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पीवी सिंधु ने जापान ओपन में रचा इतिहास: अकाने यामागुची को सीधे गेम में हराया, दो साल बाद जीता BWF खिताब
स्पोर्ट्स डेस्क
सिंधु ने फाइनल 21-17, 21-17 से जीता; जापान ओपन चैंपियन बनने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनीं
भारतीय बैडमिंटन की स्टार खिलाड़ी पीवी सिंधु ने जापान ओपन 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए महिला सिंगल्स का खिताब अपने नाम कर लिया है। रविवार को खेले गए फाइनल में सिंधु ने घरेलू दर्शकों के सामने जापान की दिग्गज खिलाड़ी अकाने यामागुची को सीधे गेम में 21-17, 21-17 से शिकस्त दी। करीब 50 मिनट तक चले मुकाबले में सिंधु ने शुरुआत से अंत तक नियंत्रण बनाए रखा और यामागुची को वापसी का बड़ा मौका नहीं दिया। इस जीत के साथ सिंधु जापान ओपन का महिला सिंगल्स खिताब जीतने वाली पहली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी बन गई हैं। यह उनके करियर का पहला BWF Super 750 खिताब भी है।
लंबे समय से बड़े खिताब का इंतजार कर रहीं सिंधु के लिए यह जीत बेहद महत्वपूर्ण रही। उन्होंने करीब दो साल बाद BWF वर्ल्ड टूर पर कोई खिताब जीता है। पिछले कुछ समय में चोट, फिटनेस और प्रदर्शन में उतार-चढ़ाव के कारण उन्हें कई मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा था। जापान ओपन में उनका प्रदर्शन बिल्कुल अलग नजर आया। पूरे टूर्नामेंट के दौरान उन्होंने आक्रामक खेल के साथ कोर्ट कवरेज और डिफेंस में भी मजबूती दिखाई और फाइनल में दो बार की विश्व चैंपियन यामागुची को हराकर अपने अभियान को खिताब में बदल दिया।
फाइनल मुकाबले का पहला गेम शुरुआत से प्रतिस्पर्धी रहा। सिंधु और यामागुची दोनों ने लंबी रैलियों के जरिए एक-दूसरे को दबाव में डालने की कोशिश की। जापानी खिलाड़ी अपने तेज फुटवर्क और शानदार डिफेंस के लिए जानी जाती हैं, लेकिन सिंधु ने उन्हें कोर्ट के दोनों कोनों में लगातार मूव कराया। भारतीय खिलाड़ी ने स्मैश के साथ ड्रॉप शॉट और नेट गेम का अच्छा तालमेल बनाया। अहम मौकों पर सिंधु ने अपनी बढ़त को हाथ से नहीं जाने दिया और पहला गेम 21-17 से जीतकर मैच में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली।
पहला गेम गंवाने के बाद यामागुची ने दूसरे गेम में वापसी की कोशिश की। उन्होंने रैलियों की गति बढ़ाई और सिंधु को बैक कोर्ट में उलझाने की रणनीति अपनाई, लेकिन भारतीय खिलाड़ी दबाव में भी संयमित नजर आईं। सिंधु ने अपनी लंबाई और कोर्ट कवरेज का फायदा उठाते हुए कई महत्वपूर्ण अंक हासिल किए। जैसे-जैसे मुकाबला आगे बढ़ा, सिंधु ने गेम पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली। निर्णायक चरण में उन्होंने गलतियां कम कीं और लगातार अंक जुटाकर दूसरा गेम भी 21-17 से अपने नाम कर लिया।
दोनों गेम का स्कोर समान रहा, लेकिन मुकाबले के दौरान कई रैलियां काफी चुनौतीपूर्ण थीं। सिंधु ने अहम मौकों पर अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए यामागुची को सहज लय हासिल नहीं करने दी। खासतौर पर जापानी खिलाड़ी के मजबूत डिफेंस को तोड़ने के लिए सिंधु ने केवल ताकतवर स्मैश पर निर्भर रहने के बजाय शटल की दिशा और गति में लगातार बदलाव किया। इसी रणनीति ने उन्हें दोनों गेम के अंतिम चरण में बढ़त बनाए रखने में मदद की।
