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ट्विशा केस में CBI की चार्जशीट दाखिल, रिटायर्ड जज समेत 2 पर केस
भोपाल (म.प्र.)
636 पेज की चार्जशीट में दहेज हत्या और क्रूरता के आरोप, जांच के दौरान करीब 150 लोगों से पूछताछ
मॉडल और एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अदालत में 636 पेज की चार्जशीट पेश की है। जांच एजेंसी ने ट्विशा की सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह तथा समर्थ सिंह को आरोपी बनाया है। दोनों के खिलाफ दहेज हत्या समेत कई धाराओं में मामला दर्ज किए जाने की बात चार्जशीट में सामने आई है। CBI की जांच के दौरान करीब 150 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। चार्जशीट के साथ जुड़े दस्तावेजों की प्रक्रिया अभी अदालत में पूरी की जा रही है। ट्विशा की मौत 12 मई की रात भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी। घटना के बाद मामला काफी चर्चा में रहा और बाद में जांच CBI को सौंपी गई।
जांच एजेंसी ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 80(2), 85 और 108 सहित अन्य प्रावधान लगाए हैं। इनमें दहेज हत्या, पति या उसके रिश्तेदार की ओर से महिला के साथ क्रूरता और आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़े आरोप शामिल हैं। इसके साथ ही दहेज के लेनदेन से संबंधित प्रावधान और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई हैं। ट्विशा के चचेरे भाई आशीष शर्मा ने कहा है कि चार्जशीट में परिवार की ओर से की गई कथित क्रूरता से जुड़े आरोपों की पुष्टि हुई है। हालांकि, मामले में अदालत के सामने रखे गए दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया चलेगी। चार्जशीट में शामिल बिंदुओं की विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद जांच एजेंसी के आरोपों की तस्वीर और साफ हो सकेगी।
मामले की जांच के दौरान ट्विशा के शव का दूसरी बार पोस्टमॉर्टम भी कराया गया था। दिल्ली AIIMS के पांच डॉक्टरों के मेडिकल बोर्ड ने दोबारा पोस्टमॉर्टम करने के बाद अपनी अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार की थी। यह रिपोर्ट 10 जुलाई को सीलबंद लिफाफे में CBI को सौंपी गई थी। परिवार की ओर से अब इस रिपोर्ट के चार्जशीट में उल्लेख को लेकर सवाल उठाए गए हैं। आशीष शर्मा का कहना है कि चार्जशीट के शुरुआती संक्षिप्त दस्तावेजों में दूसरे पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट का स्पष्ट जिक्र दिखाई नहीं देता। उनका कहना है कि मुख्य दस्तावेजों की समीक्षा के बाद ही यह पता चलेगा कि फॉरेंसिक रिपोर्ट को जांच में किस तरह शामिल किया गया है। इस मामले में परिवार की तरफ से जांच से जुड़े कुछ अधिकारियों की फोन कॉल डिटेल खंगालने की मांग भी की गई है।
परिवार की ओर से दो से तीन दिनों की कॉल डिटेल की जांच कराने की मांग रखी गई है। उनका कहना है कि इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि जांच के दौरान किसी तरह का दबाव या हस्तक्षेप हुआ था या नहीं। हालांकि इस तरह के आरोपों को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित रिकॉर्ड और जांच से सामने आए तथ्यों पर निर्भर करेगी। दूसरी तरफ CBI ने डिजिटल सबूतों को लेकर भी अदालत में अपनी कार्रवाई आगे बढ़ाई है। जांच एजेंसी ने आरोपी समर्थ सिंह का वॉइस सैंपल लेने और उसके लैपटॉप का पासवर्ड हासिल करने की मांग की थी। 3 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान समर्थ सिंह की ओर से पेश वकील ने लैपटॉप का पासवर्ड देने पर आपत्ति नहीं जताई थी। वॉइस सैंपल को लेकर बचाव पक्ष की ओर से अलग शर्त रखी गई थी।
