रूस ने पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ को बनाया आर्बिट्रेटर, यूक्रेनी बैंक का मामला

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ओशचाडबैंक ने रूस के खिलाफ निवेश विवाद शुरू किया है; तीन सदस्यीय ट्रिब्यूनल में रूस की ओर से चंद्रचूड़ की नियुक्ति, पहले दो मामलों में भूमिका से कर चुके थे इनकार

भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को रूस ने यूक्रेन के सरकारी बैंक ओशचाडबैंक से जुड़े अंतरराष्ट्रीय निवेश विवाद में अपना आर्बिट्रेटर नियुक्त किया है। मामला यूक्रेन के उन इलाकों में बैंक की संपत्तियों और कारोबार से जुड़ा है, जिन पर रूस की सैन्य कार्रवाई का असर पड़ा है। ओशचाडबैंक का दावा है कि डोनेट्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया क्षेत्रों में उसकी संपत्तियों और संचालन को नुकसान पहुंचा या वह इन्हें गंवा बैठा। बैंक की ओर से रूस के खिलाफ यह मामला यूक्रेन-रूस निवेश समझौते के तहत शुरू किया गया है।

इस मामले में तीन सदस्यीय आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल बनाया जा रहा है। कोस्टा रिका की पूर्व व्यापार मंत्री और आर्बिट्रेटर ड्याला जिमेनेज को रूस और ओशचाडबैंक ने संयुक्त रूप से ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता के लिए चुना है। वहीं, ओशचाडबैंक की तरफ से ग्रीक आर्बिट्रेटर और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के प्रोफेसर स्टावरोस ब्रेकौलाकिस को नामित किया गया है। रूस की तरफ से डीवाई चंद्रचूड़ की नियुक्ति इसी तीन सदस्यीय पैनल में हुई है।

ओशचाडबैंक ने अप्रैल 2026 में इस नए अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन की औपचारिक शुरुआत की थी। बैंक के मुताबिक उसने 24 जुलाई 2025 को रूस को विवाद संबंधी नोटिस भेजा था, लेकिन जवाब नहीं मिलने के बाद अप्रैल में आर्बिट्रेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। बैंक ने अपनी शिकायत में चार यूक्रेनी क्षेत्रों में संपत्तियों और कारोबार को हुए नुकसान का मुद्दा उठाया है। मामला 1998 के यूक्रेन-रूस द्विपक्षीय निवेश समझौते के तहत चल रहा है। दावे की रकम सैकड़ों मिलियन डॉलर बताई जा रही है।

डीवाई चंद्रचूड़ की नियुक्ति इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इससे पहले रूस ने उन्हें दो अलग निवेश विवादों में अपनी ओर से आर्बिट्रेटर बनने के लिए संपर्क किया था। रिपोर्टों के मुताबिक ये मामले जर्मन ऊर्जा कंपनी Wintershall Dea और यूक्रेनी ऊर्जा कंपनी Ukrenergo से जुड़े थे। उस समय चंद्रचूड़ ने रूस की ओर से आर्बिट्रेटर बनने के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था। उन्होंने इन संपर्कों की जानकारी भी संबंधित प्रक्रिया में साझा की थी और बाद में एक मामले में अपनी भूमिका से हट गए थे।

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मौजूदा मामले में स्थिति अलग है। इस बार पूर्व CJI ने रूस की ओर से ट्रिब्यूनल के सदस्य के तौर पर नियुक्ति स्वीकार की है। आर्बिट्रेटर की भूमिका किसी देश के पक्ष में न्यायिक फैसला सुनाने जैसी नहीं होती। तीन सदस्यीय ट्रिब्यूनल दोनों पक्षों की दलीलें, दस्तावेज और संबंधित निवेश संधि के प्रावधानों को देखकर विवाद पर निर्णय की प्रक्रिया आगे बढ़ाता है। इसलिए चंद्रचूड़ की नियुक्ति को रूस के पक्ष में किसी फैसले के रूप में देखना अभी सही नहीं होगा।

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ओशचाडबैंक यूक्रेन का सरकारी स्वामित्व वाला प्रमुख बैंक है और रूस के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कानूनी कार्रवाई में पहले भी सक्रिय रहा है। फरवरी 2026 में बैंक ने बताया था कि उसे क्रीमिया में संपत्तियों के कथित अधिग्रहण को लेकर रूस के खिलाफ एक अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन मामले में 1.1 अरब डॉलर से ज्यादा की वसूली का अंतिम फैसला मिला था। ब्याज जोड़ने के बाद बैंक का दावा 1.3 अरब डॉलर से ज्यादा बताया गया था।

