खामेनेई के अंतिम संस्कार में जुटे 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि, कई बड़े देशों ने नहीं भेजे शीर्ष नेता

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तेहरान में कड़ी सुरक्षा के बीच अंतिम विदाई की रस्में शुरू, ईरान के शीर्ष नेतृत्व ने दी श्रद्धांजलि, भारत सहित कई देशों ने मंत्री स्तर के प्रतिनिधिमंडल भेजे।

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने का सिलसिला तेहरान में शुरू हो गया है। राजधानी के इमाम खुमैनी ग्रैंड मुसल्ला में शनिवार सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग पहुंचने लगे। श्रद्धांजलि समारोह में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए नागरिकों के साथ विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की भी मौजूदगी रही। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, चीफ जस्टिस गुलाम-हुसैन मोहसेनी-एजेई, संसद के स्पीकर बाघेर गालिबाफ और सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री समारोह में शामिल हुए और खामेनेई को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक इस कार्यक्रम में 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि पहुंचे, लेकिन रूस, चीन, भारत और तुर्किये जैसे प्रभावशाली देशों ने अपने सर्वोच्च नेताओं को नहीं भेजा। इन देशों की ओर से मंत्री स्तर या अन्य वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बताया जा रहा है कि सुरक्षा कारणों से खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से समारोह में मौजूद नहीं रहे। इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी काफी चर्चा देखने को मिली। हालांकि ईरान की ओर से कई देशों के शीर्ष नेताओं को औपचारिक निमंत्रण भेजा गया था, लेकिन मौजूदा क्षेत्रीय हालात और सुरक्षा कारणों को देखते हुए अधिकांश देशों ने अपने प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया। भारत की ओर से विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बनकर श्रद्धांजलि दी। वहीं पाकिस्तान, इराक, आर्मेनिया, ताजिकिस्तान और जॉर्जिया के शीर्ष नेता स्वयं समारोह में शामिल हुए। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अलग-अलग देशों की मौजूदगी और प्रतिनिधित्व का स्तर मौजूदा कूटनीतिक समीकरणों को भी दर्शाता है।

श्रद्धांजलि समारोह के दौरान तेहरान में सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए। राजधानी की प्रमुख सड़कों, सरकारी भवनों और संवेदनशील इलाकों में सेना, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के जवान तैनात रहे। कई प्रमुख मार्गों पर सैन्य वाहनों की लगातार गश्त देखने को मिली। अधिकारियों के अनुसार समारोह में बड़ी भीड़ जुटने की संभावना को देखते हुए कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई थी। इमाम खुमैनी ग्रैंड मुसल्ला में प्रवेश करने वाले लोगों की अलग-अलग सुरक्षा जांच की गई और पूरे परिसर की निगरानी आधुनिक उपकरणों के जरिए की गई। आम लोगों की सुविधा के लिए सरकार ने राजधानी में मेट्रो और सरकारी बस सेवाओं को नि:शुल्क रखा। दूसरे शहरों से आने वाले लोगों के लिए विशेष ट्रेनें चलाई गईं, जबकि कई स्कूलों, मस्जिदों और सामुदायिक भवनों में अस्थायी ठहरने की व्यवस्था की गई। कुछ होटलों ने भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों के लिए किराए में विशेष छूट दी। प्रशासन का कहना है कि इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य दूर-दराज से आने वाले नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न होने देना था। सुबह से ही लोगों की लंबी कतारें दिखाई दीं और बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और युवा हाथों में खामेनेई की तस्वीरें लेकर श्रद्धांजलि देने पहुंचे। कई लोग लाल झंडे लिए भी नजर आए। समारोह के दौरान कुछ समूहों ने अमेरिका विरोधी नारे लगाए और क्षेत्रीय घटनाओं को लेकर अपनी नाराजगी भी जाहिर की। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे कार्यक्रम के दौरान हालात पर पूरी तरह नियंत्रण बनाए रखा और किसी अप्रिय घटना की सूचना सामने नहीं आई। कई महिलाओं को भावुक होकर रोते हुए भी देखा गया, जबकि लोगों ने शांतिपूर्वक अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की।

खामेनेई का ताबूत इमाम खुमैनी ग्रैंड मुसल्ला पहुंचने के बाद अंतिम श्रद्धांजलि की औपचारिक रस्में शुरू हुईं। अधिकारियों के अनुसार परिवार के सदस्यों ने भी उन्हें अंतिम विदाई दी। पूरे समारोह का सीधा प्रसारण देश के कई समाचार माध्यमों पर किया गया, जिसे बड़ी संख्या में लोगों ने देखा। समारोह में मौजूद नेताओं ने खामेनेई के लंबे सार्वजनिक जीवन और ईरान की राजनीति में उनकी भूमिका को याद किया। हालांकि कार्यक्रम के दौरान किसी प्रकार का औपचारिक राजनीतिक संबोधन नहीं हुआ, लेकिन कई वरिष्ठ नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें देश के महत्वपूर्ण नेताओं में से एक बताया। इस बीच दुनिया की नजर भी तेहरान पर बनी रही, क्योंकि खामेनेई के निधन के बाद ईरान की राजनीति, क्षेत्रीय रणनीति और भविष्य के नेतृत्व को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में ईरान की आंतरिक राजनीति और उसकी विदेश नीति को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले सामने आ सकते हैं। अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से जारी है और प्रशासन लगातार सुरक्षा व्यवस्था पर नजर बनाए हुए है। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बावजूद पूरे कार्यक्रम को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अंतिम संस्कार से जुड़े सभी कार्यक्रम तय कार्यक्रम के अनुसार पूरे किए जाएंगे। वहीं अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी ईरान में होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है, क्योंकि इसका असर पश्चिम एशिया के व्यापक क्षेत्रीय समीकरणों पर पड़ सकता है। 

