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भारत-जापान संबंधों को नई मजबूती, पीएम मोदी और साने ताकाइची के बीच छह अहम करार
Digital Desk
भारत दौरे पर आईं जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच उच्चस्तरीय वार्ता में छह महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बनी। दोनों देशों ने निवेश, विनिर्माण, तकनीक और आर्थिक सहयोग को नई गति देने का संकल्प दोहराया।
भारत और जापान ने द्विपक्षीय आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। तीन दिवसीय आधिकारिक भारत यात्रा पर आईं जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की। इस दौरान दोनों नेताओं ने आर्थिक सहयोग, निवेश, औद्योगिक विकास, तकनीक और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े छह महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति जताई। दोनों देशों ने अगले दस वर्षों में भारत में 10 ट्रिलियन येन के जापानी निवेश का महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी तय किया। नई दिल्ली में आयोजित भारत-जापान संयुक्त आर्थिक मंच (इंडिया-जापान जॉइंट इकोनॉमिक फोरम) को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापानी कंपनियों के लिए भारत में निवेश का वातावरण और अधिक अनुकूल बनाने का भरोसा दिया। उन्होंने घोषणा की कि केंद्र सरकार 'जापान बिजनेस वीक' की शुरुआत करेगी। इस पहल के तहत प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के वरिष्ठ अधिकारी सीधे जापानी निवेशकों और उद्योग प्रतिनिधियों से संवाद करेंगे, ताकि निवेश से जुड़ी प्रशासनिक और नीतिगत चुनौतियों का समयबद्ध समाधान किया जा सके। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और जापान के बीच आर्थिक सहयोग लगातार मजबूत हुआ है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण ऑटोमोबाइल क्षेत्र में देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया भर में बिकने वाली सुजुकी की लगभग दो-तिहाई कारें भारत में निर्मित हो रही हैं। भारत में बनी ये कारें 100 से अधिक देशों में निर्यात की जा रही हैं, जो भारतीय विनिर्माण क्षमता और दोनों देशों की औद्योगिक साझेदारी की सफलता को दर्शाती हैं।
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अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची को आत्मीय अंदाज में अपनी "छोटी बहन" कहकर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध केवल कूटनीतिक या आर्थिक नहीं हैं, बल्कि विश्वास, साझा मूल्यों और दीर्घकालिक मित्रता पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि भारत की उत्पादन क्षमता, जापान की उन्नत तकनीक और दोनों देशों के निवेश का संयोजन वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी लाभदायक साबित होगा। जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने भी भारत को जापान का भरोसेमंद और रणनीतिक साझेदार बताते हुए दोनों देशों के बीच सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि जापान भारत के कृषि और उर्वरक क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर सहयोग बढ़ाने की योजना बना रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि जापानी सहयोग से भारत में लगभग एक हजार खाद (फर्टिलाइजर) कारखाने स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। उनका कहना था कि इससे कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। द्विपक्षीय वार्ता के बाद प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री ताकाइची ने हरियाणा के खरखौदा में मारुति सुजुकी के चौथे वाहन निर्माण संयंत्र का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। करीब 35 हजार करोड़ रुपये की लागत से विकसित यह अत्याधुनिक संयंत्र भारत के ऑटोमोबाइल क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस परियोजना से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। साथ ही भारत को वैश्विक ऑटोमोबाइल विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी यह परियोजना अहम भूमिका निभाएगी।

दोनों नेताओं ने भारत-जापान औद्योगिक सहयोग को और मजबूत बनाने पर भी सहमति व्यक्त की। चर्चा के दौरान सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा, डिजिटल प्रौद्योगिकी, आपूर्ति श्रृंखला, कौशल विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नवाचार जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। दोनों देशों ने वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। भारत और जापान के बीच पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हुई है। दोनों देश बुनियादी ढांचा विकास, हाई-स्पीड रेल, मेट्रो परियोजनाओं, रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भी मिलकर काम कर रहे हैं। मौजूदा बैठक में इन क्षेत्रों में सहयोग को और विस्तार देने पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ताकाइची की यह भारत यात्रा कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह उनका पहला आधिकारिक भारत दौरा है। बुधवार को नई दिल्ली पहुंचने पर उनका औपचारिक स्वागत किया गया। राष्ट्रपति भवन में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हैदराबाद हाउस में प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया तथा मुक्त, समावेशी और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
