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अरुणाचल प्रदेश पर्यटन ने ‘टेक ए न्यू टर्न इन अरुणाचल’ अभियान का किया शुभारंभ
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नई पीढ़ी के यात्रियों के लिए भारत की अंतिम खोज सीमा की नई पर्यटन कथा
अरुणाचल प्रदेश सरकार के पर्यटन विभाग ने राज्य की पर्यटन संभावनाओं को वैश्विक स्तर पर नए सिरे से प्रस्तुत करने के उद्देश्य से अपने नवीन पर्यटन ब्रांड अभियान ‘टेक ए न्यू टर्न इन अरुणाचल’ का शुभारंभ किया। इस अभियान का उद्घाटन अरुणाचल प्रदेश सरकार के पर्यटन, शिक्षा, आरडब्ल्यूडी, पुस्तकालय एवं संसदीय कार्य मंत्री पासांग दोरजी सोना द्वारा अरुणाचल हाउस, नई दिल्ली में किया गया।
यह अभियान अरुणाचल प्रदेश को केवल एक दर्शनीय पर्यटन स्थल के रूप में नहीं, बल्कि अनुभव, संस्कृति और मानवीय आत्मीयता की अंतिम भारतीय सीमा के रूप में स्थापित करता है। राज्य की नई ब्रांड पहचान “बियॉन्ड मिथ्स एंड माउंटेन्स” पर आधारित यह पहल यात्रियों को पहाड़ों और मठों से आगे बढ़कर उन कहानियों, परंपराओं और जीवन शैली से जुड़ने का आमंत्रण देती है, जो अरुणाचल की आत्मा को परिभाषित करती हैं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री पासांग दोरजी सोना ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश की विरासत हजारों वर्षों पुरानी है। यहाँ ऊँचे हिमालयी शिखर, घने वन, समृद्ध जैव-विविधता, बौद्ध विरासत और विविध जनजातीय संस्कृतियाँ एक साथ देखने को मिलती हैं। उन्होंने कहा कि साहसिक पर्यटन, आध्यात्मिकता, प्रकृति, वन्यजीवन और सांस्कृतिक उत्सव—इन सभी क्षेत्रों में अरुणाचल में अपार संभावनाएँ मौजूद हैं।
उन्होंने कहा, “अरुणाचल प्रदेश की पहचान ही उसकी भव्यता और विशिष्टता में निहित है। यहाँ की यात्रा केवल स्थलों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह एक गहरे अनुभव में परिवर्तित हो जाती है।”
कोविड महामारी के बाद अरुणाचल प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र में उल्लेखनीय उछाल देखने को मिला है। वर्ष 2023 और 2024 में राज्य में प्रतिवर्ष 10 लाख से अधिक पर्यटक पहुँचे, जो महामारी-पूर्व वर्षों की तुलना में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, यह वृद्धि बेहतर कनेक्टिविटी, प्रभावी ब्रांडिंग और अनुभवात्मक पर्यटन मॉडल के कारण संभव हो सकी है।
राज्य सरकार की नई पर्यटन नीति के तहत सड़क और हवाई संपर्क को मजबूत करने, पर्यटक सुविधाओं के विकास तथा आवासीय क्षमता में लगभग 50 प्रतिशत वृद्धि पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही फार्म टूरिज़्म, इको-टूरिज़्म, साहसिक पर्यटन, जनजातीय पर्यटन, आध्यात्मिक पर्यटन और सीमावर्ती पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना पर भी कार्य किया जा रहा है।
‘टेक ए न्यू टर्न इन अरुणाचल’ अभियान के अंतर्गत राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों को कहानी-आधारित अनुभवों के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इनमें तवांग को आध्यात्मिक विरासत और हिमालयी दृश्यों के केंद्र के रूप में, जीरो को स्वदेशी संस्कृति और सांस्कृतिक लय के प्रतीक के रूप में, अनिनी को झीलों और झरनों की धरती के रूप में, नामसाई को आध्यात्मिकता और नदी संस्कृति के संगम के रूप में, डोंग को भारत के प्रथम सूर्योदय स्थल के रूप में तथा मेचुका को रोमांच और शांति के अनूठे संगम के रूप में दर्शाया गया है।
इस अभियान के अंतर्गत तैयार की गई फिल्मों और प्रिंट विज़ुअल्स में स्थानीय लोगों के साथ संवाद, प्राकृतिक क्षणों और वास्तविक अनुभवों को प्रमुखता से दिखाया गया है, जिससे अरुणाचल प्रदेश की आत्मीय और प्रामाणिक छवि उभरकर सामने आती है।
मंत्री सोना ने बताया कि पिछले वर्ष राज्य ने अपने लोगो और ब्रांड पहचान को नया रूप दिया था और यह अभियान उसी दिशा में एक सशक्त कदम है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पहल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन बाजार में डेस्टिनेशन अरुणाचल की सकारात्मक पहचान बनाएगी और आने वाले वर्षों में इसे भारत के अग्रणी पर्यटन स्थलों में शामिल करेगी।
राज्य पर्यटन विभाग आने वाले समय में ट्रैवल प्लेटफॉर्म्स और टूर ऑपरेटर्स के साथ साझेदारी कर, नए और अब तक अप्रयुक्त पर्यटन बाजारों तक पहुँच बढ़ाने की दिशा में भी कार्य करेगा।
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