- Hindi News
- राज्य
- मध्य प्रदेश
- जबलपुर में नर्मदा पर तिरंगा यात्रा, 7 किमी तैरकर दिया एकता का संदेश
जबलपुर में नर्मदा पर तिरंगा यात्रा, 7 किमी तैरकर दिया एकता का संदेश
जबलपुर (म.प्र.)
जिलेहरी घाट से तिलवारा पुल तक हुआ आयोजन, 5 साल के बच्चों से लेकर बुजुर्ग तैराकों ने नर्मदा में लहराया तिरंगा
जबलपुर में स्वतंत्रता दिवस से पहले नर्मदा तट पर देशभक्ति का अलग नजारा देखने को मिला। जिलेहरी घाट से तिलवारा पुल तक 18वीं ‘अखंड भारत नर्मदा तिरंगा यात्रा’ निकाली गई, जिसमें सैकड़ों लोगों ने करीब 7 किलोमीटर तक नर्मदा में तैरकर हिस्सा लिया। खास बात यह रही कि प्रतिभागियों में छोटे बच्चे भी शामिल रहे और वरिष्ठ तैराकों ने भी पूरे उत्साह के साथ दूरी तय की। नर्मदा की धार के बीच तिरंगा लेकर आगे बढ़ते प्रतिभागियों ने देश की एकता और अखंडता का संदेश दिया। यात्रा शुरू होने के साथ ही घाट पर लोगों की भीड़ जुटने लगी थी। कई जगह स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने तैराकों का उत्साह बढ़ाया। नर्मदा किनारे भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारे सुनाई देते रहे।
पानी में तैरते हुए तिरंगा थामे प्रतिभागियों की कतार दूर तक दिखाई दी। आयोजन जिलेहरी घाट से शुरू हुआ और तैराकों का समूह तिलवारा पुल की ओर बढ़ा। यह यात्रा केवल तैराकी तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें अलग-अलग उम्र के लोगों की भागीदारी ने इसे खास बना दिया। आयोजकों के मुताबिक, हर साल स्वतंत्रता दिवस के आसपास होने वाली इस यात्रा का उद्देश्य लोगों में देश के प्रति जुड़ाव और अखंडता की भावना को मजबूत करना है। इस बार भी नर्मदा को आयोजन का केंद्र बनाकर तिरंगे के साथ तैराकी की गई। सुबह से ही घाट पर आयोजन से जुड़े लोग व्यवस्थाओं में जुटे रहे। प्रतिभागियों के लिए सुरक्षा और यात्रा के पूरे मार्ग पर निगरानी की व्यवस्था भी रखी गई। नर्मदा में 7 किलोमीटर की दूरी तैरकर तय करना आसान नहीं होता, लेकिन बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने इसमें हिस्सा लेकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
इस बार की नर्मदा तिरंगा यात्रा इसके संस्थापक दिवंगत संजय यादव की स्मृति को समर्पित रही। संजय यादव की आकस्मिक मृत्यु के बाद उनके परिवार के सदस्य भूपेंद्र यादव और विवेक यादव इस आयोजन को आगे बढ़ा रहे हैं। परिवार और आयोजन से जुड़े लोगों ने उनकी शुरू की गई परंपरा को जारी रखा है। यात्रा के दौरान तिरंगा हाथ में लेकर नर्मदा में उतरने वाले प्रतिभागियों में काफी उत्साह दिखाई दिया। कुछ प्रतिभागी समूह में आगे बढ़े तो कई तैराकों ने अपने स्तर पर दूरी पूरी की। घाट पर मौजूद लोगों ने भी तिरंगा देखकर देशभक्ति के नारे लगाए।
आयोजन से जुड़े लोगों का कहना है कि नर्मदा तट पर होने वाली यह यात्रा अब जबलपुर के स्वतंत्रता दिवस से जुड़े प्रमुख आयोजनों में शामिल हो चुकी है। जिला तैराकी संघ से जुड़े तैराक भी इसमें लगातार भाग लेते रहे हैं। इस बार पांच साल के बच्चों की भागीदारी ने भी लोगों का ध्यान खींचा। वहीं उम्रदराज तैराकों ने भी पानी में उतरकर युवाओं के साथ दूरी तय की। आयोजकों के अनुसार, अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों का एक साथ तैरना आयोजन का खास हिस्सा है। इससे बच्चों और युवाओं में तैराकी के प्रति रुचि बढ़ने के साथ सामाजिक स्तर पर एकजुटता का संदेश भी जाता है। नर्मदा से जुड़ा धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी इस कार्यक्रम को अलग पहचान देता है। यात्रा के दौरान तिरंगे को प्रमुखता से रखा गया और प्रतिभागियों ने इसे देश के प्रति सम्मान और एकता के प्रतीक के तौर पर लहराया।
