- Hindi News
- राज्य
- मध्य प्रदेश
- पीएम मोदी जिनकी कर चुके तारीफ, वही शख्स अब जीते-जी कर रहा अपनी तेरहवीं
पीएम मोदी जिनकी कर चुके तारीफ, वही शख्स अब जीते-जी कर रहा अपनी तेरहवीं
सतना (म.प्र.)
सतना के रामलोटन कुशवाहा ने देहदान पर ताने मिलने के बाद जीते-जी अपनी तेरहवीं का आयोजन रखा, शोक संदेश वाले कार्ड भी छपवाए।
मध्य प्रदेश के सतना जिले में उचेहरा क्षेत्र के अत्रबेदिया गांव के रामलोटन कुशवाहा इन दिनों अपनी ही तेरहवीं और बरसी का आयोजन कर रहे हैं। उन्होंने इसके लिए शोक संदेश जैसे कार्ड भी छपवाए हैं और 13 मई को होने वाले कार्यक्रम के लिए रिश्तेदारों, परिचितों और गांव वालों को न्योता देना शुरू कर दिया है। आमतौर पर तेरहवीं किसी की मौत के बाद होती है, लेकिन इस मामले में बात कुछ और ही है। गांव में इसके बारे में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। कुछ इसे सामाजिक संदेश कह रहे हैं, तो कुछ लोग इसे देखकर आश्चर्यचकित हैं।
कहा जा रहा है कि रामलोटन ने अपनी मृत्यु के बाद देहदान करने का निर्णय लिया है। उन्होंने अपनी देह सतना के सरकारी मेडिकल कॉलेज को दान करने का संकल्प लिया है ताकि मेडिकल छात्रों को अध्ययन में मदद मिल सके। लेकिन उनके इस फैसले पर कुछ लोग तंज कसने लगे हैं। गांव में चर्चा हो रही है कि वे अंतिम संस्कार और बाद के खर्चों से बचने के लिए ऐसा कर रहे हैं। लगातार मिल रहे तानों से परेशान होकर रामलोटन ने यह अनोखा कदम उठाया। उनका कहना है कि अगर लोग सोच रहे हैं कि वे खर्च से बच रहे हैं, तो वे जीते-जी अपनी तेरहवीं और बरसी कर देंगे। इस सोच के साथ उन्होंने कार्यक्रम रखने का फैसला किया। शोक संदेश वाले कार्ड में भी कार्यक्रम का जिक्र किया गया है, जिसे देखकर लोग पहले तो चौंक गए।
रामलोटन कुशवाहा पहले से ही अपने कार्यों के लिए इलाके में जाने जाते हैं। औषधीय पौधों और स्वदेशी फसलों के संरक्षण में उनका काम काफी चर्चित रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में उनकी सराहना कर चुके हैं। साल 2024 में उन्हें भोपाल में राज्य जैव विविधता सम्मान भी मिला था। गांव के लोग बताते हैं कि रामलोटन हमेशा सामाजिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखते हैं। फिलहाल, उनका यह कदम पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। कई इसे समाज की सोच पर सवाल उठाने वाला तरीका मान रहे हैं, वहीं कुछ इसे एक भावनात्मक विरोध के रूप में देख रहे हैं, जो देहदान जैसे फैसले को लेकर समाज में फैली गलत धारणाओं को उजागर करता है।
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
पीएम मोदी जिनकी कर चुके तारीफ, वही शख्स अब जीते-जी कर रहा अपनी तेरहवीं
सतना (म.प्र.)
मध्य प्रदेश के सतना जिले में उचेहरा क्षेत्र के अत्रबेदिया गांव के रामलोटन कुशवाहा इन दिनों अपनी ही तेरहवीं और बरसी का आयोजन कर रहे हैं। उन्होंने इसके लिए शोक संदेश जैसे कार्ड भी छपवाए हैं और 13 मई को होने वाले कार्यक्रम के लिए रिश्तेदारों, परिचितों और गांव वालों को न्योता देना शुरू कर दिया है। आमतौर पर तेरहवीं किसी की मौत के बाद होती है, लेकिन इस मामले में बात कुछ और ही है। गांव में इसके बारे में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। कुछ इसे सामाजिक संदेश कह रहे हैं, तो कुछ लोग इसे देखकर आश्चर्यचकित हैं।
कहा जा रहा है कि रामलोटन ने अपनी मृत्यु के बाद देहदान करने का निर्णय लिया है। उन्होंने अपनी देह सतना के सरकारी मेडिकल कॉलेज को दान करने का संकल्प लिया है ताकि मेडिकल छात्रों को अध्ययन में मदद मिल सके। लेकिन उनके इस फैसले पर कुछ लोग तंज कसने लगे हैं। गांव में चर्चा हो रही है कि वे अंतिम संस्कार और बाद के खर्चों से बचने के लिए ऐसा कर रहे हैं। लगातार मिल रहे तानों से परेशान होकर रामलोटन ने यह अनोखा कदम उठाया। उनका कहना है कि अगर लोग सोच रहे हैं कि वे खर्च से बच रहे हैं, तो वे जीते-जी अपनी तेरहवीं और बरसी कर देंगे। इस सोच के साथ उन्होंने कार्यक्रम रखने का फैसला किया। शोक संदेश वाले कार्ड में भी कार्यक्रम का जिक्र किया गया है, जिसे देखकर लोग पहले तो चौंक गए।
रामलोटन कुशवाहा पहले से ही अपने कार्यों के लिए इलाके में जाने जाते हैं। औषधीय पौधों और स्वदेशी फसलों के संरक्षण में उनका काम काफी चर्चित रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में उनकी सराहना कर चुके हैं। साल 2024 में उन्हें भोपाल में राज्य जैव विविधता सम्मान भी मिला था। गांव के लोग बताते हैं कि रामलोटन हमेशा सामाजिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखते हैं। फिलहाल, उनका यह कदम पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। कई इसे समाज की सोच पर सवाल उठाने वाला तरीका मान रहे हैं, वहीं कुछ इसे एक भावनात्मक विरोध के रूप में देख रहे हैं, जो देहदान जैसे फैसले को लेकर समाज में फैली गलत धारणाओं को उजागर करता है।
