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नॉर्वे चेस में भारतीय खिलाड़ियों की दमदार वापसी, प्रज्ञानानंदा-गुकेश जीते
स्पोर्ट्स डेस्क
7वें राउंड में भारत ने दिखाई मजबूती, दिव्या देशमुख ने हम्पी को हराकर बढ़ाई खिताबी उम्मीदें
नॉर्वे चेस टूर्नामेंट में भारतीय खिलाड़ियों ने छठे राउंड की निराशा को पीछे छोड़ते हुए सातवें राउंड में शानदार वापसी की। सोमवार देर रात खेले गए मुकाबलों में आर. प्रज्ञानानंदा और वर्ल्ड चैंपियन डी. गुकेश ने महत्वपूर्ण जीत दर्ज की, जबकि महिला वर्ग में दिव्या देशमुख ने कोनेरू हम्पी को हराकर खिताबी दौड़ को और रोमांचक बना दिया। एक दिन पहले सभी भारतीय खिलाड़ियों को हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन इस राउंड में प्रदर्शन ने फिर से उम्मीदें जगा दीं।
ओपन कैटेगरी में आर. प्रज्ञानानंदा ने फ्रांस के मजबूत ग्रैंडमास्टर अलीरेजा फिरोजा को मात दी। सफेद मोहरों से खेलते हुए प्रज्ञानानंदा ने शुरुआत से ही संतुलित और आक्रामक रणनीति अपनाई। 26वीं चाल के बाद उन्होंने निर्णायक बढ़त बना ली और फिरोजा को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। इस जीत के साथ प्रज्ञानानंदा के कुल 9 अंक हो गए हैं और वह टॉप ग्रुप में मजबूती से बने हुए हैं। उनकी यह जीत न केवल स्कोरबोर्ड पर महत्वपूर्ण रही बल्कि आत्मविश्वास के लिहाज से भी बेहद अहम मानी जा रही है। दूसरी तरफ, वर्ल्ड चैंपियन डी. गुकेश ने अमेरिकी ग्रैंडमास्टर वेस्ली सो के खिलाफ मुकाबले में संघर्षपूर्ण प्रदर्शन किया। क्लासिकल गेम में वह जीत के करीब पहुंचे लेकिन अंतिम चरण में मुकाबला ड्रॉ पर समाप्त हुआ। हालांकि टाईब्रेक में उन्होंने शानदार वापसी करते हुए जीत दर्ज की और 1.5 अंक हासिल किए। गुकेश के अब कुल 8 अंक हो चुके हैं। भले ही वह ओपन कैटेगरी में फिलहाल नीचे की ओर हैं, लेकिन उनकी यह टाईब्रेक जीत उनके आक्रामक खेल और दबाव में वापसी की क्षमता को दर्शाती है।
महिला वर्ग में भारत के लिए दिन और भी खास रहा, जहां दिव्या देशमुख ने कोनेरू हम्पी को हराकर बड़ी सफलता हासिल की। यह मुकाबला टाईब्रेक तक गया, जहां दिव्या ने आर्मागेडन में बाजी मार ली। इस जीत के बाद उनके 10 अंक हो गए हैं और वह खिताब की दौड़ में मजबूती से बनी हुई हैं। हालांकि कजाकिस्तान की बिबिसारा असाउबायेवा अब भी 12.5 अंकों के साथ शीर्ष पर हैं, लेकिन दिव्या की जीत ने प्रतियोगिता को रोमांचक बना दिया है। प्रज्ञानानंदा और गुकेश की जीत के साथ भारतीय कैंप में उत्साह का माहौल लौट आया है। खासकर छठे राउंड में सभी खिलाड़ियों की हार के बाद यह वापसी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की उतार-चढ़ाव भरी प्रतियोगिता में मानसिक मजबूती ही असली अंतर पैदा करती है, और भारतीय खिलाड़ियों ने यह साबित किया है कि वे दबाव में भी वापसी करने की क्षमता रखते हैं।
ओपन वर्ग में वेस्ली सो 12.5 अंकों के साथ अभी भी शीर्ष पर बने हुए हैं। उनके बाद अलीरेजा फिरोजा 10 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर हैं। वहीं प्रज्ञानानंदा, मैग्नस कार्लसन और विन्सेंट कीमर 9-9 अंकों के साथ संयुक्त तीसरे स्थान पर चल रहे हैं। यह स्थिति आने वाले राउंड्स को और भी रोमांचक बना रही है क्योंकि टॉप स्थानों पर अंतर बेहद कम है। महिला वर्ग में भी स्थिति काफी दिलचस्प बनी हुई है। बिबिसारा असाउबायेवा ने चीन की झू जिनर को हराकर अपनी बढ़त मजबूत की है। उनके 12.5 अंक हैं और वह शीर्ष पर हैं। दिव्या देशमुख 10 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर हैं, जबकि अन्य खिलाड़ी भी खिताबी दौड़ में बने हुए हैं। अगला मुकाबला विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा क्योंकि दिव्या और बिबिसारा के बीच सीधा टकराव टूर्नामेंट की दिशा तय कर सकता है।
भारतीय खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि वे विश्व स्तर पर लगातार अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं। चाहे प्रज्ञानानंदा की रणनीतिक जीत हो या गुकेश की टाईब्रेक में वापसी, दोनों ने साबित किया है कि भारतीय शतरंज अब स्थिरता और आत्मविश्वास के नए स्तर पर पहुंच चुका है। वहीं दिव्या देशमुख की लगातार बढ़त महिला शतरंज में भारत की मजबूत मौजूदगी को दर्शाती है।
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नॉर्वे चेस में भारतीय खिलाड़ियों की दमदार वापसी, प्रज्ञानानंदा-गुकेश जीते
स्पोर्ट्स डेस्क
नॉर्वे चेस टूर्नामेंट में भारतीय खिलाड़ियों ने छठे राउंड की निराशा को पीछे छोड़ते हुए सातवें राउंड में शानदार वापसी की। सोमवार देर रात खेले गए मुकाबलों में आर. प्रज्ञानानंदा और वर्ल्ड चैंपियन डी. गुकेश ने महत्वपूर्ण जीत दर्ज की, जबकि महिला वर्ग में दिव्या देशमुख ने कोनेरू हम्पी को हराकर खिताबी दौड़ को और रोमांचक बना दिया। एक दिन पहले सभी भारतीय खिलाड़ियों को हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन इस राउंड में प्रदर्शन ने फिर से उम्मीदें जगा दीं।
ओपन कैटेगरी में आर. प्रज्ञानानंदा ने फ्रांस के मजबूत ग्रैंडमास्टर अलीरेजा फिरोजा को मात दी। सफेद मोहरों से खेलते हुए प्रज्ञानानंदा ने शुरुआत से ही संतुलित और आक्रामक रणनीति अपनाई। 26वीं चाल के बाद उन्होंने निर्णायक बढ़त बना ली और फिरोजा को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। इस जीत के साथ प्रज्ञानानंदा के कुल 9 अंक हो गए हैं और वह टॉप ग्रुप में मजबूती से बने हुए हैं। उनकी यह जीत न केवल स्कोरबोर्ड पर महत्वपूर्ण रही बल्कि आत्मविश्वास के लिहाज से भी बेहद अहम मानी जा रही है। दूसरी तरफ, वर्ल्ड चैंपियन डी. गुकेश ने अमेरिकी ग्रैंडमास्टर वेस्ली सो के खिलाफ मुकाबले में संघर्षपूर्ण प्रदर्शन किया। क्लासिकल गेम में वह जीत के करीब पहुंचे लेकिन अंतिम चरण में मुकाबला ड्रॉ पर समाप्त हुआ। हालांकि टाईब्रेक में उन्होंने शानदार वापसी करते हुए जीत दर्ज की और 1.5 अंक हासिल किए। गुकेश के अब कुल 8 अंक हो चुके हैं। भले ही वह ओपन कैटेगरी में फिलहाल नीचे की ओर हैं, लेकिन उनकी यह टाईब्रेक जीत उनके आक्रामक खेल और दबाव में वापसी की क्षमता को दर्शाती है।
महिला वर्ग में भारत के लिए दिन और भी खास रहा, जहां दिव्या देशमुख ने कोनेरू हम्पी को हराकर बड़ी सफलता हासिल की। यह मुकाबला टाईब्रेक तक गया, जहां दिव्या ने आर्मागेडन में बाजी मार ली। इस जीत के बाद उनके 10 अंक हो गए हैं और वह खिताब की दौड़ में मजबूती से बनी हुई हैं। हालांकि कजाकिस्तान की बिबिसारा असाउबायेवा अब भी 12.5 अंकों के साथ शीर्ष पर हैं, लेकिन दिव्या की जीत ने प्रतियोगिता को रोमांचक बना दिया है। प्रज्ञानानंदा और गुकेश की जीत के साथ भारतीय कैंप में उत्साह का माहौल लौट आया है। खासकर छठे राउंड में सभी खिलाड़ियों की हार के बाद यह वापसी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की उतार-चढ़ाव भरी प्रतियोगिता में मानसिक मजबूती ही असली अंतर पैदा करती है, और भारतीय खिलाड़ियों ने यह साबित किया है कि वे दबाव में भी वापसी करने की क्षमता रखते हैं।
ओपन वर्ग में वेस्ली सो 12.5 अंकों के साथ अभी भी शीर्ष पर बने हुए हैं। उनके बाद अलीरेजा फिरोजा 10 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर हैं। वहीं प्रज्ञानानंदा, मैग्नस कार्लसन और विन्सेंट कीमर 9-9 अंकों के साथ संयुक्त तीसरे स्थान पर चल रहे हैं। यह स्थिति आने वाले राउंड्स को और भी रोमांचक बना रही है क्योंकि टॉप स्थानों पर अंतर बेहद कम है। महिला वर्ग में भी स्थिति काफी दिलचस्प बनी हुई है। बिबिसारा असाउबायेवा ने चीन की झू जिनर को हराकर अपनी बढ़त मजबूत की है। उनके 12.5 अंक हैं और वह शीर्ष पर हैं। दिव्या देशमुख 10 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर हैं, जबकि अन्य खिलाड़ी भी खिताबी दौड़ में बने हुए हैं। अगला मुकाबला विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा क्योंकि दिव्या और बिबिसारा के बीच सीधा टकराव टूर्नामेंट की दिशा तय कर सकता है।
भारतीय खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि वे विश्व स्तर पर लगातार अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं। चाहे प्रज्ञानानंदा की रणनीतिक जीत हो या गुकेश की टाईब्रेक में वापसी, दोनों ने साबित किया है कि भारतीय शतरंज अब स्थिरता और आत्मविश्वास के नए स्तर पर पहुंच चुका है। वहीं दिव्या देशमुख की लगातार बढ़त महिला शतरंज में भारत की मजबूत मौजूदगी को दर्शाती है।
