सोना-चांदी लोन 2026: जब परिवार के गहने बनते हैं इमरजेंसी क्रेडिट

Digital Desk

कई भारतीय परिवारों में सोना और चांदी सिर्फ आभूषण या धातु नहीं होते, बल्कि वे परिवार की सबसे सुरक्षित और मूल्यवान संपत्ति होते हैं। सोने की चेन, चूड़ियां, चांदी के सिक्के, विरासत में मिले गहने या पूजा घर में रखी चांदी की वस्तुएं सालों-साल अलमारी या लॉकर में सुरक्षित रखी जाती हैं। लेकिन मेडिकल इमरजेंसी, व्यापार में विस्तार, खेती से जुड़े अचानक खर्च, शादी-ब्याह या नकदी (कैश) की अचानक किल्लत के समय यही पारिवारिक संपत्ति सबसे बड़ा सहारा बनकर उभरती है।

यही वजह है कि सोना और चांदी गिरवी रखकर लिया जाने वाला लोन (Gold & Silver Loan) आज के दौर में कई परिवारों के लिए एक अहम वित्तीय विकल्प बन चुका है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि परिवार अपनी गाढ़ी कमाई से बनाई गई संपत्ति को हमेशा के लिए बेचे बिना, बेहद कम समय में जरूरी फंड जुटा लेता है। चूंकि आभूषण या सिक्के कर्ज के बदले सिर्फ गिरवी रखे जाते हैं और लोन चुकाने के बाद वापस मिल जाते हैं, इसलिए भावनात्मक रूप से यह विकल्प संपत्ति को हमेशा के लिए बेच देने से कहीं बेहतर और तसल्लीबख्श लगता है।

वित्तीय अनुशासन: यह मुफ्त का पैसा नहीं है

हालांकि, उधार लेने वाले परिवारों को एक बात पूरी स्पष्टता से समझनी होगी: गहने गिरवी रखना कोई जोखिम-मुक्त पैसा नहीं है। सोना या चांदी के बदले लिया गया लोन भी एक औपचारिक कर्ज है। इसमें वैल्यूएशन, ब्याज दरें, प्रोसेसिंग शुल्क, भुगतान की तय तारीख, लोन-टू-वैल्यू (LTV) सीमा और भुगतान न होने पर गहनों की नीलामी का जोखिम शामिल होता है। परिवार भले ही कागजी तौर पर इन गहनों का मालिक बना रहता है, लेकिन लोन की आखिरी किस्त चुकाने तक वह आभूषण कर्जदाता (Bank या NBFC) के पास सुरक्षा (Collateral) के रूप में जमा रहता है। यहीं पर वित्तीय जागरूकता की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है।

अक्सर लोग लोन लेते समय सिर्फ इस बात पर ध्यान देते हैं कि पैसा कितनी जल्दी हाथ में आ जाएगा। जबकि इससे भी ज्यादा जरूरी सवाल यह है कि गिरवी रखे जा रहे सोने या चांदी की कीमत कैसे तय हो रही है और यदि भुगतान में देरी हुई तो इसके क्या परिणाम होंगे?

कर्जदाता की नजर में आपके गहनों की कीमत परिवार की भावनाओं से तय नहीं होती। परिवार के लिए किसी आभूषण से शादी, त्योहार या पुरखों की यादें जुड़ी हो सकती हैं, लेकिन कर्जदाता मुख्य रूप से उसकी शुद्धता (Purity), वजन, धातु की वास्तविक मात्रा और लागू नियमों के आधार पर ही मूल्यांकन करता है। गहनों में जड़े कीमती पत्थर, उसकी डिजाइन, सजावटी हिस्सा या भावनात्मक मूल्य को मूल्यांकन में शामिल नहीं किया जाता है।

विजडम कॉर्नर:

'Vittarq' के संस्थापक जैनम गांधी कहते हैं कि परिवारों को सोना-चांदी लोन को कोई अनौपचारिक इमरजेंसी कैश नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और संरचित कर्ज (Structured Loan) की तरह देखना चाहिए।

"सोना या चांदी गिरवी रखकर परिवार बिना संपत्ति बेचे तुरंत पैसा तो जुटा सकता है, लेकिन कर्ज के जाल से बचने के लिए वैल्यूएशन, लोन-टू-वैल्यू (LTV), भुगतान की समय-सीमा और नीलामी के जोखिम को पहले ही समझना होगा। परिवार के गहनों का एक गहरा भावनात्मक मूल्य होता है, लेकिन कर्जदाता सिर्फ धातु की मात्रा, शुद्धता और दस्तावेजों के आधार पर ही आकलन करता है। किसी भी महत्वपूर्ण पारिवारिक गहने को गिरवी रखने से पहले उसकी सभी शर्तों को बारीकी से समझें।" - जैनम गांधी, संस्थापक, Vittarq

