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कर्नाटक की अदालत में जज की कुर्सी पर कथित तंत्र-क्रिया का मामला, 65 वर्षीय महिला गिरफ्तार
देश विदेश
पारिवारिक विवाद में अनुकूल फैसला पाने की मंशा से अदालत में सरसों के दाने बिखेरने का आरोप, सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने की कार्रवाई
कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर जिले से एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां एक 65 वर्षीय महिला को अदालत परिसर के भीतर कथित रूप से तांत्रिक अनुष्ठान करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार महिला पर आरोप है कि उसने अपने पारिवारिक दीवानी विवाद में अनुकूल फैसला मिलने की उम्मीद से अदालत के अंदर जज की कुर्सी और मंच के आसपास सफेद सरसों के दाने बिखेरे। घटना का खुलासा अदालत के कर्मचारियों को संदिग्ध वस्तुएं मिलने के बाद हुआ। इसके बाद परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई और उसी के आधार पर पुलिस ने महिला की पहचान कर कार्रवाई की।
पुलिस के मुताबिक घटना 9 जुलाई की सुबह लगभग 9 बजकर 40 मिनट पर चिक्कबल्लापुर स्थित प्रथम अतिरिक्त वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) की अदालत में हुई। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि अदालत का कक्ष उस समय खुला था और इसी दौरान महिला अंदर पहुंची। आरोप है कि उसने न्यायाधीश की कुर्सी, मंच और आसपास के हिस्से में सफेद सरसों के दाने बिखेरे और कुछ ही देर बाद वहां से निकल गई। बाद में जब अदालत के कर्मचारियों ने यह देखा तो पूरे घटनाक्रम की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई।
मामले की सूचना मिलने के बाद अदालत प्रशासन ने सुरक्षा कैमरों की रिकॉर्डिंग की जांच कराई। अधिकारियों के अनुसार फुटेज में एक महिला अदालत कक्ष के भीतर प्रवेश करती हुई और न्यायाधीश की सीट के आसपास कुछ सामग्री फैलाती हुई दिखाई दी। इसके बाद अदालत के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी ने इस संबंध में चिक्कबल्लापुर टाउन पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया और फुटेज के आधार पर आरोपी महिला की पहचान करते हुए उसे हिरासत में ले लिया।
पुलिस ने आरोपी महिला की पहचान मंजुला (65) के रूप में की है। पूछताछ के दौरान प्रारंभिक स्तर पर यह जानकारी सामने आई कि महिला का एक पारिवारिक दीवानी मामला अदालत में लंबित है। जांच अधिकारियों का कहना है कि महिला को कथित तौर पर विश्वास था कि इस प्रकार का अनुष्ठान करने से न्यायालय में उसके पक्ष में फैसला आ सकता है। हालांकि पुलिस ने अभी तक संबंधित दीवानी मामले के बारे में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
गिरफ्तारी के बाद महिला को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि महिला ने यह कथित कृत्य अकेले किया था या किसी अन्य व्यक्ति के कहने या सहयोग से। जांच एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही हैं।
अदालत परिसर में हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। न्यायालय प्रशासन यह भी जांच कर रहा है कि कार्य समय के दौरान महिला बिना रोक-टोक अदालत कक्ष तक कैसे पहुंच गई। अधिकारियों का कहना है कि अदालत परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और प्रवेश प्रक्रिया की समीक्षा की जाएगी ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके।
यह मामला पिछले वर्ष दिल्ली की तीस हजारी अदालत में सामने आए एक अन्य घटनाक्रम की याद भी दिलाता है। उस मामले में एक हत्या के आरोपी डॉक्टर पर अदालत कक्ष के भीतर चावल के दाने बिखेरने का आरोप लगा था। उस घटना के कारण कुछ समय के लिए न्यायालय की कार्यवाही प्रभावित हुई थी। बाद में अदालत ने आरोपी पर जुर्माना लगाते हुए आवश्यक कानूनी कार्रवाई की थी। हालांकि दोनों मामलों की परिस्थितियां अलग-अलग हैं, लेकिन अदालत परिसर में इस तरह की घटनाओं ने न्यायिक संस्थानों की सुरक्षा और अनुशासन को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।
चिक्कबल्लापुर पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। अधिकारी उपलब्ध साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और पूछताछ के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी में जुटे हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कथित घटना के पीछे केवल व्यक्तिगत आस्था का मामला था या इसके पीछे किसी अन्य प्रकार की योजना या बाहरी भूमिका भी मौजूद थी।
