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भोपाल में पेयजल सुरक्षा पर सवाल: कांग्रेस ने टंकियों और जल संयंत्रों की पड़ताल की
भोपाल (म.प्र.)
स्थानीय इलाकों में गंदे पानी की शिकायतों के बीच विपक्ष ने नगर निगम पर लापरवाही के आरोप लगाए
राजधानी भोपाल में पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंता गहराती जा रही है। इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद भोपाल के कई इलाकों से भी गंदा पानी मिलने की शिकायतें सामने आई हैं। इसी को लेकर मंगलवार को कांग्रेस नेताओं और पार्षदों ने शहर की पानी की टंकियों और जल शुद्धिकरण केंद्रों का निरीक्षण किया। इस दौरान कुछ स्थानों पर सफाई व्यवस्था और तकनीकी प्रक्रियाओं में खामियां पाए जाने का दावा किया गया।
कांग्रेस का निरीक्षण दल सबसे पहले बरखेड़ा पठानी इलाके में पहुंचा, जहां स्थानीय जल टंकी की स्थिति को परखा गया। नेताओं के अनुसार, टंकी के आसपास और भीतर साफ-सफाई का स्तर संतोषजनक नहीं पाया गया। कांग्रेस नेता रविंद्र साहू झूमरवाला ने मौके पर कहा कि इसी टंकी से बड़ी आबादी को रोजाना पीने का पानी मिलता है और अगर यहां स्वच्छता का ध्यान नहीं रखा गया, तो लोगों के स्वास्थ्य पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
स्थानीय स्तर पर लापरवाही के आरोप
निरीक्षण के दौरान कांग्रेस नेताओं ने यह भी दावा किया कि टंकी परिसर के आसपास निगरानी और रखरखाव की व्यवस्था कमजोर है। उनका कहना था कि पानी जैसी बुनियादी जरूरत में किसी भी तरह की लापरवाही गंभीर परिणाम ला सकती है। झूमरवाला ने प्रशासन से मांग की कि शहर की सभी पानी की टंकियों की नियमित सफाई और तकनीकी जांच सुनिश्चित की जाए।
इसके बाद कांग्रेस पार्षदों का दल श्यामला हिल्स स्थित वाटर फिल्टर प्लांट पहुंचा। नगर निगम में विपक्ष की नेता शबिस्ता जकी और अन्य पार्षदों ने यहां जल शुद्धिकरण प्रक्रिया का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान कांग्रेस ने दावा किया कि प्लांट से निकलने वाला पानी सीधे बड़े तालाब की ओर जाता हुआ दिखाई दिया, जबकि शुद्धिकरण प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी मौके पर उपलब्ध नहीं कराई गई।
क्यों बढ़ी पेयजल को लेकर चिंता
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बड़ा तालाब भोपाल की जल आपूर्ति का प्रमुख स्रोत है। ऐसे में अगर शुद्धिकरण से पहले या प्रक्रिया में कमी के साथ पानी तालाब में जाता है, तो इससे पूरे शहर की जल गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। शबिस्ता जकी ने कहा कि निरीक्षण के समय जल परीक्षण से जुड़ी कोई ताज़ा रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में निर्धारित मानकों और दिशा-निर्देशों का पालन होता हुआ स्पष्ट रूप से नजर नहीं आया। कांग्रेस का कहना है कि पानी की नियमित जांच और योग्य तकनीकी स्टाफ की मौजूदगी बेहद जरूरी है।
प्रशासन से क्या मांग
कांग्रेस ने नगर निगम और संबंधित विभागों से तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है। नेताओं ने कहा कि जल आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं को राजनीतिक बहस का विषय बनाने के बजाय इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा मानकर देखा जाना चाहिए।
नगर निगम पहले ही कुछ इलाकों में पानी के नमूने लेने और तकनीकी सुधार की प्रक्रिया शुरू करने की बात कह चुका है। अब कांग्रेस के निरीक्षण के बाद यह देखना होगा कि प्रशासन पेयजल व्यवस्था को लेकर कितनी तेजी से ठोस कदम उठाता है।
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