सोना-चांदी लोन लेने से पहले ध्यान रखने योग्य 8 मुख्य बातें

यदि आप भी वित्तीय जरूरत के लिए अपने सोने या चांदी पर लोन लेने का विचार कर रहे हैं, तो इन 8 स्तंभों को समझना बेहद जरूरी है:

  • 1. पात्रता (Eligibility): हर तरह का सोना या चांदी एक जैसे तरीके से स्वीकार नहीं किया जाता। कर्ज आमतौर पर निर्धारित पात्रता वाले सोने-चांदी के आभूषणों और सिक्कों के बदले ही मिलता है। प्राथमिक सोना-चांदी, बुलियन (बिस्कुट या ईंट), या इनसे जुड़े कुछ वित्तीय उत्पादों पर लोन लेने की सीमाएं हो सकती हैं।

  • 2. मालिकाना हक (Ownership): कर्जदाता को यह भरोसा होना चाहिए कि उधार लेने वाले व्यक्ति को वह संपत्ति गिरवी रखने का कानूनी अधिकार है। यह उन परिवारों में विशेष रूप से अहम है जहां गहने पत्नी, माता-पिता या बच्चों के नाम पर होते हैं। परिवार की सहमति के बिना आभूषण गिरवी रखना आगे चलकर बड़े विवाद का कारण बन सकता है।

  • 3. वैल्यूएशन (Valuation): गिरवी रखी वस्तु का मूल्य उसकी असली शुद्धता और नेट मेटल वेट (Net Metal Weight) पर तय होता है। अगर गहने में पत्थर, लाख, डोरी या हुक जैसे गैर-धातु हिस्से हैं, तो उनके वजन को घटा दिया जाता है। लोन लेते समय हमेशा ग्रॉस वेट और नेट वेट का अंतर जरूर पूछें।

  • 4. लोन-टू-वैल्यू (LTV) सीमा: आमतौर पर गिरवी रखे गए सोने या चांदी की पूरी बाजार कीमत के बराबर लोन नहीं मिलता। कर्जदाता आंकी गई कीमत का एक निश्चित हिस्सा (जैसे 70% या 75%) ही लोन के रूप में देता है। छोटे लोन में LTV सीमा थोड़ी ज्यादा और बड़े लोन में कम हो सकती है, ताकि बाजार में सोने के दामों में उतार-चढ़ाव से कर्जदाता सुरक्षित रह सके।

  • 5. दस्तावेजीकरण (Documentation): लोन एग्रीमेंट में गिरवी रखी संपत्ति का विवरण, आंकी गई कीमत, ब्याज दर, छिपे हुए शुल्क, भुगतान की शर्तें, नोटिस अवधि और डिफॉल्ट की स्थिति में नीलामी की प्रक्रिया साफ लिखी होनी चाहिए। इसे सामान्य कागजी कार्रवाई मानकर बिना पढ़े साइन करने की भूल कभी न करें।

  • 6. भाषा और स्पष्टता: लोन की शर्तें साइन करने से पहले पूरी तरह समझ लें। यदि दस्तावेजों की भाषा कठिन या तकनीकी है, तो अधिकारियों से उसका सरल स्पष्टीकरण मांगें। इसके कानूनी और आर्थिक परिणाम पूरी तरह वास्तविक होते हैं।

  • 7. भुगतान अनुशासन (Repayment Discipline): आपातकालीन स्थिति में जल्दबाजी में लिया गया लोन भी समय पर चुकाना पड़ता है। लोन लेने से पहले ही यह तय कर लें कि ब्याज कितना होगा, आय में देरी हुई तो क्या बैकअप प्लान है, और क्या पूरा भुगतान एक साथ (Bullet Repayment) करना है या ईएमआई (EMI) में।

  • 8. गिरवी रखी वस्तु की सुरक्षित वापसी: लोन का पूरा भुगतान या सेटलमेंट होने के बाद, तय समय-सीमा के भीतर आपकी संपत्ति सुरक्षित वापस मिलनी चाहिए। वापसी के समय गहनों की शुद्धता और वजन की जांच लोन लेते समय मिले प्रमाणपत्रों से जरूर मिलान कर लें।

