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कोरबा में धमाके से फटा राखड़ बांध, जेसीबी ऑपरेटर की हुई मौत
कोरबा (छ.ग.)
कोरबा राखड़ बांध हादसे में जेसीबी ऑपरेटर की मौत, जहरीली राख हसदेव नदी में पहुंची, पेयजल संकट गहराया, जांच जारी
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में रविवार दोपहर बड़ा औद्योगिक हादसा सामने आया, जब एचटीपीएस (छत्तीसगढ़ राज्य बिजली उत्पादन कंपनी) का राखड़ बांध अचानक फट गया। इस घटना में 21 वर्षीय जेसीबी ऑपरेटर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि भारी मात्रा में जहरीली राख और पानी का मिश्रण आसपास के इलाकों और हसदेव नदी में फैल गया। अधिकारियों के अनुसार, हादसा दोपहर करीब 12 बजे लोतलोता गांव के पास हुआ, जहां राखड़ डंपिंग का काम चल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बांध के एक हिस्से पर अचानक दबाव बढ़ा और लगभग 30 मीटर का तटबंध तेज धमाके के साथ टूट गया, जिससे 150 फीट ऊंचाई से स्लरी का तेज बहाव नीचे गिरा।
हादसे के दौरान मौके पर काम कर रही मशीनें भी इस तेज बहाव में बह गईं। जेसीबी ऑपरेटर हुलेश्वर कश्यप मलबे में दब गए और उनकी मौत हो गई, जबकि एक अन्य पोकलेन ऑपरेटर ने किसी तरह खुद को बचा लिया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
गांवों पर असर
राखड़ बांध फटने के बाद बड़ी मात्रा में राख सीधे हसदेव नदी में पहुंच गई। इससे नदी के पानी की गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ा है। नदी किनारे बसे गांवों में पेयजल संकट की आशंका बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यह लापरवाही सीधे उनके जीवन और स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि बांध के रखरखाव में पहले से ही खामियां थीं, जिनकी अनदेखी की गई। पर्यावरणीय नुकसान को लेकर भी चिंता जताई जा रही है, क्योंकि जहरीली राख जलीय जीवों के लिए खतरा बन सकती है।
मुआवजे पर विवाद
हादसे के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और कंपनी प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। आक्रोशित लोगों ने शव को उठाने से इनकार कर दिया और मुआवजे की मांग पर अड़ गए। करीब पांच घंटे तक चले इस विवाद के बाद प्रशासन के हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ।
प्रबंधन ने मृतक के परिजनों को तत्काल 5 लाख रुपये की सहायता, कानूनी प्रक्रिया के बाद 18 लाख रुपये अतिरिक्त मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का आश्वासन दिया। इसके बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
पृष्ठभूमि और सवाल
कोरबा क्षेत्र में औद्योगिक हादसों का यह पहला मामला नहीं है। हाल ही में वेदांता पावर प्लांट से जुड़ी घटना भी चर्चा में रही थी। लगातार हो रही घटनाओं ने औद्योगिक सुरक्षा मानकों और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, राखड़ बांधों के रखरखाव और निगरानी में कई बार लापरवाही सामने आती रही है, लेकिन समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं भविष्य में बड़े पर्यावरणीय संकट का कारण बन सकती हैं।
आधिकारिक बयान और जांच
बिजली उत्पादन कंपनी के मुख्य अभियंता देवेन्द्र नाथ ने बताया कि घटना के समय बांध पर स्टैंडिंग का काम चल रहा था और वह स्वयं निरीक्षण के लिए मौके पर मौजूद थे। उन्होंने कहा कि हादसे की जांच के आदेश दे दिए गए हैं और कारणों का पता लगाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में दबाव बढ़ने और संरचनात्मक कमजोरी को संभावित कारण माना जा रहा है, हालांकि विस्तृत रिपोर्ट के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
आगे क्या
प्रशासन ने प्रभावित इलाके का सर्वे शुरू कर दिया है और जल गुणवत्ता की जांच कराई जा रही है। साथ ही, आसपास के गांवों में वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। इस कोरबा राखड़ बांध हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को लेकर सख्त निगरानी की जरूरत को उजागर किया है।
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कोरबा में धमाके से फटा राखड़ बांध, जेसीबी ऑपरेटर की हुई मौत
कोरबा (छ.ग.)
