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कटनी CSP नेहा पच्चीसिया पर गिरी गाज, CM मोहन यादव ने दिए निलंबन के निर्देश
मध्य प्रदेश
जमीन सौदे और हत्या की जांच से जुड़े आरोपों के बाद कार्रवाई, CSP समेत तीन लोगों पर FIR; पुलिस कार्यालय भी सीज किया गया
मध्य प्रदेश के कटनी में पुलिस अधिकारी नेहा पच्चीसिया से जुड़े जमीन विवाद ने अब बड़ा प्रशासनिक मोड़ ले लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित CSP के खिलाफ तत्काल निलंबन की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कटनी के कुठला थाना क्षेत्र में सामने आए इस प्रकरण में पच्चीसिया समेत तीन लोगों के खिलाफ पहले ही FIR दर्ज हो चुकी है। आरोप जमीन के एक सौदे, हत्या के मामले की जांच और कथित आपराधिक साजिश से जुड़े हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कहा गया है कि कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में लापरवाही, दबाव या पद के गलत इस्तेमाल को स्वीकार नहीं किया जाएगा। मामले की निष्पक्ष जांच कराने और आरोप सही पाए जाने पर कार्रवाई की बात भी कही गई है।
मामला सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन में भी कार्रवाई तेज हुई। पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर कटनी स्थित CSP कार्यालय को सीज किए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे पहले भी पच्चीसिया के अधीन कई थानों का प्रभार वापस लिया जा चुका था। उनके सरकारी ड्राइवर के खिलाफ भी निलंबन की कार्रवाई हुई थी। पूरा मामला केवल जमीन की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है। पुलिस जांच में हत्या के एक केस की विवेचना और एक ट्रांसपोर्टर से कथित वसूली से जुड़े आरोप भी सामने आए हैं। इन शिकायतों की जांच जबलपुर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनु बेनीवाल को सौंपी गई थी। जांच के दौरान कई लोगों के बयान दर्ज किए गए और इसके बाद मामला FIR तक पहुंचा।
कुठला थाना क्षेत्र के कनहवारा गांव में एक युवक झब्बू कोल की हत्या हुई थी। इस मामले में रमेश लोधी को आरोपी बनाया गया था। इसी केस की जांच के दौरान पुलिस की भूमिका को लेकर सवाल उठे। शिकायत में आरोप लगाया गया कि तय समय सीमा में विवेचना पूरी कर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल नहीं की गई। इसी दौरान रमेश लोधी की जमीन से जुड़ा मामला भी जांच के दायरे में आया। आरोप है कि हत्या के आरोपी से जुड़ी जमीन को बेहद कम कीमत पर खरीदने की प्रक्रिया में पुलिस अधिकारी और अन्य लोगों की भूमिका रही। हालांकि, ये सभी आरोप जांच और FIR में दर्ज दावों का हिस्सा हैं और इनकी अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
जमीन के सौदे को लेकर शिकायत में बताया गया है कि खसरा नंबर 2618/1 की जमीन की रजिस्ट्री 15 अप्रैल को मारूफ अहमद हनफी के नाम कराई गई थी। इसके बदले रमेश लोधी को 15 लाख रुपये का चेक और 3.20 लाख रुपये नकद दिए जाने की बात कही गई है। यानी कुल भुगतान करीब 18.20 लाख रुपये बताया गया। दूसरी ओर सरकारी गाइडलाइन के आधार पर इसी जमीन की कीमत करीब 82.86 लाख रुपये बताई गई थी। इसी अंतर को लेकर शिकायत में सवाल उठाए गए। आरोप है कि जमीन का सौदा वास्तविक मूल्य से काफी कम रकम में कराया गया। FIR में नेहा पच्चीसिया के साथ मारूफ अहमद हनफी और क्षितिज राज बारापत्रे के नाम भी शामिल हैं।
जांच के दौरान जमीन की रजिस्ट्री और भुगतान से जुड़े दस्तावेज भी महत्वपूर्ण माने गए। अधिकारियों ने शिकायत में लगाए गए आरोपों की पड़ताल के लिए संबंधित लोगों से पूछताछ की। जांच अधिकारी अनु बेनीवाल ने पहले कई लोगों के बयान दर्ज किए थे। अगस्त की शुरुआत में नेहा पच्चीसिया भी जांच अधिकारी के सामने पेश हुई थीं और अपना बयान दर्ज कराया था। उस समय हत्या की जांच में कथित अनियमितता और अवैध वसूली से जुड़े आरोपों की भी जांच चल रही थी। जांच पूरी होने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों को रिपोर्ट सौंपे जाने की बात कही गई थी।
पुलिस अधिकारी के खिलाफ दूसरा गंभीर आरोप एक ट्रांसपोर्टर से जुड़ा बताया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि हाईवा वाहन को छोड़ने के बदले 30 हजार रुपये की मांग की गई थी। इस मामले में भी जांच कराई गई। इससे पहले कटनी एसपी ने पच्चीसिया के सरकारी ड्राइवर केशव सिंह को निलंबित किया था। विभागीय स्तर पर उनके अधिकार क्षेत्र को भी सीमित किया गया था। बाद में मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच कटनी से बाहर जबलपुर स्तर पर कराई गई, ताकि स्थानीय स्तर पर किसी तरह के प्रभाव की आशंका न रहे।
इससे पहले पच्चीसिया ने अपने खिलाफ किए गए प्रशासनिक बदलाव को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था। उनके अधीन आने वाले पांच थानों का प्रभार हटाने के आदेश को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने इस प्रशासनिक फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद भी जांच प्रक्रिया जारी रही। अब FIR दर्ज होने और मुख्यमंत्री के स्तर से निलंबन के निर्देश दिए जाने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। पुलिस प्रशासन की ओर से संबंधित रिकॉर्ड और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
FIR में जिन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, उनमें धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और आरोपी को बचाने से जुड़े आरोप शामिल हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि जमीन के सौदे में किसकी क्या भूमिका थी और भुगतान की रकम तय करने के पीछे क्या प्रक्रिया रही। साथ ही हत्या के केस में जांच की समयसीमा, चार्जशीट में देरी और जमीन सौदे के बीच किसी संबंध की भी पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसियां शिकायत में लगाए गए आरोपों को दस्तावेजों, बयानों और उपलब्ध रिकॉर्ड से मिलाने का काम कर रही हैं।
मुख्यमंत्री की कार्रवाई के बाद अब विभागीय स्तर पर निलंबन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने साफ किया है कि कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में किसी अधिकारी की ओर से दबाव या पद के दुरुपयोग की शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा। कटनी के इस मामले में जमीन का सौदा, हत्या की जांच और कथित वसूली से जुड़े अलग-अलग आरोप एक ही जांच के दायरे में आ गए हैं। अब पुलिस और प्रशासन की जांच में सामने आने वाले दस्तावेज और बयान आगे की कार्रवाई के लिए अहम रहेंगे।
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