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नया विवाद हालांकि क्रीमिया वाले पुराने मामले से अलग है। इसमें डोनेट्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया क्षेत्रों में बैंक की संपत्तियों और कारोबार पर हुए कथित नुकसान को आधार बनाया गया है। ओशचाडबैंक का कहना है कि रूस की सैन्य कार्रवाई के कारण उसे इन इलाकों में अपनी महत्वपूर्ण संपत्तियों और संचालन का नुकसान उठाना पड़ा। रूस ने इन दावों पर क्या विस्तृत कानूनी जवाब दिया है, इस पर फिलहाल सार्वजनिक तौर पर सीमित जानकारी उपलब्ध है।

इस मामले का कानूनी आधार भी महत्वपूर्ण है। द्विपक्षीय निवेश संधियां आम तौर पर दूसरे देश में निवेश करने वाले निवेशकों को कुछ परिस्थितियों में अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन का रास्ता देती हैं। ऐसे मामलों में ट्रिब्यूनल यह देखता है कि निवेश संधि के तहत दावे सुनने का अधिकार बनता है या नहीं और संबंधित पक्षों ने संधि में तय दायित्वों का पालन किया या नहीं। ओशचाडबैंक का नया मामला इसी निवेश संधि के प्रावधानों के तहत आगे बढ़ रहा है।

पूर्व CJI चंद्रचूड़ के लिए भी यह नियुक्ति उनके न्यायिक कार्यकाल के बाद अंतरराष्ट्रीय कानून और आर्बिट्रेशन से जुड़ी भूमिका का एक अहम उदाहरण है। जून 2026 में लंदन इंटरनेशनल डिस्प्यूट्स वीक के दौरान उन्होंने आर्बिट्रेशन व्यवस्था और भारतीय अदालतों की भूमिका पर भी बात की थी। उन्होंने कहा था कि भारतीय अदालतों का रुख अब आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल की स्वायत्तता को समर्थन देने की दिशा में अधिक परिपक्व हुआ है।

अब ओशचाडबैंक के मामले में ट्रिब्यूनल के तीनों सदस्यों के नाम तय हो चुके हैं। रूस की ओर से डीवाई चंद्रचूड़, बैंक की ओर से स्टावरोस ब्रेकौलाकिस और दोनों पक्षों की सहमति से ड्याला जिमेनेज ट्रिब्यूनल में शामिल हैं। आगे की कार्यवाही में दावों, अधिकार क्षेत्र और नुकसान की रकम से जुड़े दस्तावेजों पर सुनवाई होगी। ओशचाडबैंक की ओर से इस मामले में Quinn Emanuel Urquhart & Sullivan और Asters के वकील पैरवी कर रहे हैं, जबकि रूस की कानूनी टीम में Pinna Goldberg के वकील शामिल हैं।

www.dainikjagranmpcg.com
12 Aug 2026 By Priyanka

रूस ने पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ को बनाया आर्बिट्रेटर, यूक्रेनी बैंक का मामला

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भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को रूस ने यूक्रेन के सरकारी बैंक ओशचाडबैंक से जुड़े अंतरराष्ट्रीय निवेश विवाद में अपना आर्बिट्रेटर नियुक्त किया है। मामला यूक्रेन के उन इलाकों में बैंक की संपत्तियों और कारोबार से जुड़ा है, जिन पर रूस की सैन्य कार्रवाई का असर पड़ा है। ओशचाडबैंक का दावा है कि डोनेट्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया क्षेत्रों में उसकी संपत्तियों और संचालन को नुकसान पहुंचा या वह इन्हें गंवा बैठा। बैंक की ओर से रूस के खिलाफ यह मामला यूक्रेन-रूस निवेश समझौते के तहत शुरू किया गया है।

इस मामले में तीन सदस्यीय आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल बनाया जा रहा है। कोस्टा रिका की पूर्व व्यापार मंत्री और आर्बिट्रेटर ड्याला जिमेनेज को रूस और ओशचाडबैंक ने संयुक्त रूप से ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता के लिए चुना है। वहीं, ओशचाडबैंक की तरफ से ग्रीक आर्बिट्रेटर और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के प्रोफेसर स्टावरोस ब्रेकौलाकिस को नामित किया गया है। रूस की तरफ से डीवाई चंद्रचूड़ की नियुक्ति इसी तीन सदस्यीय पैनल में हुई है।

ओशचाडबैंक ने अप्रैल 2026 में इस नए अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन की औपचारिक शुरुआत की थी। बैंक के मुताबिक उसने 24 जुलाई 2025 को रूस को विवाद संबंधी नोटिस भेजा था, लेकिन जवाब नहीं मिलने के बाद अप्रैल में आर्बिट्रेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। बैंक ने अपनी शिकायत में चार यूक्रेनी क्षेत्रों में संपत्तियों और कारोबार को हुए नुकसान का मुद्दा उठाया है। मामला 1998 के यूक्रेन-रूस द्विपक्षीय निवेश समझौते के तहत चल रहा है। दावे की रकम सैकड़ों मिलियन डॉलर बताई जा रही है।

