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गवाही गमछे की: शादी में हुई मासूम की हत्या का खुलासा
मुरैना,(म.प्र.)
मुरैना के रामपाल का पुरा गांव में रिश्तों के शक ने ले ली 7 साल की तनु की जान, गमछे ने खोला पूरा राज
मुरैना जिले के चिन्नोन थाना क्षेत्र के रामपाल का पुरा गांव में हुई एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके को हिला दिया है। शादी समारोह के बीच 7 साल की मासूम बच्ची तनु की हत्या ने रिश्तों, शक और गुस्से की ऐसी कहानी सामने रख दी, जिसने हर किसी को स्तब्ध कर दिया। शुरुआती जांच में जो मामला एक सामान्य गुमशुदगी जैसा लग रहा था, वह धीरे-धीरे एक जघन्य हत्या की गुत्थी में बदल गया, और इस पूरे केस की सबसे अहम कड़ी बना एक गमछा।
घटना 12 मई की सुबह सामने आई जब शादी समारोह में शामिल परिवार को पता चला कि तनु अपने दादा रघुनाथ सिंह के पास नहीं है। रात भर शादी में नाच-गाना चलता रहा था और सभी लोग थककर सो गए थे। सुबह जब बच्ची की तलाश शुरू हुई तो पहले उसे आसपास के गांव और खेतों में ढूंढा गया, लेकिन कुछ घंटों बाद एक सुनसान इलाके में गुफा जैसे गड्ढे में उसका शव मिला। बच्ची के हाथ-पैर एक नए गमछे से बंधे थे और सिर पर पत्थर से वार किया गया था। इस दृश्य ने पूरे परिवार और गांव को सदमे में डाल दिया। पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में यह मामला किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा किए गए अपराध जैसा लग रहा था, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, शक की सुई शादी में शामिल लोगों की ओर घूमने लगी। मौके पर मिले गमछे ने जांच को निर्णायक दिशा दी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेन्द्र पाल सिंह ने मौके पर पहुंचकर जांच संभाली और परिवार से जानकारी जुटानी शुरू की। जब बच्ची के पिता ने गमछे को पहचाना और बताया कि यह रामदीन जाटव का हो सकता है, तो पुलिस का शक गहरा गया।
फोटोग्राफी और वीडियो रिकॉर्डिंग की मदद से पुलिस ने जब शादी समारोह के फुटेज खंगाले, तो सामने आया कि रामदीन ने उसी तरह का गमछा अपने सिर पर बांध रखा था। यही सुराग पुलिस के लिए सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ। इसके बाद हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो पूरा मामला खुलता चला गया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। जांच में सामने आया कि रामदीन और रघुनाथ पड़ोसी हैं और उनके बीच बकरियों के कारोबार को लेकर आर्थिक संबंध भी हैं। रघुनाथ बकरी खरीद-फरोख्त का हिसाब रखता था और इसी कारण उसका रामदीन के घर आना-जाना लगा रहता था। इसी दौरान रामदीन की पत्नी को लेकर उसके मन में शक पैदा हो गया। उसे लगता था कि रघुनाथ का उसकी पत्नी से संबंध है, जबकि इसके पीछे कोई ठोस आधार नहीं था। धीरे-धीरे यह शक उसके दिमाग में गहराता गया और उसने बदले की भावना पाल ली।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी के मन में यह धारणा मजबूत हो गई थी कि रघुनाथ उसकी गैरमौजूदगी में उसकी पत्नी के करीब आता है। गांव में फैली छोटी-छोटी बातों और अपनी कल्पनाओं के आधार पर उसने एक खतरनाक योजना बना ली। 11 मई की रात शादी समारोह के दौरान जब सभी लोग व्यस्त थे, तब उसने मौका देखकर बच्ची को उठा लिया। इसके बाद सुनसान जगह पर ले जाकर उसके हाथ-पैर गमछे से बांधे और सिर पर पत्थर से वार कर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद वह दोबारा शादी समारोह में लौट आया और सामान्य व्यवहार करता रहा, ताकि किसी को शक न हो। अगले दिन जब बच्ची की तलाश शुरू हुई, तो वह भी भीड़ में शामिल होकर खोज में हिस्सा लेता रहा। लेकिन पुलिस की जांच और गमछे की पहचान ने उसकी पूरी कहानी उजागर कर दी।
गांव में इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे शक और भ्रम का परिणाम बता रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि आरोपी ने पहले से ही इस तरह की योजना बना रखी थी। हालांकि पुलिस का कहना है कि जांच में मिले सबूत और स्वीकारोक्ति के आधार पर मामला स्पष्ट हो चुका है। यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि व्यक्तिगत शक और मानसिक असंतुलन किस तरह समाज में बड़े अपराध को जन्म दे सकता है। एक मासूम बच्ची की जान उस विवाद का शिकार हो गई, जिसका उससे कोई संबंध ही नहीं था। आरोपी पुलिस हिरासत में है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
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गवाही गमछे की: शादी में हुई मासूम की हत्या का खुलासा
मुरैना,(म.प्र.)
मुरैना जिले के चिन्नोन थाना क्षेत्र के रामपाल का पुरा गांव में हुई एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके को हिला दिया है। शादी समारोह के बीच 7 साल की मासूम बच्ची तनु की हत्या ने रिश्तों, शक और गुस्से की ऐसी कहानी सामने रख दी, जिसने हर किसी को स्तब्ध कर दिया। शुरुआती जांच में जो मामला एक सामान्य गुमशुदगी जैसा लग रहा था, वह धीरे-धीरे एक जघन्य हत्या की गुत्थी में बदल गया, और इस पूरे केस की सबसे अहम कड़ी बना एक गमछा।
घटना 12 मई की सुबह सामने आई जब शादी समारोह में शामिल परिवार को पता चला कि तनु अपने दादा रघुनाथ सिंह के पास नहीं है। रात भर शादी में नाच-गाना चलता रहा था और सभी लोग थककर सो गए थे। सुबह जब बच्ची की तलाश शुरू हुई तो पहले उसे आसपास के गांव और खेतों में ढूंढा गया, लेकिन कुछ घंटों बाद एक सुनसान इलाके में गुफा जैसे गड्ढे में उसका शव मिला। बच्ची के हाथ-पैर एक नए गमछे से बंधे थे और सिर पर पत्थर से वार किया गया था। इस दृश्य ने पूरे परिवार और गांव को सदमे में डाल दिया। पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में यह मामला किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा किए गए अपराध जैसा लग रहा था, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, शक की सुई शादी में शामिल लोगों की ओर घूमने लगी। मौके पर मिले गमछे ने जांच को निर्णायक दिशा दी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेन्द्र पाल सिंह ने मौके पर पहुंचकर जांच संभाली और परिवार से जानकारी जुटानी शुरू की। जब बच्ची के पिता ने गमछे को पहचाना और बताया कि यह रामदीन जाटव का हो सकता है, तो पुलिस का शक गहरा गया।
फोटोग्राफी और वीडियो रिकॉर्डिंग की मदद से पुलिस ने जब शादी समारोह के फुटेज खंगाले, तो सामने आया कि रामदीन ने उसी तरह का गमछा अपने सिर पर बांध रखा था। यही सुराग पुलिस के लिए सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ। इसके बाद हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो पूरा मामला खुलता चला गया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। जांच में सामने आया कि रामदीन और रघुनाथ पड़ोसी हैं और उनके बीच बकरियों के कारोबार को लेकर आर्थिक संबंध भी हैं। रघुनाथ बकरी खरीद-फरोख्त का हिसाब रखता था और इसी कारण उसका रामदीन के घर आना-जाना लगा रहता था। इसी दौरान रामदीन की पत्नी को लेकर उसके मन में शक पैदा हो गया। उसे लगता था कि रघुनाथ का उसकी पत्नी से संबंध है, जबकि इसके पीछे कोई ठोस आधार नहीं था। धीरे-धीरे यह शक उसके दिमाग में गहराता गया और उसने बदले की भावना पाल ली।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी के मन में यह धारणा मजबूत हो गई थी कि रघुनाथ उसकी गैरमौजूदगी में उसकी पत्नी के करीब आता है। गांव में फैली छोटी-छोटी बातों और अपनी कल्पनाओं के आधार पर उसने एक खतरनाक योजना बना ली। 11 मई की रात शादी समारोह के दौरान जब सभी लोग व्यस्त थे, तब उसने मौका देखकर बच्ची को उठा लिया। इसके बाद सुनसान जगह पर ले जाकर उसके हाथ-पैर गमछे से बांधे और सिर पर पत्थर से वार कर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद वह दोबारा शादी समारोह में लौट आया और सामान्य व्यवहार करता रहा, ताकि किसी को शक न हो। अगले दिन जब बच्ची की तलाश शुरू हुई, तो वह भी भीड़ में शामिल होकर खोज में हिस्सा लेता रहा। लेकिन पुलिस की जांच और गमछे की पहचान ने उसकी पूरी कहानी उजागर कर दी।
गांव में इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे शक और भ्रम का परिणाम बता रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि आरोपी ने पहले से ही इस तरह की योजना बना रखी थी। हालांकि पुलिस का कहना है कि जांच में मिले सबूत और स्वीकारोक्ति के आधार पर मामला स्पष्ट हो चुका है। यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि व्यक्तिगत शक और मानसिक असंतुलन किस तरह समाज में बड़े अपराध को जन्म दे सकता है। एक मासूम बच्ची की जान उस विवाद का शिकार हो गई, जिसका उससे कोई संबंध ही नहीं था। आरोपी पुलिस हिरासत में है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
