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8 साल बाद विंध्य विकास प्राधिकरण में नई नियुक्तियां, संसाधनों के बिना विकास की बड़ी चुनौती
रीवा,(म.प्र.)
पूर्व विधायक पंचू लाल प्रजापति बने अध्यक्ष, 10 जिलों के विकास की जिम्मेदारी; कांग्रेस ने नियुक्तियों को बताया राजनीतिक डैमेज कंट्रोल
मध्य प्रदेश सरकार ने करीब आठ साल बाद विंध्य विकास प्राधिकरण को नई नेतृत्व टीम सौंपते हुए क्षेत्रीय विकास को लेकर एक नई शुरुआत का संकेत दिया है। सरकार ने पूर्व विधायक पंचू लाल प्रजापति को प्राधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त किया है, जबकि रीवा के डॉ. अजय सिंह और सतना के संजय तीर्थनी को उपाध्यक्ष बनाया गया है। लंबे समय से निष्क्रिय पड़े इस प्राधिकरण में हुई इन नियुक्तियों के बाद विंध्य क्षेत्र के विकास को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि नियुक्तियों के साथ ही कई सवाल भी सामने आए हैं, क्योंकि प्राधिकरण के पास फिलहाल न तो स्थायी कार्यालय है और न ही कोई अलग बजट निर्धारित किया गया है। विंध्य विकास प्राधिकरण का गठन क्षेत्र के समग्र और संतुलित विकास के उद्देश्य से किया गया था। इसके अंतर्गत रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, मैहर, मऊगंज और डिंडोरी जैसे दस जिले आते हैं। यह पूरा इलाका लंबे समय से विकास के कई मानकों पर प्रदेश के अन्य हिस्सों से पीछे माना जाता रहा है। सड़क, उद्योग, रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा और पर्यटन के क्षेत्र में अपेक्षित प्रगति नहीं होने की शिकायतें लगातार उठती रही हैं। ऐसे में सरकार की ओर से प्राधिकरण को फिर से सक्रिय करने का फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि नियुक्तियों के तुरंत बाद सबसे बड़ा सवाल संसाधनों को लेकर खड़ा हो गया है। प्राधिकरण के पास वर्तमान में अपना कोई स्थायी कार्यालय नहीं है। बताया जा रहा है कि पहले जिस भवन से इसका संचालन होता था, वहां अब आईटी पार्क का निर्माण कार्य चल रहा है। ऐसे में नए अध्यक्ष और उपाध्यक्षों के लिए अस्थायी व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही प्राधिकरण के लिए अलग से किसी बजट की घोषणा भी अब तक नहीं की गई है। जानकारों का कहना है कि बिना वित्तीय संसाधनों और प्रशासनिक ढांचे के विकास योजनाओं को जमीन पर उतारना आसान नहीं होगा। विंध्य क्षेत्र के लोग भी इस बात को लेकर उत्सुक हैं कि आखिर प्राधिकरण की भूमिका आने वाले समय में कितनी प्रभावी होगी। क्षेत्र में लंबे समय से रोजगार के अवसर बढ़ाने, औद्योगिक निवेश आकर्षित करने और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की मांग उठती रही है। कई परियोजनाएं कागजों में बनीं लेकिन उन्हें अपेक्षित गति नहीं मिल सकी। ऐसे में लोगों की उम्मीद है कि नई टीम केवल औपचारिक नियुक्तियों तक सीमित न रहकर वास्तविक विकास योजनाओं पर काम करेगी।
इधर, कांग्रेस ने इन नियुक्तियों को लेकर सरकार को घेरा है। रीवा जिला कांग्रेस अध्यक्ष इंजीनियर राजेंद्र शर्मा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार विकास की बजाय राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि जिन नेताओं को संगठन या सत्ता में स्थान नहीं मिल पाया, उन्हें समायोजित करने के लिए ऐसे पदों का उपयोग किया जा रहा है। कांग्रेस का दावा है कि यदि सरकार वास्तव में विंध्य क्षेत्र के विकास को लेकर गंभीर होती तो पहले कार्यालय, बजट और कार्ययोजना की स्पष्ट व्यवस्था करती। वहीं, प्राधिकरण