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विद्युत वितरण कंपनियों में 55 हजार से ज्यादा आउटसोर्स कर्मचारी, नियमितीकरण की कोई योजना नहीं
भोपाल (म.प्र.)
विधानसभा में ऊर्जा मंत्री ने बताया—मासिक वेतन 12,150 से 16,494 रुपये, एजेंसियों के जरिए हो रही नियुक्ति
मध्य प्रदेश की तीनों विद्युत वितरण कंपनियों में बड़ी संख्या में आउटसोर्स कर्मचारियों से काम लिया जा रहा है, लेकिन इन्हें नियमित करने की कोई योजना नहीं है। यह जानकारी ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने विधानसभा में कांग्रेस विधायक झूमा सोलंकी के सवाल के लिखित जवाब में दी। मंत्री ने स्पष्ट किया कि ये कर्मचारी विद्युत कंपनियों के नहीं, बल्कि आउटसोर्स एजेंसियों के कर्मचारी माने जाते हैं।
तीनों कंपनियों में 55,506 आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत
ऊर्जा मंत्री ने बताया कि प्रदेश की तीनों विद्युत वितरण कंपनियों में कुल 55,506 आउटसोर्स कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड में 15,522, म.प्र. मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड में 21,574 और म.प्र. पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड में 18,410 कर्मचारी शामिल हैं। ये सभी कर्मचारी उच्च कुशल, कुशल, अर्द्धकुशल और अकुशल श्रेणियों में कार्यरत हैं।
श्रेणी के अनुसार तय है न्यूनतम वेतन
मंत्री ने बताया कि आउटसोर्स कर्मचारियों को श्रम आयुक्त द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन का भुगतान किया जा रहा है। इसके तहत उच्च कुशल कर्मचारियों को 16,494 रुपये, कुशल को 14,869 रुपये, अर्द्धकुशल को 13,146 रुपये और अकुशल कर्मचारियों को 12,150 रुपये मासिक वेतन दिया जा रहा है। यह भुगतान संबंधित आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से किया जाता है।
दुर्घटना में मृत्यु पर आर्थिक सहायता का प्रावधान
कार्य के दौरान किसी आउटसोर्स कर्मचारी की दुर्घटना में मृत्यु होने पर पीड़ित परिवार को नियमानुसार 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। इसके अलावा, आउटसोर्स एजेंसियों द्वारा कर्मचारियों का सामूहिक दुर्घटना बीमा कराया जाता है। मंत्री के अनुसार कर्मचारियों को ईपीएफ और ईएसआईसी योजनाओं के तहत भी नियमों के अनुसार लाभ दिए जाते हैं।
नियमितीकरण पर सरकार का रुख स्पष्ट
ऊर्जा मंत्री ने साफ किया कि आउटसोर्स कर्मचारी सीधे विद्युत वितरण कंपनियों के कर्मचारी नहीं हैं, बल्कि सेवा प्रदाता एजेंसियों से जुड़े हैं। इसी कारण राज्य सरकार की ओर से इनके नियमितीकरण को लेकर कोई प्रस्ताव या योजना नहीं है।
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