आज से शुरू हुई आषाढ़ गुप्त नवरात्रि, कलश स्थापना और चंद्र दर्शन के साथ नौ दिवसीय शक्ति उपासना का आरंभ

धर्म डेस्क

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मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना का विशेष पर्व शुरू, साधकों और शक्ति उपासकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है गुप्त नवरात्रि; आज चंद्र दर्शन का भी शुभ संयोग

हिंदू पंचांग के अनुसार आज से आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ हो गया है। नौ दिनों तक चलने वाले इस विशेष पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। यह नवरात्रि मुख्य रूप से साधकों, तांत्रिक उपासना करने वालों और शक्ति साधना से जुड़े श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती है। इस वर्ष गुप्त नवरात्रि की शुरुआत चंद्र दर्शन के शुभ संयोग के साथ हुई है, जिसके कारण धार्मिक दृष्टि से आज का दिन और भी अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देशभर के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, दुर्गा पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है, वहीं बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने घरों में भी विधि-विधान से कलश स्थापना कर मां भगवती की आराधना शुरू कर रहे हैं।

वैदिक पंचांग के अनुसार प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 14 जुलाई की दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर हुई थी और यह 15 जुलाई को सुबह 11 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। इसी तिथि में कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त प्रातः 5 बजकर 54 मिनट से 10 बजकर 20 मिनट तक माना गया। धार्मिक मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में घट स्थापना करने से पूरे नौ दिनों की पूजा सफल और फलदायी मानी जाती है। कलश स्थापना के साथ ही अखंड ज्योति प्रज्वलित करने, जौ बोने और मां शैलपुत्री की पूजा से नवरात्रि का आरंभ किया जाता है।

चैत्र और शारदीय नवरात्रि की तुलना में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का स्वरूप अपेक्षाकृत शांत और साधना प्रधान माना जाता है। इस दौरान सार्वजनिक आयोजनों की बजाय व्यक्तिगत साधना, मंत्र जाप, ध्यान और देवी उपासना पर विशेष जोर दिया जाता है। धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि इन नौ दिनों में मां दुर्गा के प्रत्येक स्वरूप की अलग-अलग दिन पूजा करने से आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है, जबकि नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ यह पर्व संपन्न होता है।

गुप्त नवरात्रि के दौरान अनेक श्रद्धालु नौ दिनों का व्रत भी रखते हैं। व्रत रखने वाले लोग सात्विक भोजन, फल, दूध और व्रत में सेवन किए जाने वाले खाद्य पदार्थों का ही उपयोग करते हैं। धार्मिक परंपराओं के अनुसार इन दिनों दुर्गा सप्तशती, देवी महात्म्य और श्रीमद् देवी भागवत का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है। इसके अलावा मां दुर्गा के 32 नामों का पाठ, जिसे दुर्गा बत्तीसी भी कहा जाता है, करने की परंपरा भी कई स्थानों पर देखने को मिलती है। मान्यता है कि इससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

इस बार गुप्त नवरात्रि के पहले दिन चंद्र दर्शन का भी विशेष संयोग बना है। अमावस्या के बाद पहली बार चंद्रमा के दर्शन करने की परंपरा हिंदू धर्म में शुभ मानी जाती है। श्रद्धालु शाम के समय चंद्र देव के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा करते हैं और कई लोग इसी के बाद अपना व्रत भी खोलते हैं। धार्मिक मान्यता है कि चंद्र देव की पूजा करने से मानसिक संतुलन, सुख-समृद्धि और पारिवारिक जीवन में सकारात्मकता आती है। पंचांग के अनुसार आज चंद्रमा का उदय सुबह 6 बजकर 32 मिनट पर और अस्त रात 8 बजकर 19 मिनट पर होगा। हालांकि चंद्र दर्शन का वास्तविक समय स्थानीय मौसम और भौगोलिक स्थिति पर निर्भर करेगा।

ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को नवग्रहों में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इसे मन, बुद्धि, भावनाओं और समृद्धि का कारक ग्रह माना जाता है। मान्यता है कि चंद्र दर्शन के दिन चंद्र देव की पूजा करने और अर्घ्य अर्पित करने से कुंडली में चंद्र ग्रह की शुभता बढ़ती है। कई श्रद्धालु इस अवसर पर सफेद पुष्प, अक्षत, दूध और जल से चंद्र देव का पूजन करते हैं तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

देश के अनेक शक्तिपीठों और देवी मंदिरों में आज सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली। कई स्थानों पर विशेष दुर्गा पाठ, हवन, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजनों की शुरुआत हुई। उज्जैन, वाराणसी, हरिद्वार, प्रयागराज, विंध्याचल और अन्य प्रमुख देवी मंदिरों में गुप्त नवरात्रि के अवसर पर विशेष पूजा की व्यवस्था की गई है। घरों में भी श्रद्धालु विधि-विधान से कलश स्थापना कर नौ दिनों तक नियमित पूजा, आरती और मंत्र जाप का संकल्प ले रहे हैं। धार्मिक विद्वानों के अनुसार यह नवरात्रि बाहरी उत्सव से अधिक आत्मिक साधना, अनुशासन और देवी आराधना का पर्व मानी जाती है।

