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महिला आरक्षण बिल पर CM रेखा गुप्ता का विपक्ष पर तीखा हमला, बोलीं- बेटियों की हार में कैसे जीत सकता है लोकतंत्र?
नेशनल डेस्क
नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन विधेयक पर विवाद बढ़ा, सीएम रेखा गुप्ता ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए महिला प्रतिनिधित्व पर सवाल उठाए।
लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन विधेयक पर विवाद गहराया, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए महिला प्रतिनिधित्व पर उठाए सवाल।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन विधेयक पारित न होने पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बेटियों के अधिकारों की लड़ाई को राजनीति की भेंट चढ़ाया जा रहा है। सीएम ने इसे महिलाओं के प्रतिनिधित्व और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़ा अहम मुद्दा बताया। उनके बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है।
संसद में बढ़ा राजनीतिक तनाव
लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन विधेयक पर चर्चा और उसके पारित न होने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि तीन दिनों की संसदीय कार्यवाही के दौरान जो दृश्य देखने को मिला, वह बेहद निराशाजनक था।
उन्होंने आरोप लगाया कि आजादी के 78 साल बाद भी महिलाओं को राजनीति में समान अवसर नहीं मिल पा रहे हैं और इसके लिए विपक्ष की भूमिका भी जिम्मेदार है। उनके अनुसार, विधेयक के रास्ते में अनावश्यक बाधाएं खड़ी की गईं।
विपक्ष पर तीखा हमला
सीएम रेखा गुप्ता ने विपक्ष पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि “बेटियों की हार में लोकतंत्र की जीत कैसे संभव है?” उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक दल जानबूझकर ऐसे संशोधनों का विरोध कर रहे हैं, जिनसे महिला प्रतिनिधित्व बढ़ सकता है।
अधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि विधेयक पहले से तैयार प्रावधानों के साथ लाया गया था, लेकिन इसके बावजूद डिलिमिटेशन और कोटे जैसे मुद्दों को उठाकर इसे रोकने की कोशिश की गई।
महिला आरक्षण पर बहस
महिला आरक्षण और राजनीतिक भागीदारी को लेकर देश में लंबे समय से बहस चल रही है। सीएम रेखा गुप्ता ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा महिलाओं के सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी है और यह विधेयक भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि 543 सीटों में संतुलन बनाना एक चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है, लेकिन सरकार का उद्देश्य सभी वर्गों को साथ लेकर आगे बढ़ना है।
ऐतिहासिक संदर्भ का उल्लेख
अपने बयान में सीएम ने शाह बानो केस और ट्रिपल तलाक कानून का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब भी देश में महिलाओं से जुड़े बड़े सुधार लाने की कोशिश हुई, तब विपक्ष ने उसका विरोध किया।
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्ष ने अतीत में भी महिला हितों से जुड़े कई फैसलों का विरोध किया है, जबकि अब वह खुद को महिला समर्थक के रूप में पेश कर रहा है।
कविता से दिया संदेश
सीएम रेखा गुप्ता ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर एक कविता साझा कर महिलाओं को प्रेरित करने की कोशिश की। उन्होंने लिखा कि जैसे आग में तपकर सोना चमकता है, वैसे ही भारतीय महिलाएं भी संघर्षों के बाद और मजबूत बनकर उभरेंगी। उन्होंने कहा कि देश की बेटियां अब किसी भी परिस्थिति में पीछे नहीं रहेंगी और अपने अधिकारों के लिए लगातार आगे बढ़ेंगी।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर महिला आरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर राष्ट्रीय बहस को तेज कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मुद्दा आने वाले समय में संसद और राज्यों की राजनीति में अहम भूमिका निभा सकता है।
जनता के बीच भी यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या महिला सशक्तिकरण के मुद्दों पर राजनीतिक सहमति बन पाएगी या यह मुद्दा आगे भी टकराव का कारण बनेगा।
आगे की स्थिति
आने वाले सत्रों में नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन विधेयक पर फिर से चर्चा की संभावना जताई जा रही है। सरकार और विपक्ष दोनों ही अपने-अपने रुख पर कायम हैं, जिससे आगे भी राजनीतिक टकराव की स्थिति बनी रह सकती है।
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महिला आरक्षण बिल पर CM रेखा गुप्ता का विपक्ष पर तीखा हमला, बोलीं- बेटियों की हार में कैसे जीत सकता है लोकतंत्र?
