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बाब अल-मंदेब में हूती हमला, 3 पाकिस्तानी नागरिकों की मौत
अंतराष्ट्रीय न्यूज
वाणिज्यिक जहाज पर हमले में छह लोगों की जान गई, एक पाकिस्तानी घायल; सऊदी अरब और यमन के संपर्क में इस्लामाबाद, ईरान को लेकर सीधा आरोप लगाने से बचा
पाकिस्तान ने लाल सागर में वाणिज्यिक जहाज को निशाना बनाकर किए गए हूती हमले पर कड़ा विरोध जताया है। मंगलवार को बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास हुए इस हमले में छह लोगों की मौत बताई गई है, जिनमें तीन पाकिस्तानी नागरिक शामिल हैं। एक अन्य पाकिस्तानी नागरिक घायल हुआ है। घटना के बाद इस्लामाबाद में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि बाब अल-मंदेब अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए बेहद अहम रास्ता है और इस इलाके में किसी भी नए हमले का असर जहाजों की आवाजाही पर पड़ सकता है। पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने बुधवार को हमले की निंदा करते हुए इसे समुद्री सुरक्षा और स्वतंत्र नौवहन के लिए गंभीर खतरा बताया।
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, सरकार मृतकों के शव स्वदेश लाने और घायल नागरिक को जरूरी सहायता उपलब्ध कराने के लिए सऊदी अधिकारियों तथा यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के संपर्क में है। इस मामले में पाकिस्तान ने वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया है। हालांकि, इस्लामाबाद ने हमले के लिए सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहराने से परहेज किया है। हूती आंदोलन को ईरान का समर्थन हासिल है और इसी वजह से घटना का कूटनीतिक पहलू भी पाकिस्तान के लिए संवेदनशील माना जा रहा है।
यह हमला ऐसे समय हुआ है जब पाकिस्तान सऊदी अरब के साथ अपने सुरक्षा संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। कुछ ही दिन पहले पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच मक्का समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। समझौते में तीनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को लेकर अहम प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत किसी एक देश पर हमला होने की स्थिति को साझा सुरक्षा के नजरिए से देखने की बात कही गई है। अब लाल सागर में पाकिस्तानी नागरिकों की मौत ने इस समझौते के सामने शुरुआती चुनौती जैसी स्थिति पैदा कर दी है।
पाकिस्तान के लिए मुश्किल यह भी है कि वह सऊदी अरब और तुर्की के साथ रणनीतिक रिश्ते बढ़ाते हुए ईरान के साथ अपने पुराने संबंधों को भी बनाए रखना चाहता है। क्षेत्रीय राजनीति में ईरान और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से प्रतिस्पर्धा रही है। पाकिस्तान दोनों देशों के साथ संपर्क बनाए रखने की कोशिश करता रहा है। ऐसे में हूती हमले में अपने नागरिकों की मौत के बाद इस्लामाबाद का बयान संतुलित रहा। उसने हमले की आलोचना की, लेकिन तेहरान पर सीधा निशाना नहीं साधा।
बाब अल-मंदेब की भौगोलिक स्थिति इस पूरे घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बनाती है। यह संकरा समुद्री रास्ता लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और एशिया, यूरोप तथा मध्य पूर्व के बीच सामान और ऊर्जा की आवाजाही के लिए प्रमुख मार्गों में गिना जाता है। यहां जहाजों की सुरक्षा को लेकर खतरा बढ़ने पर कंपनियों को वैकल्पिक लंबे समुद्री रास्ते अपनाने पड़ सकते हैं। इससे परिवहन समय और लागत दोनों बढ़ने की आशंका रहती है।
लाल सागर में हूती हमलों को लेकर पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई जाती रही है। यमन में चल रहे संघर्ष और क्षेत्रीय तनाव के कारण इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा पहले से संवेदनशील रही है। हाल की घटनाओं ने फिर यह सवाल खड़ा किया है कि अगर हमले लगातार जारी रहते हैं तो वैश्विक शिपिंग नेटवर्क पर इसका कितना असर पड़ेगा। खासकर ऐसे समय जब खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा और समुद्री परिवहन से जुड़ी परिस्थितियां पहले ही दबाव में हैं।