नीलामी का जोखिम: आखिरी वक्त का नहीं, शुरुआत का सवाल

अगर लोन का भुगतान समय पर नहीं होता है और बकाया बढ़ता जाता है, तो कर्जदाता एक तय कानूनी प्रक्रिया के तहत आपके गहनों को नीलाम (Auction) करने की दिशा में कदम उठा सकता है। किसी भी परिवार के लिए यह सबसे बड़ा आर्थिक और भावनात्मक नुकसान होता है।

हालांकि, नीलामी से पहले कर्जदाता के लिए एक औपचारिक नोटिस भेजना और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी रखना अनिवार्य है। नीलामी से मिली राशि, बकाया कर्ज का समायोजन और बची हुई राशि (यदि कोई हो) का विवरण उधारकर्ता को दिया जाता है। लेकिन सबसे समझदारी भरी सुरक्षा यही है कि नौबत यहां तक पहुंचे ही नहीं। गिरवी लोन तभी लें, जब आपके पास भुगतान की एक वास्तविक और ठोस योजना मौजूद हो।

समझदार उधारकर्ता के लिए क्विक चेकलिस्ट

लोन विंडो पर जाने से पहले खुद से ये सवाल जरूर पूछें:

  1. गिरवी रखे जा रहे गहनों का असली मालिक कौन है और क्या परिवार सहमत है?

  2. कर्जदाता किस शुद्धता और नेट वेट के आधार पर वैल्यूएशन कर रहा है?

  3. आंकी गई कुल कीमत की तुलना में मुझे वास्तव में कितना पैसा (LTV) मिल रहा है?

  4. ब्याज दरें, प्रोसेसिंग फीस और पेनल्टी शुल्क क्या हैं?

  5. भुगतान की अंतिम तारीख क्या है और डिफॉल्ट होने पर नीलामी की प्रक्रिया क्या है?

साल 2026 में एक समझदार और जागरूक उधारकर्ता सिर्फ यह नहीं पूछता कि "मुझे कितना लोन मिल सकता है?" बल्कि वह यह भी सुनिश्चित करता है कि "मेरे सोने-चांदी की कीमत कैसे तय हो रही है, मैं इसे कब और कैसे चुकाऊंगा, और अगर कोई अप्रत्याशित संकट आया तो मेरी संपत्ति को सुरक्षित रखने के क्या रास्ते हैं?" सोना और चांदी संकट के समय आपका सबसे बड़ा संबल बन सकते हैं, बशर्ते आप वित्तीय अनुशासन का दामन न छोड़ें।

(देश के कीमती धातु बाजार (Precious Metals Market) से जुड़ी ऐसी ही गहरी रिपोर्ट्स और इनसाइट्स के लिए आप vittarq.com पर जा सकते हैं।)

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15 Jul 2026 By दैनिक जागरण

सोना-चांदी लोन 2026: जब परिवार के गहने बनते हैं इमरजेंसी क्रेडिट

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यही वजह है कि सोना और चांदी गिरवी रखकर लिया जाने वाला लोन (Gold & Silver Loan) आज के दौर में कई परिवारों के लिए एक अहम वित्तीय विकल्प बन चुका है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि परिवार अपनी गाढ़ी कमाई से बनाई गई संपत्ति को हमेशा के लिए बेचे बिना, बेहद कम समय में जरूरी फंड जुटा लेता है। चूंकि आभूषण या सिक्के कर्ज के बदले सिर्फ गिरवी रखे जाते हैं और लोन चुकाने के बाद वापस मिल जाते हैं, इसलिए भावनात्मक रूप से यह विकल्प संपत्ति को हमेशा के लिए बेच देने से कहीं बेहतर और तसल्लीबख्श लगता है।

वित्तीय अनुशासन: यह मुफ्त का पैसा नहीं है

हालांकि, उधार लेने वाले परिवारों को एक बात पूरी स्पष्टता से समझनी होगी: गहने गिरवी रखना कोई जोखिम-मुक्त पैसा नहीं है। सोना या चांदी के बदले लिया गया लोन भी एक औपचारिक कर्ज है। इसमें वैल्यूएशन, ब्याज दरें, प्रोसेसिंग शुल्क, भुगतान की तय तारीख, लोन-टू-वैल्यू (LTV) सीमा और भुगतान न होने पर गहनों की नीलामी का जोखिम शामिल होता है। परिवार भले ही कागजी तौर पर इन गहनों का मालिक बना रहता है, लेकिन लोन की आखिरी किस्त चुकाने तक वह आभूषण कर्जदाता (Bank या NBFC) के पास सुरक्षा (Collateral) के रूप में जमा रहता है। यहीं पर वित्तीय जागरूकता की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है।

अक्सर लोग लोन लेते समय सिर्फ इस बात पर ध्यान देते हैं कि पैसा कितनी जल्दी हाथ में आ जाएगा। जबकि इससे भी ज्यादा जरूरी सवाल यह है कि गिरवी रखे जा रहे सोने या चांदी की कीमत कैसे तय हो रही है और यदि भुगतान में देरी हुई तो इसके क्या परिणाम होंगे?

