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शुरुआती तेजी के बाद शेयर बाजार में सुस्ती, सेंसेक्स-निफ्टी सीमित दायरे में कारोबार करते रहे
बिजनेस डेस्क
बैंकिंग और ऑटो शेयरों में खरीदारी से बाजार को सहारा, आईटी और मेटल सेक्टर में दबाव; कच्चे तेल की कीमतें फिर 85 डॉलर के पार पहुंचीं
घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार को कारोबार की शुरुआत मजबूत बढ़त के साथ हुई, लेकिन शुरुआती उत्साह ज्यादा देर तक कायम नहीं रह सका। शुरुआती मिनटों में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने अच्छी छलांग लगाई, हालांकि कारोबार आगे बढ़ने के साथ निवेशकों का रुख संतुलित होता गया और प्रमुख सूचकांक सीमित दायरे में कारोबार करने लगे। दोपहर तक बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स करीब 77,100 अंक के आसपास और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 24,050 के स्तर के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स ने लगभग 500 अंकों तक की बढ़त दर्ज की थी, जबकि निफ्टी भी 150 अंकों से अधिक मजबूत हुआ था, लेकिन बाद में मुनाफावसूली और चुनिंदा सेक्टरों में बिकवाली के चलते बाजार की रफ्तार धीमी पड़ गई।
कारोबार के दौरान बैंकिंग और ऑटोमोबाइल सेक्टर के शेयरों में निवेशकों की अच्छी दिलचस्पी देखने को मिली। निजी और सरकारी बैंकों के कई शेयरों में खरीदारी बनी रही, जिससे बाजार को शुरुआती मजबूती मिली। ऑटो सेक्टर की कंपनियों में भी सकारात्मक रुझान रहा और निवेशकों ने चुनिंदा कंपनियों के शेयरों में खरीदारी जारी रखी। दूसरी ओर आईटी, मेटल और एफएमसीजी सेक्टर के शेयर दबाव में दिखाई दिए। इन सेक्टरों में मुनाफावसूली का असर देखने को मिला, जिसके कारण शुरुआती बढ़त काफी हद तक सीमित हो गई।
बाजार पर वैश्विक संकेतों का असर भी देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड का भाव लगभग एक प्रतिशत बढ़कर 85 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक घटनाक्रम और पश्चिम एशिया से जुड़े तनाव के कारण कच्चे तेल में तेजी बनी हुई है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि तेल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो इसका असर आयात लागत, महंगाई और भारतीय बाजार की चाल पर भी पड़ सकता है।
प्राथमिक बाजार में भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। हाल ही में शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई कंपनी कुसुमगर ने निवेशकों को मजबूत शुरुआत दी। कंपनी का शेयर बीएसई पर अपने इश्यू मूल्य की तुलना में लगभग 37 प्रतिशत प्रीमियम के साथ सूचीबद्ध हुआ, जबकि एनएसई पर भी इसकी लिस्टिंग इश्यू प्राइस से काफी ऊपर रही। कंपनी के आईपीओ को निवेशकों का अच्छा समर्थन मिला था और लिस्टिंग के दिन भी इसमें मजबूत खरीदारी देखने को मिली। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि सकारात्मक लिस्टिंग से प्राथमिक बाजार के प्रति निवेशकों का भरोसा मजबूत बना हुआ है।
आईपीओ बाजार में भी गतिविधियां तेज हैं। मंगलवार को दो कंपनियों के सार्वजनिक निर्गम (IPO) निवेश के लिए खुले रहे। इनमें एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट और अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड शामिल हैं। एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का इश्यू आकार करीब 9,813 करोड़ रुपये का है और पहले ही दिन इसे निवेशकों की अच्छी प्रतिक्रिया मिली। वहीं अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड अपने फ्रेश इश्यू के जरिए करीब 126.25 करोड़ रुपये जुटाने की योजना पर काम कर रही है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार मजबूत सब्सक्रिप्शन यह संकेत देता है कि प्राथमिक बाजार में निवेशकों की रुचि अभी भी बनी हुई है।
वैश्विक बाजारों की बात करें तो एशियाई शेयर बाजारों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंगसेंग भी हरे निशान में रहे। विदेशी बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों का असर भारतीय बाजार की शुरुआती चाल पर भी देखने को मिला, हालांकि घरेलू स्तर पर सेक्टरवार बिकवाली के कारण तेजी सीमित रही।
अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान भी सकारात्मक रुख देखने को मिला था। डाउ जोंस, नैस्डैक और एसएंडपी 500 तीनों प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए थे। विशेष रूप से टेक्नोलॉजी शेयरों में खरीदारी से नैस्डैक को मजबूती मिली। वैश्विक निवेशक अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और केंद्रीय बैंक की संभावित नीतियों पर भी नजर बनाए हुए हैं, जिसका असर आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ सकता है।
घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII/FPI) के निवेश के आंकड़े भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। हाल के दिनों में घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार में लगातार खरीदारी जारी रखी है। पिछले सात कारोबारी सत्रों के दौरान उन्होंने करीब 9,177 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं, जबकि पिछले एक महीने में उनकी कुल खरीदारी 41 हजार करोड़ रुपये से अधिक रही। दूसरी ओर विदेशी निवेशकों की ओर से सीमित बिकवाली का रुख बना हुआ है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी।
