- Hindi News
- देश विदेश
- दुनिया भर में तेजी से बदले हालात: यूक्रेन को फ्रांस का बड़ा रक्षा सहयोग, एलन मस्क पर जांच की सिफारिश...
दुनिया भर में तेजी से बदले हालात: यूक्रेन को फ्रांस का बड़ा रक्षा सहयोग, एलन मस्क पर जांच की सिफारिश और अमेरिका में नागरिकता कानून पर नई बहस
देश विदेश
फ्रांस ने यूक्रेन में मिसाइल निर्माण को दी मंजूरी, अमेरिका में एलन मस्क पर चुनावी कानून उल्लंघन के आरोपों की जांच की मांग, जन्म से नागरिकता पर रिपब्लिकन सांसदों ने फिर पेश किया विधेयक
अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा से जुड़े कई बड़े घटनाक्रम एक साथ सामने आए हैं। यूरोप में रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच फ्रांस ने यूक्रेन के साथ रक्षा सहयोग को नए स्तर पर ले जाने का फैसला किया है। दूसरी ओर अमेरिका में उद्योगपति एलन मस्क चुनाव से जुड़े कथित मामलों को लेकर कानूनी जांच की संभावना का सामना कर रहे हैं। इसी बीच अमेरिकी संसद में जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता (Birthright Citizenship) को लेकर रिपब्लिकन सांसदों ने एक नया विधेयक पेश कर राजनीतिक बहस को फिर तेज कर दिया है। इन तीनों घटनाओं को वैश्विक राजनीति, सुरक्षा और कानून के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पेरिस में आयोजित कोएलिशन ऑफ द विलिंग (Coalition of the Willing) सम्मेलन के दौरान यूक्रेन के साथ एक नई रक्षा साझेदारी की घोषणा की। इस समझौते के तहत यूक्रेन को अपने ही देश में कुछ आधुनिक पश्चिमी मिसाइलों और सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों के निर्माण की अनुमति दी जाएगी। इसके लिए आवश्यक तकनीकी लाइसेंस और रक्षा सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। फ्रांस का मानना है कि इससे यूक्रेन अपनी रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ा सकेगा और विदेशी हथियार आपूर्ति पर उसकी निर्भरता कुछ हद तक कम होगी।
जानकारी के अनुसार इस समझौते के तहत यूक्रेन को Aster-30 एयर डिफेंस इंटरसेप्टर, AASM प्रिसिजन-गाइडेड ग्लाइड बम और SCALP-EG क्रूज मिसाइल के घरेलू उत्पादन की अनुमति देने की योजना है। इसके अलावा फ्रांस और इटली आने वाले समय में यूक्रेन को अतिरिक्त एयर डिफेंस सिस्टम और इंटरसेप्टर मिसाइलें भी उपलब्ध कराएंगे। राष्ट्रपति मैक्रों ने यह भी कहा कि आने वाले वर्षों में यूक्रेन को राफेल लड़ाकू विमान उपलब्ध कराने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। यह सहयोग रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन की दीर्घकालिक रक्षा क्षमता मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
फ्रांस और ब्रिटेन के नेतृत्व में गठित कोएलिशन ऑफ द विलिंग लगातार यूक्रेन को सुरक्षा सहयोग और सैन्य सहायता उपलब्ध कराने के लिए काम कर रहा है। हालांकि इस घोषणा के बाद रूस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने आरोप लगाया कि इस तरह की सैन्य सहायता युद्ध को लंबा खींच सकती है। वहीं रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने कहा कि नाटो देशों की नीतियां यूक्रेन को पश्चिमी सैन्य तकनीकों के परीक्षण का केंद्र बना रही हैं।
इस बीच बुल्गारिया के राष्ट्रपति रुमेन रादेव ने स्पष्ट किया कि उनका देश यूक्रेन को लगातार सैन्य सहायता देने वाले गठबंधन का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि युद्ध का समाधान हथियारों से नहीं बल्कि बातचीत और कूटनीति के जरिए निकाला जाना चाहिए। रादेव के अनुसार बुल्गारिया पहले ही कई सैन्य सहायता पैकेज यूक्रेन को दे चुका है और फिलहाल उसके पास अतिरिक्त रक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार स्लोवाकिया, हंगरी और चेक गणराज्य जैसे कुछ अन्य देशों ने भी एक प्रस्तावित सैन्य सहायता योजना में शामिल होने से इनकार किया है।
