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ग्वालियर में ‘निर्भया कैफे’ परियोजना ठप, टेंडर के महीनों बाद भी नहीं मिली जगह
ग्वालियर (म.प्र.)
महिलाओं को रोजगार से जोड़ने की योजना अटकी, निर्माण एजेंसी तय होने के बावजूद शुरू नहीं हो पाया काम
ग्वालियर में महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से तैयार की गई ‘निर्भया कैफे’ परियोजना अब तक कागजों से बाहर नहीं निकल सकी है। शहर में 10 कैफे स्थापित करने की पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। टेंडर जारी होने से लेकर निर्माण एजेंसी के चयन तक सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गईं, लेकिन परियोजना की सबसे अहम कड़ी यानी उपयुक्त स्थान का चयन अब तक नहीं हो पाया है। यही वजह है कि महीनों बीत जाने के बाद भी किसी भी कैफे का निर्माण शुरू नहीं हो सका है। अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सरकारी परिसरों में उपयुक्त जगह उपलब्ध कराना बनी हुई है।
जानकारी के अनुसार, स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत फरवरी 2026 में इस योजना के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई थीं। प्रक्रिया में तीन कंपनियों ने भाग लिया था। दस्तावेजों की जांच के बाद दो कंपनियों के प्रस्ताव निरस्त कर दिए गए, जबकि एक फर्म का चयन कर उसे काम सौंप दिया गया। संबंधित एजेंसी को लेटर ऑफ एलोकेशन भी जारी किया जा चुका है। इसके बाद उम्मीद थी कि जल्द ही निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा, लेकिन जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण पूरी योजना आगे नहीं बढ़ पाई।
परियोजना के तहत शहर के अलग-अलग हिस्सों में कुल 10 आधुनिक कैफे विकसित किए जाने हैं। इनका संचालन पूरी तरह महिलाओं के हाथों में होगा। खास तौर पर विधवा, परित्यक्ता और आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को इससे जोड़कर उन्हें नियमित रोजगार उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है। प्रशासन का मानना है कि इस पहल से महिलाओं को स्वरोजगार का अवसर मिलेगा और वे आर्थिक रूप से अधिक मजबूत बन सकेंगी।
अधिकारियों के मुताबिक, एक कैफे के निर्माण पर करीब 10 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। परियोजना की लागत का एक हिस्सा स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन वहन करेगा, जबकि शेष राशि संचालन करने वाले वेंडर को निवेश करनी होगी। इसी मॉडल के आधार पर सभी 10 कैफे विकसित किए जाने हैं। कुल मिलाकर इस पूरी परियोजना की लागत लगभग एक करोड़ रुपये आंकी गई है।
कैफे के लिए स्थान तलाशने की प्रक्रिया के दौरान कई सरकारी परिसरों को संभावित सूची में शामिल किया गया। इनमें शैक्षणिक संस्थान, सरकारी कार्यालय, अस्पताल और अन्य सार्वजनिक परिसर शामिल थे। प्रशासन ने संबंधित संस्थानों से जगह उपलब्ध कराने के लिए संपर्क भी किया, लेकिन अधिकांश जगहों से अनुमति नहीं मिल सकी। कुछ विभागों ने स्थान देने से इनकार कर दिया, जबकि कुछ संस्थानों की ओर से अब तक अंतिम जवाब नहीं मिला है। इसी कारण परियोजना की प्रगति पूरी तरह रुक गई है।
स्मार्ट सिटी अधिकारियों का कहना है कि निर्माण एजेंसी तैयार है और आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जा चुकी हैं। जैसे ही उपयुक्त स्थान तय होगा, निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। फिलहाल अलग-अलग स्थानों का फिर से आकलन किया जा रहा है ताकि ऐसी जगहों का चयन किया जा सके जहां लोगों की आवाजाही अधिक हो और कैफे का संचालन व्यावहारिक रूप से सफल हो सके।
नगर निगम और स्मार्ट सिटी प्रशासन का मानना है कि यह योजना केवल कैफे खोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें सम्मानजनक आजीविका का अवसर उपलब्ध कराना है। इसी कारण स्थान चयन में जल्दबाजी के बजाय ऐसे स्थानों को प्राथमिकता देने की कोशिश की जा रही है, जहां परियोजना लंबे समय तक सफलतापूर्वक संचालित हो सके।
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ग्वालियर में ‘निर्भया कैफे’ परियोजना ठप, टेंडर के महीनों बाद भी नहीं मिली जगह
ग्वालियर (म.प्र.)
