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भस्म आरती में महाकाल का दिव्य श्रृंगार, एकादशी पर उमड़ी श्रद्धा; जयकारों से गूंजा मंदिर
उज्जैन, MP
सावन कृष्ण पक्ष की एकादशी के पावन अवसर पर रविवार, 9 अगस्त को विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती विशेष धार्मिक अनुष्ठानों और आकर्षक श्रृंगार के साथ संपन्न हुई।
तड़के करीब 2:30 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। इसके बाद भगवान महाकाल का विधि-विधान से पूजन और अभिषेक किया गया। भस्म आरती के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। कपाट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में विराजमान भगवान महाकाल सहित अन्य देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद बाबा का जलाभिषेक हुआ। दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान महाकाल का अभिषेक किया गया।
पंचामृत अभिषेक के बाद हुआ विशेष श्रृंगार
अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का भांग, चंदन और विभिन्न आभूषणों से आकर्षक श्रृंगार किया गया। भस्म आरती की परंपरा के अनुसार भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाया गया और हरिओम का जल अर्पित किया गया। मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान और पूजन किया गया।
कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित की गई। इसके बाद भगवान महाकाल को रजत शेषनाग मुकुट, रजत मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला और रंग-बिरंगे पुष्पों की मालाएं अर्पित की गईं। सुगंधित पुष्पों और आभूषणों से बाबा महाकाल का मनोहारी श्रृंगार किया गया।
भस्म आरती के बाद साकार स्वरूप में दर्शन
महाकाल मंदिर की भस्म आरती का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल अपने साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी आस्था के साथ श्रद्धालु तड़के मंदिर पहुंचे और भस्म आरती में शामिल होकर बाबा के दर्शन किए।
भस्म आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर ‘जय श्री महाकाल’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन के साथ नंदी महाराज के भी दर्शन किए। कई भक्तों ने नंदी के कान में अपनी मनोकामना कही और उसके पूरा होने की प्रार्थना की।
एकादशी पर महाकाल के दर्शन का विशेष महत्व
रविवार को सावन कृष्ण पक्ष की एकादशी होने के कारण मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था और भी विशेष नजर आई। भक्तों ने भगवान महाकाल के दर्शन के साथ पूजा-अर्चना की और सुख, शांति व समृद्धि की कामना की। सुबह की भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय नजर आया।
महाकाल की भस्म आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि उज्जैन की आध्यात्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हर दिन होने वाली इस आरती में शामिल होने के लिए देशभर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। बाबा महाकाल के दिव्य श्रृंगार और भस्म आरती के दर्शन भक्तों के लिए विशेष आध्यात्मिक अनुभव माने जाते हैं।
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भस्म आरती में महाकाल का दिव्य श्रृंगार, एकादशी पर उमड़ी श्रद्धा; जयकारों से गूंजा मंदिर
उज्जैन, MP
तड़के करीब 2:30 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। इसके बाद भगवान महाकाल का विधि-विधान से पूजन और अभिषेक किया गया। भस्म आरती के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। कपाट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में विराजमान भगवान महाकाल सहित अन्य देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद बाबा का जलाभिषेक हुआ। दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान महाकाल का अभिषेक किया गया।
पंचामृत अभिषेक के बाद हुआ विशेष श्रृंगार
अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का भांग, चंदन और विभिन्न आभूषणों से आकर्षक श्रृंगार किया गया। भस्म आरती की परंपरा के अनुसार भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाया गया और हरिओम का जल अर्पित किया गया। मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान और पूजन किया गया।
कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित की गई। इसके बाद भगवान महाकाल को रजत शेषनाग मुकुट, रजत मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला और रंग-बिरंगे पुष्पों की मालाएं अर्पित की गईं। सुगंधित पुष्पों और आभूषणों से बाबा महाकाल का मनोहारी श्रृंगार किया गया।
भस्म आरती के बाद साकार स्वरूप में दर्शन
महाकाल मंदिर की भस्म आरती का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल अपने साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी आस्था के साथ श्रद्धालु तड़के मंदिर पहुंचे और भस्म आरती में शामिल होकर बाबा के दर्शन किए।
भस्म आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर ‘जय श्री महाकाल’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन के साथ नंदी महाराज के भी दर्शन किए। कई भक्तों ने नंदी के कान में अपनी मनोकामना कही और उसके पूरा होने की प्रार्थना की।
एकादशी पर महाकाल के दर्शन का विशेष महत्व
रविवार को सावन कृष्ण पक्ष की एकादशी होने के कारण मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था और भी विशेष नजर आई। भक्तों ने भगवान महाकाल के दर्शन के साथ पूजा-अर्चना की और सुख, शांति व समृद्धि की कामना की। सुबह की भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय नजर आया।
महाकाल की भस्म आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि उज्जैन की आध्यात्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हर दिन होने वाली इस आरती में शामिल होने के लिए देशभर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। बाबा महाकाल के दिव्य श्रृंगार और भस्म आरती के दर्शन भक्तों के लिए विशेष आध्यात्मिक अनुभव माने जाते हैं।