कर्जदाता की नजर में आपके गहनों की कीमत परिवार की भावनाओं से तय नहीं होती। परिवार के लिए किसी आभूषण से शादी, त्योहार या पुरखों की यादें जुड़ी हो सकती हैं, लेकिन कर्जदाता मुख्य रूप से उसकी शुद्धता (Purity), वजन, धातु की वास्तविक मात्रा और लागू नियमों के आधार पर ही मूल्यांकन करता है। गहनों में जड़े कीमती पत्थर, उसकी डिजाइन, सजावटी हिस्सा या भावनात्मक मूल्य को मूल्यांकन में शामिल नहीं किया जाता है।

विजडम कॉर्नर:

'Vittarq' के संस्थापक जैनम गांधी कहते हैं कि परिवारों को सोना-चांदी लोन को कोई अनौपचारिक इमरजेंसी कैश नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और संरचित कर्ज (Structured Loan) की तरह देखना चाहिए।

"सोना या चांदी गिरवी रखकर परिवार बिना संपत्ति बेचे तुरंत पैसा तो जुटा सकता है, लेकिन कर्ज के जाल से बचने के लिए वैल्यूएशन, लोन-टू-वैल्यू (LTV), भुगतान की समय-सीमा और नीलामी के जोखिम को पहले ही समझना होगा। परिवार के गहनों का एक गहरा भावनात्मक मूल्य होता है, लेकिन कर्जदाता सिर्फ धातु की मात्रा, शुद्धता और दस्तावेजों के आधार पर ही आकलन करता है। किसी भी महत्वपूर्ण पारिवारिक गहने को गिरवी रखने से पहले उसकी सभी शर्तों को बारीकी से समझें।" - जैनम गांधी, संस्थापक, Vittarq

सोना-चांदी लोन लेने से पहले ध्यान रखने योग्य 8 मुख्य बातें

यदि आप भी वित्तीय जरूरत के लिए अपने सोने या चांदी पर लोन लेने का विचार कर रहे हैं, तो इन 8 स्तंभों को समझना बेहद जरूरी है:

  • 1. पात्रता (Eligibility): हर तरह का सोना या चांदी एक जैसे तरीके से स्वीकार नहीं किया जाता। कर्ज आमतौर पर निर्धारित पात्रता वाले सोने-चांदी के आभूषणों और सिक्कों के बदले ही मिलता है। प्राथमिक सोना-चांदी, बुलियन (बिस्कुट या ईंट), या इनसे जुड़े कुछ वित्तीय उत्पादों पर लोन लेने की सीमाएं हो सकती हैं।

  • 2. मालिकाना हक (Ownership): कर्जदाता को यह भरोसा होना चाहिए कि उधार लेने वाले व्यक्ति को वह संपत्ति गिरवी रखने का कानूनी अधिकार है। यह उन परिवारों में विशेष रूप से अहम है जहां गहने पत्नी, माता-पिता या बच्चों के नाम पर होते हैं। परिवार की सहमति के बिना आभूषण गिरवी रखना आगे चलकर बड़े विवाद का कारण बन सकता है।

  • 3. वैल्यूएशन (Valuation): गिरवी रखी वस्तु का मूल्य उसकी असली शुद्धता और नेट मेटल वेट (Net Metal Weight) पर तय होता है। अगर गहने में पत्थर, लाख, डोरी या हुक जैसे गैर-धातु हिस्से हैं, तो उनके वजन को घटा दिया जाता है। लोन लेते समय हमेशा ग्रॉस वेट और नेट वेट का अंतर जरूर पूछें।

  • 4. लोन-टू-वैल्यू (LTV) सीमा: आमतौर पर गिरवी रखे गए सोने या चांदी की पूरी बाजार कीमत के बराबर लोन नहीं मिलता। कर्जदाता आंकी गई कीमत का एक निश्चित हिस्सा (जैसे 70% या 75%) ही लोन के रूप में देता है। छोटे लोन में LTV सीमा थोड़ी ज्यादा और बड़े लोन में कम हो सकती है, ताकि बाजार में सोने के दामों में उतार-चढ़ाव से कर्जदाता सुरक्षित रह सके।

