राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद की दौड़ में 18 नाम, 5200 आवेदन

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अयोध्या में शुरू हुआ अंतिम चरण का इंटरव्यू, पूर्व IAS-IPS और सैन्य अधिकारियों समेत कई अनुभवी उम्मीदवार मैदान में; चयन समिति ट्रस्ट को देगी नाम

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति प्रक्रिया अब अंतिम दौर में पहुंच गई है। करीब 5,200 आवेदनों की शुरुआती छंटनी के बाद 18 उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए चुना गया है। अयोध्या में 11 अगस्त से इन उम्मीदवारों के साक्षात्कार शुरू हुए और ट्रस्ट की ओर से ऐसे व्यक्ति की तलाश की जा रही है, जो मंदिर से जुड़े बढ़ते प्रशासनिक, वित्तीय और संचालन संबंधी कामकाज को पेशेवर तरीके से संभाल सके। इससे पहले बड़ी संख्या में आवेदन आने के कारण चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए अतिरिक्त समय लिया गया था।

शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों में प्रशासनिक सेवा, पुलिस, सेना और मंदिर प्रबंधन का अनुभव रखने वाले लोग शामिल हैं। रिपोर्टों के मुताबिक सूची में तीन पूर्व IAS अधिकारी, एक पूर्व IPS अधिकारी और चार सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी हैं। दक्षिण भारत के कुछ बड़े मंदिरों में प्रशासनिक जिम्मेदारी संभाल चुके अधिकारियों को भी इस पद के लिए दावेदार माना जा रहा है। पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडेय और अयोध्या के पूर्व जिलाधिकारी दिनेश चंद्र के नाम भी चर्चा में हैं। हालांकि अंतिम चयन ट्रस्ट करेगा और अभी किसी एक नाम को तय नहीं माना जा सकता।

CEO के लिए आवेदन प्रक्रिया जुलाई में शुरू हुई थी। ट्रस्ट ने पद के लिए प्रशासनिक और प्रबंधन का लंबा अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने की बात रखी थी। उम्र, शैक्षणिक योग्यता और काम के अनुभव के साथ धार्मिक आस्था से जुड़े कुछ मानदंड भी सामने आए थे। आवेदन की अंतिम तारीख 18 जुलाई रखी गई थी। शुरुआती दिनों में ही एक हजार से ज्यादा आवेदन पहुंच गए थे और बाद में कुल संख्या करीब 5,200 तक पहुंची। इतनी बड़ी संख्या में आवेदन आने के कारण स्क्रीनिंग में अपेक्षा से ज्यादा समय लगा।

अयोध्या में चल रहे इंटरव्यू को लेकर भी काफी चर्चा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उम्मीदवारों से उनके प्रशासनिक अनुभव और मंदिर के भविष्य को लेकर सोच के अलावा व्यक्तिगत और धार्मिक आचरण से जुड़े सवाल भी पूछे गए। इनमें जनेऊ धारण करने, शराब के सेवन और शाकाहारी या मांसाहारी भोजन से जुड़े सवाल शामिल बताए जा रहे हैं। उम्मीदवारों से यह भी पूछा गया कि अगर उन्हें यह जिम्मेदारी मिलती है तो वे मंदिर की व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और प्रशासनिक कामकाज को किस तरह आगे ले जाएंगे।

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यह पद सामान्य सरकारी नौकरी से अलग इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि CEO को एक ऐसे संस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था देखनी होगी जहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर परिसर के साथ-साथ श्रद्धालुओं की आवाजाही, सुविधाएं, कर्मचारियों का प्रबंधन, दान से जुड़ी व्यवस्था, सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय और अलग-अलग परियोजनाओं की निगरानी जैसे काम भी महत्वपूर्ण होंगे। राम मंदिर के निर्माण और उससे जुड़े दूसरे विकास कार्यों के आगे बढ़ने के साथ ट्रस्ट की प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी बढ़ी हैं।

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CEO पद के लिए पेशेवर प्रशासनिक व्यवस्था की जरूरत की चर्चा ऐसे समय में तेज हुई जब मंदिर ट्रस्ट की दान व्यवस्था को लेकर विवाद सामने आया। हाल के महीनों में दान की रकम से जुड़ी कथित चोरी और अनियमितताओं के आरोपों की जांच की खबरें आई हैं। ट्रस्ट ने इस पूरे मामले को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था की समीक्षा भी की है। इसी पृष्ठभूमि में एक पूर्णकालिक CEO नियुक्त करने की प्रक्रिया को ट्रस्ट के कामकाज में बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि किसी उम्मीदवार को इन आरोपों या जांच से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा।

