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इंस्टाग्राम पर लोन एप डाउनलोड करना पड़ा भारी, व्यापारी से 1.36 लाख की ठगी
इंदौर,(म.प्र.)
इंदौर में ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग का मामला, फोटो वायरल करने की धमकी देकर वसूले रुपए
इंदौर में ऑनलाइन लोन एप के जरिए ब्लैकमेलिंग और साइबर ठगी का एक और मामला सामने आया है। शहर के एक फुटकर व्यापारी ने इंस्टाग्राम पर दिखाई दिए लोन एप के विज्ञापन पर भरोसा कर छोटा लोन लिया था, लेकिन बाद में यही फैसला उसके लिए बड़ी परेशानी बन गया। आरोपियों ने व्यापारी को फोटो और निजी जानकारी वायरल करने की धमकी देकर करीब 1 लाख 36 हजार रुपए वसूल लिए। मामले में बाणगंगा थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के मुताबिक पीड़ित राहुल गिरी बुधवार को शिकायत लेकर थाने पहुंचे थे। राहुल ने बताया कि फरवरी महीने में उन्हें निजी जरूरत के लिए पैसों की आवश्यकता थी। इसी दौरान इंस्टाग्राम चलाते समय उन्हें “स्वीट मनी” नाम के एक ऑनलाइन लोन एप का विज्ञापन दिखाई दिया। विज्ञापन में आसान प्रक्रिया और तुरंत लोन देने का दावा किया गया था। जरूरत के चलते उन्होंने लिंक पर क्लिक कर एप डाउनलोड कर ली।
राहुल ने पुलिस को बताया कि एप डाउनलोड करने के बाद उनसे आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक खाते से जुड़ी जानकारी मांगी गई। शुरुआत में उन्हें लगा कि यह सामान्य प्रक्रिया है, इसलिए उन्होंने सभी दस्तावेज और जरूरी जानकारी साझा कर दी। इसके बाद कुछ ही समय में उनके खाते में करीब 4 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए गए। शुरुआत में उन्हें लगा कि प्रक्रिया सही है और उन्हें राहत मिल गई है।
लेकिन कुछ दिनों बाद अलग-अलग मोबाइल नंबरों से वॉट्सएप कॉल और मैसेज आने लगे। कॉल करने वाले लोग खुद को लोन कंपनी का कर्मचारी बताते थे। उन्होंने राहुल से कहा कि अब उन्हें लोन की रकम ब्याज सहित तुरंत लौटानी होगी। राहुल के मुताबिक आरोपियों ने कुछ ही दिनों में रकम कई गुना बढ़ाकर मांगना शुरू कर दिया। जब उन्होंने विरोध किया तो उन्हें धमकियां मिलने लगीं।
राहुल ने बताया कि आरोपियों ने कहा कि उनके मोबाइल फोन का डाटा और फोटो उनके पास मौजूद है। पैसे नहीं देने पर फोटो एडिट कर रिश्तेदारों, दोस्तों और परिचितों को भेजने की धमकी दी गई। लगातार आने वाले कॉल और धमकियों से राहुल घबरा गए। बदनामी के डर से उन्होंने आरोपियों द्वारा बताई गई अलग-अलग यूपीआई आईडी पर रुपए ट्रांसफर करना शुरू कर दिया।
पीड़ित के मुताबिक आरोपियों ने धीरे-धीरे उनसे करीब 1 लाख 36 हजार रुपए वसूल लिए। इसके बावजूद ब्लैकमेलिंग बंद नहीं हुई। आरोपी लगातार और पैसों की मांग करते रहे। जब राहुल ने आगे रकम देने से मना किया तो आरोपियों ने उनके रिश्तेदारों और परिचितों को एडिट किए गए फोटो भेज दिए। इससे वह मानसिक रूप से काफी परेशान हो गए।
लगातार धमकियों और ब्लैकमेलिंग से परेशान होकर राहुल ने बाद में अपना मोबाइल फोन भी फॉर्मेट कर दिया। इसके बाद उन्होंने मामले की शिकायत क्राइम ब्रांच की साइबर यूनिट में की। शुरुआती जांच के बाद मामला बाणगंगा थाना पुलिस को भेजा गया, जहां एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
