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वेनेजुएला में फिर भूकंप, 920 मौतें; राहत अभियान जारी
Digital Desk
4.9 तीव्रता के नए झटके से कराकास तक हिली धरती, हजारों बेघर और लापता, लोग खुद मलबे में तलाश रहे अपनों को
दक्षिण अमेरिकी देश Venezuela में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। 25 जून को आए दो बड़े भूकंपों के बाद शनिवार को एक और झटका दर्ज किया गया, जिसकी तीव्रता 4.9 रिक्टर मापी गई। यह भूकंप देश के उत्तरी तट के पास आया और इसके झटके राजधानी कराकास से लेकर माराके तक महसूस किए गए। रॉयटर्स के मुताबिक, लोग अचानक आए इस झटके से एक बार फिर दहशत में आ गए और कई इलाकों में पहले से जर्जर इमारतें और कमजोर हो गईं। जमीन लगातार कांप रही है और लोगों में डर का माहौल अभी भी खत्म नहीं हुआ है। पिछले भूकंपों के बाद जो तबाही सामने आई थी, वह अब और गंभीर रूप लेती दिख रही है। शुरुआती रिपोर्टों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 920 तक पहुंच चुकी है, जबकि 3360 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि करीब 51,700 लोग अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश में राहत टीमें लगातार जुटी हैं। अधिकारियों के अनुसार अब तक 243 लोगों को मलबे से जिंदा निकाला गया है, लेकिन जैसे-जैसे समय बीत रहा है, उम्मीदें कमजोर होती जा रही हैं। कई जगहों पर मलबा हटाने का काम धीमा है और संसाधनों की कमी साफ दिखाई दे रही है।
राजधानी कराकास और उत्तरी तटीय इलाकों में हालात सबसे ज्यादा खराब बताए जा रहे हैं। कई इमारतें पूरी तरह ढह चुकी हैं, जबकि कुछ इमारतें इतनी कमजोर हो गई हैं कि उनमें रहना खतरे से खाली नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी राहत टीमें हर जगह नहीं पहुंच पा रही हैं, जिसकी वजह से लोग खुद ही अपने परिजनों की तलाश में जुटे हैं। कई परिवार हाथों में हथौड़े, फावड़े और दूसरे औजार लेकर मलबा हटाने में लगे हैं। यह दृश्य बेहद दर्दनाक है, जहां लोग अपने अपनों को खोजने के लिए टूटी हुई इमारतों के बीच दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। कहीं उम्मीद दिखती है तो कहीं निराशा का सन्नाटा पसरा है। ला गुआइरा और आसपास के इलाकों से जो तस्वीरें सामने आई हैं, वे पूरी स्थिति को और भयावह बना देती हैं। कहीं मलबे के नीचे दबे शव दिखाई दे रहे हैं, तो कहीं लोग अपने पालतू जानवरों को बचाते हुए नजर आए। एक तस्वीर में एक व्यक्ति मलबे से कुत्ते को बाहर निकालते हुए दिखा, जो इस आपदा के बीच इंसानियत की एक छोटी सी झलक देता है। लेकिन दूसरी तरफ टूटे घरों और बिखरी हुई जिंदगी ने लोगों को पूरी तरह झकझोर दिया है। कई लोग अपने घरों के सामने खड़े होकर सिर्फ मलबे को देखते रह जाते हैं, जैसे अब कुछ बचा ही न हो।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है, लेकिन भूकंप प्रभावित इलाकों का दायरा इतना बड़ा है कि हर जगह तुरंत पहुंचना मुश्किल हो रहा है। कुछ जगहों पर संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई है, जिससे समन्वय में दिक्कतें आ रही हैं। लगातार आ रहे झटकों के कारण और भी इमारतें गिरने का खतरा बना हुआ है। लोगों को खुले स्थानों पर रहने की सलाह दी जा रही है, लेकिन बड़ी संख्या में विस्थापित लोग अस्थायी शिविरों में मुश्किल हालात में रह रहे हैं।राहत शिविरों में भीड़ बढ़ती जा रही है और खाने-पीने की चीजों की कमी महसूस की जा रही है। कई परिवार अपने घरों से सबकुछ खोकर सिर्फ एक-दूसरे को बचाने की कोशिश में लगे हैं। बच्चों और बुजुर्गों की हालत सबसे ज्यादा चिंताजनक बताई जा रही है। कई जगहों पर मेडिकल टीमों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे घायलों का इलाज समय पर नहीं हो पा रहा। मौसम और लगातार आफ्टरशॉक्स ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। लोग रातें खुले आसमान के नीचे बिता रहे हैं, और हर हल्की सी हलचल उन्हें फिर से डराने लगती है।
