रायपुर में 26 जुलाई को जुटेंगी छत्तीसगढ़ की सिंधी पंचायतें: 120 पंचायतों के मुखी करेंगे मंथन, नए संविधान से लेकर पारिवारिक विवादों तक होगी चर्चा

रायपुर (छ.ग.)

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जोरा में प्रदेश स्तरीय ‘मुखी संवाद’ का आयोजन होगा, जिसमें समाज की एकजुटता, संगठन और सामाजिक समस्याओं के समाधान पर पंचायत प्रतिनिधि अपने सुझाव रखेंगे

छत्तीसगढ़ में सिंधी समाज को संगठित करने, पंचायतों के बीच बेहतर तालमेल बनाने और समाज से जुड़े मौजूदा मुद्दों पर साझा रणनीति तैयार करने के लिए रायपुर में बड़ा प्रदेश स्तरीय सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। पूज्य छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत की ओर से 26 जुलाई को ‘मुखी संवाद’ कार्यक्रम रखा गया है। राजधानी के जोरा स्थित प्रतिष्ठा द बैंक्वेट हॉल में होने वाले इस आयोजन में प्रदेश के अलग-अलग शहरों और जिलों की करीब 120 सिंधी पंचायतों के मुखी और प्रमुख पदाधिकारी एक मंच पर जुटेंगे।

इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही सिंधी पंचायतों के बीच सीधा संवाद स्थापित करना है। सम्मेलन में पंचायत प्रतिनिधि अपने क्षेत्रों में समाज के सामने आ रही चुनौतियों, संगठनात्मक जरूरतों और सामाजिक समस्याओं को साझा करेंगे। साथ ही भविष्य में प्रदेश स्तर पर पंचायतों के बीच समन्वय को मजबूत करने के लिए किस तरह की व्यवस्था विकसित की जाए, इस पर भी विचार किया जाएगा।

आयोजकों के मुताबिक, ‘मुखी संवाद’ को केवल औपचारिक सम्मेलन तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसमें अलग-अलग पंचायतों के प्रतिनिधियों को अपनी बात रखने और सुझाव देने का अवसर मिलेगा। समाज की एकता को मजबूत करने के साथ नई पीढ़ी को सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने, संगठन के विस्तार और पंचायतों की भूमिका को अधिक प्रभावी बनाने जैसे विषय भी चर्चा का हिस्सा रहेंगे।

सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण एजेंडा पूज्य छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत के प्रस्तावित नए संविधान को लेकर होगा। संगठनात्मक व्यवस्था को वर्तमान जरूरतों के अनुरूप बनाने के लिए तैयार किए जा रहे संविधान के विभिन्न पहलुओं पर पंचायत प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की जाएगी। इसमें प्रतिनिधियों की राय और सुझाव लिए जाने की योजना है। विचार-विमर्श के बाद सहमति के आधार पर इसे आगे लागू करने की प्रक्रिया पर काम किया जाएगा।

नए संविधान के जरिए संगठन के संचालन, पंचायतों के बीच समन्वय, पदाधिकारियों की जिम्मेदारियों और सामाजिक मामलों में पंचायत की भूमिका को अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित बनाने की दिशा में विचार किया जा सकता है। प्रदेशभर की पंचायतों को एक साझा व्यवस्था से जोड़ने के लिए भी प्रतिनिधियों से सुझाव मांगे जाएंगे।

कार्यक्रम में सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर सामने आ रही समस्याएं भी चर्चा का प्रमुख विषय होंगी। आयोजकों के अनुसार, बदलती जीवनशैली के बीच परिवारों और रिश्तों में बढ़ती दूरियां, आपसी संवाद की कमी, भरोसे से जुड़े सवाल और पारिवारिक विवाद जैसी स्थितियों को लेकर पंचायत प्रतिनिधि मंथन करेंगे।

ऐसे मामलों में सामाजिक पंचायतें किस सीमा तक सकारात्मक भूमिका निभा सकती हैं और विवादों को बढ़ने से पहले बातचीत के जरिए कैसे सुलझाया जा सकता है, इसे लेकर भी सुझाव सामने आने की उम्मीद है। प्रयास यह रहेगा कि अलग-अलग पंचायतों के अनुभवों को साझा कर ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे जरूरत पड़ने पर परिवारों को संवाद और सामाजिक स्तर पर उचित मार्गदर्शन मिल सके।

समाज के भीतर आपसी संपर्क को मजबूत करना भी सम्मेलन के एजेंडे में शामिल रहेगा। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में सिंधी समाज की पंचायतें स्थानीय स्तर पर कई सामाजिक, धार्मिक और सेवा गतिविधियां संचालित करती हैं। ‘मुखी संवाद’ के जरिए इन पंचायतों के बीच सूचनाओं और अनुभवों के आदान-प्रदान के लिए बेहतर नेटवर्क तैयार करने पर बातचीत होगी।

