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कूनो मे मादा चीता जंगल में दौड़ेगी, टाइगर स्टेट से आगे MP बन रहा वाइल्डलाइफ मॉडल
भोपाल (म.प्र.)
कूनो नेशनल पार्क में मादा चीतों को जंगल में छोड़ा गया। MP वाइल्डलाइफ संरक्षण, टाइगर रिजर्व और इको-टूरिज्म में नया मॉडल बन रहा है।
सोमवार को मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में एक खास कदम उठाया जाएगा। यहां, बोत्सवाना से लाई गई दो मादा चीतों को उनके बाड़े से खुले जंगल में छोड़ने का कार्यक्रम है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 10-11 मई को कूनो का दौरा करेंगे और इसी दौरान यह प्रक्रिया पूरी होगी। वन विभाग के अधिकारी इसे प्रोजेक्ट चीता के अगले बड़े पड़ाव के रूप में देख रहे हैं। उम्मीद है कि इन मादा चीतों को अब जंगल के बड़े हिस्से में आज़ाद घूमने का मौका मिलेगा।
ये गतिविधि सिर्फ वन्यजीवों की रिहाई नहीं है, बल्कि इसे मध्यप्रदेश के व्यापक मॉडल से भी जोड़ा जा रहा है, जिसमें वन्यजीव संरक्षण को सरकारी योजनाओं से आगे बढ़ाकर एक व्यापक नीति और सामाजिक आंदोलन के रूप में विकसित किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में कूनो में चीतों की संख्या बढ़कर 57 हो चुकी है और अब इसे एक वैश्विक संरक्षण प्रयोगशाला के रूप में विकसित करने की योजनाएं हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिसंबर 2023 में कार्यभार संभालने के बाद से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में नई सोच लाने का काम किया है। इसे अब न केवल पर्यावरण तक सीमित रखा जा रहा है, बल्कि पर्यटन, ग्रामीण रोजगार और सांस्कृतिक पहचान से भी जोड़ा जा रहा है। इसी वजह से पिछले डेढ़ साल में राज्य में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। रातापानी टाइगर रिजर्व का देश के आठवें टाइगर रिजर्व के रूप में घोषित होना भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसकी निकटता भोपाल के कारण इको-टूरिज्म को नई दिशा मिलेगी।
इसी तरह, मार्च 2025 में घोषित माधव टाइगर रिजर्व को लेकर विशेषज्ञों की राय भी सकारात्मक है। यहां बन रही सुरक्षा दीवार को मानव और वन्यजीव संघर्ष को कम करने की एक ठोस पहल माना जा रहा है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते टकराव के संदर्भ में।
मध्यप्रदेश का गिद्ध संरक्षण मॉडल भी चर्चा में है। यहां गिद्धों की संख्या 14 हजार से अधिक है, जो देश में सबसे अधिक है। वन विहार नेशनल पार्क और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के सहयोग से चल रहे रेस्क्यू सेंटर में घायलों का इलाज किया जा रहा है। हाल ही में एक गिद्ध के उज्बेकिस्तान तक पहुंचने की घटना को विभाग ने बड़ी उपलब्धि बताया है।
कूनो के साथ-साथ गांधी सागर और नौरादेही वाइल्डलाइफ सेंचुरी को भी चीता लैंडस्केप के रूप में विकसित किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि नौरादेही में सॉफ्ट रिलीज बोमा का निर्माण अगले चरण की तैयारी है। वहीं, नए वन्यजीव अभ्यारण्यों और कंजर्वेशन रिजर्व के जरिए राज्य अपने सुरक्षित क्षेत्रों का दायरा लगातार बढ़ा रहा है।
वन विभाग के अनुसार, ताप्ती क्षेत्र को मध्यप्रदेश का पहला कंजर्वेशन रिजर्व घोषित करना भी एक बड़ी सफलता है। इस क्षेत्र में Tigers, Leopards और अन्य दुर्लभ प्रजातियों की मौजूदगी इसे संवेदनशील बनाती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मॉडल स्थानीय समुदाय और संरक्षण के बीच संतुलन बनाने में मदद करेगा।
इसके अलावा, हाथी संरक्षण योजना, घड़ियाल और मगरमच्छों के संरक्षण कार्यक्रम, और जंगली भैंसों की पुनर्स्थापना जैसी योजनाएं भी राज्य में चल रही हैं। टाइगर कॉरिडोर परियोजना को भविष्य की सबसे बड़ी योजना माना जा रहा है, जिसके तहत कई टाइगर रिजर्व को जोड़ने की तैयारी है। इससे वन्यजीवों की आवाजाही भी सुरक्षित हो सकेगी।
वन्यजीव विभाग का कहना है कि इको-टूरिज्म और संरक्षण गतिविधियों से स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। कूनो और अन्य संरक्षित क्षेत्रों में पर्यटन बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर देखा जा रहा है।
कुल मिलाकर, कूनो में मादा चीतों की जंगल में रिहाई सिर्फ एक घटना नहीं है, बल्कि यह मध्यप्रदेश में एक बड़े बदलाव का हिस्सा है, जिसमें राज्य खुद को “टाइगर स्टेट” से आगे बढ़ाकर “वाइल्डलाइफ लीडर” की दिशा में प्रगति कर रहा है।
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कूनो मे मादा चीता जंगल में दौड़ेगी, टाइगर स्टेट से आगे MP बन रहा वाइल्डलाइफ मॉडल
भोपाल (म.प्र.)