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वेनेजुएला में फिर भूकंप, 920 मौतें; राहत अभियान जारी
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दक्षिण अमेरिकी देश Venezuela में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। 25 जून को आए दो बड़े भूकंपों के बाद शनिवार को एक और झटका दर्ज किया गया, जिसकी तीव्रता 4.9 रिक्टर मापी गई। यह भूकंप देश के उत्तरी तट के पास आया और इसके झटके राजधानी कराकास से लेकर माराके तक महसूस किए गए। रॉयटर्स के मुताबिक, लोग अचानक आए इस झटके से एक बार फिर दहशत में आ गए और कई इलाकों में पहले से जर्जर इमारतें और कमजोर हो गईं। जमीन लगातार कांप रही है और लोगों में डर का माहौल अभी भी खत्म नहीं हुआ है। पिछले भूकंपों के बाद जो तबाही सामने आई थी, वह अब और गंभीर रूप लेती दिख रही है। शुरुआती रिपोर्टों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 920 तक पहुंच चुकी है, जबकि 3360 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि करीब 51,700 लोग अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश में राहत टीमें लगातार जुटी हैं। अधिकारियों के अनुसार अब तक 243 लोगों को मलबे से जिंदा निकाला गया है, लेकिन जैसे-जैसे समय बीत रहा है, उम्मीदें कमजोर होती जा रही हैं। कई जगहों पर मलबा हटाने का काम धीमा है और संसाधनों की कमी साफ दिखाई दे रही है।
राजधानी कराकास और उत्तरी तटीय इलाकों में हालात सबसे ज्यादा खराब बताए जा रहे हैं। कई इमारतें पूरी तरह ढह चुकी हैं, जबकि कुछ इमारतें इतनी कमजोर हो गई हैं कि उनमें रहना खतरे से खाली नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी राहत टीमें हर जगह नहीं पहुंच पा रही हैं, जिसकी वजह से लोग खुद ही अपने परिजनों की तलाश में जुटे हैं। कई परिवार हाथों में हथौड़े, फावड़े और दूसरे औजार लेकर मलबा हटाने में लगे हैं। यह दृश्य बेहद दर्दनाक है, जहां लोग अपने अपनों को खोजने के लिए टूटी हुई इमारतों के बीच दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। कहीं उम्मीद दिखती है तो कहीं निराशा का सन्नाटा पसरा है। ला गुआइरा और आसपास के इलाकों से जो तस्वीरें सामने आई हैं, वे पूरी स्थिति को और भयावह बना देती हैं। कहीं मलबे के नीचे दबे शव दिखाई दे रहे हैं, तो कहीं लोग अपने पालतू जानवरों को बचाते हुए नजर आए। एक तस्वीर में एक व्यक्ति मलबे से कुत्ते को बाहर निकालते हुए दिखा, जो इस आपदा के बीच इंसानियत की एक छोटी सी झलक देता है। लेकिन दूसरी तरफ टूटे घरों और बिखरी हुई जिंदगी ने लोगों को पूरी तरह झकझोर दिया है। कई लोग अपने घरों के सामने खड़े होकर सिर्फ मलबे को देखते रह जाते हैं, जैसे अब कुछ बचा ही न हो।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है, लेकिन भूकंप प्रभावित इलाकों का दायरा इतना बड़ा है कि हर जगह तुरंत पहुंचना मुश्किल हो रहा है। कुछ जगहों पर संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई है, जिससे समन्वय में दिक्कतें आ रही हैं। लगातार आ रहे झटकों के कारण और भी इमारतें गिरने का खतरा बना हुआ है। लोगों को खुले स्थानों पर रहने की सलाह दी जा रही है, लेकिन बड़ी संख्या में विस्थापित लोग अस्थायी शिविरों में मुश्किल हालात में रह रहे हैं।राहत शिविरों में भीड़ बढ़ती जा रही है और खाने-पीने की चीजों की कमी महसूस की जा रही है। कई परिवार अपने घरों से सबकुछ खोकर सिर्फ एक-दूसरे को बचाने की कोशिश में लगे हैं। बच्चों और बुजुर्गों की हालत सबसे ज्यादा चिंताजनक बताई जा रही है। कई जगहों पर मेडिकल टीमों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे घायलों का इलाज समय पर नहीं हो पा रहा। मौसम और लगातार आफ्टरशॉक्स ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। लोग रातें खुले आसमान के नीचे बिता रहे हैं, और हर हल्की सी हलचल उन्हें फिर से डराने लगती है।
