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भोपाल में सीलिंग के खिलाफ व्यापारियों का प्रदर्शन, चक्काजाम
भोपाल (म.प्र.)
रोशनपुरा चौराहे पर करीब पौने दो घंटे सड़क पर बैठे व्यापारी, ब्यूटीशियन ने सड़क पर मेकअप कर जताया विरोध; आत्मदाह की चेतावनी
भोपाल में व्यावसायिक गतिविधियों पर हो रही सीलिंग कार्रवाई के विरोध में मंगलवार को व्यापारियों का गुस्सा सड़क पर दिखाई दिया। रोशनपुरा चौराहे पर बड़ी संख्या में व्यापारी जमा हुए और चक्काजाम कर दिया। करीब पौने दो घंटे तक चले प्रदर्शन के कारण इलाके में आवाजाही प्रभावित रही। व्यापारी सड़क पर बैठकर नारे लगाते रहे और कार्रवाई को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। प्रदर्शन में महिलाओं की भी अच्छी खासी मौजूदगी रही। विरोध का एक अलग तरीका उस समय देखने को मिला, जब एक ब्यूटीशियन ने सड़क पर ही मेकअप करके अपनी दुकान और रोजगार से जुड़े मुद्दे को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि शहर के कई रहवासी इलाकों में लंबे समय से दुकानें और दूसरे कारोबार चल रहे हैं। ऐसे में अचानक सीलिंग की कार्रवाई शुरू होने से सिर्फ दुकानदार ही नहीं, बल्कि वहां काम करने वाले कर्मचारी और उनके परिवार भी प्रभावित होंगे। व्यापारियों ने प्रशासन से कार्रवाई पर पुनर्विचार करने और वर्षों से चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर व्यावहारिक रास्ता निकालने की मांग रखी।
प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने सरकार के सामने अपनी कई मांगें भी रखीं। उनका कहना है कि भोपाल में मास्टर प्लान को जल्द लागू किया जाना चाहिए, ताकि जमीन के इस्तेमाल और कारोबार को लेकर स्थिति साफ हो सके। इसके साथ ही व्यापारियों ने मिक्स्ड लैंड यूज का प्रावधान लागू करने की मांग की। उनका तर्क है कि कई इलाकों में घर और कारोबार लंबे समय से साथ-साथ चल रहे हैं और इन्हें एक झटके में बंद करने से बड़ी संख्या में लोग प्रभावित होंगे। व्यापारियों ने गुजरात की तर्ज पर अनधिकृत विकास के नियमितीकरण के लिए कानून-2022 जैसा प्रावधान भोपाल में लागू करने की मांग भी उठाई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि वर्षों से संचालित कारोबार को हटाया जाता है तो छोटे दुकानदारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है। चक्काजाम के दौरान कुछ व्यापारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। महिलाएं भी सड़क पर बैठी रहीं और कार्रवाई के खिलाफ अपनी बात रखी। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है। कुछ व्यापारियों ने आत्मदाह जैसे गंभीर कदम उठाने की चेतावनी भी दी, जिसके बाद मौके पर मौजूद लोगों और प्रशासनिक अमले के बीच स्थिति को लेकर चिंता बढ़ी।
व्यापारियों के विरोध के बीच नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बयान भी सामने आया। उन्होंने कहा कि भोपाल के व्यापारियों के साथ बैठक की जाएगी और उनकी समस्याओं को सुना जाएगा। मंत्री के मुताबिक व्यापारियों की बात समझने के बाद ही आगे की स्थिति पर चर्चा होगी। वहीं प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि सीलिंग कार्रवाई को लेकर स्पष्ट समाधान चाहिए। रोशनपुरा चौराहे पर धरना और चक्काजाम काफी देर तक चला। सड़क पर बड़ी संख्या में लोगों के बैठने से यातायात प्रभावित हुआ और आसपास के रास्तों पर भी दबाव देखने को मिला। प्रदर्शन समाप्त करने से पहले व्यापारियों ने साफ किया कि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे दोबारा सड़क पर उतर सकते हैं। व्यापारियों की मुख्य चिंता उन दुकानों और कारोबार को लेकर है, जो रहवासी क्षेत्रों में लंबे समय से चल रहे हैं। उनका कहना है कि अचानक कार्रवाई होने से कारोबार बंद होने के साथ कर्मचारियों की आय भी प्रभावित होगी। प्रदर्शन के दौरान इसी मुद्दे को बार-बार उठाया गया और सरकार से जल्द बैठक कर रास्ता निकालने की मांग की गई।
भोपाल में सीलिंग के खिलाफ व्यापारियों का प्रदर्शन, चक्काजाम
भोपाल (म.प्र.)