आयोजन की तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। इसी सिलसिले में रायपुर की विभिन्न सिंधी पंचायतों के प्रतिनिधियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में 26 जुलाई को होने वाले प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम की रूपरेखा पर चर्चा की गई और शहर की पंचायतों को औपचारिक रूप से आयोजन में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया।

तैयारी बैठक में कार्यक्रम से जुड़े अलग-अलग कामों का विभाजन भी किया गया। आयोजन स्थल की व्यवस्था से लेकर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले प्रतिनिधियों के समन्वय तक की जिम्मेदारियां अलग-अलग लोगों को सौंपी गई हैं। बैठक में मौजूद प्रतिनिधियों ने आयोजन को व्यापक स्वरूप देने और अधिक से अधिक पंचायतों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

आयोजकों का प्रयास है कि प्रदेश के छोटे-बड़े शहरों और कस्बों में सक्रिय सिंधी पंचायतों के प्रतिनिधि सम्मेलन में मौजूद रहें। करीब 120 पंचायतों की संभावित भागीदारी के कारण इसे प्रदेश स्तर पर सिंधी समाज के महत्वपूर्ण संवाद कार्यक्रम के रूप में देखा जा रहा है।

बैठक के दौरान समाज के प्रतिनिधियों ने इस बात पर भी जोर दिया कि अलग-अलग पंचायतों के बीच नियमित संवाद होना जरूरी है। स्थानीय स्तर पर सामने आने वाली कई समस्याओं का स्वरूप एक जैसा होता है, लेकिन पंचायतें अलग-अलग तरीके से उनका समाधान करती हैं। यदि इन अनुभवों को साझा किया जाए तो अन्य पंचायतों को भी उससे मदद मिल सकती है।

कार्यक्रम में समाज के विकास से जुड़े दीर्घकालिक विषयों पर भी सुझाव लिए जाएंगे। सामाजिक संगठनों की सक्रियता बढ़ाने, युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने और विभिन्न आयु वर्गों को पंचायत की गतिविधियों से जोड़ने जैसे मुद्दों पर प्रतिनिधि अपनी राय रख सकेंगे।

‘मुखी संवाद’ में समाज के वरिष्ठ लोगों के अनुभवों और युवा पीढ़ी की सोच के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर भी चर्चा होने की संभावना है। बदलते सामाजिक परिवेश में पंचायतों की परंपरागत भूमिका के साथ उनकी नई जिम्मेदारियों को लेकर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

तैयारियों को लेकर हुई बैठक में बाबा मुरलीधर उदासी, प्रदेश अध्यक्ष महेश दरयानी, अमित चिमनानी, बलराम आहूजा, अमर पारवानी, राज विक्रम, गिरीश लहजा, कैलाश बालानी, अच्छूमल गावरी, अर्जुनदास ओछवानी, रमेश मिर्घानी, जीवत बजाज, तनैश आहूजा, जोधाराम वधवाणी, प्रकाश रहेजा और मुरलीधर केवलानी सहित समाज के कई प्रमुख प्रतिनिधि मौजूद रहे।

इसके अलावा हरनाम तलरेजा, गुरुनामल रोहरा, सतरामदास बजाज और नरसा लालवानी समेत विभिन्न पंचायतों से जुड़े मुखियों ने बैठक में अपने सुझाव रखे। प्रतिनिधियों ने कार्यक्रम को समाज के लिए उपयोगी बनाने और प्रदेश की पंचायतों के बीच संवाद को लगातार जारी रखने की जरूरत पर अपनी बात रखी।

आयोजन की विस्तृत रूपरेखा तैयार करने में विकास रूपरेला, अनिल लाहौरी, मनीष पंजवानी और अमर चंदानी की प्रमुख भूमिका बताई गई है। संस्था के सह-प्रवक्ता गौरव मंधानी के अनुसार, सम्मेलन के माध्यम से प्रदेश की पंचायतों को एक मंच पर लाकर सामाजिक और संगठनात्मक विषयों पर खुली चर्चा की जाएगी।

26 जुलाई को होने वाले सम्मेलन में पंचायतों के प्रतिनिधियों से मिले सुझावों को दर्ज करने और महत्वपूर्ण विषयों पर साझा राय विकसित करने की तैयारी है। नए संविधान के प्रस्ताव पर चर्चा के साथ पंचायतों की भविष्य की कार्यप्रणाली, आपसी समन्वय और सामाजिक समस्याओं में उनकी भूमिका को लेकर भी प्रतिनिधि अपने विचार रखेंगे।

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19 Jul 2026 By Priyanka

रायपुर में 26 जुलाई को जुटेंगी छत्तीसगढ़ की सिंधी पंचायतें: 120 पंचायतों के मुखी करेंगे मंथन, नए संविधान से लेकर पारिवारिक विवादों तक होगी चर्चा

रायपुर (छ.ग.)

