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72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स: ‘आर्टिकल 370’ बनी बेस्ट फीचर फिल्म, कार्तिक आर्यन-ममूटी बेस्ट एक्टर; यामी गौतम को बेस्ट एक्ट्रेस का सम्मान
बालीवुड न्यूज़
यामी और कार्तिक को पहला नेशनल अवॉर्ड, ‘श्रीकांत’ बनी बेस्ट हिंदी फिल्म; रणदीप हुड्डा को निर्देशन के लिए सम्मान
भारतीय सिनेमा के प्रतिष्ठित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का ऐलान हो गया है। साल 2024 में रिलीज हुई फिल्मों के लिए घोषित पुरस्कारों में हिंदी सिनेमा का प्रदर्शन खास रहा। यामी गौतम स्टारर राजनीतिक एक्शन-ड्रामा फिल्म ‘आर्टिकल 370’ को बेस्ट फीचर फिल्म चुना गया है। वहीं अभिनय श्रेणी में यामी गौतम को बेस्ट एक्ट्रेस का सम्मान मिला। पुरुष कलाकारों में ‘चंदू चैंपियन’ के लिए कार्तिक आर्यन और मलयालम फिल्म ‘ब्रमायुगम’ के लिए ममूटी को संयुक्त रूप से बेस्ट एक्टर चुना गया। राजकुमार राव की बायोग्राफिकल ड्रामा ‘श्रीकांत’ को बेस्ट हिंदी फिल्म का पुरस्कार मिला है।
‘आर्टिकल 370’ में यामी गौतम ने इंटेलिजेंस और सुरक्षा से जुड़े मिशन पर काम करने वाली अधिकारी जूनी हक्सर का किरदार निभाया था। फिल्म की कहानी जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 से जुड़े घटनाक्रम की पृष्ठभूमि पर आधारित थी। यामी के किरदार को एक्शन, राजनीतिक घटनाक्रम और भावनात्मक परिस्थितियों के बीच दिखाया गया था। इस भूमिका के लिए उन्हें लीडिंग रोल में बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड मिला है। यह यामी गौतम के फिल्मी करियर का पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार है।
आदित्य सुहास जांभले के निर्देशन में बनी ‘आर्टिकल 370’ ने रिलीज के समय भी काफी चर्चा बटोरी थी। सीमित बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया। उपलब्ध बॉक्स ऑफिस अनुमानों के मुताबिक, करीब 20 करोड़ रुपए के बजट वाली फिल्म ने दुनियाभर में 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का कारोबार किया था। फिल्म में यामी गौतम के अलावा प्रियामणि सहित कई कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आए थे।
फिल्म के निर्देशक आदित्य सुहास जांभले के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार नया नहीं है। इससे पहले भी उनकी फिल्मों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिल चुका है। उनकी शॉर्ट फिल्म ‘आबा ऐकताय ना?’ को 2016 में नॉन-फीचर श्रेणी में निर्देशन के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। इसके बाद ‘खारवस’ को 2019 में बेस्ट शॉर्ट फिक्शन फिल्म का सम्मान मिला। अब ‘आर्टिकल 370’ के बेस्ट फीचर फिल्म चुने जाने से उनके करियर में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है।
बेस्ट एक्टर की श्रेणी में इस बार दो कलाकारों ने बाजी मारी है। कार्तिक आर्यन और दिग्गज अभिनेता ममूटी को संयुक्त रूप से सर्वश्रेष्ठ अभिनेता चुना गया। कार्तिक को कबीर खान के निर्देशन में बनी ‘चंदू चैंपियन’ में उनके अभिनय के लिए यह सम्मान मिला है। फिल्म में उन्होंने भारत के पहले पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता मुरलीकांत पेटकर की भूमिका निभाई थी। किरदार के लिए कार्तिक ने अपने शारीरिक रूप में बड़ा बदलाव किया था और एथलीट की जिंदगी के अलग-अलग दौर को पर्दे पर उतारा था।
