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हॉर्मुज हमले के बाद भारत का बड़ा फैसला, खाड़ी क्षेत्र में तैनात हर भारतीय नाविक की होगी रियल-टाइम निगरानी
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यूएई से जुड़े दो तेल टैंकरों पर मिसाइल हमले में भारतीय मरीन इंजीनियर की मौत और 10 नाविक घायल, विदेश मंत्रालय ने ईरान से उठाया सुरक्षा का मुद्दा
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने फारस की खाड़ी और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में कार्यरत भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर नई निगरानी व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। यूएई से जुड़े दो व्यावसायिक तेल टैंकरों पर हुए मिसाइल हमले में एक भारतीय मरीन इंजीनियर की मौत और दस अन्य भारतीय चालक दल के सदस्य घायल होने के बाद केंद्र सरकार ने समुद्री सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार अब ऐसा रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार कर रही है, जिसके माध्यम से संघर्ष प्रभावित समुद्री क्षेत्रों में मौजूद प्रत्येक भारतीय नाविक की स्थिति और जहाज की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सकेगी।
सरकारी जानकारी के अनुसार हमला हॉर्मुज जलडमरूमध्य के समीप उस समय हुआ, जब एमटी मोम्बासा और एमटी अल बहियाह नामक दो व्यावसायिक टैंकर निर्धारित समुद्री मार्ग से गुजर रहे थे। मिसाइल हमले के बाद दोनों जहाजों को नुकसान पहुंचा और उनमें आग लगने की भी सूचना मिली। इन दोनों जहाजों पर लगभग 30 भारतीय नागरिक चालक दल का हिस्सा थे। हमले में बिहार के रहने वाले मरीन इंजीनियर सोनू कुमार गुप्ता की मौत हो गई। बताया गया कि वे कुछ सप्ताह पहले ही अपनी ड्यूटी पर लौटे थे। इसके अलावा 10 अन्य भारतीय नाविक घायल हुए, जिनमें दो की हालत गंभीर बताई जा रही है और उनका उपचार जारी है।
घटना के बाद विदेश मंत्रालय ने ईरान सरकार के समक्ष भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया है। अधिकारियों ने संबंधित पक्षों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया है कि संघर्ष प्रभावित समुद्री क्षेत्रों में कार्यरत भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। विदेश मंत्रालय लगातार क्षेत्र में स्थित भारतीय मिशनों और संबंधित समुद्री एजेंसियों के संपर्क में है, ताकि घायल नाविकों, उनके परिवारों और जहाजों की स्थिति से जुड़ी प्रमाणित जानकारी समय-समय पर प्राप्त होती रहे।
सरकार अब एक डिजिटल रियल-टाइम ट्रैकिंग डैशबोर्ड विकसित कर रही है, जिसमें फारस की खाड़ी, हॉर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी में काम कर रहे भारतीय नाविकों की जानकारी उपलब्ध रहेगी। इस प्रणाली में जहाज की वर्तमान लोकेशन, यात्रा मार्ग, चालक दल का विवरण, संभावित सुरक्षा जोखिम, अगला बंदरगाह और आपातकालीन सहायता से जुड़ी जानकारी शामिल की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे किसी भी संकट की स्थिति में तेज समन्वय और त्वरित राहत उपलब्ध कराना आसान होगा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार नई व्यवस्था में शिपिंग कंपनियों, भारतीय दूतावासों, महानिदेशालय शिपिंग और अन्य समुद्री एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा। किसी भी आपात स्थिति में संबंधित एजेंसियां तुरंत एक-दूसरे के साथ जानकारी साझा कर सकेंगी। इसके अलावा प्रभावित नाविकों और उनके परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए अलग समन्वय तंत्र भी तैयार किया जा रहा है।
हमले के बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इन मिसाइल हमलों की जिम्मेदारी लेने का दावा किया। ईरान की ओर से कहा गया कि संबंधित जहाजों ने कथित रूप से समुद्री चेतावनियों की अनदेखी की थी। हालांकि संयुक्त अरब अमीरात ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि दोनों जहाज नियमित व्यावसायिक गतिविधियों में लगे हुए थे और अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के अनुरूप यात्रा कर रहे थे। भारत ने भी नागरिक व्यापारी जहाजों पर हुए हमलों को लेकर चिंता जताई है और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक स्तर पर बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और ऊर्जा आपूर्ति इसी मार्ग से होकर गुजरती है। हाल के समय में पश्चिम एशिया में बढ़े सैन्य तनाव के कारण इस क्षेत्र में व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता लगातार बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मार्ग में किसी भी प्रकार की अस्थिरता का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार दोनों पर पड़ सकता है।
भारतीय अधिकारी क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। शिपिंग कंपनियों, विदेशी सरकारों और भारतीय मिशनों के साथ समन्वय बढ़ाया गया है ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। फिलहाल भारतीय नाविकों के लिए किसी प्रकार की निकासी या यात्रा संबंधी नई एडवाइजरी जारी नहीं की गई है, लेकिन समुद्री सुरक्षा से जुड़े अतिरिक्त उपायों की समीक्षा लगातार जारी है।