अमेरिका में दूसरी बड़ी खबर उद्योगपति एलन मस्क से जुड़ी है। विस्कॉन्सिन इलेक्शन कमीशन ने राज्य के चुनाव कानूनों के कथित उल्लंघन के मामले में एलन मस्क के खिलाफ आपराधिक जांच की सिफारिश की है। आयोग ने बहुमत से प्रस्ताव पारित कर मामले को ब्राउन काउंटी के जिला अटॉर्नी के पास भेजने का निर्णय लिया है। अब जिला अटॉर्नी तय करेंगे कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आपराधिक मामला दर्ज किया जाए या नहीं। आयोग के अनुसार यह फैसला निर्धारित समयसीमा के भीतर लिया जाएगा।
शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2025 में विस्कॉन्सिन सुप्रीम कोर्ट चुनाव के दौरान एलन मस्क ने सोशल मीडिया अभियानों के माध्यम से मतदाताओं को मतदान के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बड़ी धनराशि देने की घोषणा की थी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने रिपब्लिकन समर्थित उम्मीदवार के प्रचार में करोड़ों डॉलर खर्च किए। इस मामले में उनके खिलाफ एक अलग दीवानी मुकदमा भी चल रहा है, जिसमें चुनावी कानूनों के उल्लंघन और मतदाताओं को कथित प्रलोभन देने के आरोप लगाए गए हैं।
उधर अमेरिका में आव्रजन नीति को लेकर भी राजनीतिक बहस तेज हो गई है। रिपब्लिकन सांसद जिम बैंक्स ने संसद में नया विधेयक पेश किया है, जिसका उद्देश्य जन्म के आधार पर स्वतः मिलने वाली अमेरिकी नागरिकता के नियमों में बदलाव करना है। प्रस्ताव के अनुसार यदि किसी बच्चे के माता-पिता अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे हों, तो उस बच्चे को स्वतः अमेरिकी नागरिकता नहीं मिलेगी। यह प्रस्ताव पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त आव्रजन नीति से जुड़ा माना जा रहा है।
इससे पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ट्रंप प्रशासन के ऐसे ही एक कार्यकारी आदेश पर रोक लगा चुका है। अदालत ने उस आदेश को संविधान के अनुरूप नहीं माना था। इसके बावजूद रिपब्लिकन सांसदों का कहना है कि इस विषय पर कानून में संशोधन की जरूरत है। इसी बहस के बीच तथाकथित 'बर्थ टूरिज्म' और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दे भी अमेरिकी राजनीति में फिर प्रमुखता से उभर रहे हैं। आने वाले समय में संसद में इस प्रस्ताव पर व्यापक चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
दुनिया भर में तेजी से बदले हालात: यूक्रेन को फ्रांस का बड़ा रक्षा सहयोग, एलन मस्क पर जांच की सिफारिश और अमेरिका में नागरिकता कानून पर नई बहस
देश विदेश
अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा से जुड़े कई बड़े घटनाक्रम एक साथ सामने आए हैं। यूरोप में रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच फ्रांस ने यूक्रेन के साथ रक्षा सहयोग को नए स्तर पर ले जाने का फैसला किया है। दूसरी ओर अमेरिका में उद्योगपति एलन मस्क चुनाव से जुड़े कथित मामलों को लेकर कानूनी जांच की संभावना का सामना कर रहे हैं। इसी बीच अमेरिकी संसद में जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता (Birthright Citizenship) को लेकर रिपब्लिकन सांसदों ने एक नया विधेयक पेश कर राजनीतिक बहस को फिर तेज कर दिया है। इन तीनों घटनाओं को वैश्विक राजनीति, सुरक्षा और कानून के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पेरिस में आयोजित कोएलिशन ऑफ द विलिंग (Coalition of the Willing) सम्मेलन के दौरान यूक्रेन के साथ एक नई रक्षा साझेदारी की घोषणा की। इस समझौते के तहत यूक्रेन को अपने ही देश में कुछ आधुनिक पश्चिमी मिसाइलों और सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों के निर्माण की अनुमति दी जाएगी। इसके लिए आवश्यक तकनीकी लाइसेंस और रक्षा सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। फ्रांस का मानना है कि इससे यूक्रेन अपनी रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ा सकेगा और विदेशी हथियार आपूर्ति पर उसकी निर्भरता कुछ हद तक कम होगी।