पुलिस के अनुसार पीड़ित ने आधा दर्जन से ज्यादा यूपीआई आईडी और कई मोबाइल नंबरों की जानकारी जांच एजेंसियों को दी है। इन्हीं खातों और नंबरों के जरिए रकम ट्रांसफर करवाई गई थी। साइबर टीम अब इन यूपीआई खातों और बैंक डिटेल्स के जरिए आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। पुलिस का कहना है कि कई मामलों में ऐसे गिरोह दूसरे राज्यों से ऑपरेट करते हैं और फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैंक खाते खोलते हैं।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ समय में इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी लोन एप के विज्ञापन तेजी से बढ़े हैं। ये एप कम समय में आसान लोन देने का लालच देकर लोगों से निजी जानकारी हासिल करते हैं। एप डाउनलोड करते ही कई बार मोबाइल का डाटा, कॉन्टैक्ट लिस्ट और फोटो तक एक्सेस कर लिया जाता है। बाद में इन्हीं जानकारियों का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग के लिए किया जाता है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान लोन एप या लिंक पर भरोसा न करें। केवल रिजर्व बैंक से मान्यता प्राप्त और विश्वसनीय संस्थाओं से ही ऑनलाइन लोन लें। साथ ही मोबाइल एप डाउनलोड करने से पहले उसकी सत्यता जांचना जरूरी है। अधिकारियों का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति को इस तरह की धमकी मिलती है तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन या पुलिस से संपर्क करना चाहिए।
इंदौर में सामने आया यह मामला एक बार फिर ऑनलाइन लोन एप के बढ़ते खतरे को दिखाता है। छोटी रकम के लालच में लोग निजी जानकारी साझा कर देते हैं और बाद में साइबर अपराधियों के जाल में फंस जाते हैं। पुलिस अब मामले में तकनीकी जांच कर रही है और जल्द आरोपियों तक पहुंचने का दावा कर रही है।
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इंस्टाग्राम पर लोन एप डाउनलोड करना पड़ा भारी, व्यापारी से 1.36 लाख की ठगी
इंदौर,(म.प्र.)
इंदौर में ऑनलाइन लोन एप के जरिए ब्लैकमेलिंग और साइबर ठगी का एक और मामला सामने आया है। शहर के एक फुटकर व्यापारी ने इंस्टाग्राम पर दिखाई दिए लोन एप के विज्ञापन पर भरोसा कर छोटा लोन लिया था, लेकिन बाद में यही फैसला उसके लिए बड़ी परेशानी बन गया। आरोपियों ने व्यापारी को फोटो और निजी जानकारी वायरल करने की धमकी देकर करीब 1 लाख 36 हजार रुपए वसूल लिए। मामले में बाणगंगा थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के मुताबिक पीड़ित राहुल गिरी बुधवार को शिकायत लेकर थाने पहुंचे थे। राहुल ने बताया कि फरवरी महीने में उन्हें निजी जरूरत के लिए पैसों की आवश्यकता थी। इसी दौरान इंस्टाग्राम चलाते समय उन्हें “स्वीट मनी” नाम के एक ऑनलाइन लोन एप का विज्ञापन दिखाई दिया। विज्ञापन में आसान प्रक्रिया और तुरंत लोन देने का दावा किया गया था। जरूरत के चलते उन्होंने लिंक पर क्लिक कर एप डाउनलोड कर ली।
राहुल ने पुलिस को बताया कि एप डाउनलोड करने के बाद उनसे आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक खाते से जुड़ी जानकारी मांगी गई। शुरुआत में उन्हें लगा कि यह सामान्य प्रक्रिया है, इसलिए उन्होंने सभी दस्तावेज और जरूरी जानकारी साझा कर दी। इसके बाद कुछ ही समय में उनके खाते में करीब 4 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए गए। शुरुआत में उन्हें लगा कि प्रक्रिया सही है और उन्हें राहत मिल गई है।
