डिजिटल ठगी का बढ़ता जाल: छह साल में साइबर अपराधियों ने भारतीयों से उड़ा लिए ₹52 हजार करोड़ से ज्यादा

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भारत में तेजी से बढ़ते डिजिटल लेन-देन के साथ साइबर ठगी भी गंभीर चुनौती बनती जा रही है। पिछले छह वर्षों के दौरान साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में देशभर के नागरिकों को ₹52,976 करोड़ से अधिक का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। सरकारी साइबर एजेंसियों के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि डिजिटल अपराध अब संगठित और बहुआयामी रूप ले चुके हैं।

2025 में रिकॉर्ड नुकसान, शिकायतों की बाढ़

आंकड़ों के मुताबिक केवल वर्ष 2025 में ही साइबर और ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में ₹19,813 करोड़ की चपत लगी, जबकि 21 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं। इससे पहले 2024 में यह नुकसान ₹22,849 करोड़ के पार था और करीब 19 लाख मामलों की रिपोर्टिंग हुई थी। विशेषज्ञ मानते हैं कि ऑनलाइन बैंकिंग, निवेश ऐप्स और डिजिटल भुगतान के बढ़ते उपयोग ने अपराधियों के लिए नए रास्ते खोल दिए हैं।

निवेश के नाम पर सबसे ज्यादा ठगी

रिपोर्ट में सामने आया है कि कुल साइबर फ्रॉड नुकसान का बड़ा हिस्सा फर्जी निवेश योजनाओं से जुड़ा है। करीब 77 प्रतिशत नुकसान निवेश से संबंधित धोखाधड़ी के कारण हुआ। इसके अलावा डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 8 प्रतिशत, क्रेडिट कार्ड फ्रॉड से 7 प्रतिशत, सेक्सटॉर्शन से 4 प्रतिशत, ई-कॉमर्स धोखाधड़ी से 3 प्रतिशत और ऐप या मालवेयर आधारित फ्रॉड से 1 प्रतिशत का नुकसान दर्ज किया गया।

इन राज्यों में सबसे ज्यादा आर्थिक चपत

राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो महाराष्ट्र साइबर फ्रॉड से सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जहां ₹3,200 करोड़ से अधिक का नुकसान और करीब 2.8 लाख शिकायतें दर्ज हुईं। इसके बाद कर्नाटक, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना का स्थान रहा। ये पांच राज्य मिलकर देश में दर्ज कुल साइबर फ्रॉड मामलों के आधे से ज्यादा हिस्से के लिए जिम्मेदार हैं।

विदेशी नेटवर्क की भूमिका भी उजागर

साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग सिस्टम के अनुसार, 2025 में दर्ज शिकायतों में बड़ी संख्या ऐसे मामलों की थी, जिनके तार दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों से जुड़े पाए गए। कंबोडिया, म्यांमार और लाओस से संचालित साइबर नेटवर्क्स का उल्लेख करते हुए विशेषज्ञों ने इसे अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध का संकेत बताया है।

सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव

सरकारी एजेंसियों और साइबर विशेषज्ञों ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे ऑनलाइन निवेश, खरीदारी और डिजिटल भुगतान के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतें। किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या ऐप से दूरी बनाए रखें। साइबर धोखाधड़ी का शिकार होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने और 1930 हेल्पलाइन पर संपर्क करने की सलाह दी गई है।

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04 Jan 2026 By दैनिक जागरण

डिजिटल ठगी का बढ़ता जाल: छह साल में साइबर अपराधियों ने भारतीयों से उड़ा लिए ₹52 हजार करोड़ से ज्यादा

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2025 में रिकॉर्ड नुकसान, शिकायतों की बाढ़

आंकड़ों के मुताबिक केवल वर्ष 2025 में ही साइबर और ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में ₹19,813 करोड़ की चपत लगी, जबकि 21 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं। इससे पहले 2024 में यह नुकसान ₹22,849 करोड़ के पार था और करीब 19 लाख मामलों की रिपोर्टिंग हुई थी। विशेषज्ञ मानते हैं कि ऑनलाइन बैंकिंग, निवेश ऐप्स और डिजिटल भुगतान के बढ़ते उपयोग ने अपराधियों के लिए नए रास्ते खोल दिए हैं।

निवेश के नाम पर सबसे ज्यादा ठगी

रिपोर्ट में सामने आया है कि कुल साइबर फ्रॉड नुकसान का बड़ा हिस्सा फर्जी निवेश योजनाओं से जुड़ा है। करीब 77 प्रतिशत नुकसान निवेश से संबंधित धोखाधड़ी के कारण हुआ। इसके अलावा डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 8 प्रतिशत, क्रेडिट कार्ड फ्रॉड से 7 प्रतिशत, सेक्सटॉर्शन से 4 प्रतिशत, ई-कॉमर्स धोखाधड़ी से 3 प्रतिशत और ऐप या मालवेयर आधारित फ्रॉड से 1 प्रतिशत का नुकसान दर्ज किया गया।

इन राज्यों में सबसे ज्यादा आर्थिक चपत

राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो महाराष्ट्र साइबर फ्रॉड से सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जहां ₹3,200 करोड़ से अधिक का नुकसान और करीब 2.8 लाख शिकायतें दर्ज हुईं। इसके बाद कर्नाटक, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना का स्थान रहा। ये पांच राज्य मिलकर देश में दर्ज कुल साइबर फ्रॉड मामलों के आधे से ज्यादा हिस्से के लिए जिम्मेदार हैं।

विदेशी नेटवर्क की भूमिका भी उजागर

साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग सिस्टम के अनुसार, 2025 में दर्ज शिकायतों में बड़ी संख्या ऐसे मामलों की थी, जिनके तार दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों से जुड़े पाए गए। कंबोडिया, म्यांमार और लाओस से संचालित साइबर नेटवर्क्स का उल्लेख करते हुए विशेषज्ञों ने इसे अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध का संकेत बताया है।

सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव

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https://www.dainikjagranmpcg.com/business/growing-network-of-digital-fraud-cyber-criminals-stole-more-than/article-42017

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