छत्तीसगढ़ में सिंधी समाज को संगठित करने, पंचायतों के बीच बेहतर तालमेल बनाने और समाज से जुड़े मौजूदा मुद्दों पर साझा रणनीति तैयार करने के लिए रायपुर में बड़ा प्रदेश स्तरीय सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। पूज्य छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत की ओर से 26 जुलाई को ‘मुखी संवाद’ कार्यक्रम रखा गया है। राजधानी के जोरा स्थित प्रतिष्ठा द बैंक्वेट हॉल में होने वाले इस आयोजन में प्रदेश के अलग-अलग शहरों और जिलों की करीब 120 सिंधी पंचायतों के मुखी और प्रमुख पदाधिकारी एक मंच पर जुटेंगे।

इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही सिंधी पंचायतों के बीच सीधा संवाद स्थापित करना है। सम्मेलन में पंचायत प्रतिनिधि अपने क्षेत्रों में समाज के सामने आ रही चुनौतियों, संगठनात्मक जरूरतों और सामाजिक समस्याओं को साझा करेंगे। साथ ही भविष्य में प्रदेश स्तर पर पंचायतों के बीच समन्वय को मजबूत करने के लिए किस तरह की व्यवस्था विकसित की जाए, इस पर भी विचार किया जाएगा।

आयोजकों के मुताबिक, ‘मुखी संवाद’ को केवल औपचारिक सम्मेलन तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसमें अलग-अलग पंचायतों के प्रतिनिधियों को अपनी बात रखने और सुझाव देने का अवसर मिलेगा। समाज की एकता को मजबूत करने के साथ नई पीढ़ी को सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने, संगठन के विस्तार और पंचायतों की भूमिका को अधिक प्रभावी बनाने जैसे विषय भी चर्चा का हिस्सा रहेंगे।

सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण एजेंडा पूज्य छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत के प्रस्तावित नए संविधान को लेकर होगा। संगठनात्मक व्यवस्था को वर्तमान जरूरतों के अनुरूप बनाने के लिए तैयार किए जा रहे संविधान के विभिन्न पहलुओं पर पंचायत प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की जाएगी। इसमें प्रतिनिधियों की राय और सुझाव लिए जाने की योजना है। विचार-विमर्श के बाद सहमति के आधार पर इसे आगे लागू करने की प्रक्रिया पर काम किया जाएगा।

नए संविधान के जरिए संगठन के संचालन, पंचायतों के बीच समन्वय, पदाधिकारियों की जिम्मेदारियों और सामाजिक मामलों में पंचायत की भूमिका को अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित बनाने की दिशा में विचार किया जा सकता है। प्रदेशभर की पंचायतों को एक साझा व्यवस्था से जोड़ने के लिए भी प्रतिनिधियों से सुझाव मांगे जाएंगे।

कार्यक्रम में सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर सामने आ रही समस्याएं भी चर्चा का प्रमुख विषय होंगी। आयोजकों के अनुसार, बदलती जीवनशैली के बीच परिवारों और रिश्तों में बढ़ती दूरियां, आपसी संवाद की कमी, भरोसे से जुड़े सवाल और पारिवारिक विवाद जैसी स्थितियों को लेकर पंचायत प्रतिनिधि मंथन करेंगे।

ऐसे मामलों में सामाजिक पंचायतें किस सीमा तक सकारात्मक भूमिका निभा सकती हैं और विवादों को बढ़ने से पहले बातचीत के जरिए कैसे सुलझाया जा सकता है, इसे लेकर भी सुझाव सामने आने की उम्मीद है। प्रयास यह रहेगा कि अलग-अलग पंचायतों के अनुभवों को साझा कर ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे जरूरत पड़ने पर परिवारों को संवाद और सामाजिक स्तर पर उचित मार्गदर्शन मिल सके।

समाज के भीतर आपसी संपर्क को मजबूत करना भी सम्मेलन के एजेंडे में शामिल रहेगा। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में सिंधी समाज की पंचायतें स्थानीय स्तर पर कई सामाजिक, धार्मिक और सेवा गतिविधियां संचालित करती हैं। ‘मुखी संवाद’ के जरिए इन पंचायतों के बीच सूचनाओं और अनुभवों के आदान-प्रदान के लिए बेहतर नेटवर्क तैयार करने पर बातचीत होगी।