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में रविवार दोपहर बड़ा औद्योगिक हादसा सामने आया, जब एचटीपीएस (छत्तीसगढ़ राज्य बिजली उत्पादन कंपनी) का राखड़ बांध अचानक फट गया। इस घटना में 21 वर्षीय जेसीबी ऑपरेटर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि भारी मात्रा में जहरीली राख और पानी का मिश्रण आसपास के इलाकों और हसदेव नदी में फैल गया। अधिकारियों के अनुसार, हादसा दोपहर करीब 12 बजे लोतलोता गांव के पास हुआ, जहां राखड़ डंपिंग का काम चल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बांध के एक हिस्से पर अचानक दबाव बढ़ा और लगभग 30 मीटर का तटबंध तेज धमाके के साथ टूट गया, जिससे 150 फीट ऊंचाई से स्लरी का तेज बहाव नीचे गिरा।
हादसे के दौरान मौके पर काम कर रही मशीनें भी इस तेज बहाव में बह गईं। जेसीबी ऑपरेटर हुलेश्वर कश्यप मलबे में दब गए और उनकी मौत हो गई, जबकि एक अन्य पोकलेन ऑपरेटर ने किसी तरह खुद को बचा लिया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
गांवों पर असर
राखड़ बांध फटने के बाद बड़ी मात्रा में राख सीधे हसदेव नदी में पहुंच गई। इससे नदी के पानी की गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ा है। नदी किनारे बसे गांवों में पेयजल संकट की आशंका बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यह लापरवाही सीधे उनके जीवन और स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि बांध के रखरखाव में पहले से ही खामियां थीं, जिनकी अनदेखी की गई। पर्यावरणीय नुकसान को लेकर भी चिंता जताई जा रही है, क्योंकि जहरीली राख जलीय जीवों के लिए खतरा बन सकती है।
मुआवजे पर विवाद
हादसे के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और कंपनी प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। आक्रोशित लोगों ने शव को उठाने से इनकार कर दिया और मुआवजे की मांग पर अड़ गए। करीब पांच घंटे तक चले इस विवाद के बाद प्रशासन के हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ।
प्रबंधन ने मृतक के परिजनों को तत्काल 5 लाख रुपये की सहायता, कानूनी प्रक्रिया के बाद 18 लाख रुपये अतिरिक्त मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का आश्वासन दिया। इसके बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
पृष्ठभूमि और सवाल
कोरबा क्षेत्र में औद्योगिक हादसों का यह पहला मामला नहीं है। हाल ही में वेदांता पावर प्लांट से जुड़ी घटना भी चर्चा में रही थी। लगातार हो रही घटनाओं ने औद्योगिक सुरक्षा मानकों और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, राखड़ बांधों के रखरखाव और निगरानी में कई बार लापरवाही सामने आती रही है, लेकिन समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं भविष्य में बड़े पर्यावरणीय संकट का कारण बन सकती हैं।
आधिकारिक बयान और जांच
बिजली उत्पादन कंपनी के मुख्य अभियंता देवेन्द्र नाथ ने बताया कि घटना के समय बांध पर स्टैंडिंग का काम चल रहा था और वह स्वयं निरीक्षण के लिए मौके पर मौजूद थे। उन्होंने कहा कि हादसे की जांच के आदेश दे दिए गए हैं और कारणों का पता लगाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में दबाव बढ़ने और संरचनात्मक कमजोरी को संभावित कारण माना जा रहा है, हालांकि विस्तृत रिपोर्ट के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
आगे क्या
प्रशासन ने प्रभावित इलाके का सर्वे शुरू कर दिया है और जल गुणवत्ता की जांच कराई जा रही है। साथ ही, आसपास के गांवों में वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। इस कोरबा राखड़ बांध हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को लेकर सख्त निगरानी की जरूरत को उजागर किया है।