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शुरुआती तेजी के बाद शेयर बाजार में सुस्ती, सेंसेक्स-निफ्टी सीमित दायरे में कारोबार करते रहे
बिजनेस डेस्क
घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार को कारोबार की शुरुआत मजबूत बढ़त के साथ हुई, लेकिन शुरुआती उत्साह ज्यादा देर तक कायम नहीं रह सका। शुरुआती मिनटों में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने अच्छी छलांग लगाई, हालांकि कारोबार आगे बढ़ने के साथ निवेशकों का रुख संतुलित होता गया और प्रमुख सूचकांक सीमित दायरे में कारोबार करने लगे। दोपहर तक बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स करीब 77,100 अंक के आसपास और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 24,050 के स्तर के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स ने लगभग 500 अंकों तक की बढ़त दर्ज की थी, जबकि निफ्टी भी 150 अंकों से अधिक मजबूत हुआ था, लेकिन बाद में मुनाफावसूली और चुनिंदा सेक्टरों में बिकवाली के चलते बाजार की रफ्तार धीमी पड़ गई।
कारोबार के दौरान बैंकिंग और ऑटोमोबाइल सेक्टर के शेयरों में निवेशकों की अच्छी दिलचस्पी देखने को मिली। निजी और सरकारी बैंकों के कई शेयरों में खरीदारी बनी रही, जिससे बाजार को शुरुआती मजबूती मिली। ऑटो सेक्टर की कंपनियों में भी सकारात्मक रुझान रहा और निवेशकों ने चुनिंदा कंपनियों के शेयरों में खरीदारी जारी रखी। दूसरी ओर आईटी, मेटल और एफएमसीजी सेक्टर के शेयर दबाव में दिखाई दिए। इन सेक्टरों में मुनाफावसूली का असर देखने को मिला, जिसके कारण शुरुआती बढ़त काफी हद तक सीमित हो गई।
बाजार पर वैश्विक संकेतों का असर भी देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड का भाव लगभग एक प्रतिशत बढ़कर 85 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक घटनाक्रम और पश्चिम एशिया से जुड़े तनाव के कारण कच्चे तेल में तेजी बनी हुई है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि तेल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो इसका असर आयात लागत, महंगाई और भारतीय बाजार की चाल पर भी पड़ सकता है।
प्राथमिक बाजार में भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। हाल ही में शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई कंपनी कुसुमगर ने निवेशकों को मजबूत शुरुआत दी। कंपनी का शेयर बीएसई पर अपने इश्यू मूल्य की तुलना में लगभग 37 प्रतिशत प्रीमियम के साथ सूचीबद्ध हुआ, जबकि एनएसई पर भी इसकी लिस्टिंग इश्यू प्राइस से काफी ऊपर रही। कंपनी के आईपीओ को निवेशकों का अच्छा समर्थन मिला था और लिस्टिंग के दिन भी इसमें मजबूत खरीदारी देखने को मिली। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि सकारात्मक लिस्टिंग से प्राथमिक बाजार के प्रति निवेशकों का भरोसा मजबूत बना हुआ है।
आईपीओ बाजार में भी गतिविधियां तेज हैं। मंगलवार को दो कंपनियों के सार्वजनिक निर्गम (IPO) निवेश के लिए खुले रहे। इनमें एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट और अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड शामिल हैं। एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का इश्यू आकार करीब 9,813 करोड़ रुपये का है और पहले ही दिन इसे निवेशकों की अच्छी प्रतिक्रिया मिली। वहीं अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड अपने फ्रेश इश्यू के जरिए करीब 126.25 करोड़ रुपये जुटाने की योजना पर काम कर रही है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार मजबूत सब्सक्रिप्शन यह संकेत देता है कि प्राथमिक बाजार में निवेशकों की रुचि अभी भी बनी हुई है।
वैश्विक बाजारों की बात करें तो एशियाई शेयर बाजारों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंगसेंग भी हरे निशान में रहे। विदेशी बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों का असर भारतीय बाजार की शुरुआती चाल पर भी देखने को मिला, हालांकि घरेलू स्तर पर सेक्टरवार बिकवाली के कारण तेजी सीमित रही।
अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान भी सकारात्मक रुख देखने को मिला था। डाउ जोंस, नैस्डैक और एसएंडपी 500 तीनों प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए थे। विशेष रूप से टेक्नोलॉजी शेयरों में खरीदारी से नैस्डैक को मजबूती मिली। वैश्विक निवेशक अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और केंद्रीय बैंक की संभावित नीतियों पर भी नजर बनाए हुए हैं, जिसका असर आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ सकता है।
घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII/FPI) के निवेश के आंकड़े भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। हाल के दिनों में घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार में लगातार खरीदारी जारी रखी है। पिछले सात कारोबारी सत्रों के दौरान उन्होंने करीब 9,177 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं, जबकि पिछले एक महीने में उनकी कुल खरीदारी 41 हजार करोड़ रुपये से अधिक रही। दूसरी ओर विदेशी निवेशकों की ओर से सीमित बिकवाली का रुख बना हुआ है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी।
