ग्वालियर की सड़कों का हिसाब लेकर हाईकोर्ट पहुंचा नगर निगम

ग्वालियर (म.प्र.)

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मिनी ट्रक में भरकर लाए पांच साल के दस्तावेज, 129 सड़कों में 62 की स्थिति ठीक बताई गई; अब मौके पर होगा रिकॉर्ड का मिलान

ग्वालियर में खराब सड़कों को लेकर चल रही सुनवाई के बीच गुरुवार को हाईकोर्ट परिसर में नगर निगम का अलग ही नजारा देखने को मिला। पांच साल में शहर की सड़कों पर कितना काम हुआ, कहां-कहां सड़कें बनीं, कितनी बार मरम्मत और पैचवर्क कराया गया और इस पर कितना पैसा खर्च हुआ, इसका पूरा रिकॉर्ड लेकर निगम की टीम मिनी ट्रक में पहुंची। फाइलों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि उन्हें वाहन से कोर्ट तक लाने की जरूरत पड़ी। सुनवाई के दौरान इन दस्तावेजों को अदालत के सामने रखा गया। अब हाईकोर्ट सिर्फ कागजों में दर्ज जानकारी पर निर्भर नहीं रहेगा। रिकॉर्ड में जिन सड़कों पर निर्माण या मरम्मत का काम पूरा होना बताया गया है, उनकी वास्तविक स्थिति भी मौके पर जाकर देखी जाएगी। नगर निगम ने 2021 से 2026 के बीच सड़क निर्माण, रिपेयरिंग, पैचवर्क और दूसरे कामों से संबंधित दस्तावेज पेश किए हैं। इसमें खर्च का ब्यौरा और निर्माण से जुड़े रिकॉर्ड भी शामिल हैं। कोर्ट की नजर इस बात पर है कि सरकारी रिकॉर्ड और जमीन पर मौजूद सड़क की स्थिति में कितना अंतर है।

जिस सड़क पर फाइल में काम पूरा दिखाया गया है, अगर मौके पर स्थिति खराब मिलती है तो उसका भी रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। मामले की सुनवाई ग्वालियर की खस्ताहाल सड़कों से जुड़ी जनहित याचिका में हो रही है। पिछली सुनवाई के दौरान नगर निगम ने शहर की 129 प्रमुख सड़कों को लेकर रिपोर्ट अदालत में रखी थी। इसमें सिर्फ 62 सड़कें ऐसी बताई गई थीं, जिन्हें चलने लायक माना गया। 24 सड़कों की हालत पूरी तरह खराब बताई गई थी, जबकि 34 सड़कें आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त बताई गई थीं। बाकी सड़कों की स्थिति को लेकर भी रिपोर्ट में अलग-अलग जानकारी दी गई थी। इसी के बाद कोर्ट ने सड़क निर्माण पर पिछले पांच साल में हुए खर्च और उससे जुड़े मूल रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश दिए थे।

अब इस पूरे रिकॉर्ड की जांच सिर्फ फाइलों के आधार पर नहीं होगी। हाईकोर्ट ने तीन वरिष्ठ वकीलों की एक विशेष कमेटी बनाई है, जो शहर की सड़कों का मौके पर निरीक्षण करेगी। कमेटी को प्रमुख रास्तों, चौराहों और उन जगहों पर जाने के लिए कहा गया है, जिनका उल्लेख नगर निगम के दस्तावेजों में किया गया है। रिकॉर्ड में सड़क बनने, उसकी मरम्मत होने या पैचवर्क किए जाने की तारीख और काम से जुड़ी जानकारी देखी जाएगी। इसके बाद टीम मौके पर जाकर सड़क की स्थिति से उसका मिलान करेगी। उदाहरण के तौर पर किसी सड़क पर हाल में पैचवर्क का दावा किया गया है तो यह देखा जाएगा कि वहां पैचवर्क हुआ भी है या नहीं, सड़क की मौजूदा हालत कैसी है और किया गया काम कितने हिस्से में दिखाई दे रहा है।

इसी तरह नई सड़क के निर्माण का रिकॉर्ड मिलने पर उसकी मौके पर स्थिति देखी जाएगी। जांच टीम की रिपोर्ट आगे हाईकोर्ट के सामने रखी जाएगी। अदालत ने इससे पहले सड़क की गुणवत्ता को लेकर भी गंभीरता दिखाई थी। निर्माण कार्य के वास्तविक नमूने लेने और जरूरत पड़ने पर सड़क की खुदाई कर यह देखने की बात सामने आई थी कि सड़क बनाने में निर्धारित मानकों का पालन हुआ या नहीं। इसके लिए तकनीकी विशेषज्ञों की मदद लिए जाने की बात भी कही गई है। सड़क की ऊपरी सतह देखने के साथ निर्माण में इस्तेमाल सामग्री और उसकी परतों की जांच भी की जा सकती है। खास बात यह है कि इस प्रक्रिया में नगर निगम के किसी प्रशासनिक अधिकारी की मौजूदगी नहीं रहेगी। निगम की ओर से अधिकृत वकील को ही मौके पर रहने की अनुमति होगी। इसका मकसद जांच को स्वतंत्र तरीके से कराना बताया गया है।