कार्तिक आर्यन के करियर का यह पहला नेशनल फिल्म अवॉर्ड है। रोमांटिक कॉमेडी और कमर्शियल फिल्मों से पहचान बनाने वाले कार्तिक के लिए ‘चंदू चैंपियन’ उनके करियर की अलग तरह की फिल्म रही। इसमें उन्हें एक युवा सैनिक से लेकर बॉक्सर और फिर पैरालंपिक खिलाड़ी तक की यात्रा दिखानी थी। फिल्म के लिए उनकी शारीरिक तैयारी और अभिनय दोनों चर्चा में रहे थे। नेशनल अवॉर्ड मिलने के बाद यह भूमिका उनके करियर की सबसे महत्वपूर्ण परफॉर्मेंस में शामिल हो गई है।
कार्तिक के साथ मलयालम सिनेमा के दिग्गज अभिनेता ममूटी को ‘ब्रमायुगम’ के लिए संयुक्त रूप से बेस्ट एक्टर चुना गया। ब्लैक एंड व्हाइट में प्रस्तुत इस फिल्म में ममूटी का किरदार उनके सामान्य कमर्शियल रोल से काफी अलग था। हॉरर और लोककथाओं के मिश्रण पर बनी फिल्म में उनके अभिनय को काफी सराहना मिली थी। राष्ट्रीय पुरस्कारों में लंबे समय से अपनी मजबूत मौजूदगी रखने वाले ममूटी के लिए यह एक और बड़ी उपलब्धि है।
राजकुमार राव स्टारर ‘श्रीकांत’ को बेस्ट हिंदी फिल्म का पुरस्कार मिला है। तुषार हीरानंदानी के निर्देशन में बनी यह फिल्म उद्योगपति श्रीकांत बोला की जिंदगी से प्रेरित है। दृष्टिबाधित होने के बावजूद शिक्षा और कारोबार की दुनिया में अपनी पहचान बनाने की उनकी यात्रा को फिल्म की कहानी का आधार बनाया गया था। राजकुमार राव ने मुख्य किरदार निभाया, जबकि ज्योतिका, अलाया एफ और शरद केलकर भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आए।
‘श्रीकांत’ ने बॉक्स ऑफिस पर भी संतोषजनक प्रदर्शन किया था। फिल्म ने एक प्रेरणादायक बायोपिक के रूप में दर्शकों के बीच जगह बनाई। निर्देशक तुषार हीरानंदानी इससे पहले ‘सांड की आंख’ जैसी फिल्म और ‘स्कैम 2003’ जैसे प्रोजेक्ट से जुड़े रहे हैं। ‘श्रीकांत’ को बेस्ट हिंदी फिल्म चुना जाना उनके निर्देशन करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल हो गया है।
रणदीप हुड्डा को ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ के लिए निर्देशन श्रेणी में सम्मान मिला है। यह फिल्म उनके लिए इसलिए खास थी क्योंकि उन्होंने इसमें मुख्य भूमिका निभाने के साथ निर्देशन और निर्माण से जुड़ी जिम्मेदारियां भी संभाली थीं। विनायक दामोदर सावरकर के जीवन पर आधारित फिल्म के लिए रणदीप ने बड़े स्तर पर शारीरिक बदलाव भी किया था। फिल्म में सावरकर के जीवन, स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े उनके विचारों और राजनीतिक यात्रा को पर्दे पर दिखाने की कोशिश की गई थी।
सपोर्टिंग रोल की श्रेणी में अनुभवी अभिनेता संजय मिश्रा को ‘भक्षक’ में उनके अभिनय के लिए सम्मानित किया गया। सामाजिक अपराध और व्यवस्था से जुड़े गंभीर मुद्दे पर बनी इस फिल्म में भूमि पेडनेकर मुख्य भूमिका में थीं। संजय मिश्रा ने अपनी भूमिका के जरिए कहानी में महत्वपूर्ण योगदान दिया और उनके अभिनय को राष्ट्रीय पुरस्कारों में पहचान मिली।
क्षेत्रीय सिनेमा ने भी 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। तमिल भाषा की श्रेणी में ‘रायन’ को बेस्ट तमिल फिल्म चुना गया। तेलुगु सिनेमा में ‘कमेटी कुर्रोल्लू’ को सम्मान मिला, जबकि ‘लाहरी’ को बेस्ट ओड़िया फिल्म का पुरस्कार दिया गया। मराठी भाषा की श्रेणी में ‘मुक्काम पोस्ट बॉम्बिलवाड़ी’ और मणिपुरी सिनेमा में ‘सुनीता’ को सम्मान मिला। इन पुरस्कारों ने एक बार फिर राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में भारतीय सिनेमा की भाषाई विविधता को सामने रखा।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में गिने जाते हैं। इनकी शुरुआत 1954 में हुई थी। शुरुआती दौर में इन पुरस्कारों का उद्देश्य देश में गुणवत्तापूर्ण सिनेमा को प्रोत्साहित करना और अलग-अलग भारतीय भाषाओं में बनने वाली श्रेष्ठ फिल्मों को राष्ट्रीय पहचान देना था। उस समय इन्हें ‘स्टेट अवॉर्ड्स फॉर फिल्म्स’ के नाम से जाना जाता था।