आयोजन की तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। इसी सिलसिले में रायपुर की विभिन्न सिंधी पंचायतों के प्रतिनिधियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में 26 जुलाई को होने वाले प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम की रूपरेखा पर चर्चा की गई और शहर की पंचायतों को औपचारिक रूप से आयोजन में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया।

तैयारी बैठक में कार्यक्रम से जुड़े अलग-अलग कामों का विभाजन भी किया गया। आयोजन स्थल की व्यवस्था से लेकर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले प्रतिनिधियों के समन्वय तक की जिम्मेदारियां अलग-अलग लोगों को सौंपी गई हैं। बैठक में मौजूद प्रतिनिधियों ने आयोजन को व्यापक स्वरूप देने और अधिक से अधिक पंचायतों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

आयोजकों का प्रयास है कि प्रदेश के छोटे-बड़े शहरों और कस्बों में सक्रिय सिंधी पंचायतों के प्रतिनिधि सम्मेलन में मौजूद रहें। करीब 120 पंचायतों की संभावित भागीदारी के कारण इसे प्रदेश स्तर पर सिंधी समाज के महत्वपूर्ण संवाद कार्यक्रम के रूप में देखा जा रहा है।

बैठक के दौरान समाज के प्रतिनिधियों ने इस बात पर भी जोर दिया कि अलग-अलग पंचायतों के बीच नियमित संवाद होना जरूरी है। स्थानीय स्तर पर सामने आने वाली कई समस्याओं का स्वरूप एक जैसा होता है, लेकिन पंचायतें अलग-अलग तरीके से उनका समाधान करती हैं। यदि इन अनुभवों को साझा किया जाए तो अन्य पंचायतों को भी उससे मदद मिल सकती है।

कार्यक्रम में समाज के विकास से जुड़े दीर्घकालिक विषयों पर भी सुझाव लिए जाएंगे। सामाजिक संगठनों की सक्रियता बढ़ाने, युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने और विभिन्न आयु वर्गों को पंचायत की गतिविधियों से जोड़ने जैसे मुद्दों पर प्रतिनिधि अपनी राय रख सकेंगे।

‘मुखी संवाद’ में समाज के वरिष्ठ लोगों के अनुभवों और युवा पीढ़ी की सोच के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर भी चर्चा होने की संभावना है। बदलते सामाजिक परिवेश में पंचायतों की परंपरागत भूमिका के साथ उनकी नई जिम्मेदारियों को लेकर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

तैयारियों को लेकर हुई बैठक में बाबा मुरलीधर उदासी, प्रदेश अध्यक्ष महेश दरयानी, अमित चिमनानी, बलराम आहूजा, अमर पारवानी, राज विक्रम, गिरीश लहजा, कैलाश बालानी, अच्छूमल गावरी, अर्जुनदास ओछवानी, रमेश मिर्घानी, जीवत बजाज, तनैश आहूजा, जोधाराम वधवाणी, प्रकाश रहेजा और मुरलीधर केवलानी सहित समाज के कई प्रमुख प्रतिनिधि मौजूद रहे।

इसके अलावा हरनाम तलरेजा, गुरुनामल रोहरा, सतरामदास बजाज और नरसा लालवानी समेत विभिन्न पंचायतों से जुड़े मुखियों ने बैठक में अपने सुझाव रखे। प्रतिनिधियों ने कार्यक्रम को समाज के लिए उपयोगी बनाने और प्रदेश की पंचायतों के बीच संवाद को लगातार जारी रखने की जरूरत पर अपनी बात रखी।

आयोजन की विस्तृत रूपरेखा तैयार करने में विकास रूपरेला, अनिल लाहौरी, मनीष पंजवानी और अमर चंदानी की प्रमुख भूमिका बताई गई है। संस्था के सह-प्रवक्ता गौरव मंधानी के अनुसार, सम्मेलन के माध्यम से प्रदेश की पंचायतों को एक मंच पर लाकर सामाजिक और संगठनात्मक विषयों पर खुली चर्चा की जाएगी।

26 जुलाई को होने वाले सम्मेलन में पंचायतों के प्रतिनिधियों से मिले सुझावों को दर्ज करने और महत्वपूर्ण विषयों पर साझा राय विकसित करने की तैयारी है। नए संविधान के प्रस्ताव पर चर्चा के साथ पंचायतों की भविष्य की कार्यप्रणाली, आपसी समन्वय और सामाजिक समस्याओं में उनकी भूमिका को लेकर भी प्रतिनिधि अपने विचार रखेंगे।

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/6a5ca864933d0/article-59186

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