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ईरान युद्ध से बढ़ा हॉरमुज संकट, लाल सागर में हूती हमले से चिंता
अंतराष्ट्रीय न्यूज
हॉरमुज और बाब अल-मंदेब जैसे अहम समुद्री रास्तों पर बढ़ते हमलों से वैश्विक शिपिंग और तेल आपूर्ति पर दबाव, तेहरान ने अमेरिका की शर्तें पूरी होने तक जलडमरूमध्य खोलने से इनकार किया
ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध का असर अब समुद्री व्यापार पर और साफ दिखाई देने लगा है। मंगलवार को हॉरमुज के आसपास और लाल सागर के प्रवेश मार्ग बाब अल-मंदेब में वाणिज्यिक जहाजों से जुड़ी अलग-अलग घटनाओं ने तनाव बढ़ा दिया। ईरान की ओर से कहा गया है कि अमेरिका उसकी शर्तें स्वीकार नहीं करता है तो स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज को दोबारा सामान्य जहाजरानी के लिए नहीं खोला जाएगा। उधर, यमन के ईरान समर्थित हूती समूह पर बाब अल-मंदेब के पास एक वाणिज्यिक जहाज को निशाना बनाने का आरोप लगा है, जिसमें छह लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है।
हॉरमुज की स्थिति पहले से ही वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। यह जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है और दुनिया के प्रमुख तेल एवं गैस परिवहन मार्गों में शामिल है। यहां लंबे समय तक जहाजों की आवाजाही प्रभावित रहने का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों, समुद्री बीमा और माल ढुलाई पर पड़ सकता है। मंगलवार और बुधवार को तेल बाजार में भी इसका असर देखने को मिला। बाजार में यह आशंका बढ़ी कि अमेरिका और ईरान के बीच जल्द समझौता नहीं हुआ तो ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव और लंबा खिंच सकता है।
इसी बीच बाब अल-मंदेब में हुई घटना ने संकट का दूसरा मोर्चा खोल दिया है। यमन सरकार के अनुसार, मिसाइल हमले की चपेट में आए एक मिस्र के स्वामित्व वाले जहाज पर सवार लोगों में से चार क्रू सदस्यों की मौत हुई, जबकि दो यमनी बचावकर्मी भी मारे गए। इस हमले को हूती समूह से जोड़ा जा रहा है। यह घटना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ईरान-अमेरिका युद्ध शुरू होने के बाद वाणिज्यिक जहाज पर हमले में मौतों की यह पहली बड़ी रिपोर्ट बताई जा रही है।
हूती समूह और यमन में उसके विरोधी पक्ष की ओर से घटना को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। हूती नियंत्रित मीडिया ने दावा किया कि निशाना सऊदी जहाज था और वह सैन्य सामान ले जा रहा था। दूसरी तरफ जहाज की स्वतंत्र पहचान और हमले के पूरे घटनाक्रम को लेकर जांच जारी है। ऐसे में हमले की जिम्मेदारी से जुड़े दावों को अभी सावधानी से देखा जा रहा है। लेकिन इतना जरूर है कि बाब अल-मंदेब में दोबारा वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं।
अमेरिका ने भी मंगलवार को एक अलग समुद्री कार्रवाई की जानकारी दी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, अमेरिकी नौसेना के एक MH-60 हेलिकॉप्टर ने पनामा के झंडे वाले एक मालवाहक जहाज पर हमला किया। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि जहाज को कई चेतावनियां दी गई थीं और वह ईरान के बंदरगाहों पर लगाए गए अमेरिकी नौसैनिक प्रतिबंध का उल्लंघन कर रहा था। अमेरिकी सेना ने बताया कि जहाज के स्टीयरिंग सिस्टम को निशाना बनाकर उसकी आवाजाही रोक दी गई। घटना पाकिस्तान के पास बताई गई है, जहां से जहाज ओमान की खाड़ी की दिशा में जा रहा था।
इन घटनाओं के बीच ईरान ने हॉरमुज को लेकर अपना रुख और कड़ा कर दिया है। ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी मोहसेन रजाई ने कहा है कि अमेरिका को तेहरान की मांगें स्वीकार करनी होंगी, तभी जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर विचार किया जाएगा। ईरान की मांगों में विदेशों में फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी करना और क्षेत्र में चल रहे संघर्षों को खत्म करने से जुड़ी शर्तें शामिल बताई गई हैं। तेहरान का कहना है कि अमेरिका के रवैये में बदलाव के बिना हॉरमुज को खोलना संभव नहीं होगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प दूसरी ओर हॉरमुज को लेकर अलग रुख दिखा रहे हैं। ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिका के पास जलडमरूमध्य पर पूरा नियंत्रण है और ईरान को आगे की कार्रवाई के गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से बातचीत और समझौते की संभावना को लेकर भी बयान आते रहे हैं। यही विरोधाभासी संकेत बाजार और शिपिंग कंपनियों के लिए अनिश्चितता बढ़ा रहे हैं।