पहले राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा प्रदान किए गए थे। शुरुआती पुरस्कारों में मराठी फिल्म ‘श्यामची आई’ को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के लिए प्रेसिडेंट्स गोल्ड मेडल दिया गया था। उस दौर में पुरस्कारों की श्रेणियां आज की तुलना में काफी सीमित थीं और मुख्य रूप से फीचर फिल्म, डॉक्यूमेंट्री और बच्चों की फिल्मों को सम्मानित किया जाता था।
समय के साथ भारतीय फिल्म उद्योग का विस्तार हुआ और राष्ट्रीय पुरस्कारों में भी नई श्रेणियां जोड़ी गईं। विभिन्न भारतीय भाषाओं की फिल्मों, अभिनय, निर्देशन, संगीत, गायन, सिनेमैटोग्राफी, एडिटिंग, स्क्रीनप्ले और तकनीकी क्षेत्रों के कलाकारों को भी सम्मानित किया जाने लगा। बाद में इन पुरस्कारों को ‘नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स’ के नाम से व्यापक पहचान मिली।
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में ‘आर्टिकल 370’ की बड़ी सफलता के साथ यामी गौतम के लिए भी यह उपलब्धि खास बन गई है। लंबे समय से हिंदी सिनेमा में सक्रिय यामी को पहली बार अभिनय के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। वहीं ‘चंदू चैंपियन’ में मुरलीकांत पेटकर का किरदार निभाने वाले कार्तिक आर्यन ने भी पहली बार नेशनल अवॉर्ड अपने नाम किया। दूसरी तरफ ममूटी जैसे अनुभवी अभिनेता ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अभिनय क्षमता की छाप छोड़ी है।
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72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स: ‘आर्टिकल 370’ बनी बेस्ट फीचर फिल्म, कार्तिक आर्यन-ममूटी बेस्ट एक्टर; यामी गौतम को बेस्ट एक्ट्रेस का सम्मान
बालीवुड न्यूज़
भारतीय सिनेमा के प्रतिष्ठित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का ऐलान हो गया है। साल 2024 में रिलीज हुई फिल्मों के लिए घोषित पुरस्कारों में हिंदी सिनेमा का प्रदर्शन खास रहा। यामी गौतम स्टारर राजनीतिक एक्शन-ड्रामा फिल्म ‘आर्टिकल 370’ को बेस्ट फीचर फिल्म चुना गया है। वहीं अभिनय श्रेणी में यामी गौतम को बेस्ट एक्ट्रेस का सम्मान मिला। पुरुष कलाकारों में ‘चंदू चैंपियन’ के लिए कार्तिक आर्यन और मलयालम फिल्म ‘ब्रमायुगम’ के लिए ममूटी को संयुक्त रूप से बेस्ट एक्टर चुना गया। राजकुमार राव की बायोग्राफिकल ड्रामा ‘श्रीकांत’ को बेस्ट हिंदी फिल्म का पुरस्कार मिला है।
‘आर्टिकल 370’ में यामी गौतम ने इंटेलिजेंस और सुरक्षा से जुड़े मिशन पर काम करने वाली अधिकारी जूनी हक्सर का किरदार निभाया था। फिल्म की कहानी जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 से जुड़े घटनाक्रम की पृष्ठभूमि पर आधारित थी। यामी के किरदार को एक्शन, राजनीतिक घटनाक्रम और भावनात्मक परिस्थितियों के बीच दिखाया गया था। इस भूमिका के लिए उन्हें लीडिंग रोल में बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड मिला है। यह यामी गौतम के फिल्मी करियर का पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार है।