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04 Jul 2026 By Vaishnavi.J

खामेनेई के अंतिम संस्कार में जुटे 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि, कई बड़े देशों ने नहीं भेजे शीर्ष नेता

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ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने का सिलसिला तेहरान में शुरू हो गया है। राजधानी के इमाम खुमैनी ग्रैंड मुसल्ला में शनिवार सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग पहुंचने लगे। श्रद्धांजलि समारोह में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए नागरिकों के साथ विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की भी मौजूदगी रही। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, चीफ जस्टिस गुलाम-हुसैन मोहसेनी-एजेई, संसद के स्पीकर बाघेर गालिबाफ और सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री समारोह में शामिल हुए और खामेनेई को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक इस कार्यक्रम में 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि पहुंचे, लेकिन रूस, चीन, भारत और तुर्किये जैसे प्रभावशाली देशों ने अपने सर्वोच्च नेताओं को नहीं भेजा। इन देशों की ओर से मंत्री स्तर या अन्य वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बताया जा रहा है कि सुरक्षा कारणों से खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से समारोह में मौजूद नहीं रहे। इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी काफी चर्चा देखने को मिली। हालांकि ईरान की ओर से कई देशों के शीर्ष नेताओं को औपचारिक निमंत्रण भेजा गया था, लेकिन मौजूदा क्षेत्रीय हालात और सुरक्षा कारणों को देखते हुए अधिकांश देशों ने अपने प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया। भारत की ओर से विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बनकर श्रद्धांजलि दी। वहीं पाकिस्तान, इराक, आर्मेनिया, ताजिकिस्तान और जॉर्जिया के शीर्ष नेता स्वयं समारोह में शामिल हुए। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अलग-अलग देशों की मौजूदगी और प्रतिनिधित्व का स्तर मौजूदा कूटनीतिक समीकरणों को भी दर्शाता है।

श्रद्धांजलि समारोह के दौरान तेहरान में सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए। राजधानी की प्रमुख सड़कों, सरकारी भवनों और संवेदनशील इलाकों में सेना, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के जवान तैनात रहे। कई प्रमुख मार्गों पर सैन्य वाहनों की लगातार गश्त देखने को मिली। अधिकारियों के अनुसार समारोह में बड़ी भीड़ जुटने की संभावना को देखते हुए कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई थी। इमाम खुमैनी ग्रैंड मुसल्ला में प्रवेश करने वाले लोगों की अलग-अलग सुरक्षा जांच की गई और पूरे परिसर की निगरानी आधुनिक उपकरणों के जरिए की गई। आम लोगों की सुविधा के लिए सरकार ने राजधानी में मेट्रो और सरकारी बस सेवाओं को नि:शुल्क रखा। दूसरे शहरों से आने वाले लोगों के लिए विशेष ट्रेनें चलाई गईं, जबकि कई स्कूलों, मस्जिदों और सामुदायिक भवनों में अस्थायी ठहरने की व्यवस्था की गई। कुछ होटलों ने भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों के लिए किराए में विशेष छूट दी। प्रशासन का कहना है कि इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य दूर-दराज से आने वाले नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न होने देना था। सुबह से ही लोगों की लंबी कतारें दिखाई दीं और बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और युवा हाथों में खामेनेई की तस्वीरें लेकर श्रद्धांजलि देने पहुंचे। कई लोग लाल झंडे लिए भी नजर आए। समारोह के दौरान कुछ समूहों ने अमेरिका विरोधी नारे लगाए और क्षेत्रीय घटनाओं को लेकर अपनी नाराजगी भी जाहिर की। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे कार्यक्रम के दौरान हालात पर पूरी तरह नियंत्रण बनाए रखा और किसी अप्रिय घटना की सूचना सामने नहीं आई। कई महिलाओं को भावुक होकर रोते हुए भी देखा गया, जबकि लोगों ने शांतिपूर्वक अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की।

खामेनेई का ताबूत इमाम खुमैनी ग्रैंड मुसल्ला पहुंचने के बाद अंतिम श्रद्धांजलि की औपचारिक रस्में शुरू हुईं। अधिकारियों के अनुसार परिवार के सदस्यों ने भी उन्हें अंतिम विदाई दी। पूरे समारोह का सीधा प्रसारण देश के कई समाचार माध्यमों पर किया गया, जिसे बड़ी संख्या में लोगों ने देखा। समारोह में मौजूद नेताओं ने खामेनेई के लंबे सार्वजनिक जीवन और ईरान की राजनीति में उनकी भूमिका को याद किया। हालांकि कार्यक्रम के दौरान किसी प्रकार का औपचारिक राजनीतिक संबोधन नहीं हुआ, लेकिन कई वरिष्ठ नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें देश के महत्वपूर्ण नेताओं में से एक बताया। इस बीच दुनिया की नजर भी तेहरान पर बनी रही, क्योंकि खामेनेई के निधन के बाद ईरान की राजनीति, क्षेत्रीय रणनीति और भविष्य के नेतृत्व को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में ईरान की आंतरिक राजनीति और उसकी विदेश नीति को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले सामने आ सकते हैं। अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से जारी है और प्रशासन लगातार सुरक्षा व्यवस्था पर नजर बनाए हुए है। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बावजूद पूरे कार्यक्रम को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अंतिम संस्कार से जुड़े सभी कार्यक्रम तय कार्यक्रम के अनुसार पूरे किए जाएंगे। वहीं अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी ईरान में होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है, क्योंकि इसका असर पश्चिम एशिया के व्यापक क्षेत्रीय समीकरणों पर पड़ सकता है। 

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