सोमवार को मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में एक खास कदम उठाया जाएगा। यहां, बोत्सवाना से लाई गई दो मादा चीतों को उनके बाड़े से खुले जंगल में छोड़ने का कार्यक्रम है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 10-11 मई को कूनो का दौरा करेंगे और इसी दौरान यह प्रक्रिया पूरी होगी। वन विभाग के अधिकारी इसे प्रोजेक्ट चीता के अगले बड़े पड़ाव के रूप में देख रहे हैं। उम्मीद है कि इन मादा चीतों को अब जंगल के बड़े हिस्से में आज़ाद घूमने का मौका मिलेगा।
ये गतिविधि सिर्फ वन्यजीवों की रिहाई नहीं है, बल्कि इसे मध्यप्रदेश के व्यापक मॉडल से भी जोड़ा जा रहा है, जिसमें वन्यजीव संरक्षण को सरकारी योजनाओं से आगे बढ़ाकर एक व्यापक नीति और सामाजिक आंदोलन के रूप में विकसित किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में कूनो में चीतों की संख्या बढ़कर 57 हो चुकी है और अब इसे एक वैश्विक संरक्षण प्रयोगशाला के रूप में विकसित करने की योजनाएं हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिसंबर 2023 में कार्यभार संभालने के बाद से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में नई सोच लाने का काम किया है। इसे अब न केवल पर्यावरण तक सीमित रखा जा रहा है, बल्कि पर्यटन, ग्रामीण रोजगार और सांस्कृतिक पहचान से भी जोड़ा जा रहा है। इसी वजह से पिछले डेढ़ साल में राज्य में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। रातापानी टाइगर रिजर्व का देश के आठवें टाइगर रिजर्व के रूप में घोषित होना भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसकी निकटता भोपाल के कारण इको-टूरिज्म को नई दिशा मिलेगी।
इसी तरह, मार्च 2025 में घोषित माधव टाइगर रिजर्व को लेकर विशेषज्ञों की राय भी सकारात्मक है। यहां बन रही सुरक्षा दीवार को मानव और वन्यजीव संघर्ष को कम करने की एक ठोस पहल माना जा रहा है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते टकराव के संदर्भ में।
मध्यप्रदेश का गिद्ध संरक्षण मॉडल भी चर्चा में है। यहां गिद्धों की संख्या 14 हजार से अधिक है, जो देश में सबसे अधिक है। वन विहार नेशनल पार्क और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के सहयोग से चल रहे रेस्क्यू सेंटर में घायलों का इलाज किया जा रहा है। हाल ही में एक गिद्ध के उज्बेकिस्तान तक पहुंचने की घटना को विभाग ने बड़ी उपलब्धि बताया है।
कूनो के साथ-साथ गांधी सागर और नौरादेही वाइल्डलाइफ सेंचुरी को भी चीता लैंडस्केप के रूप में विकसित किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि नौरादेही में सॉफ्ट रिलीज बोमा का निर्माण अगले चरण की तैयारी है। वहीं, नए वन्यजीव अभ्यारण्यों और कंजर्वेशन रिजर्व के जरिए राज्य अपने सुरक्षित क्षेत्रों का दायरा लगातार बढ़ा रहा है।
वन विभाग के अनुसार, ताप्ती क्षेत्र को मध्यप्रदेश का पहला कंजर्वेशन रिजर्व घोषित करना भी एक बड़ी सफलता है। इस क्षेत्र में Tigers, Leopards और अन्य दुर्लभ प्रजातियों की मौजूदगी इसे संवेदनशील बनाती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मॉडल स्थानीय समुदाय और संरक्षण के बीच संतुलन बनाने में मदद करेगा।
इसके अलावा, हाथी संरक्षण योजना, घड़ियाल और मगरमच्छों के संरक्षण कार्यक्रम, और जंगली भैंसों की पुनर्स्थापना जैसी योजनाएं भी राज्य में चल रही हैं। टाइगर कॉरिडोर परियोजना को भविष्य की सबसे बड़ी योजना माना जा रहा है, जिसके तहत कई टाइगर रिजर्व को जोड़ने की तैयारी है। इससे वन्यजीवों की आवाजाही भी सुरक्षित हो सकेगी।
वन्यजीव विभाग का कहना है कि इको-टूरिज्म और संरक्षण गतिविधियों से स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। कूनो और अन्य संरक्षित क्षेत्रों में पर्यटन बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर देखा जा रहा है।
कुल मिलाकर, कूनो में मादा चीतों की जंगल में रिहाई सिर्फ एक घटना नहीं है, बल्कि यह मध्यप्रदेश में एक बड़े बदलाव का हिस्सा है, जिसमें राज्य खुद को “टाइगर स्टेट” से आगे बढ़ाकर “वाइल्डलाइफ लीडर” की दिशा में प्रगति कर रहा है।
