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बादाम छिलके के साथ या बिना छिलके—सेहत के लिए कौन सा तरीका ज्यादा फायदेमंद?
लाइफ स्टाइल डेस्क
पोषण विशेषज्ञों की राय—फायदे जरूरत और पाचन पर निर्भर, भिगोकर छीले बादाम और छिलके वाले बादाम के अलग लाभ
बादाम खाने का सही तरीका क्या कहता है पोषण विज्ञान
ड्राई फ्रूट्स को रोजमर्रा के आहार में शामिल करने की सलाह लंबे समय से दी जाती रही है। इनमें बादाम सबसे अधिक पसंद किया जाने वाला और पोषक तत्वों से भरपूर माना जाता है। हालांकि, एक सवाल अक्सर लोगों को उलझन में डाल देता है—बादाम छिलके के साथ खाएं या भिगोकर छिलका उतारकर? पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, दोनों तरीकों के अपने फायदे हैं और सही विकल्प व्यक्ति की उम्र, पाचन क्षमता और स्वास्थ्य जरूरतों पर निर्भर करता है।
छिलके वाले बादाम: पोषक तत्वों से भरपूर
पोषण विशेषज्ञ बताते हैं कि बादाम का भूरा छिलका एंटीऑक्सिडेंट्स का प्रमुख स्रोत है। इसमें फ्लैवोनॉइड्स पाए जाते हैं, जो हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मदद करते हैं। छिलके के साथ बादाम खाने से फाइबर की मात्रा भी अधिक मिलती है, जिससे पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है और कब्ज जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है।
इसके अलावा, छिलके वाले बादाम खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को नियंत्रित करने में सहायक माने जाते हैं। फाइबर और हेल्दी फैट्स की मौजूदगी के कारण ये ब्लड शुगर लेवल को धीरे-धीरे बढ़ाते हैं, जिससे डायबिटीज के मरीजों के लिए भी यह विकल्प संतुलित माना जाता है। हालांकि, जिन लोगों का पाचन कमजोर है, उनके लिए छिलके वाला बादाम कभी-कभी भारी पड़ सकता है।
भिगोकर छीले बादाम: पाचन के लिए आसान
भिगोकर छीले हुए बादाम खासतौर पर सुबह खाली पेट खाने की सलाह दी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, रातभर पानी में भिगोने से बादाम में मौजूद फाइटिक एसिड कम हो जाता है। यह एसिड कुछ मिनरल्स के अवशोषण में बाधा डाल सकता है। भिगोने के बाद छिलका हटाने से बादाम हल्के हो जाते हैं और शरीर उन्हें आसानी से पचा पाता है।
बच्चों, बुजुर्गों और उन लोगों के लिए जिन्हें गैस, एसिडिटी या अपच की शिकायत रहती है, भिगोकर छीले बादाम अधिक उपयुक्त माने जाते हैं। इससे कैल्शियम, मैग्नीशियम और आयरन जैसे मिनरल्स का अवशोषण बेहतर होता है, जो हड्डियों और मांसपेशियों के लिए जरूरी हैं।
विशेषज्ञों की राय और संतुलन का सूत्र
पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि “एक ही तरीका सभी के लिए सही” नहीं होता। जिन लोगों की जीवनशैली सक्रिय है और पाचन मजबूत है, वे सीमित मात्रा में छिलके के साथ बादाम खा सकते हैं। वहीं, संवेदनशील पाचन वाले लोगों के लिए भिगोकर छीले बादाम बेहतर विकल्प हैं।
आहार विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि बादाम की मात्रा पर ध्यान देना जरूरी है। रोजाना 5–6 बादाम पर्याप्त माने जाते हैं। जरूरत से ज्यादा सेवन किसी भी रूप में हो, लाभ की जगह नुकसान कर सकता है।
निष्कर्ष
बादाम छिलके के साथ हों या बिना छिलके—दोनों ही सेहत के लिए फायदेमंद हैं। सही चुनाव आपकी उम्र, स्वास्थ्य और पाचन क्षमता तय करती है। संतुलित मात्रा और सही समय पर सेवन ही बादाम के असली फायदे दिला सकता है।
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