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सुनवाई के दौरान अदालत के सामने सिर्फ सड़क निर्माण की गुणवत्ता का मुद्दा नहीं है, बल्कि पिछले पांच साल के दौरान किए गए काम और खर्च का पूरा हिसाब भी अहम है। नगर निगम से मेजरमेंट बुक समेत मूल दस्तावेज मांगे गए हैं। मेजरमेंट बुक में निर्माण कार्य की माप और किए गए काम का रिकॉर्ड दर्ज रहता है। इसलिए जांच के दौरान इन दस्तावेजों का मौके की स्थिति से मिलान किया जाएगा। सवाल यह है कि जिस काम का भुगतान रिकॉर्ड में दिख रहा है, वह जमीन पर किस स्थिति में है। कितनी सड़क बनाई गई और कितने हिस्से में काम हुआ, यह भी देखा जाना है। शहर में कई सड़कों पर सीवर लाइन, पुल और एलिवेटेड रोड जैसे बड़े प्रोजेक्ट चलने के कारण भी सड़कें प्रभावित हुई हैं।

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नगर निगम के अधीक्षण यंत्री की ओर से दिए गए शपथ पत्र में बहोड़ापुरा से सागरताल मेन रोड का उल्लेख किया गया था। यहां सीवर लाइन डालने के कारण सड़क को नुकसान पहुंचने की बात कही गई है। इसी तरह छप्पर वाला पुल से शान-ओ-शौकत तक का रास्ता, रामकुई से भैंस मंडी पुल और तारागंज पुल से कमानी पुल के बीच का हिस्सा भी निर्माण कार्यों से प्रभावित बताया गया है। एलिवेटेड रोड के काम के कारण कुछ हिस्सों में यातायात व्यवस्था और सड़क की स्थिति दोनों पर असर पड़ा है। निगम की रिपोर्ट में इन कारणों को भी खराब सड़क की स्थिति से जोड़ा गया है। हालांकि शहर की 129 प्रमुख सड़कों को लेकर जो रिपोर्ट पहले अदालत में रखी गई थी, वह व्यापक सड़क स्थिति पर आधारित थी। अब जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि खराब हालत की वजह निर्माण में कमी है, मरम्मत का काम लंबित है या किसी दूसरे प्रोजेक्ट के कारण सड़क प्रभावित हुई है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद नगर निगम के पुराने रिकॉर्ड, सड़क की मौजूदा स्थिति और निर्माण गुणवत्ता से जुड़े दस्तावेज एक साथ जांच के दायरे में आ गए हैं।

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14 Aug 2026 By Priyanka

ग्वालियर की सड़कों का हिसाब लेकर हाईकोर्ट पहुंचा नगर निगम

ग्वालियर (म.प्र.)

ग्वालियर में खराब सड़कों को लेकर चल रही सुनवाई के बीच गुरुवार को हाईकोर्ट परिसर में नगर निगम का अलग ही नजारा देखने को मिला। पांच साल में शहर की सड़कों पर कितना काम हुआ, कहां-कहां सड़कें बनीं, कितनी बार मरम्मत और पैचवर्क कराया गया और इस पर कितना पैसा खर्च हुआ, इसका पूरा रिकॉर्ड लेकर निगम की टीम मिनी ट्रक में पहुंची। फाइलों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि उन्हें वाहन से कोर्ट तक लाने की जरूरत पड़ी। सुनवाई के दौरान इन दस्तावेजों को अदालत के सामने रखा गया। अब हाईकोर्ट सिर्फ कागजों में दर्ज जानकारी पर निर्भर नहीं रहेगा। रिकॉर्ड में जिन सड़कों पर निर्माण या मरम्मत का काम पूरा होना बताया गया है, उनकी वास्तविक स्थिति भी मौके पर जाकर देखी जाएगी। नगर निगम ने 2021 से 2026 के बीच सड़क निर्माण, रिपेयरिंग, पैचवर्क और दूसरे कामों से संबंधित दस्तावेज पेश किए हैं। इसमें खर्च का ब्यौरा और निर्माण से जुड़े रिकॉर्ड भी शामिल हैं। कोर्ट की नजर इस बात पर है कि सरकारी रिकॉर्ड और जमीन पर मौजूद सड़क की स्थिति में कितना अंतर है।

जिस सड़क पर फाइल में काम पूरा दिखाया गया है, अगर मौके पर स्थिति खराब मिलती है तो उसका भी रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। मामले की सुनवाई ग्वालियर की खस्ताहाल सड़कों से जुड़ी जनहित याचिका में हो रही है। पिछली सुनवाई के दौरान नगर निगम ने शहर की 129 प्रमुख सड़कों को लेकर रिपोर्ट अदालत में रखी थी। इसमें सिर्फ 62 सड़कें ऐसी बताई गई थीं, जिन्हें चलने लायक माना गया। 24 सड़कों की हालत पूरी तरह खराब बताई गई थी, जबकि 34 सड़कें आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त बताई गई थीं। बाकी सड़कों की स्थिति को लेकर भी रिपोर्ट में अलग-अलग जानकारी दी गई थी। इसी के बाद कोर्ट ने सड़क निर्माण पर पिछले पांच साल में हुए खर्च और उससे जुड़े मूल रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश दिए थे।