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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने फारस की खाड़ी और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में कार्यरत भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर नई निगरानी व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। यूएई से जुड़े दो व्यावसायिक तेल टैंकरों पर हुए मिसाइल हमले में एक भारतीय मरीन इंजीनियर की मौत और दस अन्य भारतीय चालक दल के सदस्य घायल होने के बाद केंद्र सरकार ने समुद्री सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार अब ऐसा रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार कर रही है, जिसके माध्यम से संघर्ष प्रभावित समुद्री क्षेत्रों में मौजूद प्रत्येक भारतीय नाविक की स्थिति और जहाज की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सकेगी।
सरकारी जानकारी के अनुसार हमला हॉर्मुज जलडमरूमध्य के समीप उस समय हुआ, जब एमटी मोम्बासा और एमटी अल बहियाह नामक दो व्यावसायिक टैंकर निर्धारित समुद्री मार्ग से गुजर रहे थे। मिसाइल हमले के बाद दोनों जहाजों को नुकसान पहुंचा और उनमें आग लगने की भी सूचना मिली। इन दोनों जहाजों पर लगभग 30 भारतीय नागरिक चालक दल का हिस्सा थे। हमले में बिहार के रहने वाले मरीन इंजीनियर सोनू कुमार गुप्ता की मौत हो गई। बताया गया कि वे कुछ सप्ताह पहले ही अपनी ड्यूटी पर लौटे थे। इसके अलावा 10 अन्य भारतीय नाविक घायल हुए, जिनमें दो की हालत गंभीर बताई जा रही है और उनका उपचार जारी है।
घटना के बाद विदेश मंत्रालय ने ईरान सरकार के समक्ष भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया है। अधिकारियों ने संबंधित पक्षों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया है कि संघर्ष प्रभावित समुद्री क्षेत्रों में कार्यरत भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। विदेश मंत्रालय लगातार क्षेत्र में स्थित भारतीय मिशनों और संबंधित समुद्री एजेंसियों के संपर्क में है, ताकि घायल नाविकों, उनके परिवारों और जहाजों की स्थिति से जुड़ी प्रमाणित जानकारी समय-समय पर प्राप्त होती रहे।
सरकार अब एक डिजिटल रियल-टाइम ट्रैकिंग डैशबोर्ड विकसित कर रही है, जिसमें फारस की खाड़ी, हॉर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी में काम कर रहे भारतीय नाविकों की जानकारी उपलब्ध रहेगी। इस प्रणाली में जहाज की वर्तमान लोकेशन, यात्रा मार्ग, चालक दल का विवरण, संभावित सुरक्षा जोखिम, अगला बंदरगाह और आपातकालीन सहायता से जुड़ी जानकारी शामिल की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे किसी भी संकट की स्थिति में तेज समन्वय और त्वरित राहत उपलब्ध कराना आसान होगा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार नई व्यवस्था में शिपिंग कंपनियों, भारतीय दूतावासों, महानिदेशालय शिपिंग और अन्य समुद्री एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा। किसी भी आपात स्थिति में संबंधित एजेंसियां तुरंत एक-दूसरे के साथ जानकारी साझा कर सकेंगी। इसके अलावा प्रभावित नाविकों और उनके परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए अलग समन्वय तंत्र भी तैयार किया जा रहा है।
हमले के बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इन मिसाइल हमलों की जिम्मेदारी लेने का दावा किया। ईरान की ओर से कहा गया कि संबंधित जहाजों ने कथित रूप से समुद्री चेतावनियों की अनदेखी की थी। हालांकि संयुक्त अरब अमीरात ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि दोनों जहाज नियमित व्यावसायिक गतिविधियों में लगे हुए थे और अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के अनुरूप यात्रा कर रहे थे। भारत ने भी नागरिक व्यापारी जहाजों पर हुए हमलों को लेकर चिंता जताई है और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक स्तर पर बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और ऊर्जा आपूर्ति इसी मार्ग से होकर गुजरती है। हाल के समय में पश्चिम एशिया में बढ़े सैन्य तनाव के कारण इस क्षेत्र में व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता लगातार बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मार्ग में किसी भी प्रकार की अस्थिरता का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार दोनों पर पड़ सकता है।
भारतीय अधिकारी क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। शिपिंग कंपनियों, विदेशी सरकारों और भारतीय मिशनों के साथ समन्वय बढ़ाया गया है ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। फिलहाल भारतीय नाविकों के लिए किसी प्रकार की निकासी या यात्रा संबंधी नई एडवाइजरी जारी नहीं की गई है, लेकिन समुद्री सुरक्षा से जुड़े अतिरिक्त उपायों की समीक्षा लगातार जारी है।
