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बिजली संकट लगभग खत्म, मध्य प्रदेश ‘जीरो पावर कट’ की ओर
भोपाल (म.प्र.)
शिवराज काल के मुकाबले 97% घटी बिजली की कमी, मांग बढ़ने के बावजूद सप्लाई स्थिर
मध्य प्रदेश में बिजली आपूर्ति को लेकर बड़ी राहत भरी तस्वीर सामने आई है। केंद्र सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में बिजली की कमी अब लगभग खत्म हो चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल में बिजली शॉर्टेज घटकर 9 मिलियन यूनिट रह गई है, जो शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल की तुलना में करीब 97% कम है।
राज्यसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022-23 में प्रदेश में 358 मिलियन यूनिट बिजली की कमी दर्ज की गई थी। उस समय कुल मांग के मुकाबले यह कमी लगभग 0.4% थी, जिसके चलते कई इलाकों में लोड शेडिंग और अघोषित बिजली कटौती की स्थिति बनती थी। अब 2025-26 (जनवरी तक) में यह अंतर घटकर लगभग शून्य स्तर पर पहुंच गया है।
मांग बढ़ी, लेकिन सप्लाई बनी रही मजबूत
दिलचस्प बात यह है कि इस दौरान बिजली की मांग में लगातार बढ़ोतरी हुई है। जहां 2022-23 में कुल मांग करीब 92,325 मिलियन यूनिट थी, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 1,04,445 मिलियन यूनिट तक पहुंच गई। यानी करीब 13% की वृद्धि के बावजूद सप्लाई सिस्टम ने दबाव संभाला और कमी कम होती चली गई।
ग्रामीण इलाकों में भी बड़ा सुधार
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, गांवों में बिजली आपूर्ति में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वर्ष 2014 में जहां ग्रामीण क्षेत्रों में औसतन 12.5 घंटे बिजली मिलती थी, अब यह बढ़कर करीब 22.6 घंटे हो गई है। इससे शहर और गांव के बीच बिजली उपलब्धता का अंतर काफी हद तक कम हो गया है।
अब बिजली क्यों जाती है?
ऊर्जा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में बिजली कटौती की वजह सप्लाई की कमी नहीं है। यदि कहीं बिजली गुल होती है तो उसके पीछे स्थानीय तकनीकी कारण होते हैं—जैसे ट्रांसफार्मर खराब होना, लाइन फॉल्ट या रखरखाव का काम।
राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में स्थिति
अन्य राज्यों की तुलना में भी मध्य प्रदेश की स्थिति बेहतर मानी जा रही है। हालिया आंकड़ों में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों में भी बिजली की कमी नगण्य स्तर पर है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में अब भी मामूली अंतर बना हुआ है।
कुल मिलाकर, यह बदलाव न सिर्फ सरकारी प्रदर्शन को दर्शाता है, बल्कि आम उपभोक्ताओं के लिए भी राहत का संकेत है। यदि यही रफ्तार बनी रही, तो प्रदेश आने वाले समय में पूरी तरह निर्बाध बिजली आपूर्ति वाले राज्यों में शामिल हो सकता है।
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बिजली संकट लगभग खत्म, मध्य प्रदेश ‘जीरो पावर कट’ की ओर
भोपाल (म.प्र.)
मध्य प्रदेश में बिजली आपूर्ति को लेकर बड़ी राहत भरी तस्वीर सामने आई है। केंद्र सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में बिजली की कमी अब लगभग खत्म हो चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल में बिजली शॉर्टेज घटकर 9 मिलियन यूनिट रह गई है, जो शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल की तुलना में करीब 97% कम है।
राज्यसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022-23 में प्रदेश में 358 मिलियन यूनिट बिजली की कमी दर्ज की गई थी। उस समय कुल मांग के मुकाबले यह कमी लगभग 0.4% थी, जिसके चलते कई इलाकों में लोड शेडिंग और अघोषित बिजली कटौती की स्थिति बनती थी। अब 2025-26 (जनवरी तक) में यह अंतर घटकर लगभग शून्य स्तर पर पहुंच गया है।
मांग बढ़ी, लेकिन सप्लाई बनी रही मजबूत
दिलचस्प बात यह है कि इस दौरान बिजली की मांग में लगातार बढ़ोतरी हुई है। जहां 2022-23 में कुल मांग करीब 92,325 मिलियन यूनिट थी, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 1,04,445 मिलियन यूनिट तक पहुंच गई। यानी करीब 13% की वृद्धि के बावजूद सप्लाई सिस्टम ने दबाव संभाला और कमी कम होती चली गई।
ग्रामीण इलाकों में भी बड़ा सुधार
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, गांवों में बिजली आपूर्ति में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वर्ष 2014 में जहां ग्रामीण क्षेत्रों में औसतन 12.5 घंटे बिजली मिलती थी, अब यह बढ़कर करीब 22.6 घंटे हो गई है। इससे शहर और गांव के बीच बिजली उपलब्धता का अंतर काफी हद तक कम हो गया है।
अब बिजली क्यों जाती है?
ऊर्जा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में बिजली कटौती की वजह सप्लाई की कमी नहीं है। यदि कहीं बिजली गुल होती है तो उसके पीछे स्थानीय तकनीकी कारण होते हैं—जैसे ट्रांसफार्मर खराब होना, लाइन फॉल्ट या रखरखाव का काम।
राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में स्थिति
अन्य राज्यों की तुलना में भी मध्य प्रदेश की स्थिति बेहतर मानी जा रही है। हालिया आंकड़ों में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों में भी बिजली की कमी नगण्य स्तर पर है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में अब भी मामूली अंतर बना हुआ है।
कुल मिलाकर, यह बदलाव न सिर्फ सरकारी प्रदर्शन को दर्शाता है, बल्कि आम उपभोक्ताओं के लिए भी राहत का संकेत है। यदि यही रफ्तार बनी रही, तो प्रदेश आने वाले समय में पूरी तरह निर्बाध बिजली आपूर्ति वाले राज्यों में शामिल हो सकता है।
