वेदांता ग्रुप पर ED की छापेमारी: FEMA उल्लंघन के आरोपों से मचा बाजार में हलचल

बिजनेस डेस्क

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मुंबई और दिल्ली दफ्तरों पर कार्रवाई, रॉयल्टी भुगतान जांच के घेरे में

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार, 2 जून को वेदांता ग्रुप के मुंबई और दिल्ली स्थित दफ्तरों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई कथित तौर पर फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के उल्लंघन से जुड़े मामलों की जांच के तहत की गई है। जांच एजेंसी का फोकस मुख्य रूप से ग्रुप के भीतर हुए रॉयल्टी भुगतान और विदेशी लेनदेन पर है। इस कार्रवाई के बाद देश के कॉरपोरेट और शेयर बाजार में हलचल देखी गई। वेदांता लिमिटेड के शेयर में भी मामूली गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।

रॉयल्टी भुगतान बना जांच का मुख्य केंद्र

ED की जांच का प्रमुख पहलू वह रॉयल्टी भुगतान है जो भारतीय कंपनी वेदांता लिमिटेड द्वारा अपनी ब्रिटेन स्थित पैरेंट कंपनी वेदांता रिसोर्सेज को किया गया था। आरोप है कि इस भुगतान संरचना के जरिए विदेशी मुद्रा से जुड़े नियमों का उल्लंघन हुआ हो सकता है। वेदांता रिसोर्सेज पर भारी कर्ज का बोझ बताया जा रहा है, जो लगभग ₹74,000 करोड़ के आसपास है। इसी कर्ज को मैनेज करने और फंडिंग जरूरतों को पूरा करने के लिए भारतीय यूनिट से बड़ी मात्रा में रॉयल्टी भुगतान किए जाने की बात सामने आई है।

कंपनी ने दी सफाई, जांच में सहयोग का दावा

छापेमारी के बाद वेदांता ग्रुप की ओर से आधिकारिक बयान जारी किया गया। कंपनी ने कहा कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है और सभी आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह सभी लागू कानूनों और नियमों का पालन करती है। हालांकि, चूंकि मामला अभी नियामकीय जांच के अधीन है, इसलिए इस पर विस्तृत टिप्पणी करने से इनकार किया गया है।

शेयर बाजार पर दिखा असर

ED की कार्रवाई का असर तुरंत शेयर बाजार पर देखने को मिला। वेदांता लिमिटेड का स्टॉक दोपहर के समय लगभग 0.7% गिरकर ₹334.6 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था। निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल देखा गया, हालांकि यह शुरुआती प्रतिक्रिया है और आगे स्थिति जांच के परिणामों पर निर्भर करेगी। वेदांता लिमिटेड भारतीय शेयर बाजार में एक बड़ी लिस्टेड कंपनी है, जिसकी बाजार पूंजीकरण (Market Cap) लगभग ₹1.3 लाख करोड़ के आसपास है।

डिमर्जर प्रक्रिया के बीच बढ़ी मुश्किलें

यह छापेमारी ऐसे समय में हुई है जब वेदांता ग्रुप अपने बड़े पुनर्गठन यानी डिमर्जर की प्रक्रिया के अंतिम चरण में है। कंपनी अपने मौजूदा व्यवसायों को पांच अलग-अलग इकाइयों में विभाजित करने की योजना पर काम कर रही है। इस डिमर्जर के बाद चार नई लिस्टेड कंपनियां अस्तित्व में आएंगी, जिससे निवेशकों को अलग-अलग सेक्टर में निवेश का अवसर मिलेगा। हाल ही में कंपनी को इस पुनर्गठन के लिए विभिन्न नियामकीय मंजूरियां भी प्राप्त हुई थीं। ऐसे में ED की कार्रवाई ने इस प्रक्रिया को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

FEMA नियमों के उल्लंघन का आरोप क्या है?

FEMA (Foreign Exchange Management Act) भारत में विदेशी मुद्रा से जुड़े लेनदेन को नियंत्रित करने वाला कानून है। इसके तहत किसी भी प्रकार के विदेशी भुगतान, निवेश या रॉयल्टी ट्रांसफर को नियमों के अनुसार करना आवश्यक होता है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या वेदांता ग्रुप द्वारा किए गए विदेशी भुगतान नियमों के अनुरूप थे या नहीं। विशेष रूप से यह देखा जा रहा है कि क्या इन लेनदेन के जरिए धन के प्रवाह में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है।

कॉरपोरेट जगत में बढ़ी निगरानी की चिंता

इस मामले ने भारतीय कॉरपोरेट सेक्टर में एक बार फिर विदेशी लेनदेन और समूह संरचनाओं पर निगरानी को लेकर चर्चा तेज कर दी है। बड़ी कंपनियों के अंतरराष्ट्रीय फाइनेंशियल स्ट्रक्चर अब रेगुलेटर्स की कड़ी निगरानी में हैं।

ऐसे मामलों में जांच का दायरा अक्सर केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे ग्रुप के वित्तीय लेनदेन की समीक्षा की जाती है। वेदांता ग्रुप पर ED की छापेमारी ने न केवल कंपनी के संचालन पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि निवेशकों और बाजार की धारणा को भी प्रभावित किया है। हालांकि, कंपनी का कहना है कि वह पूरी तरह से नियमों का पालन कर रही है और जांच में सहयोग दे रही है।