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कर्नाटक की अदालत में जज की कुर्सी पर कथित तंत्र-क्रिया का मामला, 65 वर्षीय महिला गिरफ्तार
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कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर जिले से एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां एक 65 वर्षीय महिला को अदालत परिसर के भीतर कथित रूप से तांत्रिक अनुष्ठान करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार महिला पर आरोप है कि उसने अपने पारिवारिक दीवानी विवाद में अनुकूल फैसला मिलने की उम्मीद से अदालत के अंदर जज की कुर्सी और मंच के आसपास सफेद सरसों के दाने बिखेरे। घटना का खुलासा अदालत के कर्मचारियों को संदिग्ध वस्तुएं मिलने के बाद हुआ। इसके बाद परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई और उसी के आधार पर पुलिस ने महिला की पहचान कर कार्रवाई की।
पुलिस के मुताबिक घटना 9 जुलाई की सुबह लगभग 9 बजकर 40 मिनट पर चिक्कबल्लापुर स्थित प्रथम अतिरिक्त वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) की अदालत में हुई। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि अदालत का कक्ष उस समय खुला था और इसी दौरान महिला अंदर पहुंची। आरोप है कि उसने न्यायाधीश की कुर्सी, मंच और आसपास के हिस्से में सफेद सरसों के दाने बिखेरे और कुछ ही देर बाद वहां से निकल गई। बाद में जब अदालत के कर्मचारियों ने यह देखा तो पूरे घटनाक्रम की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई।
मामले की सूचना मिलने के बाद अदालत प्रशासन ने सुरक्षा कैमरों की रिकॉर्डिंग की जांच कराई। अधिकारियों के अनुसार फुटेज में एक महिला अदालत कक्ष के भीतर प्रवेश करती हुई और न्यायाधीश की सीट के आसपास कुछ सामग्री फैलाती हुई दिखाई दी। इसके बाद अदालत के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी ने इस संबंध में चिक्कबल्लापुर टाउन पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया और फुटेज के आधार पर आरोपी महिला की पहचान करते हुए उसे हिरासत में ले लिया।
पुलिस ने आरोपी महिला की पहचान मंजुला (65) के रूप में की है। पूछताछ के दौरान प्रारंभिक स्तर पर यह जानकारी सामने आई कि महिला का एक पारिवारिक दीवानी मामला अदालत में लंबित है। जांच अधिकारियों का कहना है कि महिला को कथित तौर पर विश्वास था कि इस प्रकार का अनुष्ठान करने से न्यायालय में उसके पक्ष में फैसला आ सकता है। हालांकि पुलिस ने अभी तक संबंधित दीवानी मामले के बारे में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
गिरफ्तारी के बाद महिला को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि महिला ने यह कथित कृत्य अकेले किया था या किसी अन्य व्यक्ति के कहने या सहयोग से। जांच एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही हैं।
अदालत परिसर में हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। न्यायालय प्रशासन यह भी जांच कर रहा है कि कार्य समय के दौरान महिला बिना रोक-टोक अदालत कक्ष तक कैसे पहुंच गई। अधिकारियों का कहना है कि अदालत परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और प्रवेश प्रक्रिया की समीक्षा की जाएगी ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके।
यह मामला पिछले वर्ष दिल्ली की तीस हजारी अदालत में सामने आए एक अन्य घटनाक्रम की याद भी दिलाता है। उस मामले में एक हत्या के आरोपी डॉक्टर पर अदालत कक्ष के भीतर चावल के दाने बिखेरने का आरोप लगा था। उस घटना के कारण कुछ समय के लिए न्यायालय की कार्यवाही प्रभावित हुई थी। बाद में अदालत ने आरोपी पर जुर्माना लगाते हुए आवश्यक कानूनी कार्रवाई की थी। हालांकि दोनों मामलों की परिस्थितियां अलग-अलग हैं, लेकिन अदालत परिसर में इस तरह की घटनाओं ने न्यायिक संस्थानों की सुरक्षा और अनुशासन को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।
चिक्कबल्लापुर पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। अधिकारी उपलब्ध साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और पूछताछ के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी में जुटे हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कथित घटना के पीछे केवल व्यक्तिगत आस्था का मामला था या इसके पीछे किसी अन्य प्रकार की योजना या बाहरी भूमिका भी मौजूद थी।
