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मुगालिया हाट में प्रशासन का जनविश्वास शिविर, 30 गांवों की सुनवाई
मध्य प्रदेश
इलेक्ट्रिक बसों से पहुंचे कमिश्नर-आईजी समेत अफसर, ग्रामीणों की योजनाओं और राजस्व से जुड़ी समस्याओं का होगा निपटारा
भोपाल के फंदा विकासखंड की ग्राम पंचायत मुगालिया हाट में शुक्रवार को मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत प्रशासनिक शिविर लगाया गया। आसपास के करीब 30 गांवों से लोग अपनी शिकायतें और रोजमर्रा की सरकारी सेवाओं से जुड़ी परेशानियां लेकर पहुंचे हैं। शिविर का मकसद अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर कम कर ग्रामीणों को एक ही जगह पर संबंधित अधिकारियों के सामने अपनी बात रखने का मौका देना है। सुबह भोपाल कलेक्टोरेट से संभागायुक्त कर्मवीर शर्मा, आईजी राजेश सिंह चंदेल, कलेक्टर प्रियंक मिश्रा समेत कई वरिष्ठ अधिकारी दो इलेक्ट्रिक बसों में सवार होकर मुगालिया हाट के लिए रवाना हुए। उनके साथ एसपी देहात पंकज पांडे, जिला पंचायत सीईओ इला तिवारी और दूसरे विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों के इलेक्ट्रिक बस से पहुंचने को अभियान के पर्यावरण और ईंधन बचत से जुड़े संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
पिछले दिनों मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी इलेक्ट्रिक वाहन के इस्तेमाल को लेकर सक्रिय नजर आए हैं। जगदीशपुर में हुई कैबिनेट बैठक के दौरान मुख्यमंत्री के साथ मंत्री और अधिकारी इलेक्ट्रिक बसों से पहुंचे थे। इसी तरह मुख्यमंत्री की इलेक्ट्रिक कार से आवाजाही भी सरकारी कार्यक्रमों में चर्चा का विषय रही है। मुगालिया हाट के शिविर में अधिकारियों के पहुंचने के बाद अलग-अलग विभागों के काउंटर और सुनवाई की व्यवस्था शुरू की गई। ग्रामीणों की शिकायतों को संबंधित विभागों तक पहुंचाने के साथ मौके पर उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर प्रकरणों की जांच की जा रही है। जिन मामलों में तुरंत समाधान संभव है, उन्हें वहीं निपटाने की कोशिश की जा रही है, जबकि दूसरे मामलों में संबंधित अधिकारियों को आगे की कार्रवाई के लिए जानकारी दी जाएगी। ग्रामीण इलाकों में जमीन, दस्तावेज, सरकारी योजनाओं और पहचान से जुड़े मामलों में लोगों को अक्सर अलग-अलग कार्यालयों में जाना पड़ता है। ऐसे में एक ही जगह पर कई विभागों के अधिकारी उपलब्ध रहने से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
शिविर में राजस्व से जुड़े प्रकरणों की भी समीक्षा की जा रही है। इसके साथ मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और जनसुनवाई में पहले से दर्ज शिकायतों की स्थिति भी देखी जाएगी। लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत आने वाले मामलों में तय समयसीमा के भीतर सेवा मिली या नहीं, इसकी जानकारी भी अधिकारियों के सामने रखी जा रही है। ग्रामीणों के किसान आईडी से जुड़े मामले, आयुष्मान भारत कार्ड बनवाने की दिक्कत, समग्र ई-केवाईसी और प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़े आवेदन भी सुनवाई में शामिल हैं। जल जीवन मिशन के तहत पानी की व्यवस्था और इससे संबंधित शिकायतों पर भी विभागीय अधिकारी जानकारी लेंगे। कई सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में दस्तावेज या ऑनलाइन प्रक्रिया की वजह से ग्रामीणों को परेशानी होती है।
शिविर में ऐसे मामलों को मौके पर ही देखने की व्यवस्था रखी गई है। अधिकारियों की मौजूदगी में ग्राम पंचायतों से जुड़े प्रकरण भी लिए जा रहे हैं। प्रशासन की ओर से अलग-अलग योजनाओं की प्रगति का फीडबैक भी लिया जाएगा, ताकि यह पता चल सके कि पात्र लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंच रहा है या नहीं। किसान आईडी और ई-केवाईसी जैसे कामों में जिन लोगों के दस्तावेज पूरे नहीं हैं, उन्हें प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी। आयुष्मान कार्ड और आवास योजना से जुड़े पात्रता मामलों की भी जांच की जा सकती है। राजस्व मामलों में जमीन से जुड़े रिकॉर्ड, नामांतरण, सीमांकन और दूसरे प्रकरण सामने आने की संभावना है। ग्रामीणों की समस्याओं को सुनने के साथ विभागीय अधिकारियों से लंबित मामलों की जानकारी भी ली जा रही है। मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत इस तरह के शिविरों में प्रशासन का जोर शिकायतों को केवल दर्ज करने के बजाय उनके निराकरण की स्थिति देखने पर है। मुगालिया हाट में भी शाम तक अलग-अलग विभागों की गतिविधियां चलेंगी और ग्राम पंचायत स्तर से आए मामलों की समीक्षा की जाएगी।