जबलपुर जिला तैराकी संघ के अध्यक्ष दीपक अस्रानी के मुताबिक, आयोजन के पीछे देशभक्ति की भावना को लोगों तक पहुंचाना और अखंड भारत के संकल्प को आगे बढ़ाना प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि यात्रा में उम्र की कोई खास सीमा नहीं रखी गई और इस वजह से अलग-अलग आयु वर्ग के तैराक इसमें शामिल हुए। पांच साल के बच्चों की मौजूदगी से लेकर वरिष्ठ तैराकों तक की भागीदारी ने आयोजन को व्यापक रूप दिया। नर्मदा में तैरते समय प्रतिभागियों के हाथों में तिरंगा रहा और पूरे रास्ते देशभक्ति का माहौल बना रहा।
तिलवारा पुल की ओर बढ़ते हुए तैराकों के साथ आयोजक और सहयोगी दल भी व्यवस्थाओं पर नजर रखते रहे। घाट के आसपास स्थानीय लोग काफी देर तक मौजूद रहे। कई लोगों ने मोबाइल से यात्रा के वीडियो बनाए और तस्वीरें भी लीं। नर्मदा के पानी में तिरंगे के साथ तैरते प्रतिभागियों का दृश्य आयोजन का सबसे प्रमुख आकर्षण रहा। यात्रा के दौरान देश की एकता, अखंडता और आपसी भाईचारे से जुड़े संदेश दिए गए। आयोजन से जुड़े लोगों के मुताबिक, नर्मदा के धार्मिक महत्व और स्वतंत्रता दिवस की भावना को एक साथ जोड़कर यह यात्रा हर साल आयोजित की जाती है। इस बार भी जिलेहरी घाट से शुरू हुई तैराकी तिलवारा पुल तक पहुंची और प्रतिभागियों ने तय दूरी के दौरान तिरंगा फहराते हुए अपनी भागीदारी निभाई।
जबलपुर में नर्मदा पर तिरंगा यात्रा, 7 किमी तैरकर दिया एकता का संदेश
जबलपुर (म.प्र.)
जबलपुर में स्वतंत्रता दिवस से पहले नर्मदा तट पर देशभक्ति का अलग नजारा देखने को मिला। जिलेहरी घाट से तिलवारा पुल तक 18वीं ‘अखंड भारत नर्मदा तिरंगा यात्रा’ निकाली गई, जिसमें सैकड़ों लोगों ने करीब 7 किलोमीटर तक नर्मदा में तैरकर हिस्सा लिया। खास बात यह रही कि प्रतिभागियों में छोटे बच्चे भी शामिल रहे और वरिष्ठ तैराकों ने भी पूरे उत्साह के साथ दूरी तय की। नर्मदा की धार के बीच तिरंगा लेकर आगे बढ़ते प्रतिभागियों ने देश की एकता और अखंडता का संदेश दिया। यात्रा शुरू होने के साथ ही घाट पर लोगों की भीड़ जुटने लगी थी। कई जगह स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने तैराकों का उत्साह बढ़ाया। नर्मदा किनारे भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारे सुनाई देते रहे।
पानी में तैरते हुए तिरंगा थामे प्रतिभागियों की कतार दूर तक दिखाई दी। आयोजन जिलेहरी घाट से शुरू हुआ और तैराकों का समूह तिलवारा पुल की ओर बढ़ा। यह यात्रा केवल तैराकी तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें अलग-अलग उम्र के लोगों की भागीदारी ने इसे खास बना दिया। आयोजकों के मुताबिक, हर साल स्वतंत्रता दिवस के आसपास होने वाली इस यात्रा का उद्देश्य लोगों में देश के प्रति जुड़ाव और अखंडता की भावना को मजबूत करना है। इस बार भी नर्मदा को आयोजन का केंद्र बनाकर तिरंगे के साथ तैराकी की गई। सुबह से ही घाट पर आयोजन से जुड़े लोग व्यवस्थाओं में जुटे रहे। प्रतिभागियों के लिए सुरक्षा और यात्रा के पूरे मार्ग पर निगरानी की व्यवस्था भी रखी गई। नर्मदा में 7 किलोमीटर की दूरी तैरकर तय करना आसान नहीं होता, लेकिन बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने इसमें हिस्सा लेकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