बचाव पक्ष ने कहा था कि वॉइस सैंपल की एक कॉपी सुरक्षित तरीके से अदालत में भी रखी जानी चाहिए। CBI की ओर से अदालत को बताया गया कि लैपटॉप और वॉइस सैंपल मामले की डिजिटल जांच के लिए जरूरी हैं। जांच एजेंसी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण में मौजूद जानकारी और अन्य डिजिटल सामग्री का विश्लेषण करना चाहती है। ऐसे मामलों में फोन, लैपटॉप, रिकॉर्डिंग और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डेटा से घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की जाती है। CBI ने भी इसी आधार पर पासवर्ड और वॉइस सैंपल को जांच के लिए महत्वपूर्ण बताया है। अब 636 पेज की चार्जशीट दाखिल होने के बाद अदालत में आरोपों और दस्तावेजों से जुड़े बिंदुओं पर आगे सुनवाई होगी।
ट्विशा शर्मा की मौत के बाद उनके परिवार ने मामले की जांच को लेकर कई सवाल उठाए थे। शुरुआती जांच के बाद मामला CBI के पास पहुंचा और केंद्रीय एजेंसी ने अलग-अलग लोगों से पूछताछ कर दस्तावेज तथा अन्य साक्ष्य जुटाए। जांच के दौरान करीब 150 गवाहों से बातचीत की गई। इनमें घटना और परिवार से जुड़े लोगों के अलावा मामले की परिस्थितियों की जानकारी रखने वाले लोग भी शामिल बताए जा रहे हैं। चार्जशीट में किन गवाहों के बयान किस आधार पर शामिल किए गए हैं, इसकी विस्तृत जानकारी अदालत में दस्तावेजों की जांच के दौरान सामने आएगी। इसी के साथ पोस्टमॉर्टम, फॉरेंसिक जांच और डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका भी मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अब मामले में अदालत के सामने CBI की ओर से दाखिल चार्जशीट के आधार पर आगे की प्रक्रिया होगी। आरोपियों के खिलाफ लगाई गई धाराओं के तहत अभियोजन पक्ष को अदालत में अपने साक्ष्य पेश करने होंगे। बचाव पक्ष को भी आरोपों पर अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा। ट्विशा के परिवार की ओर से दूसरे पोस्टमॉर्टम, अधिकारियों की कॉल डिटेल और जांच से जुड़े अन्य पहलुओं को लेकर जो सवाल उठाए गए हैं, उन पर भी आगे की कानूनी प्रक्रिया में स्थिति स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल CBI की 636 पेज की चार्जशीट, करीब 150 गवाहों की जांच और डिजिटल साक्ष्यों से जुड़ी कार्रवाई मामले की अगली सुनवाई में अहम बिंदु रहने वाली है।
ट्विशा केस में CBI की चार्जशीट दाखिल, रिटायर्ड जज समेत 2 पर केस
भोपाल (म.प्र.)
मॉडल और एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अदालत में 636 पेज की चार्जशीट पेश की है। जांच एजेंसी ने ट्विशा की सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह तथा समर्थ सिंह को आरोपी बनाया है। दोनों के खिलाफ दहेज हत्या समेत कई धाराओं में मामला दर्ज किए जाने की बात चार्जशीट में सामने आई है। CBI की जांच के दौरान करीब 150 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। चार्जशीट के साथ जुड़े दस्तावेजों की प्रक्रिया अभी अदालत में पूरी की जा रही है। ट्विशा की मौत 12 मई की रात भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी। घटना के बाद मामला काफी चर्चा में रहा और बाद में जांच CBI को सौंपी गई।
जांच एजेंसी ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 80(2), 85 और 108 सहित अन्य प्रावधान लगाए हैं। इनमें दहेज हत्या, पति या उसके रिश्तेदार की ओर से महिला के साथ क्रूरता और आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़े आरोप शामिल हैं। इसके साथ ही दहेज के लेनदेन से संबंधित प्रावधान और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई हैं। ट्विशा के चचेरे भाई आशीष शर्मा ने कहा है कि चार्जशीट में परिवार की ओर से की गई कथित क्रूरता से जुड़े आरोपों की पुष्टि हुई है। हालांकि, मामले में अदालत के सामने रखे गए दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया चलेगी। चार्जशीट में शामिल बिंदुओं की विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद जांच एजेंसी के आरोपों की तस्वीर और साफ हो सकेगी।