आदित्य सुहास जांभले के निर्देशन में बनी ‘आर्टिकल 370’ ने रिलीज के समय भी काफी चर्चा बटोरी थी। सीमित बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया। उपलब्ध बॉक्स ऑफिस अनुमानों के मुताबिक, करीब 20 करोड़ रुपए के बजट वाली फिल्म ने दुनियाभर में 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का कारोबार किया था। फिल्म में यामी गौतम के अलावा प्रियामणि सहित कई कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आए थे।
फिल्म के निर्देशक आदित्य सुहास जांभले के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार नया नहीं है। इससे पहले भी उनकी फिल्मों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिल चुका है। उनकी शॉर्ट फिल्म ‘आबा ऐकताय ना?’ को 2016 में नॉन-फीचर श्रेणी में निर्देशन के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। इसके बाद ‘खारवस’ को 2019 में बेस्ट शॉर्ट फिक्शन फिल्म का सम्मान मिला। अब ‘आर्टिकल 370’ के बेस्ट फीचर फिल्म चुने जाने से उनके करियर में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है।
बेस्ट एक्टर की श्रेणी में इस बार दो कलाकारों ने बाजी मारी है। कार्तिक आर्यन और दिग्गज अभिनेता ममूटी को संयुक्त रूप से सर्वश्रेष्ठ अभिनेता चुना गया। कार्तिक को कबीर खान के निर्देशन में बनी ‘चंदू चैंपियन’ में उनके अभिनय के लिए यह सम्मान मिला है। फिल्म में उन्होंने भारत के पहले पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता मुरलीकांत पेटकर की भूमिका निभाई थी। किरदार के लिए कार्तिक ने अपने शारीरिक रूप में बड़ा बदलाव किया था और एथलीट की जिंदगी के अलग-अलग दौर को पर्दे पर उतारा था।
कार्तिक आर्यन के करियर का यह पहला नेशनल फिल्म अवॉर्ड है। रोमांटिक कॉमेडी और कमर्शियल फिल्मों से पहचान बनाने वाले कार्तिक के लिए ‘चंदू चैंपियन’ उनके करियर की अलग तरह की फिल्म रही। इसमें उन्हें एक युवा सैनिक से लेकर बॉक्सर और फिर पैरालंपिक खिलाड़ी तक की यात्रा दिखानी थी। फिल्म के लिए उनकी शारीरिक तैयारी और अभिनय दोनों चर्चा में रहे थे। नेशनल अवॉर्ड मिलने के बाद यह भूमिका उनके करियर की सबसे महत्वपूर्ण परफॉर्मेंस में शामिल हो गई है।
कार्तिक के साथ मलयालम सिनेमा के दिग्गज अभिनेता ममूटी को ‘ब्रमायुगम’ के लिए संयुक्त रूप से बेस्ट एक्टर चुना गया। ब्लैक एंड व्हाइट में प्रस्तुत इस फिल्म में ममूटी का किरदार उनके सामान्य कमर्शियल रोल से काफी अलग था। हॉरर और लोककथाओं के मिश्रण पर बनी फिल्म में उनके अभिनय को काफी सराहना मिली थी। राष्ट्रीय पुरस्कारों में लंबे समय से अपनी मजबूत मौजूदगी रखने वाले ममूटी के लिए यह एक और बड़ी उपलब्धि है।
राजकुमार राव स्टारर ‘श्रीकांत’ को बेस्ट हिंदी फिल्म का पुरस्कार मिला है। तुषार हीरानंदानी के निर्देशन में बनी यह फिल्म उद्योगपति श्रीकांत बोला की जिंदगी से प्रेरित है। दृष्टिबाधित होने के बावजूद शिक्षा और कारोबार की दुनिया में अपनी पहचान बनाने की उनकी यात्रा को फिल्म की कहानी का आधार बनाया गया था। राजकुमार राव ने मुख्य किरदार निभाया, जबकि ज्योतिका, अलाया एफ और शरद केलकर भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आए।
‘श्रीकांत’ ने बॉक्स ऑफिस पर भी संतोषजनक प्रदर्शन किया था। फिल्म ने एक प्रेरणादायक बायोपिक के रूप में दर्शकों के बीच जगह बनाई। निर्देशक तुषार हीरानंदानी इससे पहले ‘सांड की आंख’ जैसी फिल्म और ‘स्कैम 2003’ जैसे प्रोजेक्ट से जुड़े रहे हैं। ‘श्रीकांत’ को बेस्ट हिंदी फिल्म चुना जाना उनके निर्देशन करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल हो गया है।