इस बार की नर्मदा तिरंगा यात्रा इसके संस्थापक दिवंगत संजय यादव की स्मृति को समर्पित रही। संजय यादव की आकस्मिक मृत्यु के बाद उनके परिवार के सदस्य भूपेंद्र यादव और विवेक यादव इस आयोजन को आगे बढ़ा रहे हैं। परिवार और आयोजन से जुड़े लोगों ने उनकी शुरू की गई परंपरा को जारी रखा है। यात्रा के दौरान तिरंगा हाथ में लेकर नर्मदा में उतरने वाले प्रतिभागियों में काफी उत्साह दिखाई दिया। कुछ प्रतिभागी समूह में आगे बढ़े तो कई तैराकों ने अपने स्तर पर दूरी पूरी की। घाट पर मौजूद लोगों ने भी तिरंगा देखकर देशभक्ति के नारे लगाए।
आयोजन से जुड़े लोगों का कहना है कि नर्मदा तट पर होने वाली यह यात्रा अब जबलपुर के स्वतंत्रता दिवस से जुड़े प्रमुख आयोजनों में शामिल हो चुकी है। जिला तैराकी संघ से जुड़े तैराक भी इसमें लगातार भाग लेते रहे हैं। इस बार पांच साल के बच्चों की भागीदारी ने भी लोगों का ध्यान खींचा। वहीं उम्रदराज तैराकों ने भी पानी में उतरकर युवाओं के साथ दूरी तय की। आयोजकों के अनुसार, अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों का एक साथ तैरना आयोजन का खास हिस्सा है। इससे बच्चों और युवाओं में तैराकी के प्रति रुचि बढ़ने के साथ सामाजिक स्तर पर एकजुटता का संदेश भी जाता है। नर्मदा से जुड़ा धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी इस कार्यक्रम को अलग पहचान देता है। यात्रा के दौरान तिरंगे को प्रमुखता से रखा गया और प्रतिभागियों ने इसे देश के प्रति सम्मान और एकता के प्रतीक के तौर पर लहराया।
जबलपुर जिला तैराकी संघ के अध्यक्ष दीपक अस्रानी के मुताबिक, आयोजन के पीछे देशभक्ति की भावना को लोगों तक पहुंचाना और अखंड भारत के संकल्प को आगे बढ़ाना प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि यात्रा में उम्र की कोई खास सीमा नहीं रखी गई और इस वजह से अलग-अलग आयु वर्ग के तैराक इसमें शामिल हुए। पांच साल के बच्चों की मौजूदगी से लेकर वरिष्ठ तैराकों तक की भागीदारी ने आयोजन को व्यापक रूप दिया। नर्मदा में तैरते समय प्रतिभागियों के हाथों में तिरंगा रहा और पूरे रास्ते देशभक्ति का माहौल बना रहा।
तिलवारा पुल की ओर बढ़ते हुए तैराकों के साथ आयोजक और सहयोगी दल भी व्यवस्थाओं पर नजर रखते रहे। घाट के आसपास स्थानीय लोग काफी देर तक मौजूद रहे। कई लोगों ने मोबाइल से यात्रा के वीडियो बनाए और तस्वीरें भी लीं। नर्मदा के पानी में तिरंगे के साथ तैरते प्रतिभागियों का दृश्य आयोजन का सबसे प्रमुख आकर्षण रहा। यात्रा के दौरान देश की एकता, अखंडता और आपसी भाईचारे से जुड़े संदेश दिए गए। आयोजन से जुड़े लोगों के मुताबिक, नर्मदा के धार्मिक महत्व और स्वतंत्रता दिवस की भावना को एक साथ जोड़कर यह यात्रा हर साल आयोजित की जाती है। इस बार भी जिलेहरी घाट से शुरू हुई तैराकी तिलवारा पुल तक पहुंची और प्रतिभागियों ने तय दूरी के दौरान तिरंगा फहराते हुए अपनी भागीदारी निभाई।
Recommended for You
दैनिक जागरण से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