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02 Jun 2026 By Vaishnavi.J

वेदांता ग्रुप पर ED की छापेमारी: FEMA उल्लंघन के आरोपों से मचा बाजार में हलचल

बिजनेस डेस्क

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार, 2 जून को वेदांता ग्रुप के मुंबई और दिल्ली स्थित दफ्तरों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई कथित तौर पर फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के उल्लंघन से जुड़े मामलों की जांच के तहत की गई है। जांच एजेंसी का फोकस मुख्य रूप से ग्रुप के भीतर हुए रॉयल्टी भुगतान और विदेशी लेनदेन पर है। इस कार्रवाई के बाद देश के कॉरपोरेट और शेयर बाजार में हलचल देखी गई। वेदांता लिमिटेड के शेयर में भी मामूली गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।

रॉयल्टी भुगतान बना जांच का मुख्य केंद्र

ED की जांच का प्रमुख पहलू वह रॉयल्टी भुगतान है जो भारतीय कंपनी वेदांता लिमिटेड द्वारा अपनी ब्रिटेन स्थित पैरेंट कंपनी वेदांता रिसोर्सेज को किया गया था। आरोप है कि इस भुगतान संरचना के जरिए विदेशी मुद्रा से जुड़े नियमों का उल्लंघन हुआ हो सकता है। वेदांता रिसोर्सेज पर भारी कर्ज का बोझ बताया जा रहा है, जो लगभग ₹74,000 करोड़ के आसपास है। इसी कर्ज को मैनेज करने और फंडिंग जरूरतों को पूरा करने के लिए भारतीय यूनिट से बड़ी मात्रा में रॉयल्टी भुगतान किए जाने की बात सामने आई है।

कंपनी ने दी सफाई, जांच में सहयोग का दावा

छापेमारी के बाद वेदांता ग्रुप की ओर से आधिकारिक बयान जारी किया गया। कंपनी ने कहा कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है और सभी आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह सभी लागू कानूनों और नियमों का पालन करती है। हालांकि, चूंकि मामला अभी नियामकीय जांच के अधीन है, इसलिए इस पर विस्तृत टिप्पणी करने से इनकार किया गया है।

शेयर बाजार पर दिखा असर

ED की कार्रवाई का असर तुरंत शेयर बाजार पर देखने को मिला। वेदांता लिमिटेड का स्टॉक दोपहर के समय लगभग 0.7% गिरकर ₹334.6 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था। निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल देखा गया, हालांकि यह शुरुआती प्रतिक्रिया है और आगे स्थिति जांच के परिणामों पर निर्भर करेगी। वेदांता लिमिटेड भारतीय शेयर बाजार में एक बड़ी लिस्टेड कंपनी है, जिसकी बाजार पूंजीकरण (Market Cap) लगभग ₹1.3 लाख करोड़ के आसपास है।

डिमर्जर प्रक्रिया के बीच बढ़ी मुश्किलें

यह छापेमारी ऐसे समय में हुई है जब वेदांता ग्रुप अपने बड़े पुनर्गठन यानी डिमर्जर की प्रक्रिया के अंतिम चरण में है। कंपनी अपने मौजूदा व्यवसायों को पांच अलग-अलग इकाइयों में विभाजित करने की योजना पर काम कर रही है। इस डिमर्जर के बाद चार नई लिस्टेड कंपनियां अस्तित्व में आएंगी, जिससे निवेशकों को अलग-अलग सेक्टर में निवेश का अवसर मिलेगा। हाल ही में कंपनी को इस पुनर्गठन के लिए विभिन्न नियामकीय मंजूरियां भी प्राप्त हुई थीं। ऐसे में ED की कार्रवाई ने इस प्रक्रिया को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

FEMA नियमों के उल्लंघन का आरोप क्या है?

FEMA (Foreign Exchange Management Act) भारत में विदेशी मुद्रा से जुड़े लेनदेन को नियंत्रित करने वाला कानून है। इसके तहत किसी भी प्रकार के विदेशी भुगतान, निवेश या रॉयल्टी ट्रांसफर को नियमों के अनुसार करना आवश्यक होता है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या वेदांता ग्रुप द्वारा किए गए विदेशी भुगतान नियमों के अनुरूप थे या नहीं। विशेष रूप से यह देखा जा रहा है कि क्या इन लेनदेन के जरिए धन के प्रवाह में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है।

कॉरपोरेट जगत में बढ़ी निगरानी की चिंता

इस मामले ने भारतीय कॉरपोरेट सेक्टर में एक बार फिर विदेशी लेनदेन और समूह संरचनाओं पर निगरानी को लेकर चर्चा तेज कर दी है। बड़ी कंपनियों के अंतरराष्ट्रीय फाइनेंशियल स्ट्रक्चर अब रेगुलेटर्स की कड़ी निगरानी में हैं।

ऐसे मामलों में जांच का दायरा अक्सर केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे ग्रुप के वित्तीय लेनदेन की समीक्षा की जाती है। वेदांता ग्रुप पर ED की छापेमारी ने न केवल कंपनी के संचालन पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि निवेशकों और बाजार की धारणा को भी प्रभावित किया है। हालांकि, कंपनी का कहना है कि वह पूरी तरह से नियमों का पालन कर रही है और जांच में सहयोग दे रही है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/business/ed-raid-on-vedanta-group-on-charges-of-fema-violation/article-54767

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