अब इस पूरे रिकॉर्ड की जांच सिर्फ फाइलों के आधार पर नहीं होगी। हाईकोर्ट ने तीन वरिष्ठ वकीलों की एक विशेष कमेटी बनाई है, जो शहर की सड़कों का मौके पर निरीक्षण करेगी। कमेटी को प्रमुख रास्तों, चौराहों और उन जगहों पर जाने के लिए कहा गया है, जिनका उल्लेख नगर निगम के दस्तावेजों में किया गया है। रिकॉर्ड में सड़क बनने, उसकी मरम्मत होने या पैचवर्क किए जाने की तारीख और काम से जुड़ी जानकारी देखी जाएगी। इसके बाद टीम मौके पर जाकर सड़क की स्थिति से उसका मिलान करेगी। उदाहरण के तौर पर किसी सड़क पर हाल में पैचवर्क का दावा किया गया है तो यह देखा जाएगा कि वहां पैचवर्क हुआ भी है या नहीं, सड़क की मौजूदा हालत कैसी है और किया गया काम कितने हिस्से में दिखाई दे रहा है।

इसी तरह नई सड़क के निर्माण का रिकॉर्ड मिलने पर उसकी मौके पर स्थिति देखी जाएगी। जांच टीम की रिपोर्ट आगे हाईकोर्ट के सामने रखी जाएगी। अदालत ने इससे पहले सड़क की गुणवत्ता को लेकर भी गंभीरता दिखाई थी। निर्माण कार्य के वास्तविक नमूने लेने और जरूरत पड़ने पर सड़क की खुदाई कर यह देखने की बात सामने आई थी कि सड़क बनाने में निर्धारित मानकों का पालन हुआ या नहीं। इसके लिए तकनीकी विशेषज्ञों की मदद लिए जाने की बात भी कही गई है। सड़क की ऊपरी सतह देखने के साथ निर्माण में इस्तेमाल सामग्री और उसकी परतों की जांच भी की जा सकती है। खास बात यह है कि इस प्रक्रिया में नगर निगम के किसी प्रशासनिक अधिकारी की मौजूदगी नहीं रहेगी। निगम की ओर से अधिकृत वकील को ही मौके पर रहने की अनुमति होगी। इसका मकसद जांच को स्वतंत्र तरीके से कराना बताया गया है।

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने सिर्फ सड़क निर्माण की गुणवत्ता का मुद्दा नहीं है, बल्कि पिछले पांच साल के दौरान किए गए काम और खर्च का पूरा हिसाब भी अहम है। नगर निगम से मेजरमेंट बुक समेत मूल दस्तावेज मांगे गए हैं। मेजरमेंट बुक में निर्माण कार्य की माप और किए गए काम का रिकॉर्ड दर्ज रहता है। इसलिए जांच के दौरान इन दस्तावेजों का मौके की स्थिति से मिलान किया जाएगा। सवाल यह है कि जिस काम का भुगतान रिकॉर्ड में दिख रहा है, वह जमीन पर किस स्थिति में है। कितनी सड़क बनाई गई और कितने हिस्से में काम हुआ, यह भी देखा जाना है। शहर में कई सड़कों पर सीवर लाइन, पुल और एलिवेटेड रोड जैसे बड़े प्रोजेक्ट चलने के कारण भी सड़कें प्रभावित हुई हैं।

नगर निगम के अधीक्षण यंत्री की ओर से दिए गए शपथ पत्र में बहोड़ापुरा से सागरताल मेन रोड का उल्लेख किया गया था। यहां सीवर लाइन डालने के कारण सड़क को नुकसान पहुंचने की बात कही गई है। इसी तरह छप्पर वाला पुल से शान-ओ-शौकत तक का रास्ता, रामकुई से भैंस मंडी पुल और तारागंज पुल से कमानी पुल के बीच का हिस्सा भी निर्माण कार्यों से प्रभावित बताया गया है। एलिवेटेड रोड के काम के कारण कुछ हिस्सों में यातायात व्यवस्था और सड़क की स्थिति दोनों पर असर पड़ा है। निगम की रिपोर्ट में इन कारणों को भी खराब सड़क की स्थिति से जोड़ा गया है। हालांकि शहर की 129 प्रमुख सड़कों को लेकर जो रिपोर्ट पहले अदालत में रखी गई थी, वह व्यापक सड़क स्थिति पर आधारित थी। अब जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि खराब हालत की वजह निर्माण में कमी है, मरम्मत का काम लंबित है या किसी दूसरे प्रोजेक्ट के कारण सड़क प्रभावित हुई है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद नगर निगम के पुराने रिकॉर्ड, सड़क की मौजूदा स्थिति और निर्माण गुणवत्ता से जुड़े दस्तावेज एक साथ जांच के दायरे में आ गए हैं।

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