मामले की जांच के दौरान ट्विशा के शव का दूसरी बार पोस्टमॉर्टम भी कराया गया था। दिल्ली AIIMS के पांच डॉक्टरों के मेडिकल बोर्ड ने दोबारा पोस्टमॉर्टम करने के बाद अपनी अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार की थी। यह रिपोर्ट 10 जुलाई को सीलबंद लिफाफे में CBI को सौंपी गई थी। परिवार की ओर से अब इस रिपोर्ट के चार्जशीट में उल्लेख को लेकर सवाल उठाए गए हैं। आशीष शर्मा का कहना है कि चार्जशीट के शुरुआती संक्षिप्त दस्तावेजों में दूसरे पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट का स्पष्ट जिक्र दिखाई नहीं देता। उनका कहना है कि मुख्य दस्तावेजों की समीक्षा के बाद ही यह पता चलेगा कि फॉरेंसिक रिपोर्ट को जांच में किस तरह शामिल किया गया है। इस मामले में परिवार की तरफ से जांच से जुड़े कुछ अधिकारियों की फोन कॉल डिटेल खंगालने की मांग भी की गई है।
परिवार की ओर से दो से तीन दिनों की कॉल डिटेल की जांच कराने की मांग रखी गई है। उनका कहना है कि इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि जांच के दौरान किसी तरह का दबाव या हस्तक्षेप हुआ था या नहीं। हालांकि इस तरह के आरोपों को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित रिकॉर्ड और जांच से सामने आए तथ्यों पर निर्भर करेगी। दूसरी तरफ CBI ने डिजिटल सबूतों को लेकर भी अदालत में अपनी कार्रवाई आगे बढ़ाई है। जांच एजेंसी ने आरोपी समर्थ सिंह का वॉइस सैंपल लेने और उसके लैपटॉप का पासवर्ड हासिल करने की मांग की थी। 3 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान समर्थ सिंह की ओर से पेश वकील ने लैपटॉप का पासवर्ड देने पर आपत्ति नहीं जताई थी। वॉइस सैंपल को लेकर बचाव पक्ष की ओर से अलग शर्त रखी गई थी।
बचाव पक्ष ने कहा था कि वॉइस सैंपल की एक कॉपी सुरक्षित तरीके से अदालत में भी रखी जानी चाहिए। CBI की ओर से अदालत को बताया गया कि लैपटॉप और वॉइस सैंपल मामले की डिजिटल जांच के लिए जरूरी हैं। जांच एजेंसी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण में मौजूद जानकारी और अन्य डिजिटल सामग्री का विश्लेषण करना चाहती है। ऐसे मामलों में फोन, लैपटॉप, रिकॉर्डिंग और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डेटा से घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की जाती है। CBI ने भी इसी आधार पर पासवर्ड और वॉइस सैंपल को जांच के लिए महत्वपूर्ण बताया है। अब 636 पेज की चार्जशीट दाखिल होने के बाद अदालत में आरोपों और दस्तावेजों से जुड़े बिंदुओं पर आगे सुनवाई होगी।
ट्विशा शर्मा की मौत के बाद उनके परिवार ने मामले की जांच को लेकर कई सवाल उठाए थे। शुरुआती जांच के बाद मामला CBI के पास पहुंचा और केंद्रीय एजेंसी ने अलग-अलग लोगों से पूछताछ कर दस्तावेज तथा अन्य साक्ष्य जुटाए। जांच के दौरान करीब 150 गवाहों से बातचीत की गई। इनमें घटना और परिवार से जुड़े लोगों के अलावा मामले की परिस्थितियों की जानकारी रखने वाले लोग भी शामिल बताए जा रहे हैं। चार्जशीट में किन गवाहों के बयान किस आधार पर शामिल किए गए हैं, इसकी विस्तृत जानकारी अदालत में दस्तावेजों की जांच के दौरान सामने आएगी। इसी के साथ पोस्टमॉर्टम, फॉरेंसिक जांच और डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका भी मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अब मामले में अदालत के सामने CBI की ओर से दाखिल चार्जशीट के आधार पर आगे की प्रक्रिया होगी। आरोपियों के खिलाफ लगाई गई धाराओं के तहत अभियोजन पक्ष को अदालत में अपने साक्ष्य पेश करने होंगे। बचाव पक्ष को भी आरोपों पर अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा। ट्विशा के परिवार की ओर से दूसरे पोस्टमॉर्टम, अधिकारियों की कॉल डिटेल और जांच से जुड़े अन्य पहलुओं को लेकर जो सवाल उठाए गए हैं, उन पर भी आगे की कानूनी प्रक्रिया में स्थिति स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल CBI की 636 पेज की चार्जशीट, करीब 150 गवाहों की जांच और डिजिटल साक्ष्यों से जुड़ी कार्रवाई मामले की अगली सुनवाई में अहम बिंदु रहने वाली है।
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