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बिजनेसमैन बनने का सपना, अपराध की राह: नाबालिग छात्रों ने चुराईं 8 गाड़ियां, ग्वालियर पुलिस ने किया खुलासा
ग्वालियर (म.प्र.)
पैसे की कमी से शुरू हुआ “शॉर्टकट”, 16 और 17 साल के स्कूली छात्रों ने ग्वालियर–शिवपुरी से की बाइक चोरी; CCTV से पहचान कर पुलिस ने पकड़ा
मध्यप्रदेश के ग्वालियर में वाहन चोरी के मामलों के पीछे एक चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है। बड़े बिजनेसमैन बनने का सपना देख रहे दो नाबालिग छात्रों ने पैसे जुटाने के लिए चोरी का रास्ता चुना और कुछ ही दिनों में आठ दोपहिया वाहन चुरा लिए। मुरार थाना पुलिस ने CCTV फुटेज और तकनीकी निगरानी के आधार पर दोनों को पकड़कर उनके कब्जे से चोरी की गई आठ बाइक बरामद की हैं।
पकड़े गए दोनों आरोपी नाबालिग हैं। एक की उम्र 16 वर्ष है और वह कक्षा 10वीं का छात्र है, जबकि दूसरा 17 वर्ष का है और 11वीं में पढ़ता है। दोनों एक ही स्कूल में पढ़ते हैं और वहीं से उनकी दोस्ती हुई। पुलिस पूछताछ में उन्होंने स्वीकार किया कि वे आगे चलकर अपना व्यापार शुरू करना चाहते थे, लेकिन शुरुआती पूंजी न होने के कारण उन्होंने वाहन चोरी को “आसान रास्ता” मान लिया।
पिछले कुछ हफ्तों से मुरार थाना क्षेत्र और आसपास के इलाकों में बाइक चोरी की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इनमें से सात बाइक ग्वालियर के अलग-अलग इलाकों से और एक बाइक शिवपुरी जिले से चोरी की गई थी। वारदातें अधिकतर रात के समय रिहायशी इलाकों और सार्वजनिक स्थानों के आसपास की गईं।
एएसपी अनु बेनीवाल के अनुसार, बढ़ती शिकायतों को देखते हुए मुरार थाना प्रभारी मैना पटेल को विशेष कार्रवाई के निर्देश दिए गए। जांच की जिम्मेदारी एसआई संतोष यादव को सौंपी गई। पुलिस ने उन स्थानों के CCTV फुटेज खंगाले, जहां से बाइक चोरी हुई थीं। जनभागीदारी कैमरों में दो संदिग्ध युवक चोरी करते हुए साफ नजर आए। इसके बाद पुलिस ने उनकी गतिविधियों पर नजर रखी।
करीब तीन दिन की निगरानी के बाद रविवार को दोनों संदिग्ध लाल टिपारा गौशाला के पास दिखाई दिए। प्रधान आरक्षक दर्शन सिंह और आरक्षक संजय गुर्जर की टीम ने घेराबंदी कर दोनों को मौके पर पकड़ लिया।
पुलिस पूछताछ में नाबालिगों ने बताया कि वे महंगे शौक पूरे करना चाहते थे और भविष्य में बड़ा कारोबारी बनना चाहते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य थी और व्यापार शुरू करने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे। इसी वजह से उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ चोरी शुरू कर दी। पुलिस के मुताबिक, दोनों को अपने किए पर पछतावा भी है।
पुलिस ने दोनों नाबालिगों को बाल न्याय अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए बाल सुधार गृह भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बरामद सभी आठ बाइक उनके वास्तविक मालिकों को लौटाने की तैयारी की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं इन नाबालिगों के पीछे कोई गिरोह या बड़ा नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था।
यह मामला एक बार फिर इस सवाल को उठाता है कि कम उम्र में गलत संगत, आसान पैसे की चाह और मार्गदर्शन की कमी किस तरह युवाओं को अपराध की ओर धकेल सकती है।
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