बाब अल-मंदेब पर बढ़ता खतरा खाड़ी से निकलने वाले ऊर्जा उत्पादों और दूसरे माल की आवाजाही के लिए भी अहम है। यह रास्ता यूरोप की ओर जाने वाले कई समुद्री मार्गों का हिस्सा है। अगर जहाजों को हमले के डर से रास्ता बदलना पड़ता है तो उन्हें अफ्रीका के दक्षिणी छोर यानी केप ऑफ गुड होप के रास्ते जाना पड़ सकता है। इससे सफर कई दिनों तक लंबा हो सकता है और ईंधन की खपत भी बढ़ती है।
यमन के भीतर भी सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंता बनी हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक हालिया हिंसा में सरकारी बलों और आम नागरिकों को नुकसान पहुंचा है। मोखा के आसपास का इलाका भी संघर्ष से प्रभावित बताया जा रहा है। 2022 में संघर्षविराम के बाद यमन में व्यापक स्तर पर युद्ध की स्थिति में कुछ कमी आई थी, लेकिन अलग-अलग इलाकों में हिंसा और राजनीतिक तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।
पाकिस्तान के लिए फिलहाल सबसे तत्काल मुद्दा अपने नागरिकों के शवों की वापसी और घायल व्यक्ति की सहायता है। विदेश मंत्री इशाक डार ने संबंधित देशों के साथ समन्वय की जानकारी दी है। घटना के बाद पाकिस्तान की सुरक्षा और विदेश नीति पर भी नजर है, क्योंकि एक तरफ सऊदी अरब के साथ नए सुरक्षा समीकरण बन रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान के साथ सीधे टकराव से बचना इस्लामाबाद की प्राथमिकताओं में रहा है।
लाल सागर की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों की नजर बनी हुई है। बाब अल-मंदेब जैसे अहम समुद्री मार्ग पर किसी भी लंबे व्यवधान का असर सिर्फ संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि माल ढुलाई, बीमा, ईंधन और वैश्विक सप्लाई चेन तक पहुंच सकता है। इसी वजह से पाकिस्तान के तीन नागरिकों की मौत से जुड़ा यह हमला अब केवल एक स्थानीय सुरक्षा घटना नहीं रह गया है और इसके कूटनीतिक तथा समुद्री सुरक्षा प्रभावों पर भी चर्चा तेज हो गई है।
बाब अल-मंदेब में हूती हमला, 3 पाकिस्तानी नागरिकों की मौत
अंतराष्ट्रीय न्यूज
पाकिस्तान ने लाल सागर में वाणिज्यिक जहाज को निशाना बनाकर किए गए हूती हमले पर कड़ा विरोध जताया है। मंगलवार को बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास हुए इस हमले में छह लोगों की मौत बताई गई है, जिनमें तीन पाकिस्तानी नागरिक शामिल हैं। एक अन्य पाकिस्तानी नागरिक घायल हुआ है। घटना के बाद इस्लामाबाद में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि बाब अल-मंदेब अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए बेहद अहम रास्ता है और इस इलाके में किसी भी नए हमले का असर जहाजों की आवाजाही पर पड़ सकता है। पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने बुधवार को हमले की निंदा करते हुए इसे समुद्री सुरक्षा और स्वतंत्र नौवहन के लिए गंभीर खतरा बताया।
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, सरकार मृतकों के शव स्वदेश लाने और घायल नागरिक को जरूरी सहायता उपलब्ध कराने के लिए सऊदी अधिकारियों तथा यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के संपर्क में है। इस मामले में पाकिस्तान ने वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया है। हालांकि, इस्लामाबाद ने हमले के लिए सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहराने से परहेज किया है। हूती आंदोलन को ईरान का समर्थन हासिल है और इसी वजह से घटना का कूटनीतिक पहलू भी पाकिस्तान के लिए संवेदनशील माना जा रहा है।
यह हमला ऐसे समय हुआ है जब पाकिस्तान सऊदी अरब के साथ अपने सुरक्षा संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। कुछ ही दिन पहले पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच मक्का समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। समझौते में तीनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को लेकर अहम प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत किसी एक देश पर हमला होने की स्थिति को साझा सुरक्षा के नजरिए से देखने की बात कही गई है। अब लाल सागर में पाकिस्तानी नागरिकों की मौत ने इस समझौते के सामने शुरुआती चुनौती जैसी स्थिति पैदा कर दी है।
