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15 जुलाई 2026 का पंचांग: गुरु पूर्णिमा पर बन रहे शुभ संयोग, जानें तिथि, राहुकाल और शुभ मुहूर्त
धर्म डेस्क
आज आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा के साथ गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा, पूजा-पाठ, दान और गुरु वंदना के लिए दिन बेहद शुभ माना जा रहा है
15 जुलाई 2026, बुधवार का दिन सनातन परंपरा में विशेष महत्व रखता है। आज आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है और पूरे देश में श्रद्धा और आस्था के साथ गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में पंचांग को केवल तिथि देखने का माध्यम नहीं माना जाता, बल्कि यह दिनभर के शुभ-अशुभ समय, ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति और धार्मिक कार्यों के लिए उचित समय का संकेत भी देता है। यही वजह है कि कई लोग किसी नए काम की शुरुआत, यात्रा, वाहन खरीद, पूजा, गृह प्रवेश या अन्य महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले पंचांग अवश्य देखते हैं। आज का दिन गुरु के प्रति सम्मान, ज्ञान की साधना और आध्यात्मिक उन्नति के लिए बेहद शुभ माना गया है।
हिंदू पंचांग के अनुसार आज पूर्णिमा तिथि का प्रभाव पूरे दिन बना रहेगा। पूर्णिमा का संबंध चंद्रमा की पूर्ण कला से माना जाता है और धार्मिक दृष्टि से यह तिथि पूजा-पाठ, व्रत, दान और मंत्र जाप के लिए श्रेष्ठ मानी जाती है। आज गुरु पूर्णिमा होने के कारण देशभर के मंदिरों, आश्रमों और मठों में विशेष धार्मिक आयोजन किए जाएंगे। कई स्थानों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिल सकती है। लोग अपने गुरु, शिक्षकों और माता-पिता का आशीर्वाद लेकर दिन की शुरुआत करेंगे। मान्यता है कि इस दिन गुरु का सम्मान करने और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।
बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणपति की पूजा करने से बुद्धि, विवेक और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। व्यापारी वर्ग, विद्यार्थी और नौकरीपेशा लोग आज भगवान गणेश की आराधना कर सकते हैं। कई ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि बुधवार के दिन हरे रंग का उपयोग शुभ माना जाता है और जरूरतमंद लोगों को हरी मूंग, हरा वस्त्र या हरी सब्जियों का दान करना भी लाभकारी माना जाता है। हालांकि यह धार्मिक मान्यताओं पर आधारित परंपराएं हैं और इन्हें आस्था के रूप में देखा जाता है।
आज सूर्योदय प्रातः लगभग 5:36 बजे और सूर्यास्त शाम करीब 7:18 बजे होने का अनुमान है। सुबह का समय पूजा, ध्यान और सूर्य को अर्घ्य देने के लिए अनुकूल माना गया है। जो लोग नियमित रूप से गायत्री मंत्र, विष्णु सहस्रनाम, शिव मंत्र या गुरु मंत्र का जाप करते हैं, उनके लिए आज का दिन विशेष फलदायी माना जाता है। कई श्रद्धालु आज गंगा स्नान या किसी पवित्र नदी में स्नान कर दान-पुण्य भी करते हैं। जहां यह संभव नहीं होता, वहां घर में ही स्नान कर भगवान का स्मरण करने की परंपरा निभाई जाती है।
आज राहुकाल दोपहर लगभग 12:30 बजे से 2:00 बजे तक रहने की संभावना है। ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल के दौरान नए कार्यों की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि पहले से चल रहे कार्यों पर इसका प्रभाव अलग माना जाता है। इसके अलावा यमगंड और गुलिक काल का भी ध्यान रखने की परंपरा है। यदि किसी जरूरी कार्य की शुरुआत करनी हो तो राहुकाल समाप्त होने के बाद शुभ समय चुनना बेहतर माना जाता है। दोपहर के समय अभिजीत मुहूर्त भी उपलब्ध रहेगा, जिसे विशेष परिस्थितियों में शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त माना जाता है।
गुरु पूर्णिमा का धार्मिक महत्व केवल पूजा तक सीमित नहीं है। भारतीय संस्कृति में गुरु को ज्ञान का स्रोत माना गया है। महर्षि वेदव्यास की जयंती भी इसी दिन मनाई जाती है, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। माना जाता है कि महर्षि वेदव्यास ने वेदों का संकलन किया और महाभारत जैसे महान ग्रंथ की रचना की। इसी कारण इस दिन विद्या, ज्ञान और आध्यात्मिक साधना से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्व रहता है। देशभर के विद्यालयों, गुरुकुलों और धार्मिक संस्थानों में गुरु सम्मान कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