यामागुची के खिलाफ सिंधु की यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि दोनों खिलाड़ियों के बीच लंबे समय से कड़ी प्रतिद्वंद्विता रही है। सिंधु करीब चार साल बाद किसी पूरे मुकाबले में यामागुची को हराने में सफल हुई हैं। इससे पहले 2022 के थाईलैंड ओपन में उन्होंने जापानी खिलाड़ी पर जीत हासिल की थी। पिछले साल मलेशिया ओपन में भी दोनों आमने-सामने आई थीं, लेकिन उस मुकाबले में यामागुची चोट के कारण मैच पूरा नहीं कर सकी थीं।
सिंधु और यामागुची की प्रतिद्वंद्विता विश्व बैडमिंटन में लंबे समय से चर्चा में रही है। दोनों खिलाड़ी बड़े टूर्नामेंटों में कई बार आमने-सामने आ चुकी हैं। यामागुची अपनी तेजी, बेहतरीन डिफेंस और लंबी रैलियों में धैर्य के लिए पहचानी जाती हैं, जबकि सिंधु का आक्रामक खेल, ऊंचाई का फायदा और ताकतवर स्मैश उनकी सबसे बड़ी खूबियों में शामिल है। जापान ओपन के फाइनल में सिंधु ने इन खूबियों का इस्तेमाल करते हुए घरेलू खिलाड़ी के खिलाफ सीधे गेम में जीत दर्ज की।
31 वर्षीय सिंधु के लिए यह सफलता उनके करियर के एक नए अध्याय के तौर पर देखी जा रही है। दो बार की ओलिंपिक पदक विजेता सिंधु लंबे समय से भारतीय महिला बैडमिंटन का सबसे बड़ा नाम रही हैं। हालांकि पिछले दो वर्षों में उनके लिए लगातार खिताब जीतना आसान नहीं रहा। कई टूर्नामेंटों में उन्हें शुरुआती या मध्य दौर में हार का सामना करना पड़ा। ऐसे समय में Super 750 स्तर के बड़े टूर्नामेंट में खिताबी जीत उनके आत्मविश्वास और आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिहाज से अहम साबित हो सकती है।
जापान ओपन का खिताब सिंधु के लिए इसलिए भी बड़ी उपलब्धि है क्योंकि यह BWF वर्ल्ड टूर के प्रतिष्ठित Super 750 टूर्नामेंटों में शामिल है। दुनिया की शीर्ष रैंकिंग वाली खिलाड़ी इसमें हिस्सा लेती हैं और चैंपियन बनने के लिए लगातार कई कठिन मुकाबले जीतने पड़ते हैं। सिंधु ने पूरे सप्ताह शानदार निरंतरता दिखाई और फाइनल में ऊंची रैंकिंग वाली यामागुची को हराकर खिताब पर कब्जा किया।
इस जीत ने सिंधु के दो साल से चले आ रहे खिताबी सूखे को भी समाप्त कर दिया। बड़े स्तर पर लंबे अंतराल के बाद मिली ट्रॉफी ने दिखाया कि वे अभी भी दुनिया की शीर्ष खिलाड़ियों को चुनौती देने की क्षमता रखती हैं। खास बात यह रही कि फाइनल में उन्होंने केवल आक्रामक बैडमिंटन ही नहीं खेला, बल्कि लंबी रैलियों के दौरान धैर्य और रणनीतिक नियंत्रण भी बनाए रखा।
सिंधु की फिटनेस भी फाइनल में महत्वपूर्ण साबित हुई। करीब 50 मिनट तक चले मुकाबले में उन्होंने कोर्ट पर लगातार तेजी बनाए रखी। यामागुची अक्सर विरोधी खिलाड़ियों को लंबी रैलियों में उलझाकर थकाने की कोशिश करती हैं, लेकिन इस बार सिंधु ने उनकी इस रणनीति का मजबूती से जवाब दिया। नेट के करीब तेजी से पहुंचने से लेकर बैक कोर्ट से आक्रामक शॉट खेलने तक भारतीय खिलाड़ी का संतुलन पूरे मैच में बेहतर दिखाई दिया।
पहला गेम जीतने के बाद सिंधु ने दूसरे गेम में जल्दबाजी नहीं दिखाई। यामागुची की वापसी की कोशिशों के बीच उन्होंने अपनी रणनीति पर भरोसा बनाए रखा। स्कोर के महत्वपूर्ण मोड़ पर सिंधु ने लगातार दबाव बनाया और अंतिम अंकों में मुकाबले को अपने नियंत्रण से बाहर नहीं जाने दिया। 21-17 से दूसरा गेम जीतते ही सिंधु ने सीधे गेम में फाइनल अपने नाम कर इतिहास रच दिया।
इस खिताब के साथ सिंधु के करियर में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है। ओलिंपिक में दो पदक, विश्व चैंपियनशिप का स्वर्ण और कई बड़े अंतरराष्ट्रीय खिताब जीत चुकीं सिंधु अब जापान ओपन चैंपियन भी बन गई हैं। भारतीय महिला बैडमिंटन में इससे पहले कोई खिलाड़ी इस टूर्नामेंट का सिंगल्स खिताब नहीं जीत सकी थी।