शिविर में सिर्फ सरकारी योजनाओं और शिकायतों से जुड़े मामले नहीं रखे गए हैं। क्षेत्र में काम कर रहे उद्यमियों के साथ भी अधिकारियों की बातचीत होगी। स्थानीय कारोबारी अपनी समस्याएं, कामकाज से जुड़ी दिक्कतें और प्रशासन से अपेक्षाएं अधिकारियों के सामने रख सकेंगे। उद्यमियों से मिले सुझावों के आधार पर स्थानीय स्तर पर आने वाली समस्याओं की जानकारी भी जुटाई जाएगी। मुगालिया हाट और आसपास के गांवों के लोगों के लिए यह शिविर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एक दिन में कई विभागों के अधिकारियों से संपर्क का मौका मिल रहा है। जिला और संभाग स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में शिकायतों की स्थिति सीधे उनके सामने रखी जा रही है।
प्रशासनिक अमला ग्राम पंचायत से जुड़े मामलों, योजनाओं की प्रगति और पुराने लंबित प्रकरणों की जानकारी भी एकत्र कर रहा है। शिविर स्थल पर ग्रामीणों की आवाजाही बनी हुई है और विभागवार उनकी समस्याएं दर्ज की जा रही हैं। अधिकारियों के इलेक्ट्रिक बस से आने के कारण भी सुबह से यह व्यवस्था चर्चा में रही। अभियान के दौरान ईंधन की बचत और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को लेकर सरकार की ओर से लगातार संदेश दिए जा रहे हैं। मुगालिया हाट के शिविर में भी इसी पहल की झलक दिखाई दी, जहां कमिश्नर, आईजी, कलेक्टर और दूसरे अधिकारी दो इलेक्ट्रिक बसों से पहुंचे। शाम तक ग्रामीणों की शिकायतों, पंचायतों के प्रकरणों और उद्यमियों से जुड़े मुद्दों पर अधिकारियों की बैठक और सुनवाई चलती रहेगी।
मुगालिया हाट में प्रशासन का जनविश्वास शिविर, 30 गांवों की सुनवाई
मध्य प्रदेश
भोपाल के फंदा विकासखंड की ग्राम पंचायत मुगालिया हाट में शुक्रवार को मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत प्रशासनिक शिविर लगाया गया। आसपास के करीब 30 गांवों से लोग अपनी शिकायतें और रोजमर्रा की सरकारी सेवाओं से जुड़ी परेशानियां लेकर पहुंचे हैं। शिविर का मकसद अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर कम कर ग्रामीणों को एक ही जगह पर संबंधित अधिकारियों के सामने अपनी बात रखने का मौका देना है। सुबह भोपाल कलेक्टोरेट से संभागायुक्त कर्मवीर शर्मा, आईजी राजेश सिंह चंदेल, कलेक्टर प्रियंक मिश्रा समेत कई वरिष्ठ अधिकारी दो इलेक्ट्रिक बसों में सवार होकर मुगालिया हाट के लिए रवाना हुए। उनके साथ एसपी देहात पंकज पांडे, जिला पंचायत सीईओ इला तिवारी और दूसरे विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों के इलेक्ट्रिक बस से पहुंचने को अभियान के पर्यावरण और ईंधन बचत से जुड़े संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
पिछले दिनों मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी इलेक्ट्रिक वाहन के इस्तेमाल को लेकर सक्रिय नजर आए हैं। जगदीशपुर में हुई कैबिनेट बैठक के दौरान मुख्यमंत्री के साथ मंत्री और अधिकारी इलेक्ट्रिक बसों से पहुंचे थे। इसी तरह मुख्यमंत्री की इलेक्ट्रिक कार से आवाजाही भी सरकारी कार्यक्रमों में चर्चा का विषय रही है। मुगालिया हाट के शिविर में अधिकारियों के पहुंचने के बाद अलग-अलग विभागों के काउंटर और सुनवाई की व्यवस्था शुरू की गई। ग्रामीणों की शिकायतों को संबंधित विभागों तक पहुंचाने के साथ मौके पर उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर प्रकरणों की जांच की जा रही है। जिन मामलों में तुरंत समाधान संभव है, उन्हें वहीं निपटाने की कोशिश की जा रही है, जबकि दूसरे मामलों में संबंधित अधिकारियों को आगे की कार्रवाई के लिए जानकारी दी जाएगी। ग्रामीण इलाकों में जमीन, दस्तावेज, सरकारी योजनाओं और पहचान से जुड़े मामलों में लोगों को अक्सर अलग-अलग कार्यालयों में जाना पड़ता है। ऐसे में एक ही जगह पर कई विभागों के अधिकारी उपलब्ध रहने से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