नेशनल डेस्क
लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन विधेयक पर विवाद गहराया, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए महिला प्रतिनिधित्व पर उठाए सवाल।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन विधेयक पारित न होने पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बेटियों के अधिकारों की लड़ाई को राजनीति की भेंट चढ़ाया जा रहा है। सीएम ने इसे महिलाओं के प्रतिनिधित्व और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़ा अहम मुद्दा बताया। उनके बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है।
संसद में बढ़ा राजनीतिक तनाव
लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन विधेयक पर चर्चा और उसके पारित न होने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि तीन दिनों की संसदीय कार्यवाही के दौरान जो दृश्य देखने को मिला, वह बेहद निराशाजनक था।
उन्होंने आरोप लगाया कि आजादी के 78 साल बाद भी महिलाओं को राजनीति में समान अवसर नहीं मिल पा रहे हैं और इसके लिए विपक्ष की भूमिका भी जिम्मेदार है। उनके अनुसार, विधेयक के रास्ते में अनावश्यक बाधाएं खड़ी की गईं।
विपक्ष पर तीखा हमला
सीएम रेखा गुप्ता ने विपक्ष पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि “बेटियों की हार में लोकतंत्र की जीत कैसे संभव है?” उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक दल जानबूझकर ऐसे संशोधनों का विरोध कर रहे हैं, जिनसे महिला प्रतिनिधित्व बढ़ सकता है।
अधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि विधेयक पहले से तैयार प्रावधानों के साथ लाया गया था, लेकिन इसके बावजूद डिलिमिटेशन और कोटे जैसे मुद्दों को उठाकर इसे रोकने की कोशिश की गई।
महिला आरक्षण पर बहस
महिला आरक्षण और राजनीतिक भागीदारी को लेकर देश में लंबे समय से बहस चल रही है। सीएम रेखा गुप्ता ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा महिलाओं के सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी है और यह विधेयक भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि 543 सीटों में संतुलन बनाना एक चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है, लेकिन सरकार का उद्देश्य सभी वर्गों को साथ लेकर आगे बढ़ना है।
ऐतिहासिक संदर्भ का उल्लेख
अपने बयान में सीएम ने शाह बानो केस और ट्रिपल तलाक कानून का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब भी देश में महिलाओं से जुड़े बड़े सुधार लाने की कोशिश हुई, तब विपक्ष ने उसका विरोध किया।
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्ष ने अतीत में भी महिला हितों से जुड़े कई फैसलों का विरोध किया है, जबकि अब वह खुद को महिला समर्थक के रूप में पेश कर रहा है।
कविता से दिया संदेश
सीएम रेखा गुप्ता ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर एक कविता साझा कर महिलाओं को प्रेरित करने की कोशिश की। उन्होंने लिखा कि जैसे आग में तपकर सोना चमकता है, वैसे ही भारतीय महिलाएं भी संघर्षों के बाद और मजबूत बनकर उभरेंगी। उन्होंने कहा कि देश की बेटियां अब किसी भी परिस्थिति में पीछे नहीं रहेंगी और अपने अधिकारों के लिए लगातार आगे बढ़ेंगी।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर महिला आरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर राष्ट्रीय बहस को तेज कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मुद्दा आने वाले समय में संसद और राज्यों की राजनीति में अहम भूमिका निभा सकता है।
जनता के बीच भी यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या महिला सशक्तिकरण के मुद्दों पर राजनीतिक सहमति बन पाएगी या यह मुद्दा आगे भी टकराव का कारण बनेगा।
आगे की स्थिति
आने वाले सत्रों में नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन विधेयक पर फिर से चर्चा की संभावना जताई जा रही है। सरकार और विपक्ष दोनों ही अपने-अपने रुख पर कायम हैं, जिससे आगे भी राजनीतिक टकराव की स्थिति बनी रह सकती है।