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15 Jul 2026 By Priyanka

आज से शुरू हुई आषाढ़ गुप्त नवरात्रि, कलश स्थापना और चंद्र दर्शन के साथ नौ दिवसीय शक्ति उपासना का आरंभ

धर्म डेस्क

हिंदू पंचांग के अनुसार आज से आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ हो गया है। नौ दिनों तक चलने वाले इस विशेष पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। यह नवरात्रि मुख्य रूप से साधकों, तांत्रिक उपासना करने वालों और शक्ति साधना से जुड़े श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती है। इस वर्ष गुप्त नवरात्रि की शुरुआत चंद्र दर्शन के शुभ संयोग के साथ हुई है, जिसके कारण धार्मिक दृष्टि से आज का दिन और भी अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देशभर के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, दुर्गा पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है, वहीं बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने घरों में भी विधि-विधान से कलश स्थापना कर मां भगवती की आराधना शुरू कर रहे हैं।

वैदिक पंचांग के अनुसार प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 14 जुलाई की दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर हुई थी और यह 15 जुलाई को सुबह 11 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। इसी तिथि में कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त प्रातः 5 बजकर 54 मिनट से 10 बजकर 20 मिनट तक माना गया। धार्मिक मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में घट स्थापना करने से पूरे नौ दिनों की पूजा सफल और फलदायी मानी जाती है। कलश स्थापना के साथ ही अखंड ज्योति प्रज्वलित करने, जौ बोने और मां शैलपुत्री की पूजा से नवरात्रि का आरंभ किया जाता है।

चैत्र और शारदीय नवरात्रि की तुलना में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का स्वरूप अपेक्षाकृत शांत और साधना प्रधान माना जाता है। इस दौरान सार्वजनिक आयोजनों की बजाय व्यक्तिगत साधना, मंत्र जाप, ध्यान और देवी उपासना पर विशेष जोर दिया जाता है। धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि इन नौ दिनों में मां दुर्गा के प्रत्येक स्वरूप की अलग-अलग दिन पूजा करने से आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है, जबकि नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ यह पर्व संपन्न होता है।

गुप्त नवरात्रि के दौरान अनेक श्रद्धालु नौ दिनों का व्रत भी रखते हैं। व्रत रखने वाले लोग सात्विक भोजन, फल, दूध और व्रत में सेवन किए जाने वाले खाद्य पदार्थों का ही उपयोग करते हैं। धार्मिक परंपराओं के अनुसार इन दिनों दुर्गा सप्तशती, देवी महात्म्य और श्रीमद् देवी भागवत का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है। इसके अलावा मां दुर्गा के 32 नामों का पाठ, जिसे दुर्गा बत्तीसी भी कहा जाता है, करने की परंपरा भी कई स्थानों पर देखने को मिलती है। मान्यता है कि इससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

इस बार गुप्त नवरात्रि के पहले दिन चंद्र दर्शन का भी विशेष संयोग बना है। अमावस्या के बाद पहली बार चंद्रमा के दर्शन करने की परंपरा हिंदू धर्म में शुभ मानी जाती है। श्रद्धालु शाम के समय चंद्र देव के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा करते हैं और कई लोग इसी के बाद अपना व्रत भी खोलते हैं। धार्मिक मान्यता है कि चंद्र देव की पूजा करने से मानसिक संतुलन, सुख-समृद्धि और पारिवारिक जीवन में सकारात्मकता आती है। पंचांग के अनुसार आज चंद्रमा का उदय सुबह 6 बजकर 32 मिनट पर और अस्त रात 8 बजकर 19 मिनट पर होगा। हालांकि चंद्र दर्शन का वास्तविक समय स्थानीय मौसम और भौगोलिक स्थिति पर निर्भर करेगा।

ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को नवग्रहों में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इसे मन, बुद्धि, भावनाओं और समृद्धि का कारक ग्रह माना जाता है। मान्यता है कि चंद्र दर्शन के दिन चंद्र देव की पूजा करने और अर्घ्य अर्पित करने से कुंडली में चंद्र ग्रह की शुभता बढ़ती है। कई श्रद्धालु इस अवसर पर सफेद पुष्प, अक्षत, दूध और जल से चंद्र देव का पूजन करते हैं तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

देश के अनेक शक्तिपीठों और देवी मंदिरों में आज सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली। कई स्थानों पर विशेष दुर्गा पाठ, हवन, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजनों की शुरुआत हुई। उज्जैन, वाराणसी, हरिद्वार, प्रयागराज, विंध्याचल और अन्य प्रमुख देवी मंदिरों में गुप्त नवरात्रि के अवसर पर विशेष पूजा की व्यवस्था की गई है। घरों में भी श्रद्धालु विधि-विधान से कलश स्थापना कर नौ दिनों तक नियमित पूजा, आरती और मंत्र जाप का संकल्प ले रहे हैं। धार्मिक विद्वानों के अनुसार यह नवरात्रि बाहरी उत्सव से अधिक आत्मिक साधना, अनुशासन और देवी आराधना का पर्व मानी जाती है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/ashadh-gupt-navratri-started-from-today-nine-day-shakti-worship-started/article-58820

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