हॉरमुज संकट का असर सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं है। इस रास्ते से बड़ी मात्रा में तेल और एलएनजी का अंतरराष्ट्रीय व्यापार होता है। यदि जहाजों को लंबे समय तक इस मार्ग से बचना पड़ता है तो ऊर्जा कंपनियों को वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ेगा। इसका मतलब लंबी दूरी, ज्यादा ईंधन खर्च और बढ़ी हुई बीमा लागत हो सकता है। दूसरी ओर बाब अल-मंदेब में खतरा बढ़ने से एशिया और यूरोप के बीच लाल सागर तथा स्वेज नहर के रास्ते से होने वाला व्यापार भी प्रभावित हो सकता है।
दोनों समुद्री मार्गों पर एक साथ दबाव बनने से वैश्विक सप्लाई चेन के लिए स्थिति और मुश्किल हो सकती है। पहले भी लाल सागर में हूती हमलों के दौरान कई शिपिंग कंपनियों ने जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी हिस्से से घुमाकर भेजना शुरू किया था। इससे यात्रा का समय और लागत दोनों बढ़े थे। अब अगर हॉरमुज और बाब अल-मंदेब दोनों जगह जोखिम लंबे समय तक बना रहता है तो तेल, गैस के साथ-साथ दूसरे सामान की ढुलाई पर भी असर पड़ सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम का कूटनीतिक पहलू भी अहम है। अमेरिका और ईरान के बीच किसी समझौते की उम्मीद कमजोर पड़ती है तो समुद्री रास्तों पर सैन्य गतिविधियां बढ़ सकती हैं। वहीं, हूती हमलों का दोबारा तेज होना यमन के भीतर संघर्ष और क्षेत्रीय तनाव को भी बढ़ा सकता है। बाब अल-मंदेब में हालिया मौतों ने इस आशंका को और गंभीर बनाया है।
तेल बाजार पहले ही इन घटनाओं पर प्रतिक्रिया दे रहा है। मंगलवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत में बढ़ोतरी दर्ज हुई और निवेशकों ने मध्य पूर्व के घटनाक्रम पर सतर्क रुख अपनाया। अगर हॉरमुज के दोबारा खुलने की उम्मीद और कमजोर होती है तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। इसके साथ ही शिपिंग कंपनियों के सामने सुरक्षा और रूट से जुड़े फैसले की चुनौती बनी रहेगी।
ईरान युद्ध से बढ़ा हॉरमुज संकट, लाल सागर में हूती हमले से चिंता
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ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध का असर अब समुद्री व्यापार पर और साफ दिखाई देने लगा है। मंगलवार को हॉरमुज के आसपास और लाल सागर के प्रवेश मार्ग बाब अल-मंदेब में वाणिज्यिक जहाजों से जुड़ी अलग-अलग घटनाओं ने तनाव बढ़ा दिया। ईरान की ओर से कहा गया है कि अमेरिका उसकी शर्तें स्वीकार नहीं करता है तो स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज को दोबारा सामान्य जहाजरानी के लिए नहीं खोला जाएगा। उधर, यमन के ईरान समर्थित हूती समूह पर बाब अल-मंदेब के पास एक वाणिज्यिक जहाज को निशाना बनाने का आरोप लगा है, जिसमें छह लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है।
हॉरमुज की स्थिति पहले से ही वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। यह जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है और दुनिया के प्रमुख तेल एवं गैस परिवहन मार्गों में शामिल है। यहां लंबे समय तक जहाजों की आवाजाही प्रभावित रहने का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों, समुद्री बीमा और माल ढुलाई पर पड़ सकता है। मंगलवार और बुधवार को तेल बाजार में भी इसका असर देखने को मिला। बाजार में यह आशंका बढ़ी कि अमेरिका और ईरान के बीच जल्द समझौता नहीं हुआ तो ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव और लंबा खिंच सकता है।
इसी बीच बाब अल-मंदेब में हुई घटना ने संकट का दूसरा मोर्चा खोल दिया है। यमन सरकार के अनुसार, मिसाइल हमले की चपेट में आए एक मिस्र के स्वामित्व वाले जहाज पर सवार लोगों में से चार क्रू सदस्यों की मौत हुई, जबकि दो यमनी बचावकर्मी भी मारे गए। इस हमले को हूती समूह से जोड़ा जा रहा है। यह घटना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ईरान-अमेरिका युद्ध शुरू होने के बाद वाणिज्यिक जहाज पर हमले में मौतों की यह पहली बड़ी रिपोर्ट बताई जा रही है।