जानकारी के अनुसार इस समझौते के तहत यूक्रेन को Aster-30 एयर डिफेंस इंटरसेप्टर, AASM प्रिसिजन-गाइडेड ग्लाइड बम और SCALP-EG क्रूज मिसाइल के घरेलू उत्पादन की अनुमति देने की योजना है। इसके अलावा फ्रांस और इटली आने वाले समय में यूक्रेन को अतिरिक्त एयर डिफेंस सिस्टम और इंटरसेप्टर मिसाइलें भी उपलब्ध कराएंगे। राष्ट्रपति मैक्रों ने यह भी कहा कि आने वाले वर्षों में यूक्रेन को राफेल लड़ाकू विमान उपलब्ध कराने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। यह सहयोग रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन की दीर्घकालिक रक्षा क्षमता मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
फ्रांस और ब्रिटेन के नेतृत्व में गठित कोएलिशन ऑफ द विलिंग लगातार यूक्रेन को सुरक्षा सहयोग और सैन्य सहायता उपलब्ध कराने के लिए काम कर रहा है। हालांकि इस घोषणा के बाद रूस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने आरोप लगाया कि इस तरह की सैन्य सहायता युद्ध को लंबा खींच सकती है। वहीं रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने कहा कि नाटो देशों की नीतियां यूक्रेन को पश्चिमी सैन्य तकनीकों के परीक्षण का केंद्र बना रही हैं।
इस बीच बुल्गारिया के राष्ट्रपति रुमेन रादेव ने स्पष्ट किया कि उनका देश यूक्रेन को लगातार सैन्य सहायता देने वाले गठबंधन का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि युद्ध का समाधान हथियारों से नहीं बल्कि बातचीत और कूटनीति के जरिए निकाला जाना चाहिए। रादेव के अनुसार बुल्गारिया पहले ही कई सैन्य सहायता पैकेज यूक्रेन को दे चुका है और फिलहाल उसके पास अतिरिक्त रक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार स्लोवाकिया, हंगरी और चेक गणराज्य जैसे कुछ अन्य देशों ने भी एक प्रस्तावित सैन्य सहायता योजना में शामिल होने से इनकार किया है।
अमेरिका में दूसरी बड़ी खबर उद्योगपति एलन मस्क से जुड़ी है। विस्कॉन्सिन इलेक्शन कमीशन ने राज्य के चुनाव कानूनों के कथित उल्लंघन के मामले में एलन मस्क के खिलाफ आपराधिक जांच की सिफारिश की है। आयोग ने बहुमत से प्रस्ताव पारित कर मामले को ब्राउन काउंटी के जिला अटॉर्नी के पास भेजने का निर्णय लिया है। अब जिला अटॉर्नी तय करेंगे कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आपराधिक मामला दर्ज किया जाए या नहीं। आयोग के अनुसार यह फैसला निर्धारित समयसीमा के भीतर लिया जाएगा।
शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2025 में विस्कॉन्सिन सुप्रीम कोर्ट चुनाव के दौरान एलन मस्क ने सोशल मीडिया अभियानों के माध्यम से मतदाताओं को मतदान के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बड़ी धनराशि देने की घोषणा की थी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने रिपब्लिकन समर्थित उम्मीदवार के प्रचार में करोड़ों डॉलर खर्च किए। इस मामले में उनके खिलाफ एक अलग दीवानी मुकदमा भी चल रहा है, जिसमें चुनावी कानूनों के उल्लंघन और मतदाताओं को कथित प्रलोभन देने के आरोप लगाए गए हैं।
उधर अमेरिका में आव्रजन नीति को लेकर भी राजनीतिक बहस तेज हो गई है। रिपब्लिकन सांसद जिम बैंक्स ने संसद में नया विधेयक पेश किया है, जिसका उद्देश्य जन्म के आधार पर स्वतः मिलने वाली अमेरिकी नागरिकता के नियमों में बदलाव करना है। प्रस्ताव के अनुसार यदि किसी बच्चे के माता-पिता अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे हों, तो उस बच्चे को स्वतः अमेरिकी नागरिकता नहीं मिलेगी। यह प्रस्ताव पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त आव्रजन नीति से जुड़ा माना जा रहा है।
इससे पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ट्रंप प्रशासन के ऐसे ही एक कार्यकारी आदेश पर रोक लगा चुका है। अदालत ने उस आदेश को संविधान के अनुरूप नहीं माना था। इसके बावजूद रिपब्लिकन सांसदों का कहना है कि इस विषय पर कानून में संशोधन की जरूरत है। इसी बहस के बीच तथाकथित 'बर्थ टूरिज्म' और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दे भी अमेरिकी राजनीति में फिर प्रमुखता से उभर रहे हैं। आने वाले समय में संसद में इस प्रस्ताव पर व्यापक चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।
