ईरान-अमेरिका की दूसरी वार्ता पर सस्पेंस, पाकिस्तान कर रहा मनाने की कोशिश

अंतर्राष्ट्रीय डेस्क

By Rohit.P
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ईरान-अमेरिका वार्ता अनिश्चित, पाकिस्तान मध्यस्थता में जुटा। नाकेबंदी हटाने की शर्त पर अड़ा ईरान, इस्लामाबाद बैठक पर संशय बरकरार।

अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित दूसरे दौर की शांति वार्ता पर सस्पेंस बना हुआ है, जबकि पाकिस्तान दोनों पक्षों के बीच संवाद बहाल कराने के प्रयास तेज कर रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने रविवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से फोन पर बातचीत कर क्षेत्रीय हालात और संभावित वार्ता पर चर्चा की। करीब 45 मिनट चली इस बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव पर भी विस्तार से विचार हुआ। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उनका प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंचकर बातचीत करेगा, लेकिन ईरान ने इस पर अब तक सहमति नहीं दी है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, शहबाज शरीफ ने इस बातचीत के दौरान सऊदी अरब, कतर और तुर्किये के नेताओं के साथ हालिया संवाद की जानकारी भी साझा की। दोनों नेताओं ने क्षेत्र में शांति बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। हालांकि, ईरान की सरकारी एजेंसी ने इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता को लेकर चल रही खबरों को खारिज कर दिया है, जिससे स्थिति और अस्पष्ट हो गई है।

ईरान की शर्त

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह तभी वार्ता में शामिल होगा जब अमेरिका उसके बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा। अधिकारियों के अनुसार, यह शर्त ईरान की सुरक्षा और आर्थिक हितों से जुड़ी हुई है। ईरान को आशंका है कि बिना ठोस भरोसे के बातचीत में शामिल होना उसके लिए नुकसानदेह हो सकता है।

सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय और शीर्ष नेतृत्व लगातार ईरान को मनाने की कोशिश कर रहे हैं। इस मुद्दे पर ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की बैठक भी हो चुकी है, जिसमें वार्ता की शर्तों और संभावित जोखिमों पर चर्चा की गई।

पृष्ठभूमि और गतिरोध

इससे पहले 11 और 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच पहली बार सीधी बातचीत हुई थी। हालांकि, उस दौर में कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया था। इसके बाद से ही दूसरे दौर की वार्ता को लेकर उम्मीद और अनिश्चितता दोनों बनी हुई हैं।

ईरान को यह भी संदेह है कि बातचीत के बाद भी उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंध नहीं हटाए जाएंगे। साथ ही, पहले के अनुभवों को देखते हुए उसे यह डर भी है कि वार्ता के बावजूद तनाव बढ़ सकता है। यही कारण है कि तेहरान इस बार ज्यादा सतर्क रुख अपना रहा है।

असर और आगे की स्थिति

विश्लेषकों के अनुसार, यदि यह वार्ता सफल होती है तो मध्य पूर्व में तनाव कम हो सकता है और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। वहीं, बातचीत में देरी या विफलता क्षेत्रीय अस्थिरता को और बढ़ा सकती है।

फिलहाल 22 अप्रैल को समाप्त होने वाले दो सप्ताह के युद्धविराम को लेकर भी स्थिति अनिश्चित बनी हुई है। पाकिस्तान इस युद्धविराम को आगे बढ़ाने और वार्ता को सफल बनाने के लिए सक्रिय कूटनीतिक प्रयास कर रहा है।

आगे की स्थिति काफी हद तक ईरान के रुख और अमेरिका की ओर से संभावित रियायतों पर निर्भर करेगी। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता वास्तव में हो पाएगी या नहीं।

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20 Apr 2026 By Rohit.P

ईरान-अमेरिका की दूसरी वार्ता पर सस्पेंस, पाकिस्तान कर रहा मनाने की कोशिश

अंतर्राष्ट्रीय डेस्क

अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित दूसरे दौर की शांति वार्ता पर सस्पेंस बना हुआ है, जबकि पाकिस्तान दोनों पक्षों के बीच संवाद बहाल कराने के प्रयास तेज कर रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने रविवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से फोन पर बातचीत कर क्षेत्रीय हालात और संभावित वार्ता पर चर्चा की। करीब 45 मिनट चली इस बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव पर भी विस्तार से विचार हुआ। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उनका प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंचकर बातचीत करेगा, लेकिन ईरान ने इस पर अब तक सहमति नहीं दी है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, शहबाज शरीफ ने इस बातचीत के दौरान सऊदी अरब, कतर और तुर्किये के नेताओं के साथ हालिया संवाद की जानकारी भी साझा की। दोनों नेताओं ने क्षेत्र में शांति बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। हालांकि, ईरान की सरकारी एजेंसी ने इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता को लेकर चल रही खबरों को खारिज कर दिया है, जिससे स्थिति और अस्पष्ट हो गई है।

ईरान की शर्त

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह तभी वार्ता में शामिल होगा जब अमेरिका उसके बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा। अधिकारियों के अनुसार, यह शर्त ईरान की सुरक्षा और आर्थिक हितों से जुड़ी हुई है। ईरान को आशंका है कि बिना ठोस भरोसे के बातचीत में शामिल होना उसके लिए नुकसानदेह हो सकता है।

सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय और शीर्ष नेतृत्व लगातार ईरान को मनाने की कोशिश कर रहे हैं। इस मुद्दे पर ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की बैठक भी हो चुकी है, जिसमें वार्ता की शर्तों और संभावित जोखिमों पर चर्चा की गई।

पृष्ठभूमि और गतिरोध

इससे पहले 11 और 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच पहली बार सीधी बातचीत हुई थी। हालांकि, उस दौर में कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया था। इसके बाद से ही दूसरे दौर की वार्ता को लेकर उम्मीद और अनिश्चितता दोनों बनी हुई हैं।

ईरान को यह भी संदेह है कि बातचीत के बाद भी उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंध नहीं हटाए जाएंगे। साथ ही, पहले के अनुभवों को देखते हुए उसे यह डर भी है कि वार्ता के बावजूद तनाव बढ़ सकता है। यही कारण है कि तेहरान इस बार ज्यादा सतर्क रुख अपना रहा है।

असर और आगे की स्थिति

विश्लेषकों के अनुसार, यदि यह वार्ता सफल होती है तो मध्य पूर्व में तनाव कम हो सकता है और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। वहीं, बातचीत में देरी या विफलता क्षेत्रीय अस्थिरता को और बढ़ा सकती है।

फिलहाल 22 अप्रैल को समाप्त होने वाले दो सप्ताह के युद्धविराम को लेकर भी स्थिति अनिश्चित बनी हुई है। पाकिस्तान इस युद्धविराम को आगे बढ़ाने और वार्ता को सफल बनाने के लिए सक्रिय कूटनीतिक प्रयास कर रहा है।

आगे की स्थिति काफी हद तक ईरान के रुख और अमेरिका की ओर से संभावित रियायतों पर निर्भर करेगी। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता वास्तव में हो पाएगी या नहीं।

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