शिविर में राजस्व से जुड़े प्रकरणों की भी समीक्षा की जा रही है। इसके साथ मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और जनसुनवाई में पहले से दर्ज शिकायतों की स्थिति भी देखी जाएगी। लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत आने वाले मामलों में तय समयसीमा के भीतर सेवा मिली या नहीं, इसकी जानकारी भी अधिकारियों के सामने रखी जा रही है। ग्रामीणों के किसान आईडी से जुड़े मामले, आयुष्मान भारत कार्ड बनवाने की दिक्कत, समग्र ई-केवाईसी और प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़े आवेदन भी सुनवाई में शामिल हैं। जल जीवन मिशन के तहत पानी की व्यवस्था और इससे संबंधित शिकायतों पर भी विभागीय अधिकारी जानकारी लेंगे। कई सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में दस्तावेज या ऑनलाइन प्रक्रिया की वजह से ग्रामीणों को परेशानी होती है।
शिविर में ऐसे मामलों को मौके पर ही देखने की व्यवस्था रखी गई है। अधिकारियों की मौजूदगी में ग्राम पंचायतों से जुड़े प्रकरण भी लिए जा रहे हैं। प्रशासन की ओर से अलग-अलग योजनाओं की प्रगति का फीडबैक भी लिया जाएगा, ताकि यह पता चल सके कि पात्र लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंच रहा है या नहीं। किसान आईडी और ई-केवाईसी जैसे कामों में जिन लोगों के दस्तावेज पूरे नहीं हैं, उन्हें प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी। आयुष्मान कार्ड और आवास योजना से जुड़े पात्रता मामलों की भी जांच की जा सकती है। राजस्व मामलों में जमीन से जुड़े रिकॉर्ड, नामांतरण, सीमांकन और दूसरे प्रकरण सामने आने की संभावना है। ग्रामीणों की समस्याओं को सुनने के साथ विभागीय अधिकारियों से लंबित मामलों की जानकारी भी ली जा रही है। मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत इस तरह के शिविरों में प्रशासन का जोर शिकायतों को केवल दर्ज करने के बजाय उनके निराकरण की स्थिति देखने पर है। मुगालिया हाट में भी शाम तक अलग-अलग विभागों की गतिविधियां चलेंगी और ग्राम पंचायत स्तर से आए मामलों की समीक्षा की जाएगी।
शिविर में सिर्फ सरकारी योजनाओं और शिकायतों से जुड़े मामले नहीं रखे गए हैं। क्षेत्र में काम कर रहे उद्यमियों के साथ भी अधिकारियों की बातचीत होगी। स्थानीय कारोबारी अपनी समस्याएं, कामकाज से जुड़ी दिक्कतें और प्रशासन से अपेक्षाएं अधिकारियों के सामने रख सकेंगे। उद्यमियों से मिले सुझावों के आधार पर स्थानीय स्तर पर आने वाली समस्याओं की जानकारी भी जुटाई जाएगी। मुगालिया हाट और आसपास के गांवों के लोगों के लिए यह शिविर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एक दिन में कई विभागों के अधिकारियों से संपर्क का मौका मिल रहा है। जिला और संभाग स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में शिकायतों की स्थिति सीधे उनके सामने रखी जा रही है।
प्रशासनिक अमला ग्राम पंचायत से जुड़े मामलों, योजनाओं की प्रगति और पुराने लंबित प्रकरणों की जानकारी भी एकत्र कर रहा है। शिविर स्थल पर ग्रामीणों की आवाजाही बनी हुई है और विभागवार उनकी समस्याएं दर्ज की जा रही हैं। अधिकारियों के इलेक्ट्रिक बस से आने के कारण भी सुबह से यह व्यवस्था चर्चा में रही। अभियान के दौरान ईंधन की बचत और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को लेकर सरकार की ओर से लगातार संदेश दिए जा रहे हैं। मुगालिया हाट के शिविर में भी इसी पहल की झलक दिखाई दी, जहां कमिश्नर, आईजी, कलेक्टर और दूसरे अधिकारी दो इलेक्ट्रिक बसों से पहुंचे। शाम तक ग्रामीणों की शिकायतों, पंचायतों के प्रकरणों और उद्यमियों से जुड़े मुद्दों पर अधिकारियों की बैठक और सुनवाई चलती रहेगी।
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