पाकिस्तान के लिए मुश्किल यह भी है कि वह सऊदी अरब और तुर्की के साथ रणनीतिक रिश्ते बढ़ाते हुए ईरान के साथ अपने पुराने संबंधों को भी बनाए रखना चाहता है। क्षेत्रीय राजनीति में ईरान और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से प्रतिस्पर्धा रही है। पाकिस्तान दोनों देशों के साथ संपर्क बनाए रखने की कोशिश करता रहा है। ऐसे में हूती हमले में अपने नागरिकों की मौत के बाद इस्लामाबाद का बयान संतुलित रहा। उसने हमले की आलोचना की, लेकिन तेहरान पर सीधा निशाना नहीं साधा।
बाब अल-मंदेब की भौगोलिक स्थिति इस पूरे घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बनाती है। यह संकरा समुद्री रास्ता लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और एशिया, यूरोप तथा मध्य पूर्व के बीच सामान और ऊर्जा की आवाजाही के लिए प्रमुख मार्गों में गिना जाता है। यहां जहाजों की सुरक्षा को लेकर खतरा बढ़ने पर कंपनियों को वैकल्पिक लंबे समुद्री रास्ते अपनाने पड़ सकते हैं। इससे परिवहन समय और लागत दोनों बढ़ने की आशंका रहती है।
लाल सागर में हूती हमलों को लेकर पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई जाती रही है। यमन में चल रहे संघर्ष और क्षेत्रीय तनाव के कारण इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा पहले से संवेदनशील रही है। हाल की घटनाओं ने फिर यह सवाल खड़ा किया है कि अगर हमले लगातार जारी रहते हैं तो वैश्विक शिपिंग नेटवर्क पर इसका कितना असर पड़ेगा। खासकर ऐसे समय जब खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा और समुद्री परिवहन से जुड़ी परिस्थितियां पहले ही दबाव में हैं।
बाब अल-मंदेब पर बढ़ता खतरा खाड़ी से निकलने वाले ऊर्जा उत्पादों और दूसरे माल की आवाजाही के लिए भी अहम है। यह रास्ता यूरोप की ओर जाने वाले कई समुद्री मार्गों का हिस्सा है। अगर जहाजों को हमले के डर से रास्ता बदलना पड़ता है तो उन्हें अफ्रीका के दक्षिणी छोर यानी केप ऑफ गुड होप के रास्ते जाना पड़ सकता है। इससे सफर कई दिनों तक लंबा हो सकता है और ईंधन की खपत भी बढ़ती है।
यमन के भीतर भी सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंता बनी हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक हालिया हिंसा में सरकारी बलों और आम नागरिकों को नुकसान पहुंचा है। मोखा के आसपास का इलाका भी संघर्ष से प्रभावित बताया जा रहा है। 2022 में संघर्षविराम के बाद यमन में व्यापक स्तर पर युद्ध की स्थिति में कुछ कमी आई थी, लेकिन अलग-अलग इलाकों में हिंसा और राजनीतिक तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।
पाकिस्तान के लिए फिलहाल सबसे तत्काल मुद्दा अपने नागरिकों के शवों की वापसी और घायल व्यक्ति की सहायता है। विदेश मंत्री इशाक डार ने संबंधित देशों के साथ समन्वय की जानकारी दी है। घटना के बाद पाकिस्तान की सुरक्षा और विदेश नीति पर भी नजर है, क्योंकि एक तरफ सऊदी अरब के साथ नए सुरक्षा समीकरण बन रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान के साथ सीधे टकराव से बचना इस्लामाबाद की प्राथमिकताओं में रहा है।
लाल सागर की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों की नजर बनी हुई है। बाब अल-मंदेब जैसे अहम समुद्री मार्ग पर किसी भी लंबे व्यवधान का असर सिर्फ संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि माल ढुलाई, बीमा, ईंधन और वैश्विक सप्लाई चेन तक पहुंच सकता है। इसी वजह से पाकिस्तान के तीन नागरिकों की मौत से जुड़ा यह हमला अब केवल एक स्थानीय सुरक्षा घटना नहीं रह गया है और इसके कूटनीतिक तथा समुद्री सुरक्षा प्रभावों पर भी चर्चा तेज हो गई है।
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