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थाना घेराव से पहले पुलिस की कार्रवाई, युवा कांग्रेस के विधानसभा अध्यक्ष अभिषेक पचौरी हिरासत में
मुरैना (म.प्र.)
मुरैना में बढ़ते अपराध के विरोध में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले पुलिस ने रात में समर्थकों और सुबह नेता को घर से उठाया, कांग्रेस ने बताया लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला
मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में उस वक्त राजनीतिक हलचल तेज हो गई, जब थाना घेराव से पहले ही पुलिस ने युवा कांग्रेस के सबलगढ़ विधानसभा अध्यक्ष अभिषेक पचौरी को उनके निवास से हिरासत में ले लिया। यह कार्रवाई उस प्रदर्शन से कुछ घंटे पहले की गई, जिसे शहर में बढ़ती आपराधिक घटनाओं के विरोध में आयोजित किया जाना था। पुलिस की इस कदम को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी गई है।
जानकारी के अनुसार, अभिषेक पचौरी ने 10 जनवरी को लूट, डकैती और हत्या जैसी वारदातों में बढ़ोतरी को लेकर थाने के घेराव का ऐलान किया था। प्रदर्शन की घोषणा के बाद से ही प्रशासन अलर्ट मोड में था। शुक्रवार रात को ही पुलिस ने उनके तीन से चार समर्थकों को हिरासत में ले लिया था। शनिवार सुबह तीन थानों की पुलिस टीम ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए पचौरी को उनके घर से उठाया।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह कदम कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी संभावित तनाव को टालने के उद्देश्य से उठाया गया। अधिकारियों के मुताबिक, बिना अनुमति के प्रदर्शन की आशंका और भीड़ जुटने की संभावना को देखते हुए एहतियातन हिरासत की गई है। हालांकि, पुलिस ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि हिरासत में लिए गए लोगों पर किन धाराओं में कार्रवाई की जा रही है।
वहीं, कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का आरोप है कि यह कार्रवाई पूरी तरह राजनीतिक दबाव में की गई है। पार्टी का कहना है कि अभिषेक पचौरी ने हाल ही में अंकित माहौर हत्याकांड सहित कई आपराधिक मामलों में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। इसी के चलते उन्हें और उनके समर्थकों को निशाना बनाया गया। कांग्रेस नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन करार दिया है।
स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि मुरैना और आसपास के इलाकों में अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। आम लोगों में असुरक्षा की भावना है और प्रशासन इस पर प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रहा है। इसी मुद्दे को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से थाना घेराव की योजना बनाई गई थी।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह घटना आने वाले दिनों में जिला स्तर पर सियासी टकराव को और तेज कर सकती है। विपक्ष जहां इसे जनहित की आवाज दबाने का मामला बता रहा है, वहीं प्रशासन कानून-व्यवस्था का हवाला दे रहा है। फिलहाल, पुलिस हिरासत में लिए गए नेताओं और समर्थकों से पूछताछ जारी है।
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