ग्वालियर में महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से तैयार की गई ‘निर्भया कैफे’ परियोजना अब तक कागजों से बाहर नहीं निकल सकी है। शहर में 10 कैफे स्थापित करने की पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। टेंडर जारी होने से लेकर निर्माण एजेंसी के चयन तक सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गईं, लेकिन परियोजना की सबसे अहम कड़ी यानी उपयुक्त स्थान का चयन अब तक नहीं हो पाया है। यही वजह है कि महीनों बीत जाने के बाद भी किसी भी कैफे का निर्माण शुरू नहीं हो सका है। अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सरकारी परिसरों में उपयुक्त जगह उपलब्ध कराना बनी हुई है।
जानकारी के अनुसार, स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत फरवरी 2026 में इस योजना के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई थीं। प्रक्रिया में तीन कंपनियों ने भाग लिया था। दस्तावेजों की जांच के बाद दो कंपनियों के प्रस्ताव निरस्त कर दिए गए, जबकि एक फर्म का चयन कर उसे काम सौंप दिया गया। संबंधित एजेंसी को लेटर ऑफ एलोकेशन भी जारी किया जा चुका है। इसके बाद उम्मीद थी कि जल्द ही निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा, लेकिन जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण पूरी योजना आगे नहीं बढ़ पाई।
परियोजना के तहत शहर के अलग-अलग हिस्सों में कुल 10 आधुनिक कैफे विकसित किए जाने हैं। इनका संचालन पूरी तरह महिलाओं के हाथों में होगा। खास तौर पर विधवा, परित्यक्ता और आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को इससे जोड़कर उन्हें नियमित रोजगार उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है। प्रशासन का मानना है कि इस पहल से महिलाओं को स्वरोजगार का अवसर मिलेगा और वे आर्थिक रूप से अधिक मजबूत बन सकेंगी।
अधिकारियों के मुताबिक, एक कैफे के निर्माण पर करीब 10 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। परियोजना की लागत का एक हिस्सा स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन वहन करेगा, जबकि शेष राशि संचालन करने वाले वेंडर को निवेश करनी होगी। इसी मॉडल के आधार पर सभी 10 कैफे विकसित किए जाने हैं। कुल मिलाकर इस पूरी परियोजना की लागत लगभग एक करोड़ रुपये आंकी गई है।
कैफे के लिए स्थान तलाशने की प्रक्रिया के दौरान कई सरकारी परिसरों को संभावित सूची में शामिल किया गया। इनमें शैक्षणिक संस्थान, सरकारी कार्यालय, अस्पताल और अन्य सार्वजनिक परिसर शामिल थे। प्रशासन ने संबंधित संस्थानों से जगह उपलब्ध कराने के लिए संपर्क भी किया, लेकिन अधिकांश जगहों से अनुमति नहीं मिल सकी। कुछ विभागों ने स्थान देने से इनकार कर दिया, जबकि कुछ संस्थानों की ओर से अब तक अंतिम जवाब नहीं मिला है। इसी कारण परियोजना की प्रगति पूरी तरह रुक गई है।
स्मार्ट सिटी अधिकारियों का कहना है कि निर्माण एजेंसी तैयार है और आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जा चुकी हैं। जैसे ही उपयुक्त स्थान तय होगा, निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। फिलहाल अलग-अलग स्थानों का फिर से आकलन किया जा रहा है ताकि ऐसी जगहों का चयन किया जा सके जहां लोगों की आवाजाही अधिक हो और कैफे का संचालन व्यावहारिक रूप से सफल हो सके।
नगर निगम और स्मार्ट सिटी प्रशासन का मानना है कि यह योजना केवल कैफे खोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें सम्मानजनक आजीविका का अवसर उपलब्ध कराना है। इसी कारण स्थान चयन में जल्दबाजी के बजाय ऐसे स्थानों को प्राथमिकता देने की कोशिश की जा रही है, जहां परियोजना लंबे समय तक सफलतापूर्वक संचालित हो सके।