डीवाई चंद्रचूड़ की नियुक्ति इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इससे पहले रूस ने उन्हें दो अलग निवेश विवादों में अपनी ओर से आर्बिट्रेटर बनने के लिए संपर्क किया था। रिपोर्टों के मुताबिक ये मामले जर्मन ऊर्जा कंपनी Wintershall Dea और यूक्रेनी ऊर्जा कंपनी Ukrenergo से जुड़े थे। उस समय चंद्रचूड़ ने रूस की ओर से आर्बिट्रेटर बनने के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था। उन्होंने इन संपर्कों की जानकारी भी संबंधित प्रक्रिया में साझा की थी और बाद में एक मामले में अपनी भूमिका से हट गए थे।

मौजूदा मामले में स्थिति अलग है। इस बार पूर्व CJI ने रूस की ओर से ट्रिब्यूनल के सदस्य के तौर पर नियुक्ति स्वीकार की है। आर्बिट्रेटर की भूमिका किसी देश के पक्ष में न्यायिक फैसला सुनाने जैसी नहीं होती। तीन सदस्यीय ट्रिब्यूनल दोनों पक्षों की दलीलें, दस्तावेज और संबंधित निवेश संधि के प्रावधानों को देखकर विवाद पर निर्णय की प्रक्रिया आगे बढ़ाता है। इसलिए चंद्रचूड़ की नियुक्ति को रूस के पक्ष में किसी फैसले के रूप में देखना अभी सही नहीं होगा।

ओशचाडबैंक यूक्रेन का सरकारी स्वामित्व वाला प्रमुख बैंक है और रूस के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कानूनी कार्रवाई में पहले भी सक्रिय रहा है। फरवरी 2026 में बैंक ने बताया था कि उसे क्रीमिया में संपत्तियों के कथित अधिग्रहण को लेकर रूस के खिलाफ एक अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन मामले में 1.1 अरब डॉलर से ज्यादा की वसूली का अंतिम फैसला मिला था। ब्याज जोड़ने के बाद बैंक का दावा 1.3 अरब डॉलर से ज्यादा बताया गया था।

नया विवाद हालांकि क्रीमिया वाले पुराने मामले से अलग है। इसमें डोनेट्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया क्षेत्रों में बैंक की संपत्तियों और कारोबार पर हुए कथित नुकसान को आधार बनाया गया है। ओशचाडबैंक का कहना है कि रूस की सैन्य कार्रवाई के कारण उसे इन इलाकों में अपनी महत्वपूर्ण संपत्तियों और संचालन का नुकसान उठाना पड़ा। रूस ने इन दावों पर क्या विस्तृत कानूनी जवाब दिया है, इस पर फिलहाल सार्वजनिक तौर पर सीमित जानकारी उपलब्ध है।

इस मामले का कानूनी आधार भी महत्वपूर्ण है। द्विपक्षीय निवेश संधियां आम तौर पर दूसरे देश में निवेश करने वाले निवेशकों को कुछ परिस्थितियों में अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन का रास्ता देती हैं। ऐसे मामलों में ट्रिब्यूनल यह देखता है कि निवेश संधि के तहत दावे सुनने का अधिकार बनता है या नहीं और संबंधित पक्षों ने संधि में तय दायित्वों का पालन किया या नहीं। ओशचाडबैंक का नया मामला इसी निवेश संधि के प्रावधानों के तहत आगे बढ़ रहा है।

पूर्व CJI चंद्रचूड़ के लिए भी यह नियुक्ति उनके न्यायिक कार्यकाल के बाद अंतरराष्ट्रीय कानून और आर्बिट्रेशन से जुड़ी भूमिका का एक अहम उदाहरण है। जून 2026 में लंदन इंटरनेशनल डिस्प्यूट्स वीक के दौरान उन्होंने आर्बिट्रेशन व्यवस्था और भारतीय अदालतों की भूमिका पर भी बात की थी। उन्होंने कहा था कि भारतीय अदालतों का रुख अब आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल की स्वायत्तता को समर्थन देने की दिशा में अधिक परिपक्व हुआ है।

अब ओशचाडबैंक के मामले में ट्रिब्यूनल के तीनों सदस्यों के नाम तय हो चुके हैं। रूस की ओर से डीवाई चंद्रचूड़, बैंक की ओर से स्टावरोस ब्रेकौलाकिस और दोनों पक्षों की सहमति से ड्याला जिमेनेज ट्रिब्यूनल में शामिल हैं। आगे की कार्यवाही में दावों, अधिकार क्षेत्र और नुकसान की रकम से जुड़े दस्तावेजों पर सुनवाई होगी। ओशचाडबैंक की ओर से इस मामले में Quinn Emanuel Urquhart & Sullivan और Asters के वकील पैरवी कर रहे हैं, जबकि रूस की कानूनी टीम में Pinna Goldberg के वकील शामिल हैं।

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