लेकिन कुछ दिनों बाद अलग-अलग मोबाइल नंबरों से वॉट्सएप कॉल और मैसेज आने लगे। कॉल करने वाले लोग खुद को लोन कंपनी का कर्मचारी बताते थे। उन्होंने राहुल से कहा कि अब उन्हें लोन की रकम ब्याज सहित तुरंत लौटानी होगी। राहुल के मुताबिक आरोपियों ने कुछ ही दिनों में रकम कई गुना बढ़ाकर मांगना शुरू कर दिया। जब उन्होंने विरोध किया तो उन्हें धमकियां मिलने लगीं।
राहुल ने बताया कि आरोपियों ने कहा कि उनके मोबाइल फोन का डाटा और फोटो उनके पास मौजूद है। पैसे नहीं देने पर फोटो एडिट कर रिश्तेदारों, दोस्तों और परिचितों को भेजने की धमकी दी गई। लगातार आने वाले कॉल और धमकियों से राहुल घबरा गए। बदनामी के डर से उन्होंने आरोपियों द्वारा बताई गई अलग-अलग यूपीआई आईडी पर रुपए ट्रांसफर करना शुरू कर दिया।
पीड़ित के मुताबिक आरोपियों ने धीरे-धीरे उनसे करीब 1 लाख 36 हजार रुपए वसूल लिए। इसके बावजूद ब्लैकमेलिंग बंद नहीं हुई। आरोपी लगातार और पैसों की मांग करते रहे। जब राहुल ने आगे रकम देने से मना किया तो आरोपियों ने उनके रिश्तेदारों और परिचितों को एडिट किए गए फोटो भेज दिए। इससे वह मानसिक रूप से काफी परेशान हो गए।
लगातार धमकियों और ब्लैकमेलिंग से परेशान होकर राहुल ने बाद में अपना मोबाइल फोन भी फॉर्मेट कर दिया। इसके बाद उन्होंने मामले की शिकायत क्राइम ब्रांच की साइबर यूनिट में की। शुरुआती जांच के बाद मामला बाणगंगा थाना पुलिस को भेजा गया, जहां एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
पुलिस के अनुसार पीड़ित ने आधा दर्जन से ज्यादा यूपीआई आईडी और कई मोबाइल नंबरों की जानकारी जांच एजेंसियों को दी है। इन्हीं खातों और नंबरों के जरिए रकम ट्रांसफर करवाई गई थी। साइबर टीम अब इन यूपीआई खातों और बैंक डिटेल्स के जरिए आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। पुलिस का कहना है कि कई मामलों में ऐसे गिरोह दूसरे राज्यों से ऑपरेट करते हैं और फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैंक खाते खोलते हैं।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ समय में इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी लोन एप के विज्ञापन तेजी से बढ़े हैं। ये एप कम समय में आसान लोन देने का लालच देकर लोगों से निजी जानकारी हासिल करते हैं। एप डाउनलोड करते ही कई बार मोबाइल का डाटा, कॉन्टैक्ट लिस्ट और फोटो तक एक्सेस कर लिया जाता है। बाद में इन्हीं जानकारियों का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग के लिए किया जाता है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान लोन एप या लिंक पर भरोसा न करें। केवल रिजर्व बैंक से मान्यता प्राप्त और विश्वसनीय संस्थाओं से ही ऑनलाइन लोन लें। साथ ही मोबाइल एप डाउनलोड करने से पहले उसकी सत्यता जांचना जरूरी है। अधिकारियों का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति को इस तरह की धमकी मिलती है तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन या पुलिस से संपर्क करना चाहिए।
इंदौर में सामने आया यह मामला एक बार फिर ऑनलाइन लोन एप के बढ़ते खतरे को दिखाता है। छोटी रकम के लालच में लोग निजी जानकारी साझा कर देते हैं और बाद में साइबर अपराधियों के जाल में फंस जाते हैं। पुलिस अब मामले में तकनीकी जांच कर रही है और जल्द आरोपियों तक पहुंचने का दावा कर रही है।
