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करंट से हो रहा था मछली-मगरमच्छ का शिकार, 3 आरोपी किए गए गिरफ्तार, 4 बैटरियां-3 यूपीएस भी बरामद
मंदसौर (म.प्र.)
गांधीसागर जलाशय में करंट से मछली शिकार करते 3 आरोपी गिरफ्तार, बैटरियां और उपकरण जब्त, जलीय जीवों को भारी नुकसान।
मंदसौर जिले के गांधीसागर जलाशय में अवैध मछली शिकार के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस, वन और राजस्व विभाग की संयुक्त कार्रवाई में करंट के जरिए मछलियों और अन्य जलीय जीवों का शिकार करने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। शनिवार देर रात संजीत क्षेत्र में की गई इस कार्रवाई में भारी मात्रा में उपकरण भी जब्त किए गए। अधिकारियों के अनुसार आरोपी पिछले करीब दो महीनों से बैकवॉटर इलाके में करंट प्रवाहित कर बड़े पैमाने पर शिकार कर रहे थे, जिससे जल पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंच रहा था।
प्रशासन को लगातार मिल रही शिकायतों के बाद यह कार्रवाई की गई। जांच में सामने आया कि ठेका निरस्त होने के बावजूद बाहरी लोग अवैध रूप से जलाशय में सक्रिय थे। छापेमारी के दौरान ग्राम मगरा स्थित एक ठिकाने से चार बड़ी बैटरियां, तीन यूपीएस/आईपीएस, विद्युत तार और अन्य उपकरण बरामद किए गए। यह उपकरण नदी में करंट छोड़ने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे।
अवैध शिकार का जाल
बैकवॉटर क्षेत्र-गरोठ, बसई, संजीत, रामपुरा और चचोर में लंबे समय से मछली माफिया सक्रिय थे। सूत्रों के मुताबिक आरोपी किराए के कमरे से अंडरग्राउंड वायरिंग के जरिए करंट सीधे पानी में प्रवाहित करते थे।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पश्चिम बंगाल निवासी सुकांत सरकार, सुजान विश्वास और देवव्रत विश्वास के रूप में हुई है। पूछताछ में इनके पास किसी भी प्रकार का वैध मत्स्याखेट लाइसेंस नहीं पाया गया। पुलिस ने इनके खिलाफ नाहरगढ़ थाने में मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
जलीय जीवन पर असर
करंट से शिकार के कारण बड़ी संख्या में मछलियों की मौत हुई है। वन विभाग के अनुसार इस दौरान मगरमच्छ सहित अन्य जलीय जीव भी इसकी चपेट में आए हैं।
मौके से मिले वीडियो में मृत मछलियों के साथ मगरमच्छ भी दिखाई दिए, जो इस अवैध गतिविधि के गंभीर प्रभाव को दर्शाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का शिकार जलाशय के पूरे इकोसिस्टम को असंतुलित कर सकता है।
एसडीओपी कीर्ति बघेल ने बताया कि नाहरगढ़ थाने को मिली सूचना के आधार पर संयुक्त टीम ने कार्रवाई की। “एक घर से करंट लगाने के उपकरण बरामद किए गए हैं। तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले की जांच जारी है,” उन्होंने कहा।
इस घटना ने क्षेत्र में अवैध मछली शिकार की समस्या को फिर उजागर कर दिया है। स्थानीय प्रशासन अब बैकवॉटर क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और ऐसे नेटवर्क पर सख्ती से कार्रवाई करने की तैयारी में है। अधिकारियों के अनुसार आगे भी इसी तरह के अभियान चलाए जाएंगे ताकि इस तरह की गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।
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करंट से हो रहा था मछली-मगरमच्छ का शिकार, 3 आरोपी किए गए गिरफ्तार, 4 बैटरियां-3 यूपीएस भी बरामद
मंदसौर (म.प्र.)
मंदसौर जिले के गांधीसागर जलाशय में अवैध मछली शिकार के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस, वन और राजस्व विभाग की संयुक्त कार्रवाई में करंट के जरिए मछलियों और अन्य जलीय जीवों का शिकार करने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। शनिवार देर रात संजीत क्षेत्र में की गई इस कार्रवाई में भारी मात्रा में उपकरण भी जब्त किए गए। अधिकारियों के अनुसार आरोपी पिछले करीब दो महीनों से बैकवॉटर इलाके में करंट प्रवाहित कर बड़े पैमाने पर शिकार कर रहे थे, जिससे जल पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंच रहा था।
प्रशासन को लगातार मिल रही शिकायतों के बाद यह कार्रवाई की गई। जांच में सामने आया कि ठेका निरस्त होने के बावजूद बाहरी लोग अवैध रूप से जलाशय में सक्रिय थे। छापेमारी के दौरान ग्राम मगरा स्थित एक ठिकाने से चार बड़ी बैटरियां, तीन यूपीएस/आईपीएस, विद्युत तार और अन्य उपकरण बरामद किए गए। यह उपकरण नदी में करंट छोड़ने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे।
अवैध शिकार का जाल
बैकवॉटर क्षेत्र-गरोठ, बसई, संजीत, रामपुरा और चचोर में लंबे समय से मछली माफिया सक्रिय थे। सूत्रों के मुताबिक आरोपी किराए के कमरे से अंडरग्राउंड वायरिंग के जरिए करंट सीधे पानी में प्रवाहित करते थे।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पश्चिम बंगाल निवासी सुकांत सरकार, सुजान विश्वास और देवव्रत विश्वास के रूप में हुई है। पूछताछ में इनके पास किसी भी प्रकार का वैध मत्स्याखेट लाइसेंस नहीं पाया गया। पुलिस ने इनके खिलाफ नाहरगढ़ थाने में मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
जलीय जीवन पर असर
करंट से शिकार के कारण बड़ी संख्या में मछलियों की मौत हुई है। वन विभाग के अनुसार इस दौरान मगरमच्छ सहित अन्य जलीय जीव भी इसकी चपेट में आए हैं।
मौके से मिले वीडियो में मृत मछलियों के साथ मगरमच्छ भी दिखाई दिए, जो इस अवैध गतिविधि के गंभीर प्रभाव को दर्शाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का शिकार जलाशय के पूरे इकोसिस्टम को असंतुलित कर सकता है।
एसडीओपी कीर्ति बघेल ने बताया कि नाहरगढ़ थाने को मिली सूचना के आधार पर संयुक्त टीम ने कार्रवाई की। “एक घर से करंट लगाने के उपकरण बरामद किए गए हैं। तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले की जांच जारी है,” उन्होंने कहा।
इस घटना ने क्षेत्र में अवैध मछली शिकार की समस्या को फिर उजागर कर दिया है। स्थानीय प्रशासन अब बैकवॉटर क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और ऐसे नेटवर्क पर सख्ती से कार्रवाई करने की तैयारी में है। अधिकारियों के अनुसार आगे भी इसी तरह के अभियान चलाए जाएंगे ताकि इस तरह की गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।