के नव नियुक्त पदाधिकारियों ने इन आशंकाओं को खारिज किया है। उपाध्यक्ष डॉ. अजय सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री स्वयं विंध्य क्षेत्र के विकास को लेकर गंभीर हैं और जल्द ही कार्यालय तथा अन्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी। उन्होंने बताया कि फिलहाल रीवा के सिविल लाइन क्षेत्र में अस्थायी कार्यालय की व्यवस्था की जा रही है। आवश्यकता के अनुसार बजट भी उपलब्ध कराया जाएगा। अध्यक्ष पंचू लाल प्रजापति ने भी कहा कि विंध्य के लिए नई विकास कार्ययोजना तैयार की जाएगी और क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप प्राथमिकताएं तय होंगी।
विंध्य विकास प्राधिकरण का इतिहास भी क्षेत्रीय पहचान से जुड़ा रहा है। वर्ष 1948 में विंध्य प्रदेश एक अलग प्रशासनिक इकाई के रूप में अस्तित्व में था और उसकी राजधानी रीवा हुआ करती थी। बाद में राज्य पुनर्गठन के साथ यह क्षेत्र मध्य प्रदेश का हिस्सा बन गया। क्षेत्र के पिछड़ेपन को दूर करने और विकास को गति देने के उद्देश्य से 27 सितंबर 2008 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विंध्य विकास प्राधिकरण की स्थापना की थी। अजय प्रताप सिंह इसके पहले अध्यक्ष बने थे, जबकि वर्ष 2017 में सुभाष सिंह को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। पिछले आठ वर्षों से प्राधिकरण लगभग निष्क्रिय स्थिति में था और समय-समय पर इसके भविष्य को लेकर अटकलें भी लगती रहीं। कई बार इसके समाप्त किए जाने की चर्चाएं भी सामने आईं। अब नई नियुक्तियों के बाद एक बार फिर उम्मीदें जागी हैं। हालांकि असली परीक्षा आने वाले महीनों में होगी, जब यह देखा जाएगा कि प्राधिकरण केवल राजनीतिक नियुक्तियों तक सीमित रहता है या वास्तव में विंध्य क्षेत्र के विकास का प्रभावी माध्यम बन पाता है।
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8 साल बाद विंध्य विकास प्राधिकरण में नई नियुक्तियां, संसाधनों के बिना विकास की बड़ी चुनौती
रीवा,(म.प्र.)
मध्य प्रदेश सरकार ने करीब आठ साल बाद विंध्य विकास प्राधिकरण को नई नेतृत्व टीम सौंपते हुए क्षेत्रीय विकास को लेकर एक नई शुरुआत का संकेत दिया है। सरकार ने पूर्व विधायक पंचू लाल प्रजापति को प्राधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त किया है, जबकि रीवा के डॉ. अजय सिंह और सतना के संजय तीर्थनी को उपाध्यक्ष बनाया गया है। लंबे समय से निष्क्रिय पड़े इस प्राधिकरण में हुई इन नियुक्तियों के बाद विंध्य क्षेत्र के विकास को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि नियुक्तियों के साथ ही कई सवाल भी सामने आए हैं, क्योंकि प्राधिकरण के पास फिलहाल न तो स्थायी कार्यालय है और न ही कोई अलग बजट निर्धारित किया गया है। विंध्य विकास प्राधिकरण का गठन क्षेत्र के समग्र और संतुलित विकास के उद्देश्य से किया गया था। इसके अंतर्गत रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, मैहर, मऊगंज और डिंडोरी जैसे दस जिले आते हैं। यह पूरा इलाका लंबे समय से विकास के कई मानकों पर प्रदेश के अन्य हिस्सों से पीछे माना जाता रहा है। सड़क, उद्योग, रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा और पर्यटन के क्षेत्र में अपेक्षित प्रगति नहीं होने की शिकायतें लगातार उठती रही हैं। ऐसे में सरकार की ओर से प्राधिकरण को फिर से सक्रिय करने का फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि नियुक्तियों के तुरंत बाद सबसे बड़ा सवाल संसाधनों को लेकर खड़ा