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चांदी ₹2.83 लाख प्रति किलो के ऑल टाइम हाई पर, चार दिन में ₹40 हजार की छलांग
बिजनेस न्यूज
चांदी ₹2.83 लाख प्रति किलो के ऑल टाइम हाई पर, चार दिन में ₹40 हजार की छलांग
चांदी की कीमतों ने नया इतिहास रच दिया है। 16 जनवरी को चांदी ₹2,82,720 प्रति किलो के ऑल टाइम हाई स्तर पर पहुंच गई। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, आज चांदी में ₹5,208 की तेजी दर्ज की गई। बीते चार दिनों में चांदी की कीमतों में करीब ₹40,000 प्रति किलो का उछाल आया है, जिससे निवेशकों और बाजार दोनों में हलचल तेज हो गई है।
IBJA के आंकड़ों के अनुसार, 14 जनवरी को चांदी ₹2,77,512 प्रति किलो थी, जो लगातार खरीदारी के चलते रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि चांदी अब केवल ज्वेलरी धातु नहीं रही, बल्कि इंडस्ट्रियल कमोडिटी के रूप में इसकी मांग तेजी से बढ़ी है।
जहां चांदी में तेजी बनी हुई है, वहीं सोने के दाम में आज हल्की गिरावट देखी गई। 24 कैरेट सोना ₹298 गिरकर ₹1,41,717 प्रति 10 ग्राम पर खुला। इससे पहले 14 जनवरी को सोने ने ₹1,42,015 प्रति 10 ग्राम का ऑल टाइम हाई बनाया था। सोने में बीते तीन दिनों से चली आ रही तेजी पर आज विराम लगा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, चांदी में मौजूदा तेजी के पीछे तीन बड़े कारण हैं। पहला, सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) में बढ़ती खपत, जिसने इंडस्ट्रियल डिमांड को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा दिया है। दूसरा, अमेरिका में संभावित टैरिफ बढ़ोतरी को लेकर कंपनियां पहले से चांदी का स्टॉक जमा कर रही हैं, जिससे वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बना है। तीसरा, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में उत्पादन बाधित होने की आशंका के चलते खरीदारी की होड़ लगी हुई है।
सोने की कीमतों में बीते एक साल की तेजी भी उल्लेखनीय रही है। 2025 में सोना 75 प्रतिशत महंगा हुआ। 31 दिसंबर 2024 को जहां 10 ग्राम सोना ₹76,162 था, वहीं 31 दिसंबर 2025 तक यह ₹1,33,195 पर पहुंच गया। चांदी ने इसी अवधि में और भी तेज रफ्तार दिखाई। इसकी कीमत 167 प्रतिशत बढ़कर ₹86,017 से ₹2,30,420 प्रति किलो तक पहुंची।
IBJA के अनुसार, जारी किए गए भाव में 3 प्रतिशत GST, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर्स मार्जिन शामिल नहीं होते। यही वजह है कि अलग-अलग शहरों में सोने-चांदी के खुदरा दाम अलग हो सकते हैं। इन्हीं दरों के आधार पर RBI सोवरेन गोल्ड बॉन्ड और कई बैंक गोल्ड लोन की कीमत तय करते हैं।
बाजार जानकारों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता, कमजोर डॉलर और इंडस्ट्रियल डिमांड को देखते हुए आने वाले महीनों में चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के साथ मजबूती बनी रह सकती है।
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