  • 5. दस्तावेजीकरण (Documentation): लोन एग्रीमेंट में गिरवी रखी संपत्ति का विवरण, आंकी गई कीमत, ब्याज दर, छिपे हुए शुल्क, भुगतान की शर्तें, नोटिस अवधि और डिफॉल्ट की स्थिति में नीलामी की प्रक्रिया साफ लिखी होनी चाहिए। इसे सामान्य कागजी कार्रवाई मानकर बिना पढ़े साइन करने की भूल कभी न करें।

  • 6. भाषा और स्पष्टता: लोन की शर्तें साइन करने से पहले पूरी तरह समझ लें। यदि दस्तावेजों की भाषा कठिन या तकनीकी है, तो अधिकारियों से उसका सरल स्पष्टीकरण मांगें। इसके कानूनी और आर्थिक परिणाम पूरी तरह वास्तविक होते हैं।

  • 7. भुगतान अनुशासन (Repayment Discipline): आपातकालीन स्थिति में जल्दबाजी में लिया गया लोन भी समय पर चुकाना पड़ता है। लोन लेने से पहले ही यह तय कर लें कि ब्याज कितना होगा, आय में देरी हुई तो क्या बैकअप प्लान है, और क्या पूरा भुगतान एक साथ (Bullet Repayment) करना है या ईएमआई (EMI) में।

  • 8. गिरवी रखी वस्तु की सुरक्षित वापसी: लोन का पूरा भुगतान या सेटलमेंट होने के बाद, तय समय-सीमा के भीतर आपकी संपत्ति सुरक्षित वापस मिलनी चाहिए। वापसी के समय गहनों की शुद्धता और वजन की जांच लोन लेते समय मिले प्रमाणपत्रों से जरूर मिलान कर लें।

नीलामी का जोखिम: आखिरी वक्त का नहीं, शुरुआत का सवाल

अगर लोन का भुगतान समय पर नहीं होता है और बकाया बढ़ता जाता है, तो कर्जदाता एक तय कानूनी प्रक्रिया के तहत आपके गहनों को नीलाम (Auction) करने की दिशा में कदम उठा सकता है। किसी भी परिवार के लिए यह सबसे बड़ा आर्थिक और भावनात्मक नुकसान होता है।

हालांकि, नीलामी से पहले कर्जदाता के लिए एक औपचारिक नोटिस भेजना और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी रखना अनिवार्य है। नीलामी से मिली राशि, बकाया कर्ज का समायोजन और बची हुई राशि (यदि कोई हो) का विवरण उधारकर्ता को दिया जाता है। लेकिन सबसे समझदारी भरी सुरक्षा यही है कि नौबत यहां तक पहुंचे ही नहीं। गिरवी लोन तभी लें, जब आपके पास भुगतान की एक वास्तविक और ठोस योजना मौजूद हो।

समझदार उधारकर्ता के लिए क्विक चेकलिस्ट

लोन विंडो पर जाने से पहले खुद से ये सवाल जरूर पूछें:

  1. गिरवी रखे जा रहे गहनों का असली मालिक कौन है और क्या परिवार सहमत है?

  2. कर्जदाता किस शुद्धता और नेट वेट के आधार पर वैल्यूएशन कर रहा है?

  3. आंकी गई कुल कीमत की तुलना में मुझे वास्तव में कितना पैसा (LTV) मिल रहा है?

  4. ब्याज दरें, प्रोसेसिंग फीस और पेनल्टी शुल्क क्या हैं?

  5. भुगतान की अंतिम तारीख क्या है और डिफॉल्ट होने पर नीलामी की प्रक्रिया क्या है?

साल 2026 में एक समझदार और जागरूक उधारकर्ता सिर्फ यह नहीं पूछता कि "मुझे कितना लोन मिल सकता है?" बल्कि वह यह भी सुनिश्चित करता है कि "मेरे सोने-चांदी की कीमत कैसे तय हो रही है, मैं इसे कब और कैसे चुकाऊंगा, और अगर कोई अप्रत्याशित संकट आया तो मेरी संपत्ति को सुरक्षित रखने के क्या रास्ते हैं?" सोना और चांदी संकट के समय आपका सबसे बड़ा संबल बन सकते हैं, बशर्ते आप वित्तीय अनुशासन का दामन न छोड़ें।

(देश के कीमती धातु बाजार (Precious Metals Market) से जुड़ी ऐसी ही गहरी रिपोर्ट्स और इनसाइट्स के लिए आप vittarq.com पर जा सकते हैं।)

https://www.dainikjagranmpcg.com/business/gold-and-silver-loan-2026-when-family-jewelery-becomes-emergency/article-58779

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