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मऊगंज में 5000 से अधिक लाड़ली बहनों का प्रदर्शन, ठेकेदारी व्यवस्था के विरोध में कलेक्ट्रेट पहुंचीं महिलाएं
मऊगंज,(म.प्र.)
स्कूलों और आंगनबाड़ियों में भोजन निर्माण कार्य से जुड़े रोजगार पर संकट की आशंका, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की
मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में मंगलवार को बड़ी संख्या में महिलाओं ने अपने रोजगार को बचाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचीं 5000 से अधिक लाड़ली बहनों और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर ठेकेदारी व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाई। सुबह से ही महिलाओं का जुटना शुरू हो गया था और देखते ही देखते कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास बड़ी भीड़ जमा हो गई। महिलाओं का कहना है कि स्कूलों और आंगनबाड़ियों में भोजन निर्माण का कार्य लंबे समय से स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से किया जा रहा है, जिससे हजारों परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। अब यदि इस व्यवस्था को समाप्त कर ठेकेदारी प्रणाली लागू की जाती है तो बड़ी संख्या में महिलाओं के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर अपनी चिंताओं से अवगत कराया। ज्ञापन में मांग की गई कि वर्तमान व्यवस्था को जारी रखा जाए और स्वयं सहायता समूहों को मिलने वाले कार्यों को किसी भी स्थिति में ठेकेदारों को न सौंपा जाए। प्रदर्शन में शामिल महिलाओं का कहना था कि वर्षों की मेहनत और समूहों के माध्यम से मिली आय ने उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाया है। इसी आय के सहारे वे अपने बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और दैनिक जरूरतों को पूरा कर पा रही हैं। महिलाओं ने यह भी कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया गया था और अब यदि रोजगार के अवसर उनसे छिन जाते हैं तो उनके सामने आर्थिक असुरक्षा की स्थिति पैदा हो जाएगी।
कलेक्ट्रेट पहुंचे महिला समूहों का कहना है कि स्वयं सहायता समूह केवल रोजगार का साधन नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण का आधार भी बन चुके हैं। कई महिलाएं ऐसी हैं जिन्होंने पहली बार समूहों से जुड़कर अपनी आय शुरू की और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महिलाओं का आरोप है कि यदि भोजन निर्माण और वितरण जैसे कार्य ठेकेदारों को सौंपे जाते हैं तो स्थानीय समूहों की भूमिका समाप्त हो जाएगी। इससे न केवल रोजगार प्रभावित होगा बल्कि वर्षों से विकसित हुई सामुदायिक व्यवस्था भी कमजोर पड़ सकती है।
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने नारेबाजी करते हुए प्रशासन से मांग की कि किसी भी निर्णय से पहले प्रभावित समूहों की राय ली जाए। उनका कहना था कि बिना चर्चा और बिना वैकल्पिक व्यवस्था के रोजगार से जुड़े कार्यों में बदलाव करना हजारों परिवारों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा। कई महिलाओं ने यह भी कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पहले से सीमित हैं और ऐसे में यदि वर्तमान कार्य भी बंद हो गया तो परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में भोजन निर्माण का कार्य लंबे समय से स्थानीय महिला समूहों के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। इससे एक ओर बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था चलती रही है तो दूसरी ओर महिलाओं को नियमित आय का स्रोत भी मिला है। महिलाओं का कहना है कि इस व्यवस्था ने उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत बनाया है। इसलिए किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले उसके प्रभावों का आकलन किया जाना चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान कई महिलाओं ने अपनी व्यक्तिगत परिस्थितियों का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि समूहों से होने वाली आमदनी ही उनके परिवार की आर्थिक रीढ़ है। कुछ महिलाओं ने बताया कि इसी आय के सहारे उन्होंने बच्चों को स्कूल भेजा, घर की जरूरतें पूरी कीं और कई मामलों में कर्ज भी चुकाया। ऐसे में रोजगार छिनने की आशंका ने उन्हें चिंता में डाल दिया है। प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने साफ कहा कि वे अपने रोजगार की सुरक्षा के लिए आगे भी आवाज उठाती रहेंगी।
अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की ओर हैं। प्रशासन महिलाओं की मांगों पर क्या फैसला लेता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। लेकिन इतना जरूर है कि मऊगंज में हजारों महिलाओं की यह एकजुटता महिला सशक्तिकरण और रोजगार सुरक्षा के मुद्दे को केंद्र में ले आई है। प्रदर्शन ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि जिन स्वयं सहायता समूहों को वर्षों से आत्मनिर्भरता का माध्यम बताया जाता रहा है, उनके भविष्य को लेकर आगे क्या नीति अपनाई जाएगी।
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मऊगंज में 5000 से अधिक लाड़ली बहनों का प्रदर्शन, ठेकेदारी व्यवस्था के विरोध में कलेक्ट्रेट पहुंचीं महिलाएं
मऊगंज,(म.प्र.)
मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में मंगलवार को बड़ी संख्या में महिलाओं ने अपने रोजगार को बचाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचीं 5000 से अधिक लाड़ली बहनों और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर ठेकेदारी व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाई। सुबह से ही महिलाओं का जुटना शुरू हो गया था और देखते ही देखते कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास बड़ी भीड़ जमा हो गई। महिलाओं का कहना है कि स्कूलों और आंगनबाड़ियों में भोजन निर्माण का कार्य लंबे समय से स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से किया जा रहा है, जिससे हजारों परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। अब यदि इस व्यवस्था को समाप्त कर ठेकेदारी प्रणाली लागू की जाती है तो बड़ी संख्या में महिलाओं के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर अपनी चिंताओं से अवगत कराया। ज्ञापन में मांग की गई कि वर्तमान व्यवस्था को जारी रखा जाए और स्वयं सहायता समूहों को मिलने वाले कार्यों को किसी भी स्थिति में ठेकेदारों को न सौंपा जाए। प्रदर्शन में शामिल महिलाओं का कहना था कि वर्षों की मेहनत और समूहों के माध्यम से मिली आय ने उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाया है। इसी आय के सहारे वे अपने बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और दैनिक जरूरतों को पूरा कर पा रही हैं। महिलाओं ने यह भी कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया गया था और अब यदि रोजगार के अवसर उनसे छिन जाते हैं तो उनके सामने आर्थिक असुरक्षा की स्थिति पैदा हो जाएगी।
कलेक्ट्रेट पहुंचे महिला समूहों का कहना है कि स्वयं सहायता समूह केवल रोजगार का साधन नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण का आधार भी बन चुके हैं। कई महिलाएं ऐसी हैं जिन्होंने पहली बार समूहों से जुड़कर अपनी आय शुरू की और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महिलाओं का आरोप है कि यदि भोजन निर्माण और वितरण जैसे कार्य ठेकेदारों को सौंपे जाते हैं तो स्थानीय समूहों की भूमिका समाप्त हो जाएगी। इससे न केवल रोजगार प्रभावित होगा बल्कि वर्षों से विकसित हुई सामुदायिक व्यवस्था भी कमजोर पड़ सकती है।
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने नारेबाजी करते हुए प्रशासन से मांग की कि किसी भी निर्णय से पहले प्रभावित समूहों की राय ली जाए। उनका कहना था कि बिना चर्चा और बिना वैकल्पिक व्यवस्था के रोजगार से जुड़े कार्यों में बदलाव करना हजारों परिवारों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा। कई महिलाओं ने यह भी कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पहले से सीमित हैं और ऐसे में यदि वर्तमान कार्य भी बंद हो गया तो परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में भोजन निर्माण का कार्य लंबे समय से स्थानीय महिला समूहों के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। इससे एक ओर बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था चलती रही है तो दूसरी ओर महिलाओं को नियमित आय का स्रोत भी मिला है। महिलाओं का कहना है कि इस व्यवस्था ने उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत बनाया है। इसलिए किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले उसके प्रभावों का आकलन किया जाना चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान कई महिलाओं ने अपनी व्यक्तिगत परिस्थितियों का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि समूहों से होने वाली आमदनी ही उनके परिवार की आर्थिक रीढ़ है। कुछ महिलाओं ने बताया कि इसी आय के सहारे उन्होंने बच्चों को स्कूल भेजा, घर की जरूरतें पूरी कीं और कई मामलों में कर्ज भी चुकाया। ऐसे में रोजगार छिनने की आशंका ने उन्हें चिंता में डाल दिया है। प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने साफ कहा कि वे अपने रोजगार की सुरक्षा के लिए आगे भी आवाज उठाती रहेंगी।
अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की ओर हैं। प्रशासन महिलाओं की मांगों पर क्या फैसला लेता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। लेकिन इतना जरूर है कि मऊगंज में हजारों महिलाओं की यह एकजुटता महिला सशक्तिकरण और रोजगार सुरक्षा के मुद्दे को केंद्र में ले आई है। प्रदर्शन ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि जिन स्वयं सहायता समूहों को वर्षों से आत्मनिर्भरता का माध्यम बताया जाता रहा है, उनके भविष्य को लेकर आगे क्या नीति अपनाई जाएगी।
