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एमपी के उत्तर में बारिश का अलर्ट: ग्वालियर-छतरपुर समेत 8 जिलों में तेज बौछारें संभावित
BHOPAL, MP
मध्यप्रदेश के उत्तरी जिलों में एक बार फिर मौसम ने करवट ली है। ग्वालियर, छतरपुर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, दतिया, निवाड़ी और टीकमगढ़ जिलों में सोमवार को भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।
मौसम विभाग ने इन जिलों में अगले 24 घंटों के दौरान साढ़े 4 इंच तक पानी गिरने की संभावना जताई है। रविवार को भी इन क्षेत्रों में अच्छी बारिश दर्ज की गई थी।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तर भारत से गुजर रही ट्रफ लाइन और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में वर्षा गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसका असर खासतौर पर ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड अंचलों पर अधिक दिख रहा है।
हाल ही में पूर्वी मध्यप्रदेश में बाढ़ जैसे हालात
पिछले सप्ताह प्रदेश के पूर्वी हिस्सों — जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग में भारी वर्षा के चलते बाढ़ जैसे हालात बन गए थे। रायसेन में बेतवा नदी का जलस्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच गया था। मंदिर, पुल और खेत जलमग्न हो गए थे। नर्मदा नदी अभी भी उफान पर है, वहीं कई डैम के गेट खोलने पड़े हैं।
अब तक सामान्य से ज्यादा वर्षा
मध्यप्रदेश में इस मानसून सीजन (1 जून से 4 अगस्त तक) औसतन 28.4 इंच बारिश हो चुकी है, जबकि सामान्य आंकड़ा 19 इंच का होता है। यानी प्रदेश में अब तक 9.4 इंच ज्यादा पानी गिर चुका है। मानसून की शुरुआत 16 जून को हुई थी और अब तक 76% सीजनल बारिश पूरी हो चुकी है।
इन जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा
ग्वालियर, राजगढ़, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मुरैना और श्योपुर में बारिश का कोटा पूरा हो चुका है। इन इलाकों में सामान्य से 50% तक ज्यादा वर्षा दर्ज की गई है। गुना और टीकमगढ़-निवाड़ी जिलों में सबसे ज्यादा वर्षा हुई है। वहीं, इंदौर, उज्जैन और भोपाल में अब भी अपेक्षित बारिश नहीं हुई है।
भोपाल में अगस्त का ऐतिहासिक रिकॉर्ड
भोपाल में अगस्त 2006 में सर्वाधिक 35 इंच बारिश दर्ज की गई थी, जिसमें 14 अगस्त को एक ही दिन में करीब 12 इंच पानी गिरा था। सामान्यतः राजधानी में अगस्त महीने में औसतन 14 दिन बारिश होती है।
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BHOPAL, MP
मौसम विभाग ने इन जिलों में अगले 24 घंटों के दौरान साढ़े 4 इंच तक पानी गिरने की संभावना जताई है। रविवार को भी इन क्षेत्रों में अच्छी बारिश दर्ज की गई थी।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तर भारत से गुजर रही ट्रफ लाइन और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में वर्षा गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसका असर खासतौर पर ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड अंचलों पर अधिक दिख रहा है।
हाल ही में पूर्वी मध्यप्रदेश में बाढ़ जैसे हालात
पिछले सप्ताह प्रदेश के पूर्वी हिस्सों — जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग में भारी वर्षा के चलते बाढ़ जैसे हालात बन गए थे। रायसेन में बेतवा नदी का जलस्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच गया था। मंदिर, पुल और खेत जलमग्न हो गए थे। नर्मदा नदी अभी भी उफान पर है, वहीं कई डैम के गेट खोलने पड़े हैं।
अब तक सामान्य से ज्यादा वर्षा
मध्यप्रदेश में इस मानसून सीजन (1 जून से 4 अगस्त तक) औसतन 28.4 इंच बारिश हो चुकी है, जबकि सामान्य आंकड़ा 19 इंच का होता है। यानी प्रदेश में अब तक 9.4 इंच ज्यादा पानी गिर चुका है। मानसून की शुरुआत 16 जून को हुई थी और अब तक 76% सीजनल बारिश पूरी हो चुकी है।
इन जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा
ग्वालियर, राजगढ़, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मुरैना और श्योपुर में बारिश का कोटा पूरा हो चुका है। इन इलाकों में सामान्य से 50% तक ज्यादा वर्षा दर्ज की गई है। गुना और टीकमगढ़-निवाड़ी जिलों में सबसे ज्यादा वर्षा हुई है। वहीं, इंदौर, उज्जैन और भोपाल में अब भी अपेक्षित बारिश नहीं हुई है।
भोपाल में अगस्त का ऐतिहासिक रिकॉर्ड
भोपाल में अगस्त 2006 में सर्वाधिक 35 इंच बारिश दर्ज की गई थी, जिसमें 14 अगस्त को एक ही दिन में करीब 12 इंच पानी गिरा था। सामान्यतः राजधानी में अगस्त महीने में औसतन 14 दिन बारिश होती है।