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पीवी सिंधु ने जापान ओपन में रचा इतिहास: अकाने यामागुची को सीधे गेम में हराया, दो साल बाद जीता BWF खिताब
स्पोर्ट्स डेस्क
भारतीय बैडमिंटन की स्टार खिलाड़ी पीवी सिंधु ने जापान ओपन 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए महिला सिंगल्स का खिताब अपने नाम कर लिया है। रविवार को खेले गए फाइनल में सिंधु ने घरेलू दर्शकों के सामने जापान की दिग्गज खिलाड़ी अकाने यामागुची को सीधे गेम में 21-17, 21-17 से शिकस्त दी। करीब 50 मिनट तक चले मुकाबले में सिंधु ने शुरुआत से अंत तक नियंत्रण बनाए रखा और यामागुची को वापसी का बड़ा मौका नहीं दिया। इस जीत के साथ सिंधु जापान ओपन का महिला सिंगल्स खिताब जीतने वाली पहली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी बन गई हैं। यह उनके करियर का पहला BWF Super 750 खिताब भी है।
लंबे समय से बड़े खिताब का इंतजार कर रहीं सिंधु के लिए यह जीत बेहद महत्वपूर्ण रही। उन्होंने करीब दो साल बाद BWF वर्ल्ड टूर पर कोई खिताब जीता है। पिछले कुछ समय में चोट, फिटनेस और प्रदर्शन में उतार-चढ़ाव के कारण उन्हें कई मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा था। जापान ओपन में उनका प्रदर्शन बिल्कुल अलग नजर आया। पूरे टूर्नामेंट के दौरान उन्होंने आक्रामक खेल के साथ कोर्ट कवरेज और डिफेंस में भी मजबूती दिखाई और फाइनल में दो बार की विश्व चैंपियन यामागुची को हराकर अपने अभियान को खिताब में बदल दिया।
फाइनल मुकाबले का पहला गेम शुरुआत से प्रतिस्पर्धी रहा। सिंधु और यामागुची दोनों ने लंबी रैलियों के जरिए एक-दूसरे को दबाव में डालने की कोशिश की। जापानी खिलाड़ी अपने तेज फुटवर्क और शानदार डिफेंस के लिए जानी जाती हैं, लेकिन सिंधु ने उन्हें कोर्ट के दोनों कोनों में लगातार मूव कराया। भारतीय खिलाड़ी ने स्मैश के साथ ड्रॉप शॉट और नेट गेम का अच्छा तालमेल बनाया। अहम मौकों पर सिंधु ने अपनी बढ़त को हाथ से नहीं जाने दिया और पहला गेम 21-17 से जीतकर मैच में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली।
पहला गेम गंवाने के बाद यामागुची ने दूसरे गेम में वापसी की कोशिश की। उन्होंने रैलियों की गति बढ़ाई और सिंधु को बैक कोर्ट में उलझाने की रणनीति अपनाई, लेकिन भारतीय खिलाड़ी दबाव में भी संयमित नजर आईं। सिंधु ने अपनी लंबाई और कोर्ट कवरेज का फायदा उठाते हुए कई महत्वपूर्ण अंक हासिल किए। जैसे-जैसे मुकाबला आगे बढ़ा, सिंधु ने गेम पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली। निर्णायक चरण में उन्होंने गलतियां कम कीं और लगातार अंक जुटाकर दूसरा गेम भी 21-17 से अपने नाम कर लिया।
दोनों गेम का स्कोर समान रहा, लेकिन मुकाबले के दौरान कई रैलियां काफी चुनौतीपूर्ण थीं। सिंधु ने अहम मौकों पर अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए यामागुची को सहज लय हासिल नहीं करने दी। खासतौर पर जापानी खिलाड़ी के मजबूत डिफेंस को तोड़ने के लिए सिंधु ने केवल ताकतवर स्मैश पर निर्भर रहने के बजाय शटल की दिशा और गति में लगातार बदलाव किया। इसी रणनीति ने उन्हें दोनों गेम के अंतिम चरण में बढ़त बनाए रखने में मदद की।
यामागुची के खिलाफ सिंधु की यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि दोनों खिलाड़ियों के बीच लंबे समय से कड़ी प्रतिद्वंद्विता रही है। सिंधु करीब चार साल बाद किसी पूरे मुकाबले में यामागुची को हराने में सफल हुई हैं। इससे पहले 2022 के थाईलैंड ओपन में उन्होंने जापानी खिलाड़ी पर जीत हासिल की थी। पिछले साल मलेशिया ओपन में भी दोनों आमने-सामने आई थीं, लेकिन उस मुकाबले में यामागुची चोट के कारण मैच पूरा नहीं कर सकी थीं।