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भारत-जापान संबंधों को नई मजबूती, पीएम मोदी और साने ताकाइची के बीच छह अहम करार
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भारत और जापान ने द्विपक्षीय आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। तीन दिवसीय आधिकारिक भारत यात्रा पर आईं जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की। इस दौरान दोनों नेताओं ने आर्थिक सहयोग, निवेश, औद्योगिक विकास, तकनीक और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े छह महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति जताई। दोनों देशों ने अगले दस वर्षों में भारत में 10 ट्रिलियन येन के जापानी निवेश का महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी तय किया। नई दिल्ली में आयोजित भारत-जापान संयुक्त आर्थिक मंच (इंडिया-जापान जॉइंट इकोनॉमिक फोरम) को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापानी कंपनियों के लिए भारत में निवेश का वातावरण और अधिक अनुकूल बनाने का भरोसा दिया। उन्होंने घोषणा की कि केंद्र सरकार 'जापान बिजनेस वीक' की शुरुआत करेगी। इस पहल के तहत प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के वरिष्ठ अधिकारी सीधे जापानी निवेशकों और उद्योग प्रतिनिधियों से संवाद करेंगे, ताकि निवेश से जुड़ी प्रशासनिक और नीतिगत चुनौतियों का समयबद्ध समाधान किया जा सके। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और जापान के बीच आर्थिक सहयोग लगातार मजबूत हुआ है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण ऑटोमोबाइल क्षेत्र में देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया भर में बिकने वाली सुजुकी की लगभग दो-तिहाई कारें भारत में निर्मित हो रही हैं। भारत में बनी ये कारें 100 से अधिक देशों में निर्यात की जा रही हैं, जो भारतीय विनिर्माण क्षमता और दोनों देशों की औद्योगिक साझेदारी की सफलता को दर्शाती हैं।
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अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची को आत्मीय अंदाज में अपनी "छोटी बहन" कहकर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध केवल कूटनीतिक या आर्थिक नहीं हैं, बल्कि विश्वास, साझा मूल्यों और दीर्घकालिक मित्रता पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि भारत की उत्पादन क्षमता, जापान की उन्नत तकनीक और दोनों देशों के निवेश का संयोजन वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी लाभदायक साबित होगा। जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने भी भारत को जापान का भरोसेमंद और रणनीतिक साझेदार बताते हुए दोनों देशों के बीच सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि जापान भारत के कृषि और उर्वरक क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर सहयोग बढ़ाने की योजना बना रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि जापानी सहयोग से भारत में लगभग एक हजार खाद (फर्टिलाइजर) कारखाने स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। उनका कहना था कि इससे कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। द्विपक्षीय वार्ता के बाद प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री ताकाइची ने हरियाणा के खरखौदा में मारुति सुजुकी के चौथे वाहन निर्माण संयंत्र का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। करीब 35 हजार करोड़ रुपये की लागत से विकसित यह अत्याधुनिक संयंत्र भारत के ऑटोमोबाइल क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस परियोजना से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। साथ ही भारत को वैश्विक ऑटोमोबाइल विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी यह परियोजना अहम भूमिका निभाएगी।

दोनों नेताओं ने भारत-जापान औद्योगिक सहयोग को और मजबूत बनाने पर भी सहमति व्यक्त की। चर्चा के दौरान सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा, डिजिटल प्रौद्योगिकी, आपूर्ति श्रृंखला, कौशल विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नवाचार जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। दोनों देशों ने वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। भारत और जापान के बीच पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हुई है। दोनों देश बुनियादी ढांचा विकास, हाई-स्पीड रेल, मेट्रो परियोजनाओं, रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भी मिलकर काम कर रहे हैं। मौजूदा बैठक में इन क्षेत्रों में सहयोग को और विस्तार देने पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ताकाइची की यह भारत यात्रा कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह उनका पहला आधिकारिक भारत दौरा है। बुधवार को नई दिल्ली पहुंचने पर उनका औपचारिक स्वागत किया गया। राष्ट्रपति भवन में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हैदराबाद हाउस में प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया तथा मुक्त, समावेशी और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