भोपाल में व्यावसायिक गतिविधियों पर हो रही सीलिंग कार्रवाई के विरोध में मंगलवार को व्यापारियों का गुस्सा सड़क पर दिखाई दिया। रोशनपुरा चौराहे पर बड़ी संख्या में व्यापारी जमा हुए और चक्काजाम कर दिया। करीब पौने दो घंटे तक चले प्रदर्शन के कारण इलाके में आवाजाही प्रभावित रही। व्यापारी सड़क पर बैठकर नारे लगाते रहे और कार्रवाई को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। प्रदर्शन में महिलाओं की भी अच्छी खासी मौजूदगी रही। विरोध का एक अलग तरीका उस समय देखने को मिला, जब एक ब्यूटीशियन ने सड़क पर ही मेकअप करके अपनी दुकान और रोजगार से जुड़े मुद्दे को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि शहर के कई रहवासी इलाकों में लंबे समय से दुकानें और दूसरे कारोबार चल रहे हैं। ऐसे में अचानक सीलिंग की कार्रवाई शुरू होने से सिर्फ दुकानदार ही नहीं, बल्कि वहां काम करने वाले कर्मचारी और उनके परिवार भी प्रभावित होंगे। व्यापारियों ने प्रशासन से कार्रवाई पर पुनर्विचार करने और वर्षों से चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर व्यावहारिक रास्ता निकालने की मांग रखी।
प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने सरकार के सामने अपनी कई मांगें भी रखीं। उनका कहना है कि भोपाल में मास्टर प्लान को जल्द लागू किया जाना चाहिए, ताकि जमीन के इस्तेमाल और कारोबार को लेकर स्थिति साफ हो सके। इसके साथ ही व्यापारियों ने मिक्स्ड लैंड यूज का प्रावधान लागू करने की मांग की। उनका तर्क है कि कई इलाकों में घर और कारोबार लंबे समय से साथ-साथ चल रहे हैं और इन्हें एक झटके में बंद करने से बड़ी संख्या में लोग प्रभावित होंगे। व्यापारियों ने गुजरात की तर्ज पर अनधिकृत विकास के नियमितीकरण के लिए कानून-2022 जैसा प्रावधान भोपाल में लागू करने की मांग भी उठाई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि वर्षों से संचालित कारोबार को हटाया जाता है तो छोटे दुकानदारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है। चक्काजाम के दौरान कुछ व्यापारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। महिलाएं भी सड़क पर बैठी रहीं और कार्रवाई के खिलाफ अपनी बात रखी। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है। कुछ व्यापारियों ने आत्मदाह जैसे गंभीर कदम उठाने की चेतावनी भी दी, जिसके बाद मौके पर मौजूद लोगों और प्रशासनिक अमले के बीच स्थिति को लेकर चिंता बढ़ी।
व्यापारियों के विरोध के बीच नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बयान भी सामने आया। उन्होंने कहा कि भोपाल के व्यापारियों के साथ बैठक की जाएगी और उनकी समस्याओं को सुना जाएगा। मंत्री के मुताबिक व्यापारियों की बात समझने के बाद ही आगे की स्थिति पर चर्चा होगी। वहीं प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि सीलिंग कार्रवाई को लेकर स्पष्ट समाधान चाहिए। रोशनपुरा चौराहे पर धरना और चक्काजाम काफी देर तक चला। सड़क पर बड़ी संख्या में लोगों के बैठने से यातायात प्रभावित हुआ और आसपास के रास्तों पर भी दबाव देखने को मिला। प्रदर्शन समाप्त करने से पहले व्यापारियों ने साफ किया कि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे दोबारा सड़क पर उतर सकते हैं। व्यापारियों की मुख्य चिंता उन दुकानों और कारोबार को लेकर है, जो रहवासी क्षेत्रों में लंबे समय से चल रहे हैं। उनका कहना है कि अचानक कार्रवाई होने से कारोबार बंद होने के साथ कर्मचारियों की आय भी प्रभावित होगी। प्रदर्शन के दौरान इसी मुद्दे को बार-बार उठाया गया और सरकार से जल्द बैठक कर रास्ता निकालने की मांग की गई।
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