अगर आज आप किसी नए व्यवसाय की शुरुआत, निवेश, संपत्ति से जुड़ा निर्णय या कोई बड़ा आर्थिक लेन-देन करने की योजना बना रहे हैं तो शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना लाभकारी माना जाता है। वहीं विद्यार्थी पढ़ाई की नई शुरुआत, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी या किसी महत्वपूर्ण लक्ष्य का संकल्प लेने के लिए आज का दिन चुन सकते हैं। परिवार के साथ पूजा-पाठ करना, बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना भी इस दिन शुभ माना गया है।
अधिकारियों और ज्योतिष विशेषज्ञों की ओर से हर वर्ष गुरु पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं से अपील की जाती है कि धार्मिक आयोजनों में शांति और व्यवस्था बनाए रखें। कई बड़े मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या अधिक रहने की संभावना रहती है, इसलिए स्थानीय प्रशासन भी आवश्यक व्यवस्थाएं करता है। सुबह और शाम के समय मंदिरों में विशेष आरती और भजन-कीर्तन का आयोजन होने की संभावना है। कई लोग आज व्रत रखकर भगवान विष्णु, भगवान शिव और अपने गुरु की विशेष पूजा करते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार आज पीले या सफेद वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। भगवान विष्णु को पीले पुष्प अर्पित करना, गुरु को वस्त्र या दक्षिणा देना और जरूरतमंद लोगों को अन्न दान करना पुण्यदायी माना गया है। जिन लोगों के जीवन में शिक्षा, करियर या व्यवसाय से जुड़ी चुनौतियां चल रही हैं, वे आज गुरु वंदना और गणेश पूजा कर आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। यह मान्यता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना व्यक्ति को मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है।
आज का पंचांग केवल धार्मिक अनुष्ठानों के लिए ही नहीं बल्कि दैनिक जीवन में समय की समझ और भारतीय परंपराओं से जुड़ाव का भी माध्यम है। बदलते समय में भी बड़ी संख्या में लोग पंचांग देखकर अपने महत्वपूर्ण कार्यों की योजना बनाते हैं। हालांकि किसी भी निर्णय में व्यक्तिगत परिस्थितियों, व्यावहारिक सोच और विशेषज्ञों की सलाह को भी महत्व देना चाहिए। कुल मिलाकर 15 जुलाई 2026 का दिन गुरु पूर्णिमा, पूर्णिमा तिथि और धार्मिक आस्था के कारण विशेष माना जा रहा है। यदि आप आज किसी शुभ कार्य की योजना बना रहे हैं तो पंचांग के अनुसार शुभ समय का ध्यान रखते हुए अपने कार्यों की शुरुआत कर सकते हैं।
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15 जुलाई 2026 का पंचांग: गुरु पूर्णिमा पर बन रहे शुभ संयोग, जानें तिथि, राहुकाल और शुभ मुहूर्त
धर्म डेस्क
15 जुलाई 2026, बुधवार का दिन सनातन परंपरा में विशेष महत्व रखता है। आज आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है और पूरे देश में श्रद्धा और आस्था के साथ गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में पंचांग को केवल तिथि देखने का माध्यम नहीं माना जाता, बल्कि यह दिनभर के शुभ-अशुभ समय, ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति और धार्मिक कार्यों के लिए उचित समय का संकेत भी देता है। यही वजह है कि कई लोग किसी नए काम की शुरुआत, यात्रा, वाहन खरीद, पूजा, गृह प्रवेश या अन्य महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले पंचांग अवश्य देखते हैं। आज का दिन गुरु के प्रति सम्मान, ज्ञान की साधना और आध्यात्मिक उन्नति के लिए बेहद शुभ माना गया है।
हिंदू पंचांग के अनुसार आज पूर्णिमा तिथि का प्रभाव पूरे दिन बना रहेगा। पूर्णिमा का संबंध चंद्रमा की पूर्ण कला से माना जाता है और धार्मिक दृष्टि से यह तिथि पूजा-पाठ, व्रत, दान और मंत्र जाप के लिए श्रेष्ठ मानी जाती है। आज गुरु पूर्णिमा होने के कारण देशभर के मंदिरों, आश्रमों और मठों में विशेष धार्मिक आयोजन किए जाएंगे। कई स्थानों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिल सकती है। लोग अपने गुरु, शिक्षकों और माता-पिता का आशीर्वाद लेकर दिन की शुरुआत करेंगे। मान्यता है कि इस दिन गुरु का सम्मान करने और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।
बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणपति की पूजा करने से बुद्धि, विवेक और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। व्यापारी वर्ग, विद्यार्थी और नौकरीपेशा लोग आज भगवान गणेश की आराधना कर सकते हैं। कई ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि बुधवार के दिन हरे रंग का उपयोग शुभ माना जाता है और जरूरतमंद लोगों को हरी मूंग, हरा वस्त्र या हरी सब्जियों का दान करना भी लाभकारी माना जाता है। हालांकि यह धार्मिक मान्यताओं पर आधारित परंपराएं हैं और इन्हें आस्था के रूप में देखा जाता है।