हूती समूह और यमन में उसके विरोधी पक्ष की ओर से घटना को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। हूती नियंत्रित मीडिया ने दावा किया कि निशाना सऊदी जहाज था और वह सैन्य सामान ले जा रहा था। दूसरी तरफ जहाज की स्वतंत्र पहचान और हमले के पूरे घटनाक्रम को लेकर जांच जारी है। ऐसे में हमले की जिम्मेदारी से जुड़े दावों को अभी सावधानी से देखा जा रहा है। लेकिन इतना जरूर है कि बाब अल-मंदेब में दोबारा वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं।
अमेरिका ने भी मंगलवार को एक अलग समुद्री कार्रवाई की जानकारी दी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, अमेरिकी नौसेना के एक MH-60 हेलिकॉप्टर ने पनामा के झंडे वाले एक मालवाहक जहाज पर हमला किया। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि जहाज को कई चेतावनियां दी गई थीं और वह ईरान के बंदरगाहों पर लगाए गए अमेरिकी नौसैनिक प्रतिबंध का उल्लंघन कर रहा था। अमेरिकी सेना ने बताया कि जहाज के स्टीयरिंग सिस्टम को निशाना बनाकर उसकी आवाजाही रोक दी गई। घटना पाकिस्तान के पास बताई गई है, जहां से जहाज ओमान की खाड़ी की दिशा में जा रहा था।
इन घटनाओं के बीच ईरान ने हॉरमुज को लेकर अपना रुख और कड़ा कर दिया है। ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी मोहसेन रजाई ने कहा है कि अमेरिका को तेहरान की मांगें स्वीकार करनी होंगी, तभी जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर विचार किया जाएगा। ईरान की मांगों में विदेशों में फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी करना और क्षेत्र में चल रहे संघर्षों को खत्म करने से जुड़ी शर्तें शामिल बताई गई हैं। तेहरान का कहना है कि अमेरिका के रवैये में बदलाव के बिना हॉरमुज को खोलना संभव नहीं होगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प दूसरी ओर हॉरमुज को लेकर अलग रुख दिखा रहे हैं। ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिका के पास जलडमरूमध्य पर पूरा नियंत्रण है और ईरान को आगे की कार्रवाई के गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से बातचीत और समझौते की संभावना को लेकर भी बयान आते रहे हैं। यही विरोधाभासी संकेत बाजार और शिपिंग कंपनियों के लिए अनिश्चितता बढ़ा रहे हैं।
हॉरमुज संकट का असर सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं है। इस रास्ते से बड़ी मात्रा में तेल और एलएनजी का अंतरराष्ट्रीय व्यापार होता है। यदि जहाजों को लंबे समय तक इस मार्ग से बचना पड़ता है तो ऊर्जा कंपनियों को वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ेगा। इसका मतलब लंबी दूरी, ज्यादा ईंधन खर्च और बढ़ी हुई बीमा लागत हो सकता है। दूसरी ओर बाब अल-मंदेब में खतरा बढ़ने से एशिया और यूरोप के बीच लाल सागर तथा स्वेज नहर के रास्ते से होने वाला व्यापार भी प्रभावित हो सकता है।
दोनों समुद्री मार्गों पर एक साथ दबाव बनने से वैश्विक सप्लाई चेन के लिए स्थिति और मुश्किल हो सकती है। पहले भी लाल सागर में हूती हमलों के दौरान कई शिपिंग कंपनियों ने जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी हिस्से से घुमाकर भेजना शुरू किया था। इससे यात्रा का समय और लागत दोनों बढ़े थे। अब अगर हॉरमुज और बाब अल-मंदेब दोनों जगह जोखिम लंबे समय तक बना रहता है तो तेल, गैस के साथ-साथ दूसरे सामान की ढुलाई पर भी असर पड़ सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम का कूटनीतिक पहलू भी अहम है। अमेरिका और ईरान के बीच किसी समझौते की उम्मीद कमजोर पड़ती है तो समुद्री रास्तों पर सैन्य गतिविधियां बढ़ सकती हैं। वहीं, हूती हमलों का दोबारा तेज होना यमन के भीतर संघर्ष और क्षेत्रीय तनाव को भी बढ़ा सकता है। बाब अल-मंदेब में हालिया मौतों ने इस आशंका को और गंभीर बनाया है।
तेल बाजार पहले ही इन घटनाओं पर प्रतिक्रिया दे रहा है। मंगलवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत में बढ़ोतरी दर्ज हुई और निवेशकों ने मध्य पूर्व के घटनाक्रम पर सतर्क रुख अपनाया। अगर हॉरमुज के दोबारा खुलने की उम्मीद और कमजोर होती है तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। इसके साथ ही शिपिंग कंपनियों के सामने सुरक्षा और रूट से जुड़े फैसले की चुनौती बनी रहेगी।
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