हो गया है। प्राधिकरण के पास वर्तमान में अपना कोई स्थायी कार्यालय नहीं है। बताया जा रहा है कि पहले जिस भवन से इसका संचालन होता था, वहां अब आईटी पार्क का निर्माण कार्य चल रहा है। ऐसे में नए अध्यक्ष और उपाध्यक्षों के लिए अस्थायी व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही प्राधिकरण के लिए अलग से किसी बजट की घोषणा भी अब तक नहीं की गई है। जानकारों का कहना है कि बिना वित्तीय संसाधनों और प्रशासनिक ढांचे के विकास योजनाओं को जमीन पर उतारना आसान नहीं होगा। विंध्य क्षेत्र के लोग भी इस बात को लेकर उत्सुक हैं कि आखिर प्राधिकरण की भूमिका आने वाले समय में कितनी प्रभावी होगी। क्षेत्र में लंबे समय से रोजगार के अवसर बढ़ाने, औद्योगिक निवेश आकर्षित करने और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की मांग उठती रही है। कई परियोजनाएं कागजों में बनीं लेकिन उन्हें अपेक्षित गति नहीं मिल सकी। ऐसे में लोगों की उम्मीद है कि नई टीम केवल औपचारिक नियुक्तियों तक सीमित न रहकर वास्तविक विकास योजनाओं पर काम करेगी।
इधर, कांग्रेस ने इन नियुक्तियों को लेकर सरकार को घेरा है। रीवा जिला कांग्रेस अध्यक्ष इंजीनियर राजेंद्र शर्मा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार विकास की बजाय राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि जिन नेताओं को संगठन या सत्ता में स्थान नहीं मिल पाया, उन्हें समायोजित करने के लिए ऐसे पदों का उपयोग किया जा रहा है। कांग्रेस का दावा है कि यदि सरकार वास्तव में विंध्य क्षेत्र के विकास को लेकर गंभीर होती तो पहले कार्यालय, बजट और कार्ययोजना की स्पष्ट व्यवस्था करती। वहीं, प्राधिकरण के नव नियुक्त पदाधिकारियों ने इन आशंकाओं को खारिज किया है। उपाध्यक्ष डॉ. अजय सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री स्वयं विंध्य क्षेत्र के विकास को लेकर गंभीर हैं और जल्द ही कार्यालय तथा अन्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी। उन्होंने बताया कि फिलहाल रीवा के सिविल लाइन क्षेत्र में अस्थायी कार्यालय की व्यवस्था की जा रही है। आवश्यकता के अनुसार बजट भी उपलब्ध कराया जाएगा। अध्यक्ष पंचू लाल प्रजापति ने भी कहा कि विंध्य के लिए नई विकास कार्ययोजना तैयार की जाएगी और क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप प्राथमिकताएं तय होंगी।
विंध्य विकास प्राधिकरण का इतिहास भी क्षेत्रीय पहचान से जुड़ा रहा है। वर्ष 1948 में विंध्य प्रदेश एक अलग प्रशासनिक इकाई के रूप में अस्तित्व में था और उसकी राजधानी रीवा हुआ करती थी। बाद में राज्य पुनर्गठन के साथ यह क्षेत्र मध्य प्रदेश का हिस्सा बन गया। क्षेत्र के पिछड़ेपन को दूर करने और विकास को गति देने के उद्देश्य से 27 सितंबर 2008 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विंध्य विकास प्राधिकरण की स्थापना की थी। अजय प्रताप सिंह इसके पहले अध्यक्ष बने थे, जबकि वर्ष 2017 में सुभाष सिंह को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। पिछले आठ वर्षों से प्राधिकरण लगभग निष्क्रिय स्थिति में था और समय-समय पर इसके भविष्य को लेकर अटकलें भी लगती रहीं। कई बार इसके समाप्त किए जाने की चर्चाएं भी सामने आईं। अब नई नियुक्तियों के बाद एक बार फिर उम्मीदें जागी हैं। हालांकि असली परीक्षा आने वाले महीनों में होगी, जब यह देखा जाएगा कि प्राधिकरण केवल राजनीतिक नियुक्तियों तक सीमित रहता है या वास्तव में विंध्य क्षेत्र के विकास का प्रभावी माध्यम बन पाता है।