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ट्रस्ट की ओर से पहले ही तीन सदस्यीय चयन समिति बनाई गई थी। समिति का काम आवेदन देखना, उम्मीदवारों की योग्यता की जांच करना और अंतिम चरण के लिए नामों की सिफारिश करना है। रिपोर्टों के मुताबिक इंटरव्यू पूरा होने के बाद समिति तीन नाम ट्रस्ट के सामने रख सकती है। इन नामों में से अंतिम उम्मीदवार का चयन ट्रस्ट की ओर से किया जाएगा। यानी 18 उम्मीदवारों का इंटरव्यू खत्म होने के बाद भी प्रक्रिया का एक और अहम चरण बाकी रहेगा।

इस पद के लिए सिर्फ सरकारी सेवा से जुड़े लोगों पर निर्भर नहीं रहा गया है। मंदिर प्रशासन का अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों को भी मौका दिया गया है। इसका एक कारण यह है कि राम मंदिर की व्यवस्था में धार्मिक परंपराओं के साथ आधुनिक प्रशासनिक जरूरतों का संतुलन भी जरूरी माना जा रहा है। बड़े मंदिर परिसरों में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या, दान की निगरानी, कर्मचारियों की जिम्मेदारियां और रोजमर्रा की सेवाओं के संचालन के लिए अलग-अलग स्तर पर विशेषज्ञता की जरूरत पड़ती है।

ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था में CEO की भूमिका कितनी व्यापक होगी, यह भी चयन के बाद स्पष्ट होगा। पहले की रिपोर्टों में ट्रस्ट के भीतर इस बात पर चर्चा का उल्लेख किया गया था कि नए CEO को कितनी जिम्मेदारियां और अधिकार दिए जाएं। ऐसे में चयनित व्यक्ति की भूमिका सिर्फ कार्यालयी कामकाज तक सीमित रहेगी या मंदिर से जुड़ी कई बड़ी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी भी उसे मिलेगी, इस पर भी नजर रहेगी।

अयोध्या में इंटरव्यू के लिए पहुंचे उम्मीदवारों में लंबे प्रशासनिक करियर वाले अधिकारियों की मौजूदगी ने इस भर्ती को और महत्वपूर्ण बना दिया है। 5,200 से अधिक आवेदनों से शुरू हुई प्रक्रिया अब 18 नामों तक पहुंच चुकी है। चयन समिति के सामने अब उम्मीदवारों के अनुभव, नेतृत्व क्षमता, धार्मिक-सांस्कृतिक समझ और मंदिर प्रशासन से जुड़ी जिम्मेदारियों को संभालने की क्षमता के आधार पर अंतिम नाम तय करने की चुनौती है।

www.dainikjagranmpcg.com
12 Aug 2026 By Priyanka

राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद की दौड़ में 18 नाम, 5200 आवेदन

भारत

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति प्रक्रिया अब अंतिम दौर में पहुंच गई है। करीब 5,200 आवेदनों की शुरुआती छंटनी के बाद 18 उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए चुना गया है। अयोध्या में 11 अगस्त से इन उम्मीदवारों के साक्षात्कार शुरू हुए और ट्रस्ट की ओर से ऐसे व्यक्ति की तलाश की जा रही है, जो मंदिर से जुड़े बढ़ते प्रशासनिक, वित्तीय और संचालन संबंधी कामकाज को पेशेवर तरीके से संभाल सके। इससे पहले बड़ी संख्या में आवेदन आने के कारण चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए अतिरिक्त समय लिया गया था।

शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों में प्रशासनिक सेवा, पुलिस, सेना और मंदिर प्रबंधन का अनुभव रखने वाले लोग शामिल हैं। रिपोर्टों के मुताबिक सूची में तीन पूर्व IAS अधिकारी, एक पूर्व IPS अधिकारी और चार सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी हैं। दक्षिण भारत के कुछ बड़े मंदिरों में प्रशासनिक जिम्मेदारी संभाल चुके अधिकारियों को भी इस पद के लिए दावेदार माना जा रहा है। पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडेय और अयोध्या के पूर्व जिलाधिकारी दिनेश चंद्र के नाम भी चर्चा में हैं। हालांकि अंतिम चयन ट्रस्ट करेगा और अभी किसी एक नाम को तय नहीं माना जा सकता।

CEO के लिए आवेदन प्रक्रिया जुलाई में शुरू हुई थी। ट्रस्ट ने पद के लिए प्रशासनिक और प्रबंधन का लंबा अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने की बात रखी थी। उम्र, शैक्षणिक योग्यता और काम के अनुभव के साथ धार्मिक आस्था से जुड़े कुछ मानदंड भी सामने आए थे। आवेदन की अंतिम तारीख 18 जुलाई रखी गई थी। शुरुआती दिनों में ही एक हजार से ज्यादा आवेदन पहुंच गए थे और बाद में कुल संख्या करीब 5,200 तक पहुंची। इतनी बड़ी संख्या में आवेदन आने के कारण स्क्रीनिंग में अपेक्षा से ज्यादा समय लगा।

