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ठंड में नवजात शिशुओं के लिए वैक्सीनेशन बेहद जरूरी: सर्दी के मौसम में 5 टीके बनते हैं सुरक्षा कवच
लाइफ स्टाइल
डॉक्टरों की चेतावनी—सर्दियों में कमजोर इम्यूनिटी के चलते संक्रमण का खतरा बढ़ा, समय पर टीकाकरण से टाली जा सकती हैं गंभीर बीमारियां
सर्दियों के मौसम में नवजात शिशुओं की सेहत को लेकर डॉक्टरों और स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि ठंड के दौरान बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, जिससे संक्रमण और जानलेवा बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में जन्म के बाद तय समय पर कराए जाने वाले पांच प्रमुख वैक्सीनेशन शिशु के लिए सुरक्षा कवच का काम करते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दियों में निमोनिया, डायरिया, टीबी और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों के मामले तेजी से सामने आते हैं। खासकर नवजात शिशु इन बीमारियों की चपेट में जल्दी आ जाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए जन्म के तुरंत बाद से लेकर 14 हफ्तों तक कुछ वैक्सीनेशन बेहद जरूरी माने गए हैं।
बीसीजी वैक्सीन टीबी जैसी गंभीर बीमारी से बचाव करती है और इसे जन्म के तुरंत बाद या पहले महीने में दिया जाता है। इसके साथ ही ओरल पोलियो वैक्सीन (OPV) की जीरो डोज जन्म के समय दी जाती है, जिससे पोलियो के खतरे को रोका जा सके।
डॉक्टर बताते हैं कि हेपेटाइटिस-बी वैक्सीन जन्म के 24 घंटे के भीतर देना जरूरी है, ताकि लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारी से बचाव हो सके। वहीं, 6, 10 और 14 हफ्तों में दी जाने वाली पेंटावैलेंट वैक्सीन एक साथ पांच खतरनाक बीमारियों—डिप्थीरिया, काली खांसी, टेटनस, हेपेटाइटिस-बी और Hib से सुरक्षा देती है।
इसके अलावा रोटावायरस वैक्सीन डायरिया से बचाने में अहम भूमिका निभाती है, जो सर्दियों में नवजातों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीनेशन के बाद हल्का बुखार या सूजन सामान्य है, लेकिन इससे घबराने की जरूरत नहीं। बच्चे को गर्म कपड़ों में रखें और मां का दूध पिलाते रहें, जिससे इम्यूनिटी मजबूत होती है।
स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकारी अस्पतालों और आंगनवाड़ी केंद्रों में टीकाकरण की पूरी व्यवस्था है। माता-पिता से अपील की गई है कि वे अफवाहों से बचें और टीकाकरण का पूरा शेड्यूल समय पर पूरा कराएं।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर वैक्सीनेशन न सिर्फ बच्चे को बीमारियों से बचाता है, बल्कि भविष्य में होने वाली जटिलताओं को भी टालता है। आने वाले दिनों में स्वास्थ्य विभाग सर्दियों को देखते हुए जागरूकता अभियान भी तेज करेगा।
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सर्दियों के मौसम में नवजात शिशुओं की सेहत को लेकर डॉक्टरों और स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि ठंड के दौरान बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, जिससे संक्रमण और जानलेवा बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में जन्म के बाद तय समय पर कराए जाने वाले पांच प्रमुख वैक्सीनेशन शिशु के लिए सुरक्षा कवच का काम करते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दियों में निमोनिया, डायरिया, टीबी और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों के मामले तेजी से सामने आते हैं। खासकर नवजात शिशु इन बीमारियों की चपेट में जल्दी आ जाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए जन्म के तुरंत बाद से लेकर 14 हफ्तों तक कुछ वैक्सीनेशन बेहद जरूरी माने गए हैं।
बीसीजी वैक्सीन टीबी जैसी गंभीर बीमारी से बचाव करती है और इसे जन्म के तुरंत बाद या पहले महीने में दिया जाता है। इसके साथ ही ओरल पोलियो वैक्सीन (OPV) की जीरो डोज जन्म के समय दी जाती है, जिससे पोलियो के खतरे को रोका जा सके।
डॉक्टर बताते हैं कि हेपेटाइटिस-बी वैक्सीन जन्म के 24 घंटे के भीतर देना जरूरी है, ताकि लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारी से बचाव हो सके। वहीं, 6, 10 और 14 हफ्तों में दी जाने वाली पेंटावैलेंट वैक्सीन एक साथ पांच खतरनाक बीमारियों—डिप्थीरिया, काली खांसी, टेटनस, हेपेटाइटिस-बी और Hib से सुरक्षा देती है।
इसके अलावा रोटावायरस वैक्सीन डायरिया से बचाने में अहम भूमिका निभाती है, जो सर्दियों में नवजातों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीनेशन के बाद हल्का बुखार या सूजन सामान्य है, लेकिन इससे घबराने की जरूरत नहीं। बच्चे को गर्म कपड़ों में रखें और मां का दूध पिलाते रहें, जिससे इम्यूनिटी मजबूत होती है।
स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकारी अस्पतालों और आंगनवाड़ी केंद्रों में टीकाकरण की पूरी व्यवस्था है। माता-पिता से अपील की गई है कि वे अफवाहों से बचें और टीकाकरण का पूरा शेड्यूल समय पर पूरा कराएं।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर वैक्सीनेशन न सिर्फ बच्चे को बीमारियों से बचाता है, बल्कि भविष्य में होने वाली जटिलताओं को भी टालता है। आने वाले दिनों में स्वास्थ्य विभाग सर्दियों को देखते हुए जागरूकता अभियान भी तेज करेगा।
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