रणदीप हुड्डा को ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ के लिए निर्देशन श्रेणी में सम्मान मिला है। यह फिल्म उनके लिए इसलिए खास थी क्योंकि उन्होंने इसमें मुख्य भूमिका निभाने के साथ निर्देशन और निर्माण से जुड़ी जिम्मेदारियां भी संभाली थीं। विनायक दामोदर सावरकर के जीवन पर आधारित फिल्म के लिए रणदीप ने बड़े स्तर पर शारीरिक बदलाव भी किया था। फिल्म में सावरकर के जीवन, स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े उनके विचारों और राजनीतिक यात्रा को पर्दे पर दिखाने की कोशिश की गई थी।
सपोर्टिंग रोल की श्रेणी में अनुभवी अभिनेता संजय मिश्रा को ‘भक्षक’ में उनके अभिनय के लिए सम्मानित किया गया। सामाजिक अपराध और व्यवस्था से जुड़े गंभीर मुद्दे पर बनी इस फिल्म में भूमि पेडनेकर मुख्य भूमिका में थीं। संजय मिश्रा ने अपनी भूमिका के जरिए कहानी में महत्वपूर्ण योगदान दिया और उनके अभिनय को राष्ट्रीय पुरस्कारों में पहचान मिली।
क्षेत्रीय सिनेमा ने भी 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। तमिल भाषा की श्रेणी में ‘रायन’ को बेस्ट तमिल फिल्म चुना गया। तेलुगु सिनेमा में ‘कमेटी कुर्रोल्लू’ को सम्मान मिला, जबकि ‘लाहरी’ को बेस्ट ओड़िया फिल्म का पुरस्कार दिया गया। मराठी भाषा की श्रेणी में ‘मुक्काम पोस्ट बॉम्बिलवाड़ी’ और मणिपुरी सिनेमा में ‘सुनीता’ को सम्मान मिला। इन पुरस्कारों ने एक बार फिर राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में भारतीय सिनेमा की भाषाई विविधता को सामने रखा।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में गिने जाते हैं। इनकी शुरुआत 1954 में हुई थी। शुरुआती दौर में इन पुरस्कारों का उद्देश्य देश में गुणवत्तापूर्ण सिनेमा को प्रोत्साहित करना और अलग-अलग भारतीय भाषाओं में बनने वाली श्रेष्ठ फिल्मों को राष्ट्रीय पहचान देना था। उस समय इन्हें ‘स्टेट अवॉर्ड्स फॉर फिल्म्स’ के नाम से जाना जाता था।
पहले राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा प्रदान किए गए थे। शुरुआती पुरस्कारों में मराठी फिल्म ‘श्यामची आई’ को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के लिए प्रेसिडेंट्स गोल्ड मेडल दिया गया था। उस दौर में पुरस्कारों की श्रेणियां आज की तुलना में काफी सीमित थीं और मुख्य रूप से फीचर फिल्म, डॉक्यूमेंट्री और बच्चों की फिल्मों को सम्मानित किया जाता था।
समय के साथ भारतीय फिल्म उद्योग का विस्तार हुआ और राष्ट्रीय पुरस्कारों में भी नई श्रेणियां जोड़ी गईं। विभिन्न भारतीय भाषाओं की फिल्मों, अभिनय, निर्देशन, संगीत, गायन, सिनेमैटोग्राफी, एडिटिंग, स्क्रीनप्ले और तकनीकी क्षेत्रों के कलाकारों को भी सम्मानित किया जाने लगा। बाद में इन पुरस्कारों को ‘नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स’ के नाम से व्यापक पहचान मिली।
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में ‘आर्टिकल 370’ की बड़ी सफलता के साथ यामी गौतम के लिए भी यह उपलब्धि खास बन गई है। लंबे समय से हिंदी सिनेमा में सक्रिय यामी को पहली बार अभिनय के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। वहीं ‘चंदू चैंपियन’ में मुरलीकांत पेटकर का किरदार निभाने वाले कार्तिक आर्यन ने भी पहली बार नेशनल अवॉर्ड अपने नाम किया। दूसरी तरफ ममूटी जैसे अनुभवी अभिनेता ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अभिनय क्षमता की छाप छोड़ी है।
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