आज सूर्योदय प्रातः लगभग 5:36 बजे और सूर्यास्त शाम करीब 7:18 बजे होने का अनुमान है। सुबह का समय पूजा, ध्यान और सूर्य को अर्घ्य देने के लिए अनुकूल माना गया है। जो लोग नियमित रूप से गायत्री मंत्र, विष्णु सहस्रनाम, शिव मंत्र या गुरु मंत्र का जाप करते हैं, उनके लिए आज का दिन विशेष फलदायी माना जाता है। कई श्रद्धालु आज गंगा स्नान या किसी पवित्र नदी में स्नान कर दान-पुण्य भी करते हैं। जहां यह संभव नहीं होता, वहां घर में ही स्नान कर भगवान का स्मरण करने की परंपरा निभाई जाती है।
आज राहुकाल दोपहर लगभग 12:30 बजे से 2:00 बजे तक रहने की संभावना है। ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल के दौरान नए कार्यों की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि पहले से चल रहे कार्यों पर इसका प्रभाव अलग माना जाता है। इसके अलावा यमगंड और गुलिक काल का भी ध्यान रखने की परंपरा है। यदि किसी जरूरी कार्य की शुरुआत करनी हो तो राहुकाल समाप्त होने के बाद शुभ समय चुनना बेहतर माना जाता है। दोपहर के समय अभिजीत मुहूर्त भी उपलब्ध रहेगा, जिसे विशेष परिस्थितियों में शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त माना जाता है।
गुरु पूर्णिमा का धार्मिक महत्व केवल पूजा तक सीमित नहीं है। भारतीय संस्कृति में गुरु को ज्ञान का स्रोत माना गया है। महर्षि वेदव्यास की जयंती भी इसी दिन मनाई जाती है, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। माना जाता है कि महर्षि वेदव्यास ने वेदों का संकलन किया और महाभारत जैसे महान ग्रंथ की रचना की। इसी कारण इस दिन विद्या, ज्ञान और आध्यात्मिक साधना से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्व रहता है। देशभर के विद्यालयों, गुरुकुलों और धार्मिक संस्थानों में गुरु सम्मान कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
अगर आज आप किसी नए व्यवसाय की शुरुआत, निवेश, संपत्ति से जुड़ा निर्णय या कोई बड़ा आर्थिक लेन-देन करने की योजना बना रहे हैं तो शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना लाभकारी माना जाता है। वहीं विद्यार्थी पढ़ाई की नई शुरुआत, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी या किसी महत्वपूर्ण लक्ष्य का संकल्प लेने के लिए आज का दिन चुन सकते हैं। परिवार के साथ पूजा-पाठ करना, बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना भी इस दिन शुभ माना गया है।
अधिकारियों और ज्योतिष विशेषज्ञों की ओर से हर वर्ष गुरु पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं से अपील की जाती है कि धार्मिक आयोजनों में शांति और व्यवस्था बनाए रखें। कई बड़े मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या अधिक रहने की संभावना रहती है, इसलिए स्थानीय प्रशासन भी आवश्यक व्यवस्थाएं करता है। सुबह और शाम के समय मंदिरों में विशेष आरती और भजन-कीर्तन का आयोजन होने की संभावना है। कई लोग आज व्रत रखकर भगवान विष्णु, भगवान शिव और अपने गुरु की विशेष पूजा करते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार आज पीले या सफेद वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। भगवान विष्णु को पीले पुष्प अर्पित करना, गुरु को वस्त्र या दक्षिणा देना और जरूरतमंद लोगों को अन्न दान करना पुण्यदायी माना गया है। जिन लोगों के जीवन में शिक्षा, करियर या व्यवसाय से जुड़ी चुनौतियां चल रही हैं, वे आज गुरु वंदना और गणेश पूजा कर आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। यह मान्यता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना व्यक्ति को मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है।
आज का पंचांग केवल धार्मिक अनुष्ठानों के लिए ही नहीं बल्कि दैनिक जीवन में समय की समझ और भारतीय परंपराओं से जुड़ाव का भी माध्यम है। बदलते समय में भी बड़ी संख्या में लोग पंचांग देखकर अपने महत्वपूर्ण कार्यों की योजना बनाते हैं। हालांकि किसी भी निर्णय में व्यक्तिगत परिस्थितियों, व्यावहारिक सोच और विशेषज्ञों की सलाह को भी महत्व देना चाहिए। कुल मिलाकर 15 जुलाई 2026 का दिन गुरु पूर्णिमा, पूर्णिमा तिथि और धार्मिक आस्था के कारण विशेष माना जा रहा है। यदि आप आज किसी शुभ कार्य की योजना बना रहे हैं तो पंचांग के अनुसार शुभ समय का ध्यान रखते हुए अपने कार्यों की शुरुआत कर सकते हैं।
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