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BJP छोड़ेंगे या नई राह चुनेंगे? अन्नामलाई की दिल्ली मुलाकातों ने बढ़ाई अटकलें
Digital Desk
राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और बीएल संतोष से मिले पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, 7 जून को समर्थकों के साथ बैठक के बाद बड़े फैसले के संकेत
तमिलनाडु भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई एक बार फिर राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में हैं। मंगलवार को उन्होंने दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब उनके भाजपा छोड़ने की अटकलें लगातार तेज हो रही हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अन्नामलाई अपने भविष्य को लेकर गंभीर मंथन कर रहे हैं और आने वाले दिनों में कोई बड़ा फैसला सामने आ सकता है। हालांकि अभी तक उन्होंने सार्वजनिक रूप से किसी भी तरह की घोषणा नहीं की है, लेकिन उनके हालिया बयान और गतिविधियां कई सवाल खड़े कर रही हैं।
अन्नामलाई भाजपा से किसी टकराव या विवाद की स्थिति में अलग नहीं होना चाहते। बताया जा रहा है कि वे सम्मानजनक तरीके से अपनी आगे की राजनीतिक और सामाजिक यात्रा तय करना चाहते हैं। चर्चा यह भी है कि वे तमिलनाडु में ‘राष्ट्रवादी-तमिल दर्शन’ की विचारधारा पर आधारित एक गैर-राजनीतिक जनआंदोलन शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर लोगों को जोड़ना बताया जा रहा है। हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भविष्य में यही आंदोलन एक राजनीतिक दल का रूप भी ले सकता है।
अन्नामलाई ने संकेत दिया है कि जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। बताया जा रहा है कि 7 जून को वे अपने कोर समर्थकों और करीबी सहयोगियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करेंगे। इस बैठक के बाद ही उनके अगले कदम की औपचारिक घोषणा हो सकती है। तमिलनाडु की राजनीति में उनकी लोकप्रियता और युवाओं के बीच मजबूत पकड़ को देखते हुए सभी प्रमुख राजनीतिक दल उनकी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। भाजपा के अलावा द्रमुक, अन्नाद्रमुक और अन्य क्षेत्रीय दल भी इस घटनाक्रम को गंभीरता से देख रहे हैं।
दिल्ली रवाना होने से पहले चेन्नई एयरपोर्ट पर पत्रकारों ने जब उनसे भाजपा छोड़ने की चर्चाओं को लेकर सवाल पूछा था, तब उन्होंने सीधे जवाब देने से बचते हुए कहा था कि दो दिन इंतजार कीजिए, फिर बात करेंगे। उनके इस बयान ने अटकलों को और हवा दे दी। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि सब कुछ सामान्य होता तो इस तरह की प्रतिक्रिया शायद देखने को नहीं मिलती। ऐसे में उनके अगले बयान और फैसले पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
अन्नामलाई और भाजपा के बीच पिछले कुछ समय से मतभेदों की खबरें सामने आती रही हैं। विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर नैनार नागेंद्रन को यह जिम्मेदारी सौंप दी थी। इसके बाद राजनीतिक विश्लेषकों ने माना था कि पार्टी नेतृत्व और अन्नामलाई के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद उभर रहे हैं। विधानसभा चुनाव में उन्होंने स्वयं चुनाव नहीं लड़ा, जिससे भी कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं।
कुछ समय पहले अन्नामलाई ने सीबीएसई की तीन-भाषा नीति को मौजूदा सत्र से लागू किए जाने पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने शिक्षा मंत्रालय से आग्रह किया था कि इस नीति को 2029-30 शैक्षणिक सत्र से लागू किया जाए ताकि छात्रों और अभिभावकों को पर्याप्त समय मिल सके। उनके इस रुख को भी पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग माना गया था। हालांकि उन्होंने अपनी बात को राज्य के हित और व्यावहारिक जरूरतों से जोड़कर प्रस्तुत किया था।
दावा किया गया कि भाजपा और अन्नाद्रमुक के बीच गठबंधन को लेकर अन्नामलाई पूरी तरह सहमत नहीं थे। माना जाता है कि वे राज्य में भाजपा की स्वतंत्र पहचान मजबूत करने के पक्षधर थे। हालांकि बाद में उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार किया और पार्टी के लिए सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बावजूद मतभेदों की चर्चाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुईं।
तमिलनाडु में भाजपा के विस्तार में अन्नामलाई की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। उनकी ‘एन मन्न, एन मक्कल’ पदयात्रा ने राज्यभर में भाजपा की पहुंच बढ़ाने में मदद की थी। इसी दौरान भाजपा का वोट शेयर भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा था। हालांकि हालिया चुनावी परिणामों ने पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं दिलाई। ऐसे में अन्नामलाई के संभावित अलग रास्ता चुनने की चर्चाओं को भाजपा के लिए चुनौती के रूप में भी देखा जा रहा है।
इधर, अन्नामलाई के जन्मदिन से पहले चेन्नई और कोयम्बटूर सहित कई शहरों में उनके समर्थन में पोस्टर लगाए गए हैं। पोस्टरों पर उन्हें नेतृत्व संभालने की अपील की गई है। समर्थकों का कहना है कि अन्नामलाई ने तमिलनाडु की राजनीति में एक नई ऊर्जा पैदा की है और उन्हें सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहना चाहिए। कुछ स्थानों पर नए लोगों को उनके संभावित आंदोलन से जोड़ने के प्रयास भी शुरू हो चुके हैं।