सिंधु और यामागुची की प्रतिद्वंद्विता विश्व बैडमिंटन में लंबे समय से चर्चा में रही है। दोनों खिलाड़ी बड़े टूर्नामेंटों में कई बार आमने-सामने आ चुकी हैं। यामागुची अपनी तेजी, बेहतरीन डिफेंस और लंबी रैलियों में धैर्य के लिए पहचानी जाती हैं, जबकि सिंधु का आक्रामक खेल, ऊंचाई का फायदा और ताकतवर स्मैश उनकी सबसे बड़ी खूबियों में शामिल है। जापान ओपन के फाइनल में सिंधु ने इन खूबियों का इस्तेमाल करते हुए घरेलू खिलाड़ी के खिलाफ सीधे गेम में जीत दर्ज की।
31 वर्षीय सिंधु के लिए यह सफलता उनके करियर के एक नए अध्याय के तौर पर देखी जा रही है। दो बार की ओलिंपिक पदक विजेता सिंधु लंबे समय से भारतीय महिला बैडमिंटन का सबसे बड़ा नाम रही हैं। हालांकि पिछले दो वर्षों में उनके लिए लगातार खिताब जीतना आसान नहीं रहा। कई टूर्नामेंटों में उन्हें शुरुआती या मध्य दौर में हार का सामना करना पड़ा। ऐसे समय में Super 750 स्तर के बड़े टूर्नामेंट में खिताबी जीत उनके आत्मविश्वास और आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिहाज से अहम साबित हो सकती है।
जापान ओपन का खिताब सिंधु के लिए इसलिए भी बड़ी उपलब्धि है क्योंकि यह BWF वर्ल्ड टूर के प्रतिष्ठित Super 750 टूर्नामेंटों में शामिल है। दुनिया की शीर्ष रैंकिंग वाली खिलाड़ी इसमें हिस्सा लेती हैं और चैंपियन बनने के लिए लगातार कई कठिन मुकाबले जीतने पड़ते हैं। सिंधु ने पूरे सप्ताह शानदार निरंतरता दिखाई और फाइनल में ऊंची रैंकिंग वाली यामागुची को हराकर खिताब पर कब्जा किया।
इस जीत ने सिंधु के दो साल से चले आ रहे खिताबी सूखे को भी समाप्त कर दिया। बड़े स्तर पर लंबे अंतराल के बाद मिली ट्रॉफी ने दिखाया कि वे अभी भी दुनिया की शीर्ष खिलाड़ियों को चुनौती देने की क्षमता रखती हैं। खास बात यह रही कि फाइनल में उन्होंने केवल आक्रामक बैडमिंटन ही नहीं खेला, बल्कि लंबी रैलियों के दौरान धैर्य और रणनीतिक नियंत्रण भी बनाए रखा।
सिंधु की फिटनेस भी फाइनल में महत्वपूर्ण साबित हुई। करीब 50 मिनट तक चले मुकाबले में उन्होंने कोर्ट पर लगातार तेजी बनाए रखी। यामागुची अक्सर विरोधी खिलाड़ियों को लंबी रैलियों में उलझाकर थकाने की कोशिश करती हैं, लेकिन इस बार सिंधु ने उनकी इस रणनीति का मजबूती से जवाब दिया। नेट के करीब तेजी से पहुंचने से लेकर बैक कोर्ट से आक्रामक शॉट खेलने तक भारतीय खिलाड़ी का संतुलन पूरे मैच में बेहतर दिखाई दिया।
पहला गेम जीतने के बाद सिंधु ने दूसरे गेम में जल्दबाजी नहीं दिखाई। यामागुची की वापसी की कोशिशों के बीच उन्होंने अपनी रणनीति पर भरोसा बनाए रखा। स्कोर के महत्वपूर्ण मोड़ पर सिंधु ने लगातार दबाव बनाया और अंतिम अंकों में मुकाबले को अपने नियंत्रण से बाहर नहीं जाने दिया। 21-17 से दूसरा गेम जीतते ही सिंधु ने सीधे गेम में फाइनल अपने नाम कर इतिहास रच दिया।
इस खिताब के साथ सिंधु के करियर में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है। ओलिंपिक में दो पदक, विश्व चैंपियनशिप का स्वर्ण और कई बड़े अंतरराष्ट्रीय खिताब जीत चुकीं सिंधु अब जापान ओपन चैंपियन भी बन गई हैं। भारतीय महिला बैडमिंटन में इससे पहले कोई खिलाड़ी इस टूर्नामेंट का सिंगल्स खिताब नहीं जीत सकी थी।
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