अयोध्या में चल रहे इंटरव्यू को लेकर भी काफी चर्चा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उम्मीदवारों से उनके प्रशासनिक अनुभव और मंदिर के भविष्य को लेकर सोच के अलावा व्यक्तिगत और धार्मिक आचरण से जुड़े सवाल भी पूछे गए। इनमें जनेऊ धारण करने, शराब के सेवन और शाकाहारी या मांसाहारी भोजन से जुड़े सवाल शामिल बताए जा रहे हैं। उम्मीदवारों से यह भी पूछा गया कि अगर उन्हें यह जिम्मेदारी मिलती है तो वे मंदिर की व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और प्रशासनिक कामकाज को किस तरह आगे ले जाएंगे।

यह पद सामान्य सरकारी नौकरी से अलग इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि CEO को एक ऐसे संस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था देखनी होगी जहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर परिसर के साथ-साथ श्रद्धालुओं की आवाजाही, सुविधाएं, कर्मचारियों का प्रबंधन, दान से जुड़ी व्यवस्था, सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय और अलग-अलग परियोजनाओं की निगरानी जैसे काम भी महत्वपूर्ण होंगे। राम मंदिर के निर्माण और उससे जुड़े दूसरे विकास कार्यों के आगे बढ़ने के साथ ट्रस्ट की प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी बढ़ी हैं।

CEO पद के लिए पेशेवर प्रशासनिक व्यवस्था की जरूरत की चर्चा ऐसे समय में तेज हुई जब मंदिर ट्रस्ट की दान व्यवस्था को लेकर विवाद सामने आया। हाल के महीनों में दान की रकम से जुड़ी कथित चोरी और अनियमितताओं के आरोपों की जांच की खबरें आई हैं। ट्रस्ट ने इस पूरे मामले को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था की समीक्षा भी की है। इसी पृष्ठभूमि में एक पूर्णकालिक CEO नियुक्त करने की प्रक्रिया को ट्रस्ट के कामकाज में बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि किसी उम्मीदवार को इन आरोपों या जांच से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा।

ट्रस्ट की ओर से पहले ही तीन सदस्यीय चयन समिति बनाई गई थी। समिति का काम आवेदन देखना, उम्मीदवारों की योग्यता की जांच करना और अंतिम चरण के लिए नामों की सिफारिश करना है। रिपोर्टों के मुताबिक इंटरव्यू पूरा होने के बाद समिति तीन नाम ट्रस्ट के सामने रख सकती है। इन नामों में से अंतिम उम्मीदवार का चयन ट्रस्ट की ओर से किया जाएगा। यानी 18 उम्मीदवारों का इंटरव्यू खत्म होने के बाद भी प्रक्रिया का एक और अहम चरण बाकी रहेगा।

इस पद के लिए सिर्फ सरकारी सेवा से जुड़े लोगों पर निर्भर नहीं रहा गया है। मंदिर प्रशासन का अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों को भी मौका दिया गया है। इसका एक कारण यह है कि राम मंदिर की व्यवस्था में धार्मिक परंपराओं के साथ आधुनिक प्रशासनिक जरूरतों का संतुलन भी जरूरी माना जा रहा है। बड़े मंदिर परिसरों में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या, दान की निगरानी, कर्मचारियों की जिम्मेदारियां और रोजमर्रा की सेवाओं के संचालन के लिए अलग-अलग स्तर पर विशेषज्ञता की जरूरत पड़ती है।

ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था में CEO की भूमिका कितनी व्यापक होगी, यह भी चयन के बाद स्पष्ट होगा। पहले की रिपोर्टों में ट्रस्ट के भीतर इस बात पर चर्चा का उल्लेख किया गया था कि नए CEO को कितनी जिम्मेदारियां और अधिकार दिए जाएं। ऐसे में चयनित व्यक्ति की भूमिका सिर्फ कार्यालयी कामकाज तक सीमित रहेगी या मंदिर से जुड़ी कई बड़ी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी भी उसे मिलेगी, इस पर भी नजर रहेगी।

अयोध्या में इंटरव्यू के लिए पहुंचे उम्मीदवारों में लंबे प्रशासनिक करियर वाले अधिकारियों की मौजूदगी ने इस भर्ती को और महत्वपूर्ण बना दिया है। 5,200 से अधिक आवेदनों से शुरू हुई प्रक्रिया अब 18 नामों तक पहुंच चुकी है। चयन समिति के सामने अब उम्मीदवारों के अनुभव, नेतृत्व क्षमता, धार्मिक-सांस्कृतिक समझ और मंदिर प्रशासन से जुड़ी जिम्मेदारियों को संभालने की क्षमता के आधार पर अंतिम नाम तय करने की चुनौती है।

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