CM हेल्पलाइन में फर्जी शिकायतों का खेल, कुंवारे व्यक्ति की 20 साल की बेटी बताकर दर्ज कराया मामला

रीवा,(म.प्र.)

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रीवा के मऊगंज में 233 शिकायतों की जांच में बड़ा खुलासा, डायल-112 कर्मियों और पुलिसकर्मियों के नाम सामने आने से उठे सवाल

मध्यप्रदेश सरकार की सीएम हेल्पलाइन-181 आम नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए बनाई गई व्यवस्था है। लेकिन रीवा जिले के मऊगंज क्षेत्र से सामने आए एक मामले ने इस पूरी प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतों के रिकॉर्ड की जांच में ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे यह आशंका जताई जा रही है कि शिकायतों के निपटारे का प्रतिशत बढ़ाने और रैंकिंग सुधारने के लिए फर्जी शिकायतें दर्ज कर उनका समाधान भी दिखाया गया। जांच में सामने आया कि कुल 233 शिकायतें केवल 21 मोबाइल नंबरों से दर्ज की गई थीं। रिकॉर्ड का विश्लेषण करने पर कई शिकायतों में समान पैटर्न दिखाई दिया। कुछ मोबाइल नंबरों से कुछ ही मिनटों के अंतराल में लगातार कई शिकायतें दर्ज कराई गईं, जबकि कई मामलों में शिकायतकर्ताओं के नाम और शिकायतों की प्रकृति भी संदेह पैदा करने वाली मिली। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि कुछ शिकायतें वास्तविक घटनाओं से मेल नहीं खाती थीं।

सबसे चौंकाने वाला मामला अंकित चौरसिया नाम के व्यक्ति से जुड़ा सामने आया। सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर उनके नाम से दर्ज शिकायत में दावा किया गया था कि उनकी 20 वर्षीय बेटी अंशिका चौरसिया स्कूल जाने के बाद लापता हो गई है और पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं कर रही है। लेकिन जब संबंधित व्यक्ति तक पहुंचकर जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि उनकी अभी तक शादी ही नहीं हुई है। ऐसे में 20 वर्षीय बेटी होने का सवाल ही नहीं उठता। इस खुलासे ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया और रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया। इसी तरह अन्य कई शिकायतों में भी विसंगतियां सामने आईं। कुछ शिकायतों में पत्नी के लापता होने, बच्चों के गुम होने, पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं मिलने, चोरी, मारपीट और पुलिस कार्रवाई नहीं होने जैसे आरोप दर्ज किए गए थे। लेकिन जांच के दौरान कई शिकायतकर्ताओं के बारे में जो जानकारी सामने आई, वह शिकायतों के विवरण से मेल नहीं खाती थी। इससे यह संदेह और गहरा गया कि शिकायतें वास्तविक नागरिकों द्वारा नहीं बल्कि किसी संगठित तरीके से दर्ज की गई हो सकती हैं।

दस्तावेजों की पड़ताल में डायल-112 चालक प्रवेश चतुर्वेदी, डायल-112 कर्मचारी कृष्णा कुशवाहा और हवलदार विवेक यादव के नाम भी सामने आए हैं। हालांकि मामले के सामने आने के बाद संबंधित पक्षों ने सीधे तौर पर किसी भी अनियमितता से इनकार किया है, लेकिन रिकॉर्ड में दर्ज विवरण और उपलब्ध दस्तावेज कई सवाल खड़े कर रहे हैं। जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि शिकायतों के पैटर्न और दर्ज किए गए विवरणों की गहन जांच की आवश्यकता है। सीएम हेल्पलाइन जैसी व्यवस्था की सफलता उसकी विश्वसनीयता पर निर्भर करती है। यदि शिकायतें फर्जी तरीके से दर्ज की जाती हैं या उनके समाधान के आंकड़े कृत्रिम रूप से बढ़ाए जाते हैं, तो इसका सीधा असर वास्तविक शिकायतकर्ताओं पर पड़ता है। ऐसे मामलों में न केवल व्यवस्था की साख प्रभावित होती है, बल्कि आम नागरिकों का भरोसा भी कमजोर पड़ता है।

रिकॉर्ड की जांच में यह भी सामने आया कि कई शिकायतों में घटना का विवरण सामान्य प्रक्रिया के अनुरूप नहीं था। शिकायत दर्ज कराने के लिए आमतौर पर घटना की पूरी जानकारी, शिकायतकर्ता की पहचान और अन्य जरूरी विवरण देना होता है, लेकिन कई मामलों में यह जानकारी अधूरी या संदिग्ध पाई गई। कुछ शिकायतों में समान भाषा और एक जैसी शैली का इस्तेमाल भी देखने को मिला, जिससे संगठित तरीके से शिकायतें दर्ज किए जाने की आशंका बढ़ गई। मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक और पुलिस महकमे में भी हलचल बढ़ गई है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की गड़बड़ी या फर्जीवाड़ा साबित होता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले की जांच और दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया जारी है। मऊगंज से सामने आया यह मामला केवल एक जिले तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह की अनियमितताएं हो सकती हैं। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष यह तय करेंगे कि यह केवल कुछ फर्जी शिकायतों का मामला है या फिर शिकायत निवारण प्रणाली के भीतर किसी बड़े खेल का हिस्सा।

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18 Jun 2026 By Vaishnavi.J

CM हेल्पलाइन में फर्जी शिकायतों का खेल, कुंवारे व्यक्ति की 20 साल की बेटी बताकर दर्ज कराया मामला

रीवा,(म.प्र.)

मध्यप्रदेश सरकार की सीएम हेल्पलाइन-181 आम नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए बनाई गई व्यवस्था है। लेकिन रीवा जिले के मऊगंज क्षेत्र से सामने आए एक मामले ने इस पूरी प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतों के रिकॉर्ड की जांच में ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे यह आशंका जताई जा रही है कि शिकायतों के निपटारे का प्रतिशत बढ़ाने और रैंकिंग सुधारने के लिए फर्जी शिकायतें दर्ज कर उनका समाधान भी दिखाया गया। जांच में सामने आया कि कुल 233 शिकायतें केवल 21 मोबाइल नंबरों से दर्ज की गई थीं। रिकॉर्ड का विश्लेषण करने पर कई शिकायतों में समान पैटर्न दिखाई दिया। कुछ मोबाइल नंबरों से कुछ ही मिनटों के अंतराल में लगातार कई शिकायतें दर्ज कराई गईं, जबकि कई मामलों में शिकायतकर्ताओं के नाम और शिकायतों की प्रकृति भी संदेह पैदा करने वाली मिली। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि कुछ शिकायतें वास्तविक घटनाओं से मेल नहीं खाती थीं।

सबसे चौंकाने वाला मामला अंकित चौरसिया नाम के व्यक्ति से जुड़ा सामने आया। सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर उनके नाम से दर्ज शिकायत में दावा किया गया था कि उनकी 20 वर्षीय बेटी अंशिका चौरसिया स्कूल जाने के बाद लापता हो गई है और पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं कर रही है। लेकिन जब संबंधित व्यक्ति तक पहुंचकर जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि उनकी अभी तक शादी ही नहीं हुई है। ऐसे में 20 वर्षीय बेटी होने का सवाल ही नहीं उठता। इस खुलासे ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया और रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया। इसी तरह अन्य कई शिकायतों में भी विसंगतियां सामने आईं। कुछ शिकायतों में पत्नी के लापता होने, बच्चों के गुम होने, पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं मिलने, चोरी, मारपीट और पुलिस कार्रवाई नहीं होने जैसे आरोप दर्ज किए गए थे। लेकिन जांच के दौरान कई शिकायतकर्ताओं के बारे में जो जानकारी सामने आई, वह शिकायतों के विवरण से मेल नहीं खाती थी। इससे यह संदेह और गहरा गया कि शिकायतें वास्तविक नागरिकों द्वारा नहीं बल्कि किसी संगठित तरीके से दर्ज की गई हो सकती हैं।

दस्तावेजों की पड़ताल में डायल-112 चालक प्रवेश चतुर्वेदी, डायल-112 कर्मचारी कृष्णा कुशवाहा और हवलदार विवेक यादव के नाम भी सामने आए हैं। हालांकि मामले के सामने आने के बाद संबंधित पक्षों ने सीधे तौर पर किसी भी अनियमितता से इनकार किया है, लेकिन रिकॉर्ड में दर्ज विवरण और उपलब्ध दस्तावेज कई सवाल खड़े कर रहे हैं। जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि शिकायतों के पैटर्न और दर्ज किए गए विवरणों की गहन जांच की आवश्यकता है। सीएम हेल्पलाइन जैसी व्यवस्था की सफलता उसकी विश्वसनीयता पर निर्भर करती है। यदि शिकायतें फर्जी तरीके से दर्ज की जाती हैं या उनके समाधान के आंकड़े कृत्रिम रूप से बढ़ाए जाते हैं, तो इसका सीधा असर वास्तविक शिकायतकर्ताओं पर पड़ता है। ऐसे मामलों में न केवल व्यवस्था की साख प्रभावित होती है, बल्कि आम नागरिकों का भरोसा भी कमजोर पड़ता है।

रिकॉर्ड की जांच में यह भी सामने आया कि कई शिकायतों में घटना का विवरण सामान्य प्रक्रिया के अनुरूप नहीं था। शिकायत दर्ज कराने के लिए आमतौर पर घटना की पूरी जानकारी, शिकायतकर्ता की पहचान और अन्य जरूरी विवरण देना होता है, लेकिन कई मामलों में यह जानकारी अधूरी या संदिग्ध पाई गई। कुछ शिकायतों में समान भाषा और एक जैसी शैली का इस्तेमाल भी देखने को मिला, जिससे संगठित तरीके से शिकायतें दर्ज किए जाने की आशंका बढ़ गई। मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक और पुलिस महकमे में भी हलचल बढ़ गई है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की गड़बड़ी या फर्जीवाड़ा साबित होता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले की जांच और दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया जारी है। मऊगंज से सामने आया यह मामला केवल एक जिले तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह की अनियमितताएं हो सकती हैं। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष यह तय करेंगे कि यह केवल कुछ फर्जी शिकायतों का मामला है या फिर शिकायत निवारण प्रणाली के भीतर किसी बड़े खेल का हिस्सा।

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/a-case-was-lodged-against-the-cm-helpline-by-pretending/article-56291

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