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BJP छोड़ेंगे या नई राह चुनेंगे? अन्नामलाई की दिल्ली मुलाकातों ने बढ़ाई अटकलें
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तमिलनाडु भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई एक बार फिर राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में हैं। मंगलवार को उन्होंने दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब उनके भाजपा छोड़ने की अटकलें लगातार तेज हो रही हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अन्नामलाई अपने भविष्य को लेकर गंभीर मंथन कर रहे हैं और आने वाले दिनों में कोई बड़ा फैसला सामने आ सकता है। हालांकि अभी तक उन्होंने सार्वजनिक रूप से किसी भी तरह की घोषणा नहीं की है, लेकिन उनके हालिया बयान और गतिविधियां कई सवाल खड़े कर रही हैं।
अन्नामलाई भाजपा से किसी टकराव या विवाद की स्थिति में अलग नहीं होना चाहते। बताया जा रहा है कि वे सम्मानजनक तरीके से अपनी आगे की राजनीतिक और सामाजिक यात्रा तय करना चाहते हैं। चर्चा यह भी है कि वे तमिलनाडु में ‘राष्ट्रवादी-तमिल दर्शन’ की विचारधारा पर आधारित एक गैर-राजनीतिक जनआंदोलन शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर लोगों को जोड़ना बताया जा रहा है। हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भविष्य में यही आंदोलन एक राजनीतिक दल का रूप भी ले सकता है।
अन्नामलाई ने संकेत दिया है कि जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। बताया जा रहा है कि 7 जून को वे अपने कोर समर्थकों और करीबी सहयोगियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करेंगे। इस बैठक के बाद ही उनके अगले कदम की औपचारिक घोषणा हो सकती है। तमिलनाडु की राजनीति में उनकी लोकप्रियता और युवाओं के बीच मजबूत पकड़ को देखते हुए सभी प्रमुख राजनीतिक दल उनकी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। भाजपा के अलावा द्रमुक, अन्नाद्रमुक और अन्य क्षेत्रीय दल भी इस घटनाक्रम को गंभीरता से देख रहे हैं।
दिल्ली रवाना होने से पहले चेन्नई एयरपोर्ट पर पत्रकारों ने जब उनसे भाजपा छोड़ने की चर्चाओं को लेकर सवाल पूछा था, तब उन्होंने सीधे जवाब देने से बचते हुए कहा था कि दो दिन इंतजार कीजिए, फिर बात करेंगे। उनके इस बयान ने अटकलों को और हवा दे दी। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि सब कुछ सामान्य होता तो इस तरह की प्रतिक्रिया शायद देखने को नहीं मिलती। ऐसे में उनके अगले बयान और फैसले पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
अन्नामलाई और भाजपा के बीच पिछले कुछ समय से मतभेदों की खबरें सामने आती रही हैं। विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर नैनार नागेंद्रन को यह जिम्मेदारी सौंप दी थी। इसके बाद राजनीतिक विश्लेषकों ने माना था कि पार्टी नेतृत्व और अन्नामलाई के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद उभर रहे हैं। विधानसभा चुनाव में उन्होंने स्वयं चुनाव नहीं लड़ा, जिससे भी कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं।
कुछ समय पहले अन्नामलाई ने सीबीएसई की तीन-भाषा नीति को मौजूदा सत्र से लागू किए जाने पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने शिक्षा मंत्रालय से आग्रह किया था कि इस नीति को 2029-30 शैक्षणिक सत्र से लागू किया जाए ताकि छात्रों और अभिभावकों को पर्याप्त समय मिल सके। उनके इस रुख को भी पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग माना गया था। हालांकि उन्होंने अपनी बात को राज्य के हित और व्यावहारिक जरूरतों से जोड़कर प्रस्तुत किया था।
दावा किया गया कि भाजपा और अन्नाद्रमुक के बीच गठबंधन को लेकर अन्नामलाई पूरी तरह सहमत नहीं थे। माना जाता है कि वे राज्य में भाजपा की स्वतंत्र पहचान मजबूत करने के पक्षधर थे। हालांकि बाद में उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार किया और पार्टी के लिए सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बावजूद मतभेदों की चर्चाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुईं।
तमिलनाडु में भाजपा के विस्तार में अन्नामलाई की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। उनकी ‘एन मन्न, एन मक्कल’ पदयात्रा ने राज्यभर में भाजपा की पहुंच बढ़ाने में मदद की थी। इसी दौरान भाजपा का वोट शेयर भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा था। हालांकि हालिया चुनावी परिणामों ने पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं दिलाई। ऐसे में अन्नामलाई के संभावित अलग रास्ता चुनने की चर्चाओं को भाजपा के लिए चुनौती के रूप में भी देखा जा रहा है।
इधर, अन्नामलाई के जन्मदिन से पहले चेन्नई और कोयम्बटूर सहित कई शहरों में उनके समर्थन में पोस्टर लगाए गए हैं। पोस्टरों पर उन्हें नेतृत्व संभालने की अपील की गई है। समर्थकों का कहना है कि अन्नामलाई ने तमिलनाडु की राजनीति में एक नई ऊर्जा पैदा की है और उन्हें सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहना चाहिए। कुछ स्थानों पर नए लोगों को उनके संभावित आंदोलन से जोड़ने के प